*20 हजार की कथित डील या साजिशवायरल ऑडियो से उठे सवाल चौथा स्तंभ पर भरोसा या भरोसा टूटने का डर* अमोला। क्षेत्र में वायरल हो रही एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने माहौल पूरी तरह गरमा दिया है। अमोला थाना प्रभारी अंशुल गुप्ता को हटाने की चर्चाओं के बीच सामने आए इस ऑडियो ने राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है। ऑडियो में कथित तौर पर थाना प्रभारी के खिलाफ माहौल बनाने और साजिश रचने जैसी बातें सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अमोला थाना बीते कुछ समय से अवैध गतिविधियों, खासकर शराब माफिया और आपराधिक तत्वों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा था। इससे कई असामाजिक तत्वों में डर का माहौल बना हुआ था। ऐसे में अचानक नकारात्मक खबरों का उभरना और उसी दौरान ऑडियो वायरल होना संदेह को और गहरा करता है। चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश और आर्थिक लाभ के चलते माहौल बनाने में जुटे हैं। आरोप है कि कुछ तथाकथित लोग पैसों के बदले खबरों को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति, जिसे स्थानीय स्तर पर पत्रकार सौरभ भार्गव बताया जा रहा है, द्वारा करीब 20,000 रुपये की मांग और “जैसा चाहेंगे वैसा मामला बना देंगे” जैसी बातें कही गई हैं। साथ ही कथित बातचीत में थाना प्रभारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और उन्हें हटवाने की बात भी सामने आने की चर्चा है। हालांकि, इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है— अगर वही लोग, जिन्हें समाज में “चौथा स्तंभ” माना जाता है, कथित रूप से शराब माफिया जैसे तत्वों से जुड़े होने या उनके पक्ष में बोलने के आरोपों में घिरते हैं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? एक ओर सार्वजनिक रूप से अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाना और दूसरी ओर कथित रूप से फोन पर विपरीत रुख अपनाने की चर्चा—यह दोहरा रवैया कई सवालों को जन्म देता है। इसके साथ ही यह भी चिंता सामने आ रही है कि यदि किसी थाना प्रभारी पर इस तरह कथित रूप से दबाव बनाने की कोशिश होती है, तो कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर क्या असर पड़ेगा? क्या अधिकारी स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर पाएंगे? हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वायरल ऑडियो की सत्यता की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिर भी, क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है। आमजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी हो तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल, यह मामला केवल एक वायरल ऑडियो नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, मीडिया की साख और कानून व्यवस्था पर जनता के भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि सच्चाई क्या है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। *20 हजार की कथित डील या साजिशवायरल ऑडियो से उठे सवाल चौथा स्तंभ पर भरोसा या भरोसा टूटने का डर* अमोला। क्षेत्र में वायरल हो रही एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने माहौल पूरी तरह गरमा दिया है। अमोला थाना प्रभारी अंशुल गुप्ता को हटाने की चर्चाओं के बीच सामने आए इस ऑडियो ने राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है। ऑडियो में कथित तौर पर थाना प्रभारी के खिलाफ माहौल बनाने और साजिश रचने जैसी बातें सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अमोला थाना बीते कुछ समय से अवैध गतिविधियों, खासकर शराब माफिया और आपराधिक तत्वों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा था। इससे कई असामाजिक तत्वों में डर का माहौल बना हुआ था। ऐसे में अचानक नकारात्मक खबरों का उभरना और उसी दौरान ऑडियो वायरल होना संदेह को और गहरा करता है। चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश और आर्थिक लाभ के चलते माहौल बनाने में जुटे हैं। आरोप है कि कुछ तथाकथित लोग पैसों के बदले खबरों को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति, जिसे स्थानीय स्तर पर पत्रकार सौरभ भार्गव बताया जा रहा है, द्वारा करीब 20,000 रुपये की मांग और “जैसा चाहेंगे वैसा मामला बना देंगे” जैसी बातें कही गई हैं। साथ ही कथित बातचीत में थाना प्रभारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और उन्हें हटवाने की बात भी सामने आने की चर्चा है। हालांकि, इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है— अगर वही लोग, जिन्हें समाज में “चौथा स्तंभ” माना जाता है, कथित रूप से शराब माफिया जैसे तत्वों से जुड़े होने या उनके पक्ष में बोलने के आरोपों में घिरते हैं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? एक ओर सार्वजनिक रूप से अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाना और दूसरी ओर कथित रूप से फोन पर विपरीत रुख अपनाने की चर्चा—यह दोहरा रवैया कई सवालों को जन्म देता है। इसके साथ ही यह भी चिंता सामने आ रही है कि यदि किसी थाना प्रभारी पर इस तरह कथित रूप से दबाव बनाने की कोशिश होती है, तो कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर क्या असर पड़ेगा? क्या अधिकारी स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर पाएंगे? हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वायरल ऑडियो की सत्यता की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिर भी, क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है। आमजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी हो तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल, यह मामला केवल एक वायरल ऑडियो नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, मीडिया की साख और कानून व्यवस्था पर जनता के भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि सच्चाई क्या है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
*20 हजार की कथित डील या साजिशवायरल ऑडियो से उठे सवाल चौथा स्तंभ पर भरोसा या भरोसा टूटने का डर* अमोला। क्षेत्र में वायरल हो रही एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने माहौल पूरी तरह गरमा दिया है। अमोला थाना प्रभारी अंशुल गुप्ता को हटाने की चर्चाओं के बीच सामने आए इस ऑडियो ने राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है। ऑडियो में कथित तौर पर थाना प्रभारी के खिलाफ माहौल बनाने और साजिश रचने जैसी बातें सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अमोला थाना बीते कुछ समय से अवैध गतिविधियों, खासकर शराब माफिया और आपराधिक तत्वों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा था। इससे कई असामाजिक तत्वों में डर का माहौल बना हुआ था। ऐसे में अचानक नकारात्मक खबरों का उभरना और उसी दौरान ऑडियो वायरल होना संदेह को और गहरा करता है। चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश और आर्थिक लाभ के चलते माहौल बनाने में जुटे हैं। आरोप है कि कुछ तथाकथित लोग पैसों के बदले खबरों को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति, जिसे स्थानीय स्तर पर पत्रकार सौरभ भार्गव बताया जा रहा है, द्वारा करीब 20,000 रुपये की मांग और “जैसा चाहेंगे वैसा मामला बना देंगे” जैसी बातें कही गई हैं। साथ ही कथित बातचीत में थाना प्रभारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और उन्हें हटवाने की बात भी सामने आने की चर्चा है। हालांकि, इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है— अगर वही लोग, जिन्हें समाज में “चौथा स्तंभ” माना जाता है, कथित रूप से शराब माफिया जैसे तत्वों से जुड़े होने या उनके पक्ष में बोलने के आरोपों में घिरते हैं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? एक ओर सार्वजनिक रूप से अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाना और दूसरी ओर कथित रूप से फोन पर विपरीत रुख अपनाने की चर्चा—यह दोहरा रवैया कई सवालों को जन्म देता है। इसके साथ ही यह भी चिंता सामने आ रही है कि यदि किसी थाना प्रभारी पर इस तरह कथित रूप से दबाव बनाने की कोशिश होती है, तो कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर क्या असर पड़ेगा? क्या अधिकारी स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर पाएंगे? हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वायरल ऑडियो की सत्यता की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिर भी, क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है। आमजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी हो तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल, यह मामला केवल एक वायरल ऑडियो नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, मीडिया की साख और कानून व्यवस्था पर जनता के भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि सच्चाई क्या है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। *20 हजार की कथित डील या साजिशवायरल ऑडियो से उठे सवाल चौथा स्तंभ पर भरोसा या भरोसा टूटने का डर* अमोला। क्षेत्र में वायरल हो रही एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने माहौल पूरी तरह गरमा दिया है। अमोला थाना प्रभारी अंशुल गुप्ता को हटाने की चर्चाओं के बीच सामने आए इस ऑडियो ने राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है। ऑडियो में कथित तौर पर थाना प्रभारी के खिलाफ माहौल बनाने और साजिश रचने जैसी बातें सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अमोला थाना बीते कुछ समय से अवैध गतिविधियों, खासकर शराब माफिया और आपराधिक तत्वों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा था। इससे कई असामाजिक तत्वों में डर का माहौल बना हुआ था। ऐसे में अचानक नकारात्मक खबरों का उभरना और उसी दौरान ऑडियो वायरल होना संदेह को और गहरा करता है। चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश और आर्थिक लाभ के चलते माहौल बनाने में जुटे हैं। आरोप है कि कुछ तथाकथित लोग पैसों के बदले खबरों को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति, जिसे स्थानीय स्तर पर पत्रकार सौरभ भार्गव बताया जा रहा है, द्वारा करीब 20,000 रुपये की मांग और “जैसा चाहेंगे वैसा मामला बना देंगे” जैसी बातें कही गई हैं। साथ ही कथित बातचीत में थाना प्रभारी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और उन्हें हटवाने की बात भी सामने आने की चर्चा है। हालांकि, इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है— अगर वही लोग, जिन्हें समाज में “चौथा स्तंभ” माना जाता है, कथित रूप से शराब माफिया जैसे तत्वों से जुड़े होने या उनके पक्ष में बोलने के आरोपों में घिरते हैं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? एक ओर सार्वजनिक रूप से अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाना और दूसरी ओर कथित रूप से फोन पर विपरीत रुख अपनाने की चर्चा—यह दोहरा रवैया कई सवालों को जन्म देता है। इसके साथ ही यह भी चिंता सामने आ रही है कि यदि किसी थाना प्रभारी पर इस तरह कथित रूप से दबाव बनाने की कोशिश होती है, तो कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर क्या असर पड़ेगा? क्या अधिकारी स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर पाएंगे? हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वायरल ऑडियो की सत्यता की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिर भी, क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है। आमजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी हो तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल, यह मामला केवल एक वायरल ऑडियो नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, मीडिया की साख और कानून व्यवस्था पर जनता के भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि सच्चाई क्या है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
- शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ जिला आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कच्ची शराब जब्त की है। यह कार्रवाई कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा एवं उपायुक्त आबकारी संभागीय उड़नदस्ता ग्वालियर श्री संदीप शर्मा के निर्देशन में की गई। जिला आबकारी अधिकारी श्री शुभम दांगोड़े के नेतृत्व में वृत्त करैरा प्रभारी गौरव कुमार कोल की टीम ने न्यू अमोला एवम सिरसौद कंजर डेरे में दबिश दी । कार्रवाई के दौरान न्यू अमोला से लगभग 24 बल्क लीटर हाथ भट्टी की जहरीली शराब जब्त की गई। और सिरसौद डेरे से से 4200 kg गुड़ लाहन, 100 ली. हाथ भट्टी मदिरा एवम मदिरा बनाने की सामग्री भट्टी टंकी एवम ड्रम आदि मोके से गुड लाहन का सैंपल लेकर मौके से नष्ट किया गया एवम हाथ भट्टी मदिरा को जप्त किया गया ।बारामद एवम नष्ट सामग्री की कुल अनुमानित क़ीमत 480000₹ आंकी गई है । आबकारी विभाग ने मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के तहत आरोपिया रवीना पत्नी भज्जी को गिरफ्तार कर 34(1),49(क) समेत कुल 10 आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया । इस कार्रवाई में वृत्त प्रभारी गौरव कुमार कोल,आबकारी उपनिरीक्षक लोकेश बेवरिया आरक्षक रितिक, गिर्राज , डोंगर सिंह, डालसिंह , मुकेश तथा सैनिक सुमन जोशी, रीतू और दिलीप की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब एवं नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।2
- 3 दिन से घर में खाने के पड़े लाले, आज ही 5 पसेरी गेहूं लाया था लड़का, अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान वो भी फैलाए, 3 दिन से भूखी महिला ने चिल्लाते हुए लगाए आरोप1
- Post by Ranu rajput पत्रकार1
- जानकारी सोमवार दोपहर 12 बजे मिली शाहाबाद उपखंड के आदिवासी सहरिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली सामने आई है। जननी एक्सप्रेस और 104 एंबुलेंस सेवाएं लंबे समय से बंद होने से गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है। केलवाड़ा, समरानियां, देवरी, कस्बाथाना व राजपुर सहित कई स्थानों पर एंबुलेंसें कबाड़ बनी खड़ी हैं। मजबूरन प्रसूताएं निजी वाहनों से महंगा सफर कर रही हैं, जिससे आर्थिक बोझ और जोखिम बढ़ रहा है। ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. श्रवण शर्मा ने बताया कि सेवाएं शुरू कराने के प्रयास जारी हैं तथा किराया भुगतान की व्यवस्था लागू की गई है।1
- पुलिस अधीक्षक शिवपुरी अमन सिंह राठौड़ एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले के निर्देशन तथा एस.डी.ओ.पी. पोहरी आनंन्द राय के मार्गदर्शन में महिला सम्बधी गम्भीर अपराधो में आरोपियो को गिरफ्तार कर तुरंत कार्यवाही करने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्देश दिये गये हैं। थाना पोहरी मे दिनांक 22.04.2026 को फरियादी नें उपस्थित थाना आकर स्वयं की नाबलिग पुत्री के कही चले जाने की रिपोर्ट की थी जिस पर थाना पोहरी पर अपराध क्रमांक 100/2026 धारा 137(2) बीएनएस पंजीबद्ध किया गया था। विवेचना के दौरान अपहता को दिनाँक 28.04.26 को दस्तयाब किया गया था तथा प्रकरण मे इजाफा धारा इजाफा 64(2), 87 बीएनएस, 5एल 16 पांक्सो एक्ट इजाफा की गई थी एवं आरोपी घटना दिनांक से फरार था। प्रकरण मे बरिष्ठ अधिकारियो के निर्देशन व मार्गदर्शन में निरी रवि चौहान थाना प्रभारी पोहरी के द्वारा टीम बनाकर त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर आरोपी को माननीय न्यायालय पेश किया गया। सराहनीय कार्यवाही : - निरी रवि चौहन, उपनिरी वीरेन्द्र परिहार, प्र.आर. 180 हृदेश पाराशर, आर. 247 मुनेश धाकड़, आर.802 अमित कुमार की विशेष भूमिका रही।1
- आज से बारां कलेक्टर के रूप में बालमुकुंद असावा की सेवाएं हुई शुरू।।1
- शिवपुरी शहर के कठमई तिराहे के पास ट्रक में लगी भीषण आग, लाखों का माल जलकर खाक..1
- पुलिस अधीक्षक शिवपुरी अमन सिंह राठौड़ एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले के निर्देशन में तथा एस.डी.ओ.पी. पोहरी आनंन्द राय के मार्गदर्शन में न्यायालय के प्रकरण क्रमांक 397/2021 अपराध क्रमांक 156/2021 में स्थाई वारंटी सुरेन्द्र पुत्र पूरम जाटव उम्र 26 साल निवासी ग्राम अगर्रा थाना पोहरी जिला शिवपुरी का, जो करीब 05 वर्ष फरार चल रहा था। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधिक से अधिक स्थाई वारंट तामील कराये जाने के निर्देश दिये गये थे, निरी. रवि चौहान के नेतृत्व में टीम गठित कर स्थायी वारंटी को दिनांक 04.05.2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। सराहनीय कार्यवाही :- निरी रवि चौहान, उनि वीरेन्द्र परिहार, प्र.आर.571 भगवानलाल, आर. 1162 रामअवतार रावत, आर. 313 मांगीलाल गुर्जर, आर. 256 रामनाथ रावत, आर. 1134 अरविंद कुशवाह की विशेष भूमिका रही।2
- जानकारी सोमवार दोपहर 12 बजे मिली केलवाड़ा कस्बे के विश्वकर्मा तिराहे पर तीन युवकों ने नशे में जमकर उत्पात मचाया और एक मोबाइल दुकान के काउंटर का कांच तोड़ दिया। जानकारी के अनुसार राहुल माली अपनी चाची के साथ जा रहा था, तभी बाइक सवार ने पीछे से टक्कर मार दी और फरार हो गया। कुछ देर बाद आरोपी अपने साथी के साथ लौटे और जयप्रकाश राठौर की दुकान पर तोड़फोड़ कर दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घायल राहुल को उपचार के लिए बारां रेफर किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।1