गाँव जाने मे भी टोल, लौटने मे भी टोल ! रिमार के ग्रामीण परेशान, प्रशासन मौन कब तक ? रामपुर बघेलान–रिमार मार्ग पर टोल की समस्या: ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी? गाँव जाने के लिए भी टोल, वापस आने के लिए भी टोल! आखिर ग्रामीणों की गलती क्या है? रामपुर बघेलान क्षेत्र के रिमार गाँव और आसपास के ग्रामीणों को टोल व्यवस्था के कारण हो रही परेशानी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस मार्ग से चार पहिया वाहन आसानी से गाँव तक पहुँच जाते थे, लेकिन सड़क निर्माण के दौरान रास्ते पर पत्थर डालकर इसे अवरुद्ध कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुराना रास्ता नक्शे में भी दर्ज है और इसका उपयोग गाँव तक आने-जाने के लिए होता रहा है। आखिर ग्रामीणों को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही है? गाँव जाने के लिए ग्रामीणों को टोल से आगे निकलकर लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। वापस लौटते समय फिर उसी टोल से गुजरना पड़ता है और दोबारा शुल्क देने की नौबत आती है। टोल से पहले बने यू-टर्न पर ड्रम और रस्से लगाकर रास्ता बंद किए जाने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पहले भी एसडीएम को ज्ञापन दिए गए, धरना-प्रदर्शन किए गए और संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक शिकायत, फिर भी समाधान का इंतजार! इस मामले को लेकर एडवोकेट प्रशांत कुमार त्रिपाठी, आर.टी.आई. एक्टिविस्ट, ने भी अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों की समस्या उठाई है। उनके अनुसार, कलेक्टर और कमिश्नर को शिकायतें देने के साथ सीएम हेल्पलाइन पर भी मामला उठाया गया, लेकिन ग्रामीणों को राहत नहीं मिल सकी। यह भी बताया गया है कि सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए कलेक्टर द्वारा टोल बंद करने के संबंध में एनएचएआई को पत्र लिखा गया है। शासन-प्रशासन से सीधे सवाल: यदि पुराने रास्ते और यू-टर्न का उपयोग ग्रामीणों के आवागमन के लिए होता रहा है, तो इसे बंद रखने का आधार क्या है? क्या ग्रामीणों को अपने ही गाँव आने-जाने के लिए बार-बार टोल शुल्क देना उचित है? जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष यह समस्या उठाई जा चुकी है, तो समाधान में देरी क्यों हो रही है? हमारी प्रमुख माँगें: टोल से पहले बंद किए गए यू-टर्न को तत्काल खुलवाया जाए। रिमार एवं आसपास के गाँवों के ग्रामीणों के लिए सुगम और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए। पुराने रास्ते और स्वीकृत नक्शे की स्थिति की जाँच कर उचित निर्णय लिया जाए। सड़क की खराब स्थिति और टोल वसूली से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जाँच की जाए। जनता की सुविधा सर्वोपरि होनी चाहिए। सड़क निर्माण का उद्देश्य लोगों का आवागमन आसान बनाना है, न कि उन्हें अपने ही गाँव पहुँचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करने और बार-बार शुल्क देने को मजबूर करना। शासन-प्रशासन, एनएचएआई और संबंधित अधिकारियों से अपील है कि इस समस्या का तत्काल समाधान कर ग्रामीणों को राहत प्रदान करें। इस आवाज़ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ, ताकि ग्रामीणों की समस्या जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुँचे।
गाँव जाने मे भी टोल, लौटने मे भी टोल ! रिमार के ग्रामीण परेशान, प्रशासन मौन कब तक ? रामपुर बघेलान–रिमार मार्ग पर टोल की समस्या: ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी? गाँव जाने के लिए भी टोल, वापस आने के लिए भी टोल! आखिर ग्रामीणों की गलती क्या है? रामपुर बघेलान क्षेत्र के रिमार गाँव और आसपास के ग्रामीणों को टोल व्यवस्था के कारण हो रही परेशानी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस मार्ग से चार पहिया वाहन आसानी से गाँव तक पहुँच जाते थे, लेकिन सड़क निर्माण के दौरान रास्ते पर पत्थर डालकर इसे अवरुद्ध कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुराना रास्ता नक्शे में भी दर्ज है और इसका उपयोग गाँव तक आने-जाने के लिए होता रहा है। आखिर ग्रामीणों को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही है? गाँव जाने के लिए ग्रामीणों को टोल से आगे निकलकर लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। वापस लौटते समय फिर उसी टोल से गुजरना पड़ता है और दोबारा शुल्क देने की नौबत आती है। टोल से पहले बने यू-टर्न पर ड्रम और रस्से लगाकर रास्ता बंद किए जाने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पहले भी एसडीएम को ज्ञापन दिए गए, धरना-प्रदर्शन किए गए और संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक शिकायत, फिर भी समाधान का इंतजार! इस मामले को लेकर एडवोकेट प्रशांत कुमार त्रिपाठी, आर.टी.आई. एक्टिविस्ट, ने भी अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों की समस्या उठाई है। उनके अनुसार, कलेक्टर और कमिश्नर को शिकायतें देने के साथ सीएम हेल्पलाइन पर भी मामला उठाया गया, लेकिन ग्रामीणों को राहत नहीं मिल सकी। यह भी बताया गया है कि सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए कलेक्टर द्वारा टोल बंद करने के संबंध में एनएचएआई को पत्र लिखा गया है। शासन-प्रशासन से सीधे सवाल: यदि पुराने रास्ते और यू-टर्न का उपयोग ग्रामीणों के आवागमन के लिए होता रहा है, तो इसे बंद रखने का आधार क्या है? क्या ग्रामीणों को अपने ही गाँव आने-जाने के लिए बार-बार टोल शुल्क देना उचित है? जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष यह समस्या उठाई जा चुकी है, तो समाधान में देरी क्यों हो रही है? हमारी प्रमुख माँगें: टोल से पहले बंद किए गए यू-टर्न को तत्काल खुलवाया जाए। रिमार एवं आसपास के गाँवों के ग्रामीणों के लिए सुगम और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए। पुराने रास्ते और स्वीकृत नक्शे की स्थिति की जाँच कर उचित निर्णय लिया जाए। सड़क की खराब स्थिति और टोल वसूली से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जाँच की जाए। जनता की सुविधा सर्वोपरि होनी चाहिए। सड़क निर्माण का उद्देश्य लोगों का आवागमन आसान बनाना है, न कि उन्हें अपने ही गाँव पहुँचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करने और बार-बार शुल्क देने को मजबूर करना। शासन-प्रशासन, एनएचएआई और संबंधित अधिकारियों से अपील है कि इस समस्या का तत्काल समाधान कर ग्रामीणों को राहत प्रदान करें। इस आवाज़ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ, ताकि ग्रामीणों की समस्या जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुँचे।
- गाँव जाने मे भी टोल, लौटने मे भी टोल ! रिमार के ग्रामीण परेशान, प्रशासन मौन कब तक ? रामपुर बघेलान–रिमार मार्ग पर टोल की समस्या: ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी? गाँव जाने के लिए भी टोल, वापस आने के लिए भी टोल! आखिर ग्रामीणों की गलती क्या है? रामपुर बघेलान क्षेत्र के रिमार गाँव और आसपास के ग्रामीणों को टोल व्यवस्था के कारण हो रही परेशानी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस मार्ग से चार पहिया वाहन आसानी से गाँव तक पहुँच जाते थे, लेकिन सड़क निर्माण के दौरान रास्ते पर पत्थर डालकर इसे अवरुद्ध कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुराना रास्ता नक्शे में भी दर्ज है और इसका उपयोग गाँव तक आने-जाने के लिए होता रहा है। आखिर ग्रामीणों को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही है? गाँव जाने के लिए ग्रामीणों को टोल से आगे निकलकर लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। वापस लौटते समय फिर उसी टोल से गुजरना पड़ता है और दोबारा शुल्क देने की नौबत आती है। टोल से पहले बने यू-टर्न पर ड्रम और रस्से लगाकर रास्ता बंद किए जाने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पहले भी एसडीएम को ज्ञापन दिए गए, धरना-प्रदर्शन किए गए और संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक शिकायत, फिर भी समाधान का इंतजार! इस मामले को लेकर एडवोकेट प्रशांत कुमार त्रिपाठी, आर.टी.आई. एक्टिविस्ट, ने भी अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों की समस्या उठाई है। उनके अनुसार, कलेक्टर और कमिश्नर को शिकायतें देने के साथ सीएम हेल्पलाइन पर भी मामला उठाया गया, लेकिन ग्रामीणों को राहत नहीं मिल सकी। यह भी बताया गया है कि सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए कलेक्टर द्वारा टोल बंद करने के संबंध में एनएचएआई को पत्र लिखा गया है। शासन-प्रशासन से सीधे सवाल: यदि पुराने रास्ते और यू-टर्न का उपयोग ग्रामीणों के आवागमन के लिए होता रहा है, तो इसे बंद रखने का आधार क्या है? क्या ग्रामीणों को अपने ही गाँव आने-जाने के लिए बार-बार टोल शुल्क देना उचित है? जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष यह समस्या उठाई जा चुकी है, तो समाधान में देरी क्यों हो रही है? हमारी प्रमुख माँगें: टोल से पहले बंद किए गए यू-टर्न को तत्काल खुलवाया जाए। रिमार एवं आसपास के गाँवों के ग्रामीणों के लिए सुगम और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए। पुराने रास्ते और स्वीकृत नक्शे की स्थिति की जाँच कर उचित निर्णय लिया जाए। सड़क की खराब स्थिति और टोल वसूली से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जाँच की जाए। जनता की सुविधा सर्वोपरि होनी चाहिए। सड़क निर्माण का उद्देश्य लोगों का आवागमन आसान बनाना है, न कि उन्हें अपने ही गाँव पहुँचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करने और बार-बार शुल्क देने को मजबूर करना। शासन-प्रशासन, एनएचएआई और संबंधित अधिकारियों से अपील है कि इस समस्या का तत्काल समाधान कर ग्रामीणों को राहत प्रदान करें। इस आवाज़ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ, ताकि ग्रामीणों की समस्या जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुँचे।1
- *सतना कलेक्ट्रेट के बाहर टेलर की दुकान में घुसा सांप, डायल 112 के प्रधान आरक्षक वसीम मंसूरी ने सुरक्षित निकाला, पत्रकार कुंदन सिंह* सतना, मध्य प्रदेश। सतना कलेक्ट्रेट के बाहर स्थित एक टेलर की दुकान में अचानक सांप घुसने से हड़कंप मच गया। दुकान में सांप दिखाई देने के बाद लोगों में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। इस दौरान प्रधान आरक्षक वसीम मंसूरी ने साहस, सूझबूझ और सतर्कता का परिचय देते हुए सांप को सुरक्षित तरीके से दुकान से बाहर निकाल दिया। पुलिसकर्मी की तत्परता और साहस से एक बड़ा हादसा टल गया। उनकी इस जिम्मेदाराना कार्यशैली की सराहना की जा रही है। यह घटना दर्शाती है कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी तत्पर रहते हैं। *सतना कलेक्ट्रेट के बाहर टेलर की दुकान में घुसा सांप, डायल 112 के प्रधान आरक्षक वसीम मंसूरी ने सुरक्षित निकाला, पत्रकार कुंदन सिंह* सतना, मध्य प्रदेश। सतना कलेक्ट्रेट के बाहर स्थित एक टेलर की दुकान में अचानक सांप घुसने से हड़कंप मच गया। दुकान में सांप दिखाई देने के बाद लोगों में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। इस दौरान प्रधान आरक्षक वसीम मंसूरी ने साहस, सूझबूझ और सतर्कता का परिचय देते हुए सांप को सुरक्षित तरीके से दुकान से बाहर निकाल दिया। पुलिसकर्मी की तत्परता और साहस से एक बड़ा हादसा टल गया। उनकी इस जिम्मेदाराना कार्यशैली की सराहना की जा रही है। यह घटना दर्शाती है कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी तत्पर रहते हैं।1
- भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है चुनाव आयोग! आज सतना जिले में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया। भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है चुनाव आयोग! आज सतना जिले में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया। भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिलकर मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में धांधली कर रही है। इस वोट चोरी के खिलाफ आदरणीय राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। हम लोकतंत्र पर आँच नहीं आने देंगे!1
- रीवा/ पेसेन्ट की मृत्यु के बाद परिजनों ने प्रार्थना हॉस्पिटल में बॉडी रखकर धरने में बैठे परिजन, लापरवाह डॉक्टर मुकेश तिवारी सहित अन्य पर कार्यवाही की मांग....* रीवा/ पेसेन्ट की मृत्यु के बाद परिजनों ने प्रार्थना हॉस्पिटल में बॉडी रखकर धरने में बैठे परिजन, लापरवाह डॉक्टर मुकेश तिवारी सहित अन्य पर कार्यवाही की मांग....*1
- इसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए देश में सभी जाति वर्ग को1
- म.प्र.रीवागुढ से खैरा पहुंच मार्ग की दुर्दशा आंखो देखी खवर रीवा गुढ।से खैरा पहुंच मार्ग रोड गढो मे तबदील हो गई जबकी इस रोड को बने लगभग 2या 3 वर्ष हुए यहा विधायक श्री नागेंद्र सिंह जी है और यह उनका विकास है2
- केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई रेल लाइनों का किया लोकार्पण। ब्रेकिंग न्यूज़ मध्य प्रदेश * केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई रेल लाइनों का किया लोकार्पण। * वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रिमोट का बटन दबाकर किया शुभारंभ। * सतना-देवेन्द्रनगर और रीवा-चुरहट नई रेल लाइनों की मिली सौगात। * नागौद और चुरहट रेलवे स्टेशनों से नई ट्रेन सेवा को दिखाई हरी झंडी। * देवेन्द्रनगर-चुरहट-देवेन्द्रनगर ट्रेन सेवा शुरू। * नई रेल लाइनों से क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा। *1
- *मैहर में कानून व्यवस्था को चुनौती, बस स्टैंड पर युवक से मारपीट का वीडियो वायरल पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल* *युवक पर लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप मुख्य आरोपी की जगह उसके भाई को थाने ले जाने और घायल को धमकाने के दावों ने खड़े किए सवाल* मैहर। शहर के राज्य परिवहन बस स्टैंड में एक युवक के साथ दिनदहाड़े कथित तौर पर लाठी-डंडों से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि पान-मसाला की दुकान चलाने वाले टिंकू चौरसिया ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर युवक पर हमला किया। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है, लेकिन अब तक पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, मारपीट में घायल युवक की पहचान विवेकानंद कुशवाहा, पिता दद्दी कुशवाहा, निवासी इंदवार थाना क्षेत्र, जिला उमरिया के रूप में बताई जा रही है। वर्तमान में वह मैहर के बढ़गैया जी मोहल्ले में रहता है। आरोप है कि बस स्टैंड परिसर में टिंकू चौरसिया और उसके साथियों ने युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की। वायरल वीडियो में घटना से संबंधित दृश्य सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, मारपीट की पूरी परिस्थितियों और घटना में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। मुख्य आरोपी की जगह भाई को थाने ले जाने का दावा इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस मारपीट के मुख्य आरोपी टिंकू चौरसिया के स्थान पर उसके भाई को थाने ले गई और बाद में छोड़ दिया। यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई या नहीं और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की? हालांकि, पुलिस ने वास्तव में किस व्यक्ति को थाने बुलाया या हिरासत में लिया और उसे छोड़ने के पीछे क्या कारण थे, इसकी पुष्टि आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही हो सकेगी। पीड़ित को धमकाने का भी आरोप मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि घायल युवक को कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो उसकी दुकान में लूटपाट के आरोप में ऐसा मामला दर्ज करवाया जाएगा कि उसे जिंदगीभर जेल में रहना पड़ेगा। यदि इस तरह की धमकी दिए जाने की पुष्टि होती है, तो यह पीड़ित पर दबाव बनाने का गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, इस कथित धमकी की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आखिर कानून का डर किसे? पुलिस से उठ रहे सीधे सवाल मैहर में दिनदहाड़े मारपीट की घटना और उसके बाद पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वायरल वीडियो के आधार पर घटना की निष्पक्ष जांच की गई? क्या मारपीट के आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई? क्या घायल युवक की शिकायत दर्ज की गई और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया? क्या पीड़ित को धमकाने के आरोपों की जांच की जाएगी? क्या पुलिस इस मामले में अपनी कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करेगी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी युवक के साथ सार्वजनिक स्थान पर लाठी-डंडों से मारपीट हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के मुताबिक कार्रवाई कब होगी? अब मैहर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वायरल वीडियो, मारपीट के आरोपों और पीड़ित को धमकाने के दावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, पुलिस अपनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करे, ताकि जनता के सामने वास्तविक तथ्य आ सकें और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। *मैहर में कानून व्यवस्था को चुनौती, बस स्टैंड पर युवक से मारपीट का वीडियो वायरल पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल* *युवक पर लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप मुख्य आरोपी की जगह उसके भाई को थाने ले जाने और घायल को धमकाने के दावों ने खड़े किए सवाल* मैहर। शहर के राज्य परिवहन बस स्टैंड में एक युवक के साथ दिनदहाड़े कथित तौर पर लाठी-डंडों से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि पान-मसाला की दुकान चलाने वाले टिंकू चौरसिया ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर युवक पर हमला किया। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है, लेकिन अब तक पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, मारपीट में घायल युवक की पहचान विवेकानंद कुशवाहा, पिता दद्दी कुशवाहा, निवासी इंदवार थाना क्षेत्र, जिला उमरिया के रूप में बताई जा रही है। वर्तमान में वह मैहर के बढ़गैया जी मोहल्ले में रहता है। आरोप है कि बस स्टैंड परिसर में टिंकू चौरसिया और उसके साथियों ने युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की। वायरल वीडियो में घटना से संबंधित दृश्य सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, मारपीट की पूरी परिस्थितियों और घटना में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। मुख्य आरोपी की जगह भाई को थाने ले जाने का दावा इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस मारपीट के मुख्य आरोपी टिंकू चौरसिया के स्थान पर उसके भाई को थाने ले गई और बाद में छोड़ दिया। यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई या नहीं और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की? हालांकि, पुलिस ने वास्तव में किस व्यक्ति को थाने बुलाया या हिरासत में लिया और उसे छोड़ने के पीछे क्या कारण थे, इसकी पुष्टि आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही हो सकेगी। पीड़ित को धमकाने का भी आरोप मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि घायल युवक को कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो उसकी दुकान में लूटपाट के आरोप में ऐसा मामला दर्ज करवाया जाएगा कि उसे जिंदगीभर जेल में रहना पड़ेगा। यदि इस तरह की धमकी दिए जाने की पुष्टि होती है, तो यह पीड़ित पर दबाव बनाने का गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, इस कथित धमकी की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आखिर कानून का डर किसे? पुलिस से उठ रहे सीधे सवाल मैहर में दिनदहाड़े मारपीट की घटना और उसके बाद पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वायरल वीडियो के आधार पर घटना की निष्पक्ष जांच की गई? क्या मारपीट के आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई? क्या घायल युवक की शिकायत दर्ज की गई और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया? क्या पीड़ित को धमकाने के आरोपों की जांच की जाएगी? क्या पुलिस इस मामले में अपनी कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करेगी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी युवक के साथ सार्वजनिक स्थान पर लाठी-डंडों से मारपीट हुई है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के मुताबिक कार्रवाई कब होगी? अब मैहर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वायरल वीडियो, मारपीट के आरोपों और पीड़ित को धमकाने के दावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, पुलिस अपनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करे, ताकि जनता के सामने वास्तविक तथ्य आ सकें और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।1