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थाना सैनी पुलिस टीम द्वारा शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। विधिक कार्यवाही पश्चात मा0 न्यायालय भेजा गया । थाना सैनी पुलिस टीम द्वारा शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। विधिक कार्यवाही पश्चात मा0 न्यायालय भेजा गया । #UPPolice #kaushambipolice

2 hrs ago
user_Indian National News INN
Indian National News INN
पत्रकार चैल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago
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थाना सैनी पुलिस टीम द्वारा शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। विधिक कार्यवाही पश्चात मा0 न्यायालय भेजा गया । थाना सैनी पुलिस टीम द्वारा शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। विधिक कार्यवाही पश्चात मा0 न्यायालय भेजा गया । #UPPolice #kaushambipolice

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  • #कौशाम्बी_ब्रेकिंग_न्यूज चरवा थाना अंतर्गत अरई सुमेरपुर में हाई टेंशन तार की शार्ट सर्किट से 6 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख अरई सुमेरपुर एवं अडाहरा के किसानों की गेहूं की फसल जलकर राख । मौके पर नहीं पहुंचा फायर ब्रिगेड ग्रामीणों ने मिलकर बुझाई आग । रिपोर्ट - Sunil Kumar Indian National News " सच की खोज " किसी भी प्रकार कि घटनाएं होने पर एवं खबर चलवाने के लिए संपर्क करें - 9415796247,9415796298
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    #कौशाम्बी_ब्रेकिंग_न्यूज चरवा थाना अंतर्गत अरई 
सुमेरपुर में हाई टेंशन तार की शार्ट सर्किट से 6 बीघा 
गेहूं की फसल जलकर राख अरई सुमेरपुर एवं अडाहरा 
के किसानों की गेहूं की फसल जलकर राख । मौके पर 
नहीं पहुंचा फायर ब्रिगेड ग्रामीणों ने मिलकर बुझाई आग ।
रिपोर्ट - Sunil Kumar 
Indian National News " सच की खोज " 
किसी भी प्रकार कि घटनाएं होने पर एवं खबर चलवाने 
के लिए संपर्क करें - 9415796247,9415796298
    user_Indian National News INN
    Indian National News INN
    पत्रकार चैल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • कौशाम्बी। तिल्हापुर मोड़ स्थित अरमान हॉस्पिटल को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर अस्पताल संचालक ने अपनी सफाई दी है। क्षेत्र के कुछ लोगों का आरोप है कि अस्पताल का संचालन बेसमेंट में किया जा रहा है, जिसे लेकर कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच भी कराई गई थी। इसी संबंध में जब अस्पताल संचालक डॉ. निसार से बातचीत की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया। डॉ. निसार ने कहा कि उनके अस्पताल में दो अलग-अलग दिशा में गेट बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां मरीजों का इलाज किया जाता है, वह पूर्ण रूप से बेसमेंट नहीं है, बल्कि सामान्य तल पर ही व्यवस्था है। उन्होंने यह भी बताया कि वास्तविक बेसमेंट नीचे स्थित है, जिसे बंद रखा जाता है और वहां किसी प्रकार की चिकित्सा गतिविधि नहीं होती है। संचालक ने आगे कहा कि एक गेट सड़क स्तर से थोड़ा नीचे तथा दूसरा गेट सड़क से ऊपर स्थित है, जिससे लोगों को भ्रम होता है कि अस्पताल बेसमेंट में संचालित हो रहा है। उन्होंने अस्पताल की सेवाओं पर जोर देते हुए कहा कि यहां मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराया जाता है। अस्पताल में तैनात स्टाफ द्वारा मरीजों की हर समय देखभाल की जाती है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाती। डॉ. निसार ने यह भी बताया कि अस्पताल को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अधिकारियों द्वारा की गई जांच में कोई गंभीर कमी नहीं पाई गई। फिलहाल, इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है, जबकि अस्पताल प्रशासन अपने संचालन को पूरी तरह नियमों के अनुरूप बता रहा है।
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    कौशाम्बी। तिल्हापुर मोड़ स्थित अरमान हॉस्पिटल को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर अस्पताल संचालक ने अपनी सफाई दी है। क्षेत्र के कुछ लोगों का आरोप है कि अस्पताल का संचालन बेसमेंट में किया जा रहा है, जिसे लेकर कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की जा चुकी है।
बताया जा रहा है कि शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच भी कराई गई थी। इसी संबंध में जब अस्पताल संचालक डॉ. निसार से बातचीत की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया।
डॉ. निसार ने कहा कि उनके अस्पताल में दो अलग-अलग दिशा में गेट बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां मरीजों का इलाज किया जाता है, वह पूर्ण रूप से बेसमेंट नहीं है, बल्कि सामान्य तल पर ही व्यवस्था है। उन्होंने यह भी बताया कि वास्तविक बेसमेंट नीचे स्थित है, जिसे बंद रखा जाता है और वहां किसी प्रकार की चिकित्सा गतिविधि नहीं होती है।
संचालक ने आगे कहा कि एक गेट सड़क स्तर से थोड़ा नीचे तथा दूसरा गेट सड़क से ऊपर स्थित है, जिससे लोगों को भ्रम होता है कि अस्पताल बेसमेंट में संचालित हो रहा है।
उन्होंने अस्पताल की सेवाओं पर जोर देते हुए कहा कि यहां मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराया जाता है। अस्पताल में तैनात स्टाफ द्वारा मरीजों की हर समय देखभाल की जाती है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाती।
डॉ. निसार ने यह भी बताया कि अस्पताल को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अधिकारियों द्वारा की गई जांच में कोई गंभीर कमी नहीं पाई गई।
फिलहाल, इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है, जबकि अस्पताल प्रशासन अपने संचालन को पूरी तरह नियमों के अनुरूप बता रहा है।
    user_Aman kesharwani
    Aman kesharwani
    JOURNALIST चैल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • गंगा मे अचानक आया पानी,लाखों की फसल बर्बाद, उज्जिनी हसनपुर के किसान आए भुखमरी के कगार पर ब्यूरो रिपोर्ट सुनील साहू वैधयत ख़बर हिन्दी दैनिक PRIME 18 NEWS चायल/कौशाम्बी ...गंगा में अचानक पानी छोड़े जाने से सैकड़ों बीघा फसल डूब गई है। किसानों ने मेहनत से तरबूज, खीरा, ककड़ी की खेती की थी, जो अब बर्बाद हो गई है। बिना सूचना के पानी छोड़ने से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और वे कर्जदार हो गए हैं।अचानक गंगा के पानी आने की वजह से सैकड़ों बीघा कछार की तरबूज, हिरमिंजी, खीरा, ककड़ी की फसल डूब गई। इससे किसानों की मेहनत के साथ लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। मूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र के तराई इलाके में बसे उज्जिनी हसनपुर , चक ताजपुर सहित कई गांवों के लोगों ने गंगा के कछार में हर वर्ष की तरह अबकी बार भी नकदी खेती की तैयारी पूरी मेहनत व लागत के साथ की थी।हिरमिंजी, खीरा, ककड़ी के अलावा बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती तैयार की गई थी। इतना ही नहीं कई इलाकों में लोगों ने करेला की भी खेती तैयार कर ली थी। सामान्य स्थिति होने के कारण किसान अपने-अपने घर चले आए थे। कुछ लोग ही अपने मचान पर सो रहे थे। लेकिन दो दिन पहले गंगा नदी में पानी बढ़ना शुरू हुआ और अब तक कछार में तैयार फसल डूब गई। मचान से उतरे किसानों ने गंगा का रौद्र रूप देखा तो उनके होश उड़ गए। मोबाइल फोन से परिवार व आसपास के खेतिहरों को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही लोग छोटी नाव से भागकर आए। डूबी फसल देखकर लोगों के होश उड़ गए। किसानों का लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। सैकड़ों किसानों ने अक्तूबर-नवंबर 2025 से ही गंगा किनारे गड्ढे खोदकर, खाद-पानी की व्यवस्था कर और महीनों मेहनत के बाद तरबूज की खेती तैयार की थी। फसल तैयार थी और कुछ ही दिनों में बाजार में तरबूज की बिक्री शुरू होने वाली थी। लेकिन इसी दौरान गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी हो गई। देखते ही देखते पानी कछार में फैल गया और सैकड़ों बीघे में लगी तरबूज की फसल जलमग्न हो गई। सुबह जब किसान खेतों की ओर पहुंचे तो डूबी हुई फसल देखकर उनकी आंखें भर आई।किसानों का कहना है कि अचानक गंगा नदी में पानी आने से नकदी खेती पूरी तरह से चौपट हो गई है। आढ़तियों से फसल के उत्पादन को लेकर बातचीत चल रही थी। वाहन आने भी लगे थे। उपज की सप्लाई चालू हो गई थी। यही एक मौका था जब किसान अपनी लागत के बाद उपज का लाभ लेता, लेकिन ऐन वक्त पर गंगा में छोड़े गए पानी से सब बर्बाद हो गया। फसल डूबने से किसानों की मेहनत के साथ लागत भी डूब चुकी है। अब किसान कर्जदार हो गए हैं।गंगा का कछार जनवरी से खाली होने लगता है। खाली मैदान में फरवरी के आखिर से खेती शुरू कर दी जाती है। अचानक गंगा में पानी आ जाने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उन्हें इसका मुआवजा मिलना चाहिए।कड़ी मेहनत के बाद फसल तैयार हई थी, जो पानी में डूब चुकी है। अब इसकी भरपाई कौन करेगा।।
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    गंगा मे अचानक आया पानी,लाखों की फसल बर्बाद, उज्जिनी हसनपुर के किसान आए भुखमरी के कगार पर 
ब्यूरो रिपोर्ट सुनील साहू वैधयत ख़बर हिन्दी दैनिक PRIME 18 NEWS 
चायल/कौशाम्बी ...गंगा में अचानक पानी छोड़े जाने से सैकड़ों बीघा फसल डूब गई है। किसानों ने मेहनत से तरबूज, खीरा, ककड़ी की खेती की थी, जो अब बर्बाद हो गई है। बिना सूचना के पानी छोड़ने से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और वे कर्जदार हो गए हैं।अचानक गंगा के पानी आने की वजह से सैकड़ों बीघा कछार की तरबूज, हिरमिंजी, खीरा, ककड़ी की फसल डूब गई। इससे किसानों की मेहनत के साथ लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। मूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र के तराई इलाके में बसे उज्जिनी  हसनपुर , चक ताजपुर सहित कई गांवों के लोगों ने गंगा के कछार में हर वर्ष की तरह अबकी बार भी नकदी खेती की तैयारी पूरी मेहनत व लागत के साथ की थी।हिरमिंजी, खीरा, ककड़ी के अलावा बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती तैयार की गई थी। इतना ही नहीं कई इलाकों में लोगों ने करेला की भी खेती तैयार कर ली थी। सामान्य स्थिति होने के कारण किसान अपने-अपने घर चले आए थे। कुछ लोग ही अपने मचान पर सो रहे थे। लेकिन दो दिन पहले गंगा नदी में पानी बढ़ना शुरू हुआ और अब तक कछार में तैयार फसल डूब गई। मचान से उतरे किसानों ने गंगा का रौद्र रूप देखा तो उनके होश उड़ गए। मोबाइल फोन से परिवार व आसपास के खेतिहरों को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही लोग छोटी नाव से भागकर आए। डूबी फसल देखकर लोगों के होश उड़ गए। किसानों का लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। सैकड़ों किसानों ने अक्तूबर-नवंबर 2025 से ही गंगा किनारे गड्ढे खोदकर, खाद-पानी की व्यवस्था कर और महीनों मेहनत के बाद तरबूज की खेती तैयार की थी। फसल तैयार थी और कुछ ही दिनों में बाजार में तरबूज की बिक्री शुरू होने वाली थी। लेकिन इसी दौरान गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी हो गई। देखते ही देखते पानी कछार में फैल गया और सैकड़ों बीघे में लगी तरबूज की फसल जलमग्न हो गई। सुबह जब किसान खेतों की ओर पहुंचे तो डूबी हुई फसल देखकर उनकी आंखें भर आई।किसानों का कहना है कि अचानक गंगा नदी में पानी आने से नकदी खेती पूरी तरह से चौपट हो गई है। आढ़तियों से फसल के उत्पादन को लेकर बातचीत चल रही थी। वाहन आने भी लगे थे। उपज की सप्लाई चालू हो गई थी। यही एक मौका था जब किसान अपनी लागत के बाद उपज का लाभ लेता, लेकिन ऐन वक्त पर गंगा में छोड़े गए पानी से सब बर्बाद हो गया। फसल डूबने से किसानों की मेहनत के साथ लागत भी डूब चुकी है। अब किसान कर्जदार हो गए हैं।गंगा का कछार जनवरी से खाली होने लगता है। खाली मैदान में फरवरी के आखिर से खेती शुरू कर दी जाती है। अचानक गंगा में पानी आ जाने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उन्हें इसका मुआवजा मिलना चाहिए।कड़ी मेहनत के बाद फसल तैयार हई थी, जो पानी में डूब चुकी है। अब इसकी भरपाई कौन करेगा।।
    user_जर्नलिस्ट सुनील साहू PRIME 18 NEWS वैधयत ख़बर
    जर्नलिस्ट सुनील साहू PRIME 18 NEWS वैधयत ख़बर
    रिपोर्टर मंझनपुर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • Post by Journalist Shubham Pandey
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    Post by Journalist Shubham Pandey
    user_Journalist Shubham Pandey
    Journalist Shubham Pandey
    Local News Reporter मंझनपुर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    48 min ago
  • प्रयागराज। धूमनगंज के कोड़रा, उमरपुर, नींवा इलाके से सामने आया एक वायरल वीडियो गैस चोरी के उस काले खेल की परतें खोल रहा है, जो अब तक परदे के पीछे चल रहा था। यह कोई साधारण दृश्य नहीं—यह एक ऐसा सबूत है, जो सीधे-सीधे बताता है कि किस तरह गैस सिलेंडरों के साथ छेड़छाड़ कर ‘पलटी’ के नाम पर चोरी को अंजाम दिया जा रहा है। वीडियो में साफ दिखाई देता है—एक शख्स सिलेंडर के ऊपर सवार है, दोनों टंकियों के मुंह को कसकर जोड़ता है और फिर शुरू होता है गैस का खेल… एक टंकी से दूसरी टंकी में ‘ट्रांसफर’ नहीं, बल्कि कथित तौर पर सुनियोजित ‘चोरी’। यह तरीका जितना खतरनाक है, उतना ही चौंकाने वाला भी। यह दृश्य किसी एक पल की गलती नहीं लगता, बल्कि पूरी तैयारी और तकनीक के साथ किया जा रहा कार्य प्रतीत होता है। हर हरकत, हर एंगल यही संकेत देता है कि यह ‘हाथ की सफाई’ नहीं,बल्कि गैस की बूंद-बूंद पर नजर गड़ाए एक सुनियोजित धंधा हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल—अगर वीडियो में इतना साफ नजर आ रहा है, तो क्या इसे नजरअंदाज किया जा सकता है? क्या यह कहा जा सकता है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई? जवाब खुद वीडियो दे रहा है।—ग्राहकों के हिस्से पर ‘साइलेंट वार’—यदि इस तरह सिलेंडरों की ‘पलटी’ की जा रही है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ना तय है। हर सिलेंडर में पहुंचने वाली गैस की मात्रा पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। यानी जो हक जनता का है, वही धीरे-धीरे ‘कट’ किया जा रहा है—बिना शोर, बिना आवाज।—अब वक्त है—जांच और कार्रवाई का— जरूरत है कि सक्षम अधिकारी इस वायरल वीडियो को ठोस आधार मानते हुए तत्काल संज्ञान लें। तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इसकी गहराई से जांच हो, वीडियो की सच्चाई की पुष्टि की जाए और जो भी इस खेल में शामिल हों, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस तरह के कृत्यों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगे, ताकि आगे किसी भी उपभोक्ता के हक पर इस तरह ‘चुपचाप डाका’ न डाला जा सके। यह सिर्फ एक वीडियो नहीं—यह एक खुलासा है। सवाल उठ चुका है, अब जवाब देना जरूरी है।
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    प्रयागराज। धूमनगंज के कोड़रा, उमरपुर, नींवा इलाके से सामने आया एक वायरल वीडियो गैस चोरी के उस काले खेल की परतें खोल रहा है, जो अब तक परदे के पीछे चल रहा था। यह कोई साधारण दृश्य नहीं—यह एक ऐसा सबूत है, जो सीधे-सीधे बताता है कि किस तरह गैस सिलेंडरों के साथ छेड़छाड़ कर ‘पलटी’ के नाम पर चोरी को अंजाम दिया जा रहा है। वीडियो में साफ दिखाई देता है—एक शख्स सिलेंडर के ऊपर सवार है, दोनों टंकियों के मुंह को कसकर जोड़ता है और फिर शुरू होता है गैस का खेल… एक टंकी से दूसरी टंकी में ‘ट्रांसफर’ नहीं, बल्कि कथित तौर पर सुनियोजित ‘चोरी’। यह तरीका जितना खतरनाक है, उतना ही चौंकाने वाला भी। यह दृश्य किसी एक पल की गलती नहीं लगता, बल्कि पूरी तैयारी और तकनीक के साथ किया जा रहा कार्य प्रतीत होता है। हर हरकत, हर एंगल यही संकेत देता है कि यह ‘हाथ की सफाई’ नहीं,बल्कि गैस की बूंद-बूंद पर नजर गड़ाए एक सुनियोजित धंधा हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल—अगर वीडियो में इतना साफ नजर आ रहा है, तो क्या इसे नजरअंदाज किया जा सकता है? क्या यह कहा जा सकता है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई? जवाब खुद वीडियो दे रहा है।—ग्राहकों के हिस्से पर ‘साइलेंट वार’—यदि इस तरह सिलेंडरों की ‘पलटी’ की जा रही है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ना तय है। हर सिलेंडर में पहुंचने वाली गैस की मात्रा पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। यानी जो हक जनता का है, वही धीरे-धीरे ‘कट’ किया जा रहा है—बिना शोर, बिना आवाज।—अब वक्त है—जांच और कार्रवाई का— जरूरत है कि सक्षम अधिकारी इस वायरल वीडियो को ठोस आधार मानते हुए तत्काल संज्ञान लें। तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इसकी गहराई से जांच हो, वीडियो की सच्चाई की पुष्टि की जाए और जो भी इस खेल में शामिल हों, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस तरह के कृत्यों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगे, ताकि आगे किसी भी उपभोक्ता के हक पर इस तरह ‘चुपचाप डाका’ न डाला जा सके। यह सिर्फ एक वीडियो नहीं—यह एक खुलासा है। सवाल उठ चुका है, अब जवाब देना जरूरी है।
    user_Ashvani
    Ashvani
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by गुरु ज्ञान
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    Post by गुरु ज्ञान
    user_गुरु ज्ञान
    गुरु ज्ञान
    इलाहाबाद, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मजदूरों के गुलामी के दस्तावेज है चारो श्रमिक कोड बिल* -- *मनोज पांडेय* प्रयागराज। केंद्रीय ट्रेंड यूनियंस और इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय आह्वान पर आज भारतीय रेलवे से सभी जोनो/उत्पादन इकाइयो में न्यू पेन्शन स्किम, चार श्रम सहिंता और निजीकरण/निगमीकरण का ज़ोरदार विरोध कर प्रदर्शन किया | उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मण्डल में नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व रेलवे कर्मचारियों ने प्रयागराज जं हाबड़ा इंड पर न्यू पेन्शन स्किम एवं चारों श्रमिक कोड बिल के विरोध में शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीक़े बाह में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए *इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन IREF व नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन NCRWU केंद्रीय महामंत्री कॉमरेड मनोज पाण्डेय ने कहा कि* चारो श्रमिक कोड़ बिल आधुनिक ग़ुलामी के प्रतीक है, उन्होंने कहा वर्षों के संघर्ष और शहादत के बाद जो कानून मजदूरों के हित में बनाए गए थे उन्हें देश बेचवा सरकार कारपोरेट घरानों के पक्ष में खत्म करके चार श्रमिक कोड़ बिल 2020 बनाई है इन चारों श्रम संहिता जिसे आज से देश भर में लागू किया जा रहा है, 1-औद्योगिक संबंध संहिता 2020, 2-व्यवसायिक संरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020, 3-सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, 4-वेतन संहिता 2020, का हम विरोध करते है, कामरेड मनोज ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यू पेन्शन स्किम (एन पी एस ) आत्मघाती योजना है इस लिए संगठन इसका विरोध करता है और पुरानी पेन्शन स्किम (ओ पी एस ) लागु होने तक आन्दोलन के लिए प्रतिबद्ध है | विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए *इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन IREF व नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन NCRWU केंद्रीय संगठन मंत्री डॉ कमल उसरी ने कहा कि* पूर्व में मजदूरों कर्मचारियों के हित के लिए जो कानून बनाए गए थे उनमें से 29 केंद्रीय कानूनो का स्वतंत्र अस्तित्व स्वतः समाप्त हो गया, शेष 15 कानूनों में बदलाव किया है यानी कि अब तक जो 44 श्रमिक कानून लागू थे खत्म हो गए है मुख्य रूप अब मजदूरों के सामान्य कार्य दिवस 10 घण्टे से 12 घण्टे अथवा कुछ भी हो सकते है, अब श्रम विभाग के निरीक्षक की भूमिका सिर्फ मदद कर्ता अथवा फेसिलेटर तक़ सीमित कर दी गई है, सामाजिक सुरक्षा में कर्मचारी भविष्य निधि ( ई पी एफ़) में योगदान को 12%से घटाकर 10% कर दिया गया है| लेकिन हम लोग सरकार की तानाशाही रवैये के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे, विरोध प्रदर्शन का संचालन नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय सहायक महामंत्री कॉमरेड शिवेंद्र प्रताप सिंह ने किया और अध्यक्षता नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कॉमरेड संजय तिवारी ने किया, विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से कॉमरेड मनोज पाण्डेय, डॉ कमल उसरी, कॉमरेड संजय तिवारी, श्रीमती सुधा देवी जोनल अध्यक्ष महिला मोर्चा, शिवेंद्र प्रताप सिंह, सैय्यद इरफ़ात अली ,संदीप सिंह, दीपक कुमार , सुनील गुप्ता , गोपाल शर्मा, नितिन कुमार, राजू यादव, , पी एन सिंह, पीयूष सोनी, सिद्धार्थ शर्मा, इफ़्तेख़ार अहमद , राजकुमार , सुनील आर्यन आदि मौजूद रहे।
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    मजदूरों के गुलामी के दस्तावेज है चारो श्रमिक कोड बिल* -- *मनोज पांडेय*
प्रयागराज। केंद्रीय ट्रेंड यूनियंस और इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय आह्वान पर आज भारतीय रेलवे से सभी जोनो/उत्पादन इकाइयो में न्यू पेन्शन स्किम, चार श्रम सहिंता और निजीकरण/निगमीकरण का ज़ोरदार विरोध कर प्रदर्शन किया | उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मण्डल में नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व रेलवे कर्मचारियों ने प्रयागराज जं हाबड़ा इंड पर न्यू पेन्शन स्किम एवं चारों श्रमिक कोड  बिल के विरोध में शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीक़े बाह में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया,
विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए *इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन IREF व नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन NCRWU केंद्रीय महामंत्री कॉमरेड मनोज पाण्डेय ने कहा कि* चारो श्रमिक कोड़ बिल आधुनिक ग़ुलामी के प्रतीक है, उन्होंने कहा वर्षों के संघर्ष और शहादत के बाद जो कानून मजदूरों के हित में बनाए गए थे उन्हें देश बेचवा सरकार कारपोरेट घरानों के पक्ष में खत्म करके चार श्रमिक कोड़ बिल 2020 बनाई है इन चारों श्रम संहिता जिसे आज से देश भर में लागू किया जा रहा है,
1-औद्योगिक संबंध संहिता 2020, 2-व्यवसायिक संरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020, 3-सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, 4-वेतन संहिता  2020, का हम विरोध करते है,
कामरेड मनोज ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यू पेन्शन स्किम (एन पी एस ) आत्मघाती योजना है इस लिए संगठन इसका विरोध करता है और पुरानी पेन्शन स्किम (ओ पी एस ) लागु होने तक आन्दोलन के लिए प्रतिबद्ध है |
विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए  *इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन IREF व नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन NCRWU केंद्रीय संगठन मंत्री डॉ कमल उसरी ने कहा कि*
पूर्व में मजदूरों कर्मचारियों के हित के लिए जो कानून बनाए गए थे उनमें से 29 केंद्रीय कानूनो का स्वतंत्र अस्तित्व स्वतः समाप्त हो गया, शेष 15 कानूनों में बदलाव किया है यानी कि अब तक जो 44 श्रमिक कानून लागू थे खत्म हो गए है मुख्य रूप अब मजदूरों के सामान्य कार्य दिवस 10 घण्टे से 12 घण्टे अथवा कुछ भी हो सकते है, अब श्रम विभाग के निरीक्षक की भूमिका सिर्फ मदद कर्ता अथवा फेसिलेटर तक़ सीमित कर दी गई है, सामाजिक सुरक्षा में कर्मचारी भविष्य निधि ( ई पी एफ़) में योगदान को 12%से घटाकर 10% कर दिया गया है|
लेकिन हम लोग सरकार की तानाशाही रवैये के खिलाफ संघर्ष  जारी रखेंगे,
विरोध प्रदर्शन का संचालन नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय सहायक महामंत्री कॉमरेड शिवेंद्र प्रताप सिंह ने किया और अध्यक्षता नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कॉमरेड संजय तिवारी ने किया, विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से कॉमरेड मनोज पाण्डेय, डॉ कमल उसरी, कॉमरेड संजय तिवारी, श्रीमती सुधा देवी जोनल अध्यक्ष महिला मोर्चा, शिवेंद्र प्रताप सिंह, सैय्यद इरफ़ात अली ,संदीप सिंह, दीपक कुमार , सुनील गुप्ता , गोपाल शर्मा, नितिन कुमार, राजू यादव, , पी एन सिंह, पीयूष सोनी, सिद्धार्थ शर्मा, इफ़्तेख़ार अहमद , राजकुमार , सुनील आर्यन आदि मौजूद रहे।
    user_AT Samachar
    AT Samachar
    Media house प्रयागराज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • UP: मथुरा में यमुना घाट पर पंडित जी का आशिकी भूत देखिए, महिलाओं ने नाव पर जमकर पीटा, मथुरा के गोकुल में बृज दर्शन को आई महिला श्रद्धालुओं ने पंडा को साथ लेकर दर्शन करने निकलीं, तभी यमुना घाट पर नाव में पंडित जी ने अश्लीलता की कोशिश कर दी। गुस्साई महिलाओं ने तुरंत मज़ामत कर दी और नाव पर जमकर मारपीट शुरू कर दी! पंडित जी ने जान बचाने के लिए सीधे जमुना में छलांग लगा दी। वीडियो मौके पर बने लोगों ने वायरल कर दिया।
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    UP: मथुरा में यमुना घाट पर पंडित जी का आशिकी भूत देखिए, महिलाओं ने नाव पर जमकर पीटा, मथुरा के गोकुल में बृज दर्शन 
को आई महिला श्रद्धालुओं ने पंडा को साथ लेकर दर्शन करने निकलीं, तभी यमुना घाट पर नाव में पंडित जी ने अश्लीलता की कोशिश कर दी। गुस्साई महिलाओं ने तुरंत मज़ामत कर दी और 
नाव पर जमकर मारपीट शुरू कर दी! पंडित जी ने जान बचाने के लिए सीधे जमुना में छलांग लगा दी। वीडियो मौके पर बने लोगों ने वायरल कर दिया।
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    पत्रकार चैल, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
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