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बिहार को हर साल बाढ़ के बाद राहत नहीं, बाढ़ का स्थायी समाधान चाहिए। सिर्फ घोषणा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। बिहार में आने वाली बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कुप्रबंधन (Mismanagement) का घातक मिश्रण है। बाढ़ की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ घोषणाओं और राहत पैकेज से आगे बढ़कर स्थायी समाधान पर काम करना होगा। सिस्टम ने बिहार के लोगों को हर साल बाढ़ का दर्द झेलने के लिए जैसे अभिशप्त बना दिया है। इस दर्द को हेलिकॉप्टर में बैठकर कभी नहीं समझा जा सकता। इसके लिए जमीन पर उतरना होगा, लोगों के बीच जाना होगा और ईमानदारी से काम करना होगा। बिहार को हर साल बाढ़ के बाद राहत नहीं, बाढ़ का स्थायी समाधान चाहिए। सिर्फ घोषणा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
सही सूचना बिहार
बिहार को हर साल बाढ़ के बाद राहत नहीं, बाढ़ का स्थायी समाधान चाहिए। सिर्फ घोषणा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। बिहार में आने वाली बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कुप्रबंधन (Mismanagement) का घातक मिश्रण है। बाढ़ की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ घोषणाओं और राहत पैकेज से आगे बढ़कर स्थायी समाधान पर काम करना होगा। सिस्टम ने बिहार के लोगों को हर साल बाढ़ का दर्द झेलने के लिए जैसे अभिशप्त बना दिया है। इस दर्द को हेलिकॉप्टर में बैठकर कभी नहीं समझा जा सकता। इसके लिए जमीन पर उतरना होगा, लोगों के बीच जाना होगा और ईमानदारी से काम करना होगा। बिहार को हर साल बाढ़ के बाद राहत नहीं, बाढ़ का स्थायी समाधान चाहिए। सिर्फ घोषणा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
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- बिहार को दीये की रोशनी से ज्यादा एक ऐसी नीति की जरूरत है, जो हर साल आने वाली बाढ़ के अंधेरे से स्थायी मुक्ति दिला सके। राज + नीति = राजनीति। लेकिन क्या हमने सिर्फ राज करने के चक्कर में नीति को ही भुला दिया है? अब तो देखकर ऐसा ही लगता है। राज ही सर्वोपरि है, नीति नहीं! उन्हें खुद कहना चाहिए था— “मेरे लिए दीया नहीं, सेवा का संकल्प जलाइए। यह संकल्प हो कि बिहार की बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।” क्योंकि बाढ़ से तबाह लोगों के सामने दीया जलाना कहीं न कहीं एक तरह का उपहास-सा लगता है। जिन लोगों को अपना घर, खेत और जीवन फिर से खड़ा करने में महीनों लग जाएंगे, जिनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा है और जिन्हें मालूम है कि कुछ महीनों बाद फिर बाढ़ लौट सकती है—उनके सामने हम दीया जला रहे हैं? बिहार को दीये की रोशनी से ज्यादा एक ऐसी नीति की जरूरत है, जो हर साल आने वाली बाढ़ के अंधेरे से स्थायी मुक्ति दिला सके।1
- 🚨 तीन दिन पहले की नाराजगी खत्म, डीएम से मिले मुखिया संघ के पदाधिकारी—बाढ़ राहत और विकास पर हुई अहम चर्चा आरा। तीन दिन पहले जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं होने को लेकर मुखिया संघ भोजपुर और जिला प्रशासन के बीच बनी नाराजगी आज हुई मुलाकात के बाद खत्म होती नजर आई। जिलाधिकारी श्री मनेश कुमार मीणा से मुखिया संघ भोजपुर के अध्यक्ष श्री हरेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में मुखिया गणों ने मुलाकात की। मुखिया संघ की ओर से पंचायत स्तर पर बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं और राहत व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया। बैठक में प्रशासन और मुखिया संघ के बीच आपसी समन्वय के साथ पंचायतों के विकास एवं आपदा राहत कार्यों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। बैठक के बाद मुखिया संघ और जिला प्रशासन के बीच तीन दिन पहले बनी दूरी खत्म होने के साथ ही पंचायतों के विकास और बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने को लेकर सकारात्मक माहौल बनने की बात सामने आई।1
- तेजस्वी यादव पर हमला, चिराग पासवान के काम गिनाए - LJP नेता का बड़ा बयान तेजस्वी यादव पर हमला, चिराग पासवान के काम गिनाए - LJP नेता का बड़ा बयान आरा/भोजपुर: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एक नेता ने आज तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि "आप सब जानते हैं कि तेजस्वी जी को बिहार की जनता ने जो जिम्मेदारी दी, उसको वो वाकई में निभा नहीं पाते। जब सदन में रहना होता है तो वो विदेश भ्रमण पर रहते हैं।" उन्होंने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत सरकार के मंत्री चिराग पासवान की तारीफ करते हुए कहा कि बाढ़ के दौरान चिराग पासवान जी दो-दो बार हाजीपुर गए हैं और लगातार 'चिराग का भरोसा' कार्यक्रम चला रहे हैं। नेता ने बताया कि हाल ही में बिहार में हुए छात्र आंदोलन के दौरान भी चिराग पासवान जी ने छात्रों से मिलकर उनका हालचाल जाना और उनकी मांगों को प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री तक पहुँचाया। वहीं जब उनसे सवाल पूछा गया कि आपकी ही पार्टी के बिहार सरकार के मंत्री संजय टाइगर जी बाढ़ग्रस्त इलाके में देखने तक नहीं गए और उनका पुतला भी जलाया गया, तो उन्होंने कहा - "उनके ऊपर बहुत सारी जवाबदेही है। वो फोन के माध्यम से, अपने संगठन के माध्यम से और प्रशासनिक पदाधिकारियों के माध्यम से बाढ़ राहत में लगे हुए होंगे और समय मिलेगा तो जरूर आएंगे।" उन्होंने कहा कि जंगल राज तेजस्वी यादव के परिवार के राज में बिहार में चला है और हमारी पार्टी का विकास का काम तेजी से हो रहा है।1
- विरेन्द्र मिश्रा प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी भोजपुर जिला कांग्रेस कमिटी शहीद भवन आरा *मां आरण्य देवी मंदिर, आरा* आरा शहर की अधिष्ठात्री देवी हैं *मां आरण्य देवी*। इसी देवी के नाम पर शहर का नाम *आरा* पड़ा है। *1. मंदिर कहां है?* - आरा रेलवे स्टेशन से उत्तर दिशा में, शीश महल चौक से 200 मीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है - संवत् 2005 में स्थापित, संगमरमर का मंदिर, मुख्य द्वार पूरब की तरफ - अभी पुराने भवन को तोड़कर नया बहुमंजिला भवन बनाया जा रहा है *2. मूर्तियां* मंदिर में दो काले पत्थर की प्राचीन मूर्तियां हैं: - *बड़ी मूर्ति* - मां सरस्वती का रूप - *छोटी मूर्ति* - मां महालक्ष्मी का रूप इसीलिए मान्यता है कि यहां पूजा करने से घर में विद्या और धन दोनों आते हैं। 1953 में यहां राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की मूर्तियां भी स्थापित की गईं। *3. इतिहास - 3 युगों से जुड़ा* *त्रेता युग - रामायण काल:* कहा जाता है जब भगवान राम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र बक्सर से जनकपुर धनुष यज्ञ के लिए जा रहे थे, तो उन्होंने यहां गंगा स्नान कर आरण्य देवी की पूजा की थी। यहां पहले घना वन था, इसलिए नाम आरण्य देवी पड़ा। *द्वापर युग - महाभारत काल:* - पांडव वनवास के दौरान आरा में ठहरे थे। उन्होंने आदिशक्ति की पूजा की - रात में मां ने युधिष्ठिर को सपने में कहा कि मेरी प्रतिमा स्थापित करो। तब युधिष्ठिर ने मूर्ति स्थापित की - इस जगह राजा मयूरध्वज की राजधानी रतनपुरा थी। राजा बहुत बड़े दानवीर थे। भगवान कृष्ण ने अर्जुन के साथ आकर उनकी परीक्षा ली। राजा से अपने शेर के भोजन के लिए पुत्र के शरीर का मांस मांगा। राजा-रानी अपने पुत्र को आरे से चीरने लगे तो देवी प्रकट हुईं। उसी आरे के नाम पर शहर का नाम आरा पड़ा *4. मान्यता* - नवरात्र में यहां बहुत बड़ी भीड़ आती है, मन्नत पूरी होने तक भक्त घी के बड़े दीये जलाते हैं - गंगा और सोन नदी का संगम आरा से 10 KM पूरब कोइलवर के बिंद्रा गांव के पास है, जिसे पुराणों में शोध संगम कहा गया है - कुछ पुजारी कहते हैं कि माता सती का एक अंग यहां भी गिरा था आपको आरा जाने का रास्ता या नवरात्रि की पूजा का समय चाहिए?1
- आरा मे सजा गणपति बप्पा का दरबार, 25 साल से शिवसेना रख रहा है प्रतिमा आरा से संजय श्रीवास्तव स्लग।आरा मे सजा गणपति बप्पा का दरबार, 25 साल से शिवसेना रख रहा है प्रतिमा आरा के रमना मैदान में गणपति बप्पा की विधि-विधान से हुई स्थापना, दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु एंकर।आरा की पावन धरती पर सोमवार को गणपति बप्पा का भव्य दरबार सज गया। शिवसेना की भोजपुर इकाई द्वारा आयोजित गणेश चतुर्थी महोत्सव की शुरुआत रमना मैदान स्थित हनुमान मंदिर के समीप गणपति बप्पा की विधि-विधान से स्थापना एवं पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस वर्ष यह आयोजन अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सुबह से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पूजा-अर्चना के दौरान "गणपति बप्पा मोरया" के जयघोष से रमना मैदान का माहौल भक्तिमय हो गया।1
- 🦷 डॉक्टर L.K. कुमार ने इलाज को लेकर कही बड़ी बात—सुनिए क्या कहा?1
- भोजपुर मे जमीरा पुल के पास सांसद व मंत्री के पुतले फूंका1
- बिहार को हर साल बाढ़ के बाद राहत नहीं, बाढ़ का स्थायी समाधान चाहिए। सिर्फ घोषणा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। बिहार में आने वाली बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है। यह प्राकृतिक भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक कुप्रबंधन (Mismanagement) का घातक मिश्रण है। बाढ़ की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ घोषणाओं और राहत पैकेज से आगे बढ़कर स्थायी समाधान पर काम करना होगा। सिस्टम ने बिहार के लोगों को हर साल बाढ़ का दर्द झेलने के लिए जैसे अभिशप्त बना दिया है। इस दर्द को हेलिकॉप्टर में बैठकर कभी नहीं समझा जा सकता। इसके लिए जमीन पर उतरना होगा, लोगों के बीच जाना होगा और ईमानदारी से काम करना होगा। बिहार को हर साल बाढ़ के बाद राहत नहीं, बाढ़ का स्थायी समाधान चाहिए। सिर्फ घोषणा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।1