ग्रामीण विकास की धुरी हैं जनपद CEO तीन दिवसीय हड़ताल ने स्पष्ट की प्रशासनिक शक्ति और प्रभाव ग्रामीण विकास की धुरी हैं जनपद CEO तीन दिवसीय हड़ताल ने स्पष्ट की प्रशासनिक शक्ति और प्रभाव *♦️रीवा : समाचार अपडेट* रीवा जिले में पिछले तीन दिनों से जारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आंदोलन ने प्रशासनिक गलियारों में यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि ग्रामीण विकास की पूरी व्यवस्था में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है।यह हड़ताल न केवल एक विरोध प्रदर्शन था, बल्कि इसने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में जनपद CEO की केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित किया। *व्यापक प्रशासनिक नेटवर्क और नेतृत्व* ग्रामीण विकास विभाग का पूरा विशाल अमला सीधे तौर पर जनपद CEO के अधीन कार्य करता है।रीवा के हालिया घटनाक्रम में जब जनपद CEO स्वयं हड़ताल पर उतरे, तो उनके समर्थन और नेतृत्व में SDO (RES), उपयंत्री, PCO, ADEO, सचिव, GRS, BPO, सहायक यंत्री, सरपंच, पंच, बाबू एवं ऑपरेटर सहित समस्त अमले ने कार्य ठप कर दिया। इस एकजुटता ने जिले की विकास योजनाओं और दैनिक प्रशासनिक गतिविधियों को पूरी तरह से प्रभावित किया। *जनपद सीईओ के पास रहती हैं विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां* जनपद CEO केवल अपने विभाग तक सीमित नहीं हैं। भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन उनके नेतृत्व में ही होता है।इसके अतिरिक्त राजस्व विभाग के SIR एवं जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग। स्वास्थ्य विभाग में आयुष्मान कार्ड निर्माण की प्रक्रिया का क्रियान्वयन।PHE विभाग में नल-जल योजना की जमीनी सफलता।सहित अन्य विभागों की विभिन्न योजनाओं में पंचायत विभाग की भूमिका अनिवार्य रहती है। *ब्लॉक स्तर का सबसे बड़ा कार्यबल* जिले के कलेक्टर के अधीन भले ही 50 से अधिक विभाग हों, लेकिन ब्लॉक स्तर पर सबसे बड़ा प्रशासनिक अमला जनपद CEO के पास ही होता है।तुलनात्मक रूप से देखें तो जहाँ राजस्व एवं पुलिस विभाग के पास औसतन 50-60 कर्मचारियों का स्टाफ रहता है, वहीं जनपद CEO 29 विभागों के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।वे अपने अधीन लगभग 2000 से अधिक कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों GRS, सचिव, सरपंच, पंच आदि के व्यापक नेटवर्क का संचालन करते हैं। *प्रशासन और लोकतंत्र का संगम* जनपद पंचायत एक ऐसा अनूठा केंद्र है जहाँ प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व का मिलन होता है। जनपद CEO, जनपद अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य के साथ समन्वय बनाकर विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करते हैं।अब तीन दिनों की हड़ताल के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती व्यवस्थाओं को दोबारा पटरी पर लाने की है।हड़ताल समाप्त होने के बाद, प्रशासन की नजर इस पर है कि सभी जनपद CEO किस प्रकार रुकी हुई गतिविधियों में तेजी लाते हैं और रीवा जिले को प्रदेश में नंबर-1 बनाने के संकल्प को कैसे सिद्ध करते हैं
ग्रामीण विकास की धुरी हैं जनपद CEO तीन दिवसीय हड़ताल ने स्पष्ट की प्रशासनिक शक्ति और प्रभाव ग्रामीण विकास की धुरी हैं जनपद CEO तीन दिवसीय हड़ताल ने स्पष्ट की प्रशासनिक शक्ति और प्रभाव *♦️रीवा : समाचार अपडेट* रीवा जिले में पिछले तीन दिनों से जारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आंदोलन ने प्रशासनिक गलियारों में यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि ग्रामीण विकास की पूरी व्यवस्था में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है।यह हड़ताल न केवल एक विरोध प्रदर्शन था, बल्कि इसने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में जनपद CEO की केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित किया। *व्यापक प्रशासनिक नेटवर्क और नेतृत्व* ग्रामीण विकास विभाग का पूरा विशाल अमला सीधे तौर पर जनपद CEO के अधीन कार्य करता है।रीवा के हालिया घटनाक्रम में जब जनपद CEO स्वयं हड़ताल पर उतरे, तो उनके समर्थन और नेतृत्व में SDO (RES), उपयंत्री, PCO, ADEO, सचिव, GRS, BPO, सहायक यंत्री, सरपंच, पंच, बाबू एवं ऑपरेटर सहित समस्त अमले ने कार्य ठप कर दिया। इस एकजुटता ने जिले की विकास योजनाओं और दैनिक प्रशासनिक गतिविधियों को पूरी तरह से प्रभावित किया। *जनपद सीईओ के पास रहती हैं विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां* जनपद CEO केवल अपने विभाग तक सीमित नहीं हैं। भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन उनके नेतृत्व में ही होता है।इसके अतिरिक्त राजस्व विभाग के SIR एवं जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग। स्वास्थ्य विभाग में आयुष्मान कार्ड निर्माण की प्रक्रिया का क्रियान्वयन।PHE विभाग में नल-जल योजना की जमीनी सफलता।सहित अन्य विभागों की विभिन्न योजनाओं में पंचायत विभाग की भूमिका अनिवार्य रहती है। *ब्लॉक स्तर का सबसे बड़ा कार्यबल* जिले के कलेक्टर के अधीन भले ही 50 से अधिक विभाग हों, लेकिन ब्लॉक स्तर पर सबसे बड़ा प्रशासनिक अमला जनपद CEO के पास ही होता है।तुलनात्मक रूप से देखें तो जहाँ राजस्व एवं पुलिस विभाग के पास औसतन 50-60 कर्मचारियों का स्टाफ रहता है, वहीं जनपद CEO 29 विभागों के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।वे अपने अधीन लगभग 2000 से अधिक कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों GRS, सचिव, सरपंच, पंच आदि के व्यापक नेटवर्क का संचालन करते हैं। *प्रशासन और लोकतंत्र का संगम* जनपद पंचायत एक ऐसा अनूठा केंद्र है जहाँ प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व का मिलन होता है। जनपद CEO, जनपद अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य के साथ समन्वय बनाकर विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करते हैं।अब तीन दिनों की हड़ताल के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती व्यवस्थाओं को दोबारा पटरी पर लाने की है।हड़ताल समाप्त होने के बाद, प्रशासन की नजर इस पर है कि सभी जनपद CEO किस प्रकार रुकी हुई गतिविधियों में तेजी लाते हैं और रीवा जिले को प्रदेश में नंबर-1 बनाने के संकल्प को कैसे सिद्ध करते हैं
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- Post by Bablu,Namdev1
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