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जनपद में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा को शुचितापूर्वक और शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न कराया गया। परीक्षा के दौरान, अधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान, संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ताकि परीक्षा निष्पक्ष एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद रही।
फास्ट न्यूज इंडिया पीलीभीत
जनपद में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा को शुचितापूर्वक और शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न कराया गया। परीक्षा के दौरान, अधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान, संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ताकि परीक्षा निष्पक्ष एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद रही।
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- जनपद में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा को शुचितापूर्वक और शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न कराया गया। परीक्षा के दौरान, अधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान, संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ताकि परीक्षा निष्पक्ष एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद रही।1
- आज, 30 मई को, देश हिंदी पत्रकारिता दिवस मना रहा है, जो भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है जिसने देश को उसकी अपनी ज़ुबान में बोलने का अवसर दिया। इस अवसर पर, upnewstv24 के सरफ़राज़ अहमद ख़ान ने भारत के पहले हिंदी अख़बार 'उदन्त मार्तण्ड' को याद किया, जिसे पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 को कोलकाता से शुरू किया था। इसी अख़बार ने देश में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी, और आज इस ऐतिहासिक यात्रा पर विचार किया जा रहा है कि 1826 के उस दौर और आज के डिजिटल युग की पत्रकारिता में कितना बड़ा फ़र्क आ चुका है। 'उदन्त मार्तण्ड' के दौर में पत्रकारिता को एक 'मिशन' माना जाता था, जिसका मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना या टीआरपी बटोरना नहीं था। यह अख़बार विज्ञान, आधुनिक जानकारियों और सबसे बढ़कर सामाजिक मुद्दों को उठाने का माध्यम था। हालांकि, ब्रिटिश हुकूमत के दौर में इसे कोई सरकारी सहायता नहीं मिली, और अत्यधिक डाक दरों के कारण इसे देश के दूसरे हिस्सों तक पहुँचाना मुश्किल हो गया। इन बढ़ते ख़र्चों के चलते, 'उदन्त मार्तण्ड' महज़ डेढ़ साल के अंदर, दिसंबर 1827 में बंद हो गया, जिसके कुल 79 अंक ही प्रकाशित हो पाए थे। पंडित शुक्ल जी ने बाद में 'समदन्त मार्तण्ड' नाम से एक और पत्र निकाला, पर वह भी ज़्यादा समय तक नहीं चल सका, फिर भी उनकी जलाई हुई मशाल बुझी नहीं। आज की पत्रकारिता और 'उदन्त मार्तण्ड' के दौर की पत्रकारिता की तुलना में कई बड़े बदलाव स्पष्ट नज़र आते हैं। पहला बड़ा अंतर मक़सद का है, जहाँ तब पत्रकारिता देश को जगाने का एक माध्यम थी, वहीं आज यह एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट बिज़नेस बन चुकी है। दूसरा अंतर साधनों का है; पहले अख़बार छापने और पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी, जबकि आज तकनीक और सोशल मीडिया के चलते एक क्लिक पर ख़बर लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुँच जाती है। यूट्यूब, ट्विटर और डिजिटल मीडिया ने हर हाथ में माइक थमा दिया है। सबसे बड़ा अंतर सरोकार का है। 'उदन्त मार्तण्ड' के दौर में जनता के असल मुद्दे, विज्ञान और सामाजिक सुधार प्राथमिकता थे। इसके विपरीत, आज मुख्यधारा की मीडिया पर अक्सर टीआरपी की होड़, सनसनीखेज ख़बरों और असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के आरोप लगते हैं। यह एक बड़ा सवाल है कि जहाँ पत्रकारिता के साधन बहुत आधुनिक हो गए हैं, क्या उसके मूल्य भी उतने ही मजबूत हैं। हिंदी पत्रकारिता दिवस के इस अवसर पर, 'उदन्त मार्तण्ड' और पंडित जुगल किशोर शुक्ल जी के उस जज़्बे को याद करने की ज़रूरत है, क्योंकि डिजिटल माध्यमों के आने से शक्ति तो बढ़ी है, लेकिन ज़िम्मेदारी भी बढ़ी है। upnewstv24 का लक्ष्य हमेशा निष्पक्ष, सच्ची और जनता से जुड़ी ख़बरें पहुँचाना है, और दर्शकों से पूछा गया है कि क्या आज की पत्रकारिता अपने पुराने मूल्यों को बचाए रख पाई है।1
- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में समाजवादी पार्टी ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में एक अनोखा धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने एक कार को रस्सों से बांधकर कलेक्ट्रेट तक खींचा, जबकि एक कार्यकर्ता अर्धनग्न होकर उसी कार पर बैठकर महंगाई के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराता रहा। प्रदर्शन के बीच प्रशासनिक अधिकारियों और समाजवादी पार्टी के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।1
- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में, जहां सरकार 'मिशन शक्ति' और महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं न्यूरिया थाना क्षेत्र से एक चिंताजनक घटना सामने आई है। मझोला पुलिस चौकी के ठीक सामने सरेराह एक महिला को कुछ दबंगों ने बेरहमी से पीटा, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि चंद कदमों की दूरी पर तैनात पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस घटना ने खाकी और कानून-व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह पूरा मामला न्यूरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत मझोला पुलिस चौकी के सामने का है, जहां किसी पुराने विवाद को लेकर कुछ दबंगों ने एक महिला को बाजार में घेर लिया। विवाद इतना बढ़ा कि दबंगों ने महिला के साथ गाली-गलौज करते हुए उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। महिला खुद को बचाने के लिए चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन वहां मौजूद भीड़ में से कोई भी उसे बचाने आगे नहीं आया। यह पूरा घटनाक्रम उस पुलिस चौकी के ठीक मुहाने पर हुआ, जिसकी जिम्मेदारी क्षेत्र में अमन-चैन बनाए रखने की है। इस घटना ने स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। जनता के मन में गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि जब चौकी के सामने चीख-पुकार मच रही थी, तो अंदर तैनात पुलिसकर्मियों को इसकी आवाज क्यों नहीं सुनाई दी और उस समय गश्त कहां थी? यह साफ दर्शाता है कि इलाके के दबंगों और उपद्रवियों के मन से खाकी का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब महिलाएं पुलिस चौकी के सामने ही सुरक्षित नहीं हैं, तो ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा की उम्मीद किससे की जाए। घटना का वीडियो (यदि उपलब्ध हो) सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस मामले में जब उच्च अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि इस घटना के बाद सोती हुई पुलिस जागती है या फिर इस गंभीर मामले को भी कागजी दावों के पीछे दबा दिया जाता है।1
- पीलीभीत जनपद में बी.एड. प्रवेश परीक्षा रविवार को कड़े सुरक्षा प्रबंधों और निर्धारित समय के अनुसार शांतिपूर्वक शुरू हो गई। प्रशासन ने परीक्षा को पूरी तरह नकलविहीन, निष्पक्ष और निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए मुस्तैदी दिखाई। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्रा सुबह से ही सक्रिय रहे, उन्होंने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था और अन्य इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और नकल विहीन परीक्षा कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले या लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जनपद में इस परीक्षा के लिए कुल 4 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें सनातन धर्म बांके बिहारी राम इण्टर कालेज, राजकीय बालिका इण्टर कालेज, राजकीय ड्रमण्ड इण्टर कालेज और उपाधि महाविद्यालय शामिल हैं। इन केंद्रों पर कुल 1,495 अभ्यर्थी दो पालियों—सुबह 9:00 से 12:00 बजे और दोपहर 2:00 से 5:00 बजे—में परीक्षा दे रहे हैं। सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत सीसीटीवी कैमरों (वॉयस रिकॉर्डर सहित) से हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत परीक्षार्थियों, कक्ष निरीक्षकों और स्टाफ को परीक्षा कक्ष में मोबाइल या कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने की अनुमति नहीं है। परीक्षा केंद्रों के आसपास की सभी फोटो स्टेट दुकानें बंद रखने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र (आईडी) अनिवार्य किया गया है और बिना आईडी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। प्रश्नपत्र खोलने और उत्तर पुस्तिकाओं को सील करने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। परीक्षा के दौरान स्टेटिक मजिस्ट्रेट, केंद्र पर्यवेक्षक और पुलिस बल लगातार केंद्रों पर भ्रमणशील हैं।4
- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के पूरनपुर क्षेत्र में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहाँ एक युवक अपनी तलाकशुदा पत्नी से मिलने के लिए बुर्का पहनकर पहुँचा। युवक की चाल-ढाल और हावभाव देखकर स्थानीय लोगों को शक हुआ, जिसके बाद उसकी पहचान उजागर हो गई। पहचान खुलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने युवक की जमकर पिटाई कर दी। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस इस मामले की जानकारी जुटाने में लगी है, वहीं यह पूरा प्रकरण इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।1
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