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खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो की बैठक, आंदोलन की चेतावनी डुमरी/गिरिडीह । झामुमो के प्रधान कार्यालय, करियारी में पार्टी की प्रखंड कमिटी की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो उर्फ राजू ने की। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा पारित _खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026_ के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिलाध्यक्ष संजय सिंह और केंद्रीय समिति सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू उपस्थित रहे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयक का जमकर विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह विधेयक वापस नहीं लेती है, तो उसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने यह भी कहा कि झारखंड से खनिज संपदा को बाहर जाने से रोका जाएगा।बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ पप्पू, जिला सचिव महाल सोरेन, प्रमुख उषा देवी, बरकत अली, उप प्रमुख उपेंद्र महतो, डेगलाल महतो, संध्या राज, विजय यादव, संजय मेहता, मिथलेश महतो, भोली महतो, अनिल रजक, शमसुद्दीन अंसारी, डेगनारायण महतो, खिरोधर यादव, अख्तर अंसारी, करामत हुसैन, गौरी शंकर प्रसाद, रीतलाल मंडल, संजय कुमार वर्मा, जलील अंसारी, टहलू साव, मोहम्मद खुर्शीद, कमलापति मंडल, मनीष रजक, सतीश मंडल, गुलाम सरवर आदि उपस्थित थे।

7 hrs ago
user_Ajay Kumar Rajak
Ajay Kumar Rajak
Local News Reporter डुमरी, गिरिडीह, झारखंड•
7 hrs ago
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खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो की बैठक, आंदोलन की चेतावनी डुमरी/गिरिडीह । झामुमो के प्रधान कार्यालय, करियारी में पार्टी की प्रखंड कमिटी की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो उर्फ राजू ने की। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा पारित _खान एवं

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खनिज संशोधन विधेयक 2026_ के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिलाध्यक्ष संजय सिंह और केंद्रीय समिति सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू उपस्थित रहे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयक का जमकर विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार

यह विधेयक वापस नहीं लेती है, तो उसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने यह भी कहा कि झारखंड से खनिज संपदा को बाहर जाने से रोका जाएगा।बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ पप्पू, जिला सचिव महाल सोरेन, प्रमुख उषा देवी, बरकत अली, उप प्रमुख उपेंद्र महतो,

डेगलाल महतो, संध्या राज, विजय यादव, संजय मेहता, मिथलेश महतो, भोली महतो, अनिल रजक, शमसुद्दीन अंसारी, डेगनारायण महतो, खिरोधर यादव, अख्तर अंसारी, करामत हुसैन, गौरी शंकर प्रसाद, रीतलाल मंडल, संजय कुमार वर्मा, जलील अंसारी, टहलू साव, मोहम्मद खुर्शीद, कमलापति मंडल, मनीष रजक, सतीश मंडल, गुलाम सरवर आदि उपस्थित थे।

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  • खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो की बैठक, आंदोलन की चेतावनी डुमरी/गिरिडीह । झामुमो के प्रधान कार्यालय, करियारी में पार्टी की प्रखंड कमिटी की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो उर्फ राजू ने की। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा पारित _खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026_ के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिलाध्यक्ष संजय सिंह और केंद्रीय समिति सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू उपस्थित रहे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयक का जमकर विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह विधेयक वापस नहीं लेती है, तो उसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने यह भी कहा कि झारखंड से खनिज संपदा को बाहर जाने से रोका जाएगा।बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ पप्पू, जिला सचिव महाल सोरेन, प्रमुख उषा देवी, बरकत अली, उप प्रमुख उपेंद्र महतो, डेगलाल महतो, संध्या राज, विजय यादव, संजय मेहता, मिथलेश महतो, भोली महतो, अनिल रजक, शमसुद्दीन अंसारी, डेगनारायण महतो, खिरोधर यादव, अख्तर अंसारी, करामत हुसैन, गौरी शंकर प्रसाद, रीतलाल मंडल, संजय कुमार वर्मा, जलील अंसारी, टहलू साव, मोहम्मद खुर्शीद, कमलापति मंडल, मनीष रजक, सतीश मंडल, गुलाम सरवर आदि उपस्थित थे।
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    खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो की बैठक, आंदोलन की चेतावनी
डुमरी/गिरिडीह । झामुमो के प्रधान कार्यालय, करियारी में पार्टी की प्रखंड कमिटी की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो उर्फ राजू ने की। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा पारित _खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026_ के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिलाध्यक्ष संजय सिंह और केंद्रीय समिति सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू उपस्थित रहे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयक का जमकर विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह विधेयक वापस नहीं लेती है, तो उसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने यह भी कहा कि झारखंड से खनिज संपदा को बाहर जाने से रोका जाएगा।बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ पप्पू, जिला सचिव महाल सोरेन, प्रमुख उषा देवी, बरकत अली, उप प्रमुख उपेंद्र महतो, डेगलाल महतो, संध्या राज, विजय यादव, संजय मेहता, मिथलेश महतो, भोली महतो, अनिल रजक, शमसुद्दीन अंसारी, डेगनारायण महतो, खिरोधर यादव, अख्तर अंसारी, करामत हुसैन, गौरी शंकर प्रसाद, रीतलाल मंडल, संजय कुमार वर्मा, जलील अंसारी, टहलू साव, मोहम्मद खुर्शीद, कमलापति मंडल, मनीष रजक, सतीश मंडल, गुलाम सरवर आदि उपस्थित थे।
    user_Ajay Kumar Rajak
    Ajay Kumar Rajak
    Local News Reporter डुमरी, गिरिडीह, झारखंड•
    7 hrs ago
  • 🏍️ राइडर भाइयों की आंखों देखी आपबीती! 🔥 कैमरे पर छलका राइडर्स का दर्द, खुली कई चौंकाने वाली बातें! 🚨 सड़कों पर दिन-रात दौड़ने वाले राइडर्स का फूटा गुस्सा! कोनार डैम, विष्णुगढ़ में राइडर्स से खास बातचीत। कैमरे के सामने राइडर्स ने अपनी परेशानियों और अनुभवों को खुलकर साझा किया। आखिर सड़कों पर राइडिंग को लेकर क्या है उनकी कहानी? पूरी खबर और बातचीत वीडियो में देखें। आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं। सच तक झारखंड न्यूज को फॉलो करें।
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    🏍️ राइडर भाइयों की आंखों देखी आपबीती!
🔥 कैमरे पर छलका राइडर्स का दर्द, खुली कई चौंकाने वाली बातें!
🚨 सड़कों पर दिन-रात दौड़ने वाले राइडर्स का फूटा गुस्सा!
कोनार डैम, विष्णुगढ़ में राइडर्स से खास बातचीत। कैमरे के सामने राइडर्स ने अपनी परेशानियों और अनुभवों को खुलकर साझा किया। आखिर सड़कों पर राइडिंग को लेकर क्या है उनकी कहानी? पूरी खबर और बातचीत वीडियो में देखें।
आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं।
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    user_Sach Tak Jharkhand News
    Sach Tak Jharkhand News
    Local News Reporter बिशुनगढ़, हजारीबाग, झारखंड•
    6 hrs ago
  • गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ हुआ समापन गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में सोमवार सुबह आयोजित पंचायत स्तरीय एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ सोमवार की शाम 6 बजे शानदार समापन हुआ। प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने हिस्सा लिया।
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    गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ हुआ समापन
गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में सोमवार सुबह आयोजित पंचायत स्तरीय एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ सोमवार की शाम 6 बजे शानदार समापन हुआ। प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने हिस्सा लिया।
    user_Shivani Seth
    Shivani Seth
    गंडे, गिरिडीह, झारखंड•
    5 hrs ago
  • बाघमारा का राजनीति तापमान गर्म होता दिख रहा नेता एक दूसरे आरोप प्रत्यारोप करने लिए मौका नहीं गवा रहे हैं कल कांग्रेस के नेता बोल गए और आज ढुल्लू महतो ने कह दिया श्री महतो ने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं इस खबर में,,,,,,,,,,,,,,,,
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    बाघमारा का राजनीति तापमान गर्म होता दिख रहा नेता एक दूसरे आरोप प्रत्यारोप करने लिए मौका नहीं गवा रहे हैं कल कांग्रेस के नेता बोल गए और आज ढुल्लू महतो ने कह दिया श्री महतो ने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं इस खबर में,,,,,,,,,,,,,,,,
    user_संतोष कुमार दे
    संतोष कुमार दे
    रिपोर्टर बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    5 hrs ago
  • छाताबाद भू-धंसान पर सियासत हुई गरम अनूप सिंह ने ढुल्लू महतो पर साधा निशाना सांसद ने पलटवार कर कांग्रेस पर बोला हमला आरोप-प्रत्यारोप से और तेज हुआ सियासी संग्राम
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    छाताबाद भू-धंसान पर सियासत हुई गरम
अनूप सिंह ने ढुल्लू महतो पर साधा निशाना
सांसद ने पलटवार कर कांग्रेस पर बोला हमला
आरोप-प्रत्यारोप से और तेज हुआ सियासी संग्राम
    user_जनता न्यूज़ 24
    जनता न्यूज़ 24
    बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    6 hrs ago
  • गांव के गली से संबधित हमारे गाँव अरारी बिरनी गिरिडीह मे 1 गली है जिस गली से रोज 150 से 200 बच्चे स्कूल आवागमन करते हैं और बारिश के कारण 1 से 1.1/2 km की दूरी जायदा करनी पड़ती है हमारे गाँव के मुखिया से कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई
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    गांव के गली से संबधित 
हमारे गाँव अरारी बिरनी गिरिडीह मे 1 गली है जिस गली से रोज 150 से 200 बच्चे स्कूल आवागमन करते हैं और बारिश के कारण 1 से 1.1/2 km की दूरी जायदा करनी पड़ती है हमारे गाँव के मुखिया से कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई
    user_Madhu rana
    Madhu rana
    बिरनी, गिरिडीह, झारखंड•
    10 hrs ago
  • क्यों मनाते हैं हम मनसा पूजा, क्या है इस पारम्परिक पुजा पीछे का कहानी मनसा पूजा झारखंड, बंगाल, असम और बिहार में मानसून के मौसम में मनाई जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पारंपरिक लोक पूजा है। नागों की देवी माता मनसा (जो भगवान शिव की मानसी पुत्री और वासुकी नाग की बहन हैं) को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से सर्प-दंश से रक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। ​मनसा पूजा मनाने के पीछे के धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण ओर ​पौराणिक महत्व क्या हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी सर्पों की देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि मनसा पूजा करने से विषैले सांपों का भय समाप्त हो जाता है और वे परिवार के किसी भी सदस्य को हानि नहीं पहुँचाते। ​मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री और आस्तिक ऋषि की माता के रूप में पूजा जाता है। इन्हें महाज्ञान और तंत्र-मंत्र की देवी भी माना जाता है, जो अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं। ​ मनसा पूजा मुख्य रूप से सावन और भाद्रपद महीने में नागपंचमी या उसके आसपास के दिनों में मनाई जाती है। यह समय मानसून का होता है, जब लगातार बारिश के कारण जमीन के अंदर पानी भर जाने से सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों और इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं। ऐतिहासिक रूप से इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति के जीवों (विशेषकर सर्पों) के प्रति भय को श्रद्धा और संतुलन में बदलना था। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि मनुष्य को प्रकृति और उसके जीव-जंतुओं के साथ सामंजस्य बनाकर कैसे रहना चाहिए। मनसा पूजा अंधविश्वास या भय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं (सर्पों) और मानव जीवन के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाने वाला एक अनूठा लोक पर्व है। यह हमें सिखाता है कि कैसे प्राचीन समाजों ने डर को पूजा और सम्मान के माध्यम से एक सकारात्मक जीवन-दृष्टि में बदल दिया था।मनसा पूजा के पीछे की सबसे प्रसिद्ध और मुख्य पौराणिक कथा चंपकनगर के व्यापारी चन्दन (या चांद सादगर) और माता मनसा के बीच के संघर्ष और अंततः उनकी भक्ति की विजय पर आधारित है। यह कथा प्रसिद्ध बंगाली महाकाव्य 'मनसा मंगल' और 'पद्म पुराण' में विस्तार से मिलती है। ​ पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी की उत्पत्ति भगवान शिव के मन से हुई थी, इसलिए उनका नाम 'मनसा' पड़ा। नागराज वासुकी उनके भाई और ऋषि आस्तिक उनके पुत्र थे। ​चांद सादगर का अड़ियल रवैया: चंपकनगर के एक अत्यंत शक्तिशाली और शिवजी के अनन्य भक्त व्यापारी थे—चांद सादगर। वे भगवान शिव के अलावा किसी अन्य देवी-देवता की पूजा नहीं करते थे। मनसा देवी चाहती थीं कि धरती पर उनकी पूजा का विस्तार हो और चांद सादगर उन्हें अपनी इष्ट देवी के रूप में स्वीकार करें, लेकिन चांद सादगर ने अपनी जिद के कारण मनसा देवी को पूजने से लगातार इनकार कर दिया। ​मनसा देवी का प्रकोप और पुत्रों की मृत्यु ​चांद सादगर के अहंकार और पूजा न करने से क्रोधित होकर मनसा देवी ने उनके जीवन में एक के बाद एक कई संकट खड़े किए। ​देवी के प्रकोप के कारण चांद सादगर के सातों पुत्रों की मृत्यु एक-एक करके विषैले सांपों के काटने से हो गई। यहाँ तक कि उनका पूरा व्यापार और वैभव भी नष्ट हो गया, लेकिन इसके बावजूद चांद सादगर ने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहे। ​चांद सादगर के सबसे छोटे पुत्र लखाइ (लखिंदर) का विवाह बेहुला नाम की एक कन्या से हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह की रात ही लखाइ को सांप डस लेगा। ​इसे टालने के लिए चांद सादगर ने एक पूरी तरह से सुरक्षित लोहे का घर (लोहगढ़) बनवाया, जिसमें हवा का भी प्रवेश न हो सके। ​इसके बावजूद, मनसा देवी की माया से एक सूक्ष्म रूपी नाग (या एक छोटी सी दरार के जरिए) उस घर में प्रवेश कर गया और सोते हुए लखाइ को डस लिया, जिससे उसकी भी मृत्यु हो गई। उस समय की लोक प्रथा के अनुसार, सांप के काटे व्यक्ति को दफनाया या जलाया नहीं जाता था, बल्कि उसे एक बेड़े पर रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था। ​पति की मृत्यु से विचलित हुए बिना, सती बेहुला ने अपने मृत पति के शरीर के साथ एक बांस के बेड़े पर बैठकर पानी में लंबी और कठिन यात्रा शुरू की। महीनों तक बहते हुए वह बेड़ा देवी मनसा के लोक तक जा पहुँचा। बेहुला के इस अटूट प्रेम, पति-भक्ति और असाधारण साहस को देखकर माता मनसा पिघल गईं। ​मनसा देवी ने बेहुला के पति समेत उनके पति के सभी सातों भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया और चांद सादगर के नष्ट हुए वैभव को वापस लौटा दिया। ​अंततः, चांद सादगर को देवी की शक्ति का अहसास हुआ और उन्होंने अपने बाएं हाथ के अंगूठे से (या अपनी सीधी पूजा के बजाय उल्टे हाथ से) माता मनसा को पहला पुष्पांजलि अर्पित किया। ​इसी ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंग के बाद से धरती पर नागों की देवी मनसा की पूजा विधि-विधान से शुरू हुई, जो आज भी लोक-संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
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    क्यों मनाते हैं हम मनसा पूजा, क्या है इस पारम्परिक पुजा पीछे का कहानी 

मनसा पूजा झारखंड, बंगाल, असम और बिहार में मानसून के मौसम में मनाई जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पारंपरिक लोक पूजा है। नागों की देवी माता मनसा (जो भगवान शिव की मानसी पुत्री और वासुकी नाग की बहन हैं) को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से सर्प-दंश से रक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
​मनसा पूजा मनाने के पीछे के धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण ओर 
​पौराणिक महत्व क्या हैं. 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी सर्पों की देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि मनसा पूजा करने से विषैले सांपों का भय समाप्त हो जाता है और वे परिवार के किसी भी सदस्य को हानि नहीं पहुँचाते।
​मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री और आस्तिक ऋषि की माता के रूप में पूजा जाता है। इन्हें महाज्ञान और तंत्र-मंत्र की देवी भी माना जाता है, जो अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं।
​ मनसा पूजा मुख्य रूप से सावन और भाद्रपद महीने में नागपंचमी या उसके आसपास के दिनों में मनाई जाती है। यह समय मानसून का होता है, जब लगातार बारिश के कारण जमीन के अंदर पानी भर जाने से सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों और इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं।
ऐतिहासिक रूप से इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति के जीवों (विशेषकर सर्पों) के प्रति भय को श्रद्धा और संतुलन में बदलना था। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि मनुष्य को प्रकृति और उसके जीव-जंतुओं के साथ सामंजस्य बनाकर कैसे रहना चाहिए।
मनसा पूजा अंधविश्वास या भय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं (सर्पों) और मानव जीवन के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाने वाला एक अनूठा लोक पर्व है। यह हमें सिखाता है कि कैसे प्राचीन समाजों ने डर को पूजा और सम्मान के माध्यम से एक सकारात्मक जीवन-दृष्टि में बदल दिया था।मनसा पूजा के पीछे की सबसे प्रसिद्ध और मुख्य पौराणिक कथा चंपकनगर के व्यापारी चन्दन (या चांद सादगर) और माता मनसा के बीच के संघर्ष और अंततः उनकी भक्ति की विजय पर आधारित है। यह कथा प्रसिद्ध बंगाली महाकाव्य 'मनसा मंगल' और 'पद्म पुराण' में विस्तार से मिलती है।
​ पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी की उत्पत्ति भगवान शिव के मन से हुई थी, इसलिए उनका नाम 'मनसा' पड़ा। नागराज वासुकी उनके भाई और ऋषि आस्तिक उनके पुत्र थे।
​चांद सादगर का अड़ियल रवैया: चंपकनगर के एक अत्यंत शक्तिशाली और शिवजी के अनन्य भक्त व्यापारी थे—चांद सादगर। वे भगवान शिव के अलावा किसी अन्य देवी-देवता की पूजा नहीं करते थे। मनसा देवी चाहती थीं कि धरती पर उनकी पूजा का विस्तार हो और चांद सादगर उन्हें अपनी इष्ट देवी के रूप में स्वीकार करें, लेकिन चांद सादगर ने अपनी जिद के कारण मनसा देवी को पूजने से लगातार इनकार कर दिया।
​मनसा देवी का प्रकोप और पुत्रों की मृत्यु
​चांद सादगर के अहंकार और पूजा न करने से क्रोधित होकर मनसा देवी ने उनके जीवन में एक के बाद एक कई संकट खड़े किए।
​देवी के प्रकोप के कारण चांद सादगर के सातों पुत्रों की मृत्यु एक-एक करके विषैले सांपों के काटने से हो गई। यहाँ तक कि उनका पूरा व्यापार और वैभव भी नष्ट हो गया, लेकिन इसके बावजूद चांद सादगर ने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहे।
​चांद सादगर के सबसे छोटे पुत्र लखाइ (लखिंदर) का विवाह बेहुला नाम की एक कन्या से हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह की रात ही लखाइ को सांप डस लेगा।
​इसे टालने के लिए चांद सादगर ने एक पूरी तरह से सुरक्षित लोहे का घर (लोहगढ़) बनवाया, जिसमें हवा का भी प्रवेश न हो सके।
​इसके बावजूद, मनसा देवी की माया से एक सूक्ष्म रूपी नाग (या एक छोटी सी दरार के जरिए) उस घर में प्रवेश कर गया और सोते हुए लखाइ को डस लिया, जिससे उसकी भी मृत्यु हो गई।
उस समय की लोक प्रथा के अनुसार, सांप के काटे व्यक्ति को दफनाया या जलाया नहीं जाता था, बल्कि उसे एक बेड़े पर रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था।
​पति की मृत्यु से विचलित हुए बिना, सती बेहुला ने अपने मृत पति के शरीर के साथ एक बांस के बेड़े पर बैठकर पानी में लंबी और कठिन यात्रा शुरू की। महीनों तक बहते हुए वह बेड़ा देवी मनसा के लोक तक जा पहुँचा।
बेहुला के इस अटूट प्रेम, पति-भक्ति और असाधारण साहस को देखकर माता मनसा पिघल गईं।
​मनसा देवी ने बेहुला के पति समेत उनके पति के सभी सातों भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया और चांद सादगर के नष्ट हुए वैभव को वापस लौटा दिया।
​अंततः, चांद सादगर को देवी की शक्ति का अहसास हुआ और उन्होंने अपने बाएं हाथ के अंगूठे से (या अपनी सीधी पूजा के बजाय उल्टे हाथ से) माता मनसा को पहला पुष्पांजलि अर्पित किया।
​इसी ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंग के बाद से धरती पर नागों की देवी मनसा की पूजा विधि-विधान से शुरू हुई, जो आज भी लोक-संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
    user_प्रेम कुमार *पत्रकार*
    प्रेम कुमार *पत्रकार*
    Local News Reporter बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    13 hrs ago
  • VB G RAM G Yojna में चेक डेम का प्रकार... VB G RAM G Yojna में चेक डेम का प्रकार... VB G RAM G Yojna में चेक डेम का प्रकार...
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    VB G RAM G Yojna में चेक डेम का प्रकार...
VB G RAM G Yojna में चेक डेम का प्रकार...
VB G RAM G Yojna में चेक डेम का प्रकार...
    user_BaरKaट्ठा Ki आwaज
    BaरKaट्ठा Ki आwaज
    Court reporter Barkatha, Hazaribagh•
    9 hrs ago
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