उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक तीन मंजिला अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग के कारण 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें से अधिकांश छात्र और युवा प्रोफेशनल्स थे। इस बड़ी त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में अवैध और असुरक्षित व्यावसायिक इमारतों व कोचिंग सेंटरों के खिलाफ एक बड़ा प्रदेशव्यापी महा-अभियान शुरू हो गया है। यह दर्दनाक घटना 22 जून 2026 को अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक कॉम्प्लेक्स में घटी, जहां एक एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, कोचिंग संस्थान और गेमिंग जोन संचालित हो रहे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 15 बच्चों की मौत जलने से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं और दम घुटने (Asphyxia) से हुई। इस त्रासदी की मुख्य वजहों में इमारत के दरवाजों पर लगे ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक लॉक थे, जो बिजली कटने और आग लगने पर स्वतः लॉक हो गए, जिससे छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इसके अलावा, तीन मंजिला इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरी सीढ़ी थी, जहां धुआं भर जाने से निकास पूरी तरह ठप हो गया। जाँच में यह भी सामने आया कि यह पूरी बिल्डिंग अवैध थी और इसके खिलाफ 2016 में भी ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था, जिसे बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी व भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला (सुरेंद्र शुक्ला) सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है; उन पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मुकदमा दर्ज हुआ है। साथ ही, लापरवाही बरतने और अवैध इमारत को संरक्षण देने के आरोप में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और दमकल विभाग के 6 जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, एलडीए ने विवादित इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए भवन स्वामी को 15 दिनों का अंतिम नोटिस भी थमा दिया है। लखनऊ की इस त्रासदी के बाद जिला प्रशासन, एलडीए, पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीमें पूरे राज्य में सड़कों पर उतर आई हैं। सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी (NOC) का उल्लंघन करने पर अब तक 100 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील किया जा चुका है। कानपुर के काकादेव कोचिंग हब में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने देर रात से सुबह तक ताबड़तोड़ छापेमारी कर नियमों का उल्लंघन कर बेसमेंट में चल रहे 22 से अधिक नामचीन कोचिंग सेंटरों को सील किया, जिनमें फिजिक्स वाला (Physics Wallah) और विद्यापीठ, अर्थ एकेडमी जैसे बड़े संस्थान भी शामिल हैं। इसके साथ ही, 22 अन्य संस्थानों को रेड नोटिस जारी किया गया है। प्रयागराज में भी प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने सिविल लाइंस स्थित प्रसिद्ध शिक्षक खान सर के संस्थान 'खान ग्लोबल क्लासेस' को अवैध संचालन और सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते सील कर दिया। छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद यह कार्रवाई की गई। मेरठ, वाराणसी, देवरिया, फिरोजाबाद और बुलंदशहर जैसे अन्य जिलों में भी संयुक्त टीमों ने करीब 48 से अधिक कोचिंग सेंटरों और मानकों के विपरीत चल रहे होटलों को सील करने की कार्रवाई की है। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है: आखिर 2016 के ध्वस्तीकरण के आदेश पर 10 साल तक धूल क्यों जमती रही? सरकार हमेशा 'हादसे के बाद' ही क्यों जागती है? क्या हर बार सिर्फ 'छोटे कर्मचारियों' को ही बलि का बकरा बनाया जाएगा, जबकि 'आवासीय' कागजों पर सालों से 'व्यावसायिक' खेल चलता रहा? और बायोमेट्रिक तथा डिजिटल लॉक को लेकर कोई नियम क्यों नहीं बनाए गए? इन सवालों के बीच 15 मासूम जिंदगियां लापरवाही की भेंट चढ़ गईं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक तीन मंजिला अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग के कारण 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें से अधिकांश छात्र और युवा प्रोफेशनल्स थे। इस बड़ी त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में अवैध और असुरक्षित व्यावसायिक इमारतों व कोचिंग सेंटरों के खिलाफ एक बड़ा प्रदेशव्यापी महा-अभियान शुरू हो गया है। यह दर्दनाक घटना 22 जून 2026 को अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक कॉम्प्लेक्स में घटी, जहां एक एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, कोचिंग संस्थान और गेमिंग जोन संचालित हो रहे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 15 बच्चों की मौत जलने से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं और दम घुटने (Asphyxia) से हुई। इस त्रासदी की मुख्य वजहों में इमारत के दरवाजों पर लगे ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक लॉक
थे, जो बिजली कटने और आग लगने पर स्वतः लॉक हो गए, जिससे छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इसके अलावा, तीन मंजिला इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरी सीढ़ी थी, जहां धुआं भर जाने से निकास पूरी तरह ठप हो गया। जाँच में यह भी सामने आया कि यह पूरी बिल्डिंग अवैध थी और इसके खिलाफ 2016 में भी ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था, जिसे बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी व भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला (सुरेंद्र शुक्ला) सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है; उन पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मुकदमा दर्ज हुआ है। साथ ही, लापरवाही बरतने और अवैध इमारत को संरक्षण देने के आरोप में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और दमकल
विभाग के 6 जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, एलडीए ने विवादित इमारत को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए भवन स्वामी को 15 दिनों का अंतिम नोटिस भी थमा दिया है। लखनऊ की इस त्रासदी के बाद जिला प्रशासन, एलडीए, पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीमें पूरे राज्य में सड़कों पर उतर आई हैं। सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी (NOC) का उल्लंघन करने पर अब तक 100 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील किया जा चुका है। कानपुर के काकादेव कोचिंग हब में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने देर रात से सुबह तक ताबड़तोड़ छापेमारी कर नियमों का उल्लंघन कर बेसमेंट में चल रहे 22 से अधिक नामचीन कोचिंग सेंटरों को सील किया, जिनमें फिजिक्स वाला (Physics Wallah) और विद्यापीठ, अर्थ एकेडमी जैसे बड़े संस्थान भी शामिल हैं। इसके साथ ही, 22 अन्य संस्थानों को रेड नोटिस जारी किया गया है। प्रयागराज में भी प्रयागराज विकास प्राधिकरण
(PDA) ने सिविल लाइंस स्थित प्रसिद्ध शिक्षक खान सर के संस्थान 'खान ग्लोबल क्लासेस' को अवैध संचालन और सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते सील कर दिया। छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद यह कार्रवाई की गई। मेरठ, वाराणसी, देवरिया, फिरोजाबाद और बुलंदशहर जैसे अन्य जिलों में भी संयुक्त टीमों ने करीब 48 से अधिक कोचिंग सेंटरों और मानकों के विपरीत चल रहे होटलों को सील करने की कार्रवाई की है। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है: आखिर 2016 के ध्वस्तीकरण के आदेश पर 10 साल तक धूल क्यों जमती रही? सरकार हमेशा 'हादसे के बाद' ही क्यों जागती है? क्या हर बार सिर्फ 'छोटे कर्मचारियों' को ही बलि का बकरा बनाया जाएगा, जबकि 'आवासीय' कागजों पर सालों से 'व्यावसायिक' खेल चलता रहा? और बायोमेट्रिक तथा डिजिटल लॉक को लेकर कोई नियम क्यों नहीं बनाए गए? इन सवालों के बीच 15 मासूम जिंदगियां लापरवाही की भेंट चढ़ गईं।
- पूर्व RAW अधिकारी लकी बिष्ट ने घोषणा की है कि वे बिहार आ रहे हैं। यह जानकारी खुद बिष्ट ने साझा की है।1
- कौशाम्बी के आर्कोमहावीरपुर फीटर के अंतर्गत पावर हाउस के जे.ई. निशार अहमद पर गंभीर धांधली और मनमानी का आरोप लगा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जे.ई. निशार अहमद द्वारा लाइनमैनों से पैसा वसूलने, बिजली बनाने और बिगाड़ने का गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है। उन पर उपभोक्ताओं से फोन पर अनाप-शनाप बातें करने का भी आरोप है, जिसे उनकी आदत बताया गया है। पूर्व में भी उपभोक्ताओं से वसूली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनता का आरोप है कि जे.ई. निशार अहमद की शह पर प्रतिदिन बिजली कटौती, हाफ लाइट और ट्रांसफॉर्मर से फ्यूज उड़ाकर जनता को परेशान किया जा रहा है। उपभोक्ताओं से पैसे वसूलकर दो-दो दिन लाइट न बनाने और फिर पैसा लेकर लाइट बनाने का चलन लाइनमैनों का पेशा बन चुका है। ग्राम सभा गौहानी मलाका की जनता इस रवैये से त्रस्त है। जे.ई. निशार अहमद ने उपभोक्ताओं को धमकी देते हुए कहा है कि लाइट बिगड़ने पर वे उन्हें फोन न करें, बल्कि पावर हाउस जाकर शिकायत करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि शिकायत करने वाले व्यक्ति के कारण किसी लाइनमैन को कुछ भी होता है, तो उसकी जवाबदारी शिकायतकर्ता की होगी। रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें जे.ई. निशार अहमद स्वयं यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि शिकायतकर्ता जिम्मेदार होगा यदि लाइनमैन को कुछ होता है। जनता का सवाल है कि क्या जे.ई. निशार अहमद का इस तरह उपभोक्ताओं को धमकाना उचित है और क्या उन्हें उच्चाधिकारियों का कोई खौफ नहीं है। आरोप है कि जे.ई. निशार अहमद खुद को पावर हाउस का मालिक समझने लगे हैं। गौहानी मलाका की जनता न्याय की मांग कर रही है और पूछ रही है कि उन्हें इस मनमाने जे.ई. से कब छुटकारा मिलेगा। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो ग्राम सभा गौहानी मलाका से एक बड़ा जन सैलाब निकलेगा और जे.ई. निशार अहमद के मालिकाना हक को पावर हाउस से हटा दिया जाएगा। अब देखना यह है कि क्या कोई उच्चाधिकारी इस बेलगाम जे.ई. पर लगाम लगाएगा।2
- कौशांबी जिले में मुहर्रम के मद्देनज़र पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। पुलिस अधीक्षक ने विभिन्न थाना क्षेत्रों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस लगातार धर्मगुरुओं के संपर्क में है और जिलाधिकारी के साथ सेंट्रल पीस कमेटी की बैठक भी आयोजित की गई है। प्रशासन ने लोगों को ताजिया और मातम के दौरान छुरीबाजी न करने संबंधी दिशानिर्देशों से अवगत कराया है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुहर्रम के सभी जुलूस तय मार्गों और परंपरागत व्यवस्था के तहत ही निकाले जाएंगे। जनपद में 8वीं, 9वीं और 10वीं मुहर्रम के जुलूसों के लिए जोनल व सेक्टर प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं।1
- दिनांक 23/06/2026 को, ऊंचाहार द्वितीय जिला पंचायत क्षेत्र के धनी सवैया ग्राम सभा स्थित बरईन का पुरवा में, अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप 500 मीटर लंबी सड़क के डामरीकरण का कार्य विधिवत पूजा-पाठ, मंत्रोच्चारण और प्रसाद वितरण के साथ प्रारंभ किया गया। इस कार्य के शुरू होने से क्षेत्रीय जनता में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस उपलब्धि के लिए लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों का बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार व्यक्त किया गया है।1
- पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी, श्री सत्यनारायण ने जनपद में मोहर्रम को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से की गई तैयारियों के संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने इन तैयारियों पर एक वीडियो बाइट जारी की है, जिसमें प्रशासन द्वारा मोहर्रम के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया है।1
- रायबरेली के जगतपुर थाना क्षेत्र के बैरीहार गांव में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला प्रेम प्रसंग के चलते गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गई। तीन बच्चों की मां यह महिला अपने प्रेम संबंध को लेकर जिद पर अड़ी हुई थी, जिसके चलते वह लंबे समय से विवादों में थी। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई और जगतपुर पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने महिला को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए काफी देर तक समझाने-बुझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस महिला को सुरक्षित नीचे उतारने में कामयाब रही, लेकिन नीचे आने के बाद भी वह अपनी बात पर अड़ी रही। कार्यवाहक थाना प्रभारी अजय मलिक ने बताया कि मामले के समाधान के लिए महिला के माता-पिता और पति को थाने बुलाया गया है। पुलिस दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले का शांतिपूर्ण हल निकालने का प्रयास कर रही है। यह पूरा घटनाक्रम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा और बैरीहार गांव में घंटों तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।1
- आज दिनांक 23/06/2026 को जिला पंचायत ऊँचाहार द्वितीय क्षेत्र के ऊंचाहार देहात पिपरहा गांव में पूर्व चेयरमैन ऊंचाहार श्री प्रमोद गुप्ता द्वारा बड़े मंगल के शुभ अवसर पर एक भव्य और विशाल प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया, जिससे यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।1
- कौशांबी के कोखराज थाना क्षेत्र में मुहर्रम पर्व को सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक ने कई गाँवों में पैदल मार्च कर सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। रूप नारायणपुर सैलाबी, सीहोरी, बरीपुर, राला, मलाक भायल, उलाचूपुर और भरवारी सहित अनेक क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों ने भ्रमण किया और स्थानीय लोगों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया। इस दौरान, सिराथू के सीओ सतेंद्र तिवारी और कोखराज थाना प्रभारी चंद्र भूषण मौर्य ने ताजिया कमेटियों के पदाधिकारियों से भेंट की। उन्होंने जुलूस के दौरान सामने आ सकने वाली समस्याओं के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अफवाह फैलाने या किसी भी प्रकार की अराजकता उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- भैंस चोरी की कई वारदातों में वांछित एक शातिर अपराधी, गुड्डु गिरवार पर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि, इस बड़ी पुलिस कार्रवाई के पीछे की असल सच्चाई क्या है, इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों को इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट देखने के लिए कहा गया है।1