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श्री गंगानगर जिले के रायसिंहनगर नगरपालिका ने शहर के मुख्य चौराहों पर सूखे और गीले कचरे के लिए अलग-अलग कचरा पात्र स्थापित किए हैं। इस पहल का उद्देश्य कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना है। इस कार्य का एक फोटो भी जारी किया गया है, जिसे सुभाष चंद्र राय ने लिया है।
Subhash chander
श्री गंगानगर जिले के रायसिंहनगर नगरपालिका ने शहर के मुख्य चौराहों पर सूखे और गीले कचरे के लिए अलग-अलग कचरा पात्र स्थापित किए हैं। इस पहल का उद्देश्य कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना है। इस कार्य का एक फोटो भी जारी किया गया है, जिसे सुभाष चंद्र राय ने लिया है।
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- श्रीगंगानगर जिले के गजसिंहपुर से ख्यालीवाला रोड पर गांव पीरावाली के नजदीक पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सड़क किनारे बनाई गई पानी की एक डिग्गी लगातार क्षेत्र में खतरे का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह डिग्गी किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है, लेकिन संबंधित विभाग इस मामले में आंखें मूंदे बैठा है। सड़क किनारे बनी इस खुली डिग्गी के कारण आए दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कृषि विभाग द्वारा किस आधार और किस सिस्टम से इस डिग्गी पर अनुदान स्वीकृत किया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि इस डिग्गी में ट्यूबवेल का पानी भरकर सरकारी खाले में छोड़ा जा रहा है, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी नियमों की अनदेखी कर निजी लाभ पहुंचाया जा रहा है। क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि इस मामले में संबंधित पटवारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और प्रशासनिक मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में एक बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन, पीडब्ल्यूडी विभाग और जिला अधिकारियों से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि सड़क किनारे बनी इस खतरनाक डिग्गी को तुरंत सुरक्षित कराया जाए, ताकि आमजन की जान जोखिम में न पड़े।4
- रायसिंहनगर स्थित नामी कुमार पेट्रोल पंप बंद कर दिया गया है, क्योंकि वहां पेट्रोल और डीजल पूरी तरह से खत्म हो गया है। यह स्थिति कल शनिवार को तेज अंधड़ आने के लगभग दो घंटे बाद उत्पन्न हुई। पंप प्रबंधन ने ग्राहकों की असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए पंप के बाहर एक नोटिस भी चस्पा किया है, जिस पर लिखा है कि "असुविधा के लिए खेद है पेट्रोल डीजल खत्म"।1
- मोदी यूनिवर्सिटी ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत 97% अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को 100% छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। यूनिवर्सिटी का यह कदम बेटियों को वैश्विक लीडर के रूप में तैयार करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिसे शिक्षा जगत में एक बड़ा ऐलान बताया जा रहा है।1
- अरूट जयंती के शुभ अवसर पर बार संघ द्वारा ठंडे मीठे पानी की छबील और हलवा-छोले के लंगर का आयोजन किया गया। इस दौरान बार संघ के अध्यक्ष हंसराज तनेजा ने सभी को अपनी शुभकामनाएं अर्पित कीं। इस पुण्य कार्य में बड़ी संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण किया।1
- मंडोर में भोग्यशाली परिक्रमा का एक भव्य आयोजन किया गया।1
- छत्तरगढ़ सत्तासर क्षेत्र से पत्रकार देवी सिंह उदावत द्वारा विशेष समाचार प्रस्तुत किया गया है।1
- राजस्थान के बीकानेर में कल शाम आई तेज आंधी ने पूरे शहर को धूल की मोटी चादर से ढक दिया, जिससे आसमान का रंग पीला पड़ गया। इस दौरान कई लोगों को ऐसा लगा मानो रेगिस्तान शहर के बीच ही उतर आया हो। तेज हवाओं के साथ उड़ती धूल के कारण विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी, जिसके चलते लोगों को आवागमन में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। आज बीकानेर में मौसम अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन गर्मी और उमस का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके अनुसार क्षेत्र में फिर से तेज हवाएं और धूलभरी आंधियां देखने को मिल सकती हैं। कल की इस धूलभरी आंधी और पीले पड़े आसमान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में रहीं। कई लोगों ने इसके वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए इसे एक रेगिस्तानी तूफान जैसा अद्भुत नजारा बताया।1
- रायसिंहनगर से 30 मई 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, समीपवर्ती ग्राम पंचायत 22 पीएस के गांव 24 पीएस में वर्षों पुराना एक कुआं आज 'खून के आंसू रो रहा' है। यह कुआं इतना प्राचीन है कि आज भी इसमें पानी भरा हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह सफाई को तरस रहा है और कचरे का भंडार बन चुका है। कुएं के पास ही रामदेव मंदिर भी स्थित है। बताया गया है कि इस कुएं पर एक बड़े बरगद के पेड़ ने अपना निवास बना लिया है, जिसकी शाखाएं कुएं की जड़ों में समा चुकी हैं। पंचायती राज चुनाव के दौरान ग्रामीणों को अगले सरपंच से यह उम्मीद है कि वे इस कुएं का पुनर्निर्माण करवाकर इसे पुनः तैयार करवाएंगे। पीने के पानी के लिए पाइपलाइन की आपूर्ति उपलब्ध होने के कारण अब इस कुएं का उपयोग नहीं किया जाता, फिर भी इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।1