Shuru
Apke Nagar Ki App…
रायसिंहनगर से 30 मई 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, समीपवर्ती ग्राम पंचायत 22 पीएस के गांव 24 पीएस में वर्षों पुराना एक कुआं आज 'खून के आंसू रो रहा' है। यह कुआं इतना प्राचीन है कि आज भी इसमें पानी भरा हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह सफाई को तरस रहा है और कचरे का भंडार बन चुका है। कुएं के पास ही रामदेव मंदिर भी स्थित है। बताया गया है कि इस कुएं पर एक बड़े बरगद के पेड़ ने अपना निवास बना लिया है, जिसकी शाखाएं कुएं की जड़ों में समा चुकी हैं। पंचायती राज चुनाव के दौरान ग्रामीणों को अगले सरपंच से यह उम्मीद है कि वे इस कुएं का पुनर्निर्माण करवाकर इसे पुनः तैयार करवाएंगे। पीने के पानी के लिए पाइपलाइन की आपूर्ति उपलब्ध होने के कारण अब इस कुएं का उपयोग नहीं किया जाता, फिर भी इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Subhash chander
रायसिंहनगर से 30 मई 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, समीपवर्ती ग्राम पंचायत 22 पीएस के गांव 24 पीएस में वर्षों पुराना एक कुआं आज 'खून के आंसू रो रहा' है। यह कुआं इतना प्राचीन है कि आज भी इसमें पानी भरा हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह सफाई को तरस रहा है और कचरे का भंडार बन चुका है। कुएं के पास ही रामदेव मंदिर भी स्थित है। बताया गया है कि इस कुएं पर एक बड़े बरगद के पेड़ ने अपना निवास बना लिया है, जिसकी शाखाएं कुएं की जड़ों में समा चुकी हैं। पंचायती राज चुनाव के दौरान ग्रामीणों को अगले सरपंच से यह उम्मीद है कि वे इस कुएं का पुनर्निर्माण करवाकर इसे पुनः तैयार करवाएंगे। पीने के पानी के लिए पाइपलाइन की आपूर्ति उपलब्ध होने के कारण अब इस कुएं का उपयोग नहीं किया जाता, फिर भी इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
More news from राजस्थान and nearby areas
- रायसिंहनगर से 30 मई 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, समीपवर्ती ग्राम पंचायत 22 पीएस के गांव 24 पीएस में वर्षों पुराना एक कुआं आज 'खून के आंसू रो रहा' है। यह कुआं इतना प्राचीन है कि आज भी इसमें पानी भरा हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह सफाई को तरस रहा है और कचरे का भंडार बन चुका है। कुएं के पास ही रामदेव मंदिर भी स्थित है। बताया गया है कि इस कुएं पर एक बड़े बरगद के पेड़ ने अपना निवास बना लिया है, जिसकी शाखाएं कुएं की जड़ों में समा चुकी हैं। पंचायती राज चुनाव के दौरान ग्रामीणों को अगले सरपंच से यह उम्मीद है कि वे इस कुएं का पुनर्निर्माण करवाकर इसे पुनः तैयार करवाएंगे। पीने के पानी के लिए पाइपलाइन की आपूर्ति उपलब्ध होने के कारण अब इस कुएं का उपयोग नहीं किया जाता, फिर भी इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।1
- अरूट जयंती के शुभ अवसर पर बार संघ द्वारा ठंडे मीठे पानी की छबील और हलवा-छोले के लंगर का आयोजन किया गया। इस दौरान बार संघ के अध्यक्ष हंसराज तनेजा ने सभी को अपनी शुभकामनाएं अर्पित कीं। इस पुण्य कार्य में बड़ी संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण किया।1
- मंडोर में भोग्यशाली परिक्रमा का एक भव्य आयोजन किया गया।1
- राजस्थान के सरदारशहर क्षेत्र में एक तेज़ काली पीली आंधी ने दिन का नज़ारा पूरी तरह बदल दिया। इस आंधी के प्रभाव से दिन के समय में ही अंधेरे जैसा माहौल छा गया, जिससे ऐसा लगा मानो दिन रात में परिवर्तित हो गया हो।1
- स्थानीय जानकारी के अनुसार, बीकानेर में पूरी आंधी आ गई है।1
- बीकानेर में शुक्रवार शाम करीब 3:45 बजे इनकम टैक्स ऑफिस के पास एक व्यक्ति मृत अवस्था में मिला। सूचना मिलने पर खिदमतगार खादिम सोसाइटी और असहाय सेवा संस्थान की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं। इन टीमों में हाजी जाकिर, हाजी नसीम, हाजी मलंग बाबा, राजकुमार, शोएब भाई, मोहम्मद जुनैद खान, इमरान, अयूब, और एम्बुलेंस के साथ राजकुमार खड़गावत शामिल थे। कोटगेट थाना पुलिस के कुलदीप जी और उनकी टीम की निगरानी में शव को पीबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसे मोर्चरी में रखवाया गया। मृतक की पहचान उसके पास मिले आधार कार्ड के अनुसार सुंदर लाल सुथार, पुत्र भैरू सुथार, उम्र लगभग 43 वर्ष, निवासी कृष्ण नगर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) के रूप में हुई है। इस घटना ने बीकानेर में बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ या भटककर आए लोगों के लिए स्थायी आश्रय गृहों की कमी को फिर से उजागर किया है। ऐसे व्यक्तियों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए एक समर्पित संस्था या एनजीओ की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जो समय रहते उनका बचाव और देखभाल कर सके। शव को अस्पताल पहुँचाने और आवश्यक प्रक्रियाओं में शोएब भाई की टीम ने भी सहयोग किया।1
- तेज अंधड़ के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। धूल धूसर (धूल भरी आंधी) के चलते खासकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।3
- अनूपगढ़ क्षेत्र में भीषण गर्मी के बाद एक तेज धूल भरी आंधी ने दस्तक दी, जिसके कारण स्थानीय जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया।1