कोटा के चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या करोड़ों रुपए की संपत्ति पर नियंत्रण के विवाद के चलते करवाई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े वकील संतोष राय ने ₹1 लाख की सुपारी देकर इस वारदात को अंजाम दिलाया। वारदात से ठीक दो दिन पहले, वकील संतोष राय ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती होकर अपनी झूठी सर्जरी का बहाना बनाया था। पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि लगभग 1100 साल पुराने इस मठ की सैकड़ों बीघा जमीन और करोड़ों रुपए की संपत्ति को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। वकील संतोष राय ने खुद को मठ का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर रखा था और वह इस पर पूर्ण नियंत्रण चाहता था। इसके विपरीत, महंत देवानंद महाराज नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद गहरा गया। इसी टकराव के चलते संतोष राय ने देवानंद महाराज को रास्ते से हटाने की साजिश रची और बदमाश आदित्य वर्मा को ₹1 लाख की सुपारी देकर हत्या के लिए तैयार किया। 2 जून को, वकील ने चार आरोपियों को मठ की पूरी रेकी करवाई और महंत की दिनचर्या की विस्तृत जानकारी भी दी थी। मठ की रेकी करवाने के बाद, संतोष राय उसी रात सर्जरी का बहाना बनाकर जयपुर के अस्पताल में भर्ती हो गया था। 5 जून की रात को, दो बाइकों पर सवार आरोपी मठ पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले नंदनवन महाराज के कमरे की कुंडी बाहर से लगा दी। इसके बाद, वे देवानंद महाराज के कमरे में घुस गए और उन पर चाकू से हमला कर दिया। जब महंत अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे, तो आरोपियों ने उन्हें पकड़ लिया और ताबड़तोड़ वार करके मौके से फरार हो गए। महंत देवानंद महाराज की 5 जून की रात हुई हत्या के बाद, पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के निर्देश पर 2 एएसपी, 3 डीएसपी, 7 इंस्पेक्टर और लगभग 100 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। इस टीम ने गुरुवार को वकील संतोष राय और गिरोह के बदमाश पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया। सुपारी लेने वाले बदमाश समेत तीन अन्य आरोपियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रेसल मठ महादेव के खाते में ₹4 करोड़ 33 लाख 13 हजार 31 जमा हैं। इसके अतिरिक्त, मठ के नाम पर चंद्रेसल, रंगतालाब, दसलाना, देवली मछियान, नोटाना और रामखेड़ली सहित छह राजस्व गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन भी है। मठ का ट्रस्ट 30 साल से अधिक पुराना है, जिसकी जमीनों से होने वाली आय खाते में जमा होती है और मंदिर को नियमित पूजा-अर्चना के लिए सरकार से अलग से सहायता राशि भी प्राप्त होती है।
कोटा के चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या करोड़ों रुपए की संपत्ति पर नियंत्रण के विवाद के चलते करवाई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े वकील संतोष राय ने ₹1 लाख की सुपारी देकर इस वारदात को अंजाम दिलाया। वारदात से ठीक दो दिन पहले, वकील संतोष राय ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती होकर अपनी झूठी सर्जरी का बहाना बनाया था। पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि लगभग 1100 साल पुराने इस मठ की सैकड़ों बीघा जमीन और करोड़ों रुपए की संपत्ति को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। वकील संतोष राय ने खुद को मठ का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर रखा था और वह इस पर पूर्ण नियंत्रण चाहता था। इसके विपरीत, महंत देवानंद महाराज नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद गहरा गया। इसी टकराव के चलते संतोष राय ने देवानंद महाराज को रास्ते से हटाने की साजिश रची और बदमाश आदित्य वर्मा को ₹1 लाख की सुपारी देकर हत्या के लिए तैयार किया। 2 जून को, वकील ने चार आरोपियों को मठ की पूरी रेकी करवाई और महंत की दिनचर्या की विस्तृत जानकारी भी दी थी। मठ की रेकी करवाने के बाद, संतोष राय उसी रात सर्जरी का बहाना बनाकर जयपुर के अस्पताल में भर्ती हो गया था। 5 जून की रात को, दो बाइकों पर सवार आरोपी मठ पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले नंदनवन महाराज के कमरे की कुंडी बाहर से लगा दी। इसके बाद, वे देवानंद महाराज के कमरे में घुस गए और उन पर चाकू से हमला कर दिया। जब महंत अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे, तो आरोपियों ने उन्हें पकड़ लिया और ताबड़तोड़ वार करके मौके से फरार हो गए। महंत देवानंद महाराज की 5 जून की रात हुई हत्या के बाद, पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के निर्देश पर 2 एएसपी, 3 डीएसपी, 7 इंस्पेक्टर और लगभग 100 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। इस टीम ने गुरुवार को वकील संतोष राय और गिरोह के बदमाश पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया। सुपारी लेने वाले बदमाश समेत तीन अन्य आरोपियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रेसल मठ महादेव के खाते में ₹4 करोड़ 33 लाख 13 हजार 31 जमा हैं। इसके अतिरिक्त, मठ के नाम पर चंद्रेसल, रंगतालाब, दसलाना, देवली मछियान, नोटाना और रामखेड़ली सहित छह राजस्व गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन भी है। मठ का ट्रस्ट 30 साल से अधिक पुराना है, जिसकी जमीनों से होने वाली आय खाते में जमा होती है और मंदिर को नियमित पूजा-अर्चना के लिए सरकार से अलग से सहायता राशि भी प्राप्त होती है।
- यह पोस्ट माँ ज्वालामुखी और माँ माता दी को श्रद्धापूर्वक नमन करती है। इसके माध्यम से सभी भक्तों से आग्रह किया गया है कि वे कमेंट बॉक्स में 'जय माता दी' अवश्य लिखें।1
- यमुनानगर जिले के बिलासपुर में, असगरपुर रोड पर काला आम्ब शहडोरा बिल्डिंग का निर्माण कार्य जारी है।1
- शाहाबाद मारकंडा स्थित जगज्योति दरबार में महंत राजेंद्र पुरी जी महाराज ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि इंसान का भविष्य उसके अपने कर्मों से ही निर्धारित होता है।1
- भराड़ी में दि भराड़ी एक्स स्टुडेंट्स सोशल वेलफेयर समिति की मासिक बैठक 14 जून को आयोजित की गई, जहाँ कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से पुनर्गठन किया गया। वरिष्ठ सदस्य ठाकुर रूप सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में, प्रधान आजाद चंद वर्मा ने पुरानी कार्यकारिणी को भंग कर नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया पूरी करवाई। इस पुनर्गठन में, अधिकांश पदाधिकारियों को यथावत रखते हुए कार्यकारिणी का विस्तार किया गया, जिसमें आजाद चंद वर्मा को प्रधान, ज्ञानचंद भारद्वाज को उपप्रधान, जे.के. शर्मा को महासचिव, जनक राज शर्मा को प्रेस सचिव और जगन्नाथ शर्मा को कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रधान आजाद चंद वर्मा ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए अधिक से अधिक लोगों से समिति से जुड़ने और जरूरतमंदों की सहायता में सहयोग करने का आह्वान किया। बैठक के दौरान, समिति ने अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए लक्ष्मी देवी (भपराल) को विवाह हेतु 5,100 रुपये, प्रेमी देवी (भ्योल) को उपचार के लिए 7,000 रुपये और रतनी देवी (हरितल्यांगर) को मकान आगजनी से हुए नुकसान के लिए 7,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस प्रकार कुल 19,100 रुपये की सहायता राशि वितरित की गई। इसी अवसर पर, गांव मलोट के सेवानिवृत्त एसआई हेमराज शर्मा ने समिति की सदस्यता ग्रहण की, और बैठक में समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।1
- मूल पोस्ट में, व्यक्ति अपने आराध्य और गुरु श्री महाकालेश्वर को नमन करते हुए, उनके चरणों में शीश झुकाते हैं। इसमें 'पार्वती पत्य हर हर महादेव जी की जय हो' का उदघोष किया गया है। पोस्ट का समापन अपने आराध्य से समस्त सृष्टि के कल्याण की प्रार्थना के साथ होता है।1
- पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र गर्ग ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के हिमाचल दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी को उनकी राजनीतिक हताशा का परिचायक बताया है। गर्ग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रही है, जबकि नड्डा के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश, विशेषकर बिलासपुर जिला को कई ऐतिहासिक विकास परियोजनाएं मिली हैं। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एम्स बिलासपुर, फोरलेन परियोजनाएं, रेलवे विस्तार तथा स्वास्थ्य एवं आधारभूत ढांचे से जुड़े अनेक बड़े प्रकल्प जगत प्रकाश नड्डा की ही देन हैं। गर्ग ने इन परियोजनाओं को बिलासपुर और पूरे हिमाचल प्रदेश के विकास की नई दिशा देने वाला बताया। उन्होंने कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा मेडिकल कॉलेज और आईआईटी को यूपीए सरकार की देन बताने वाले बयानों को तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया, साथ ही तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के बयानों को भी तथ्यों से परे बताया। गर्ग ने जोर देकर कहा कि घुमारवीं का 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल भी नड्डा के स्वास्थ्य क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने के दौरान ही अस्तित्व में आया और विकसित हुआ, जिससे हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं। पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए कभी धन की कमी नहीं आने दी, लेकिन कांग्रेस सरकार उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है और सरकार के अपने नेता ही उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस सरकार जनहित के मुद्दों पर पूरी तरह असफल साबित हुई है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए गर्ग ने दावा किया कि बिलासपुर जिला में कांग्रेस का जनाधार तेजी से सिमट रहा है। उन्होंने बताया कि जिला परिषद की एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीत सकी, और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को कई स्थानों पर करारी हार का सामना करना पड़ा। गर्ग के अनुसार, प्रधान, उपप्रधान और बीडीसी सदस्य पदों पर लगभग 80 प्रतिशत स्थानों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर जनता का विश्वास प्राप्त किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंचायती राज चुनावों के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों से संतुष्ट नहीं है और जनता भाजपा की विकासोन्मुखी नीतियों के साथ खड़ी है। गर्ग ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी, क्योंकि प्रदेश की जनता विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है, और कांग्रेस सरकार इन सभी मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने अंत में कहा कि कांग्रेस नेताओं की लगातार बढ़ती बयानबाजी इस बात का प्रमाण है कि पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख बौखला गई है, और जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि विकास के ठोस परिणाम देखना चाहती है, जिसका जवाब वह आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से देगी। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी महेंद्र पाल रतवान, नवीन शर्मा जिला महामंत्री, पंकज चंदेल और सुरेन्द्र शर्मा उपस्थित रहे।2
- भारत में लगातार हो रही हिंदू हत्याओं को लेकर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया गया है, जिसके पीछे 'जिहादियों' का हाथ होने का आरोप लगाया गया है। इस घटनाक्रम से देश में शरीया कानून लागू करने की तैयारी की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से, विनोद की हत्या के बाद लोगों ने उन 'हिंदुओं' पर भी सवाल उठाया है जिन्होंने "मोहम्मद दीपक को अपना बाप बना लिया था" और जो अब इस मामले पर मौन हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 'जिहादी' उन्हें अपना चारा बना रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने तीन दिन के भीतर 'उन जिहादियों' के खिलाफ सख़्त से सख़्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह आश्वासन लोगों को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जिस तरह 'उस जिहादी' ने उनके 'भाई विनोद' की हत्या की है, उसी प्रकार 'उस जिहादी' का भी एनकाउंटर किया जाना चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि अब 'खून का बदला खून से ही होगा'।1