हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र में स्थित बिशाय जंगल की एक चट्टान पर एक अनोखी नाग के फन जैसी आकृति उभरी है, जो इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस अद्भुत आकृति को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और इसे नाग देवता का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में यह नाग के फन जैसी आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। क्षेत्र में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं, जहाँ कई श्रद्धालु इसे एक दिव्य संकेत और नाग देवता का आशीर्वाद मान रहे हैं। लोग आकृति के पास पूजा-पाठ कर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम भी हो सकता है, जहाँ चट्टानों पर वर्षों तक मौसम, पानी, हवा और प्राकृतिक कटाव के प्रभाव से ऐसी आकृतियाँ बन जाना असामान्य नहीं है, जो कई बार किसी जीव-जंतु या वस्तु जैसी प्रतीत होती हैं और लोगों में कौतूहल पैदा करती हैं। इस नाग आकृति की चर्चा फैलने के बाद से बिशाय जंगल में लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं और इसे आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी वैज्ञानिक संस्था या प्रशासनिक विभाग ने इस आकृति के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या निष्कर्ष जारी नहीं किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चाहे इसे प्राकृतिक संयोग माना जाए या आस्था का प्रतीक, यह आकृति अब लोगों के बीच आकर्षण, जिज्ञासा और श्रद्धा का केंद्र बन गई है।
हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र में स्थित बिशाय जंगल की एक चट्टान पर एक अनोखी नाग के फन जैसी आकृति उभरी है, जो इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस अद्भुत आकृति को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और इसे नाग देवता का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में यह नाग के फन जैसी आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। क्षेत्र में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं, जहाँ कई श्रद्धालु इसे एक दिव्य संकेत और नाग देवता का आशीर्वाद मान रहे हैं। लोग आकृति के पास पूजा-पाठ कर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम भी हो सकता है, जहाँ चट्टानों पर वर्षों तक मौसम, पानी, हवा और प्राकृतिक कटाव के प्रभाव से ऐसी आकृतियाँ बन जाना असामान्य नहीं है, जो कई बार किसी जीव-जंतु या वस्तु जैसी प्रतीत होती हैं और लोगों में कौतूहल पैदा करती हैं। इस नाग आकृति की चर्चा फैलने के बाद से बिशाय जंगल में लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं और इसे आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी वैज्ञानिक संस्था या प्रशासनिक विभाग ने इस आकृति के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या निष्कर्ष जारी नहीं किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चाहे इसे प्राकृतिक संयोग माना जाए या आस्था का प्रतीक, यह आकृति अब लोगों के बीच आकर्षण, जिज्ञासा और श्रद्धा का केंद्र बन गई है।
- हजारीबाग में निरंजन मैथमेटिक्स के छात्रों ने एक बार फिर अपनी सफलता का परचम लहराया है। इस शानदार प्रदर्शन के बाद, संस्थान के टॉपर विद्यार्थियों को लैपटॉप देकर सम्मानित किया गया।1
- हजारीबाग जिले के टाटीझरिया क्षेत्र में स्थित बिशाय जंगल की एक चट्टान पर एक अनोखी नाग के फन जैसी आकृति उभरी है, जो इन दिनों लोगों के बीच आकर्षण और आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस अद्भुत आकृति को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं और इसे नाग देवता का स्वरूप मानकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में यह नाग के फन जैसी आकृति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। क्षेत्र में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं, जहाँ कई श्रद्धालु इसे एक दिव्य संकेत और नाग देवता का आशीर्वाद मान रहे हैं। लोग आकृति के पास पूजा-पाठ कर अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम भी हो सकता है, जहाँ चट्टानों पर वर्षों तक मौसम, पानी, हवा और प्राकृतिक कटाव के प्रभाव से ऐसी आकृतियाँ बन जाना असामान्य नहीं है, जो कई बार किसी जीव-जंतु या वस्तु जैसी प्रतीत होती हैं और लोगों में कौतूहल पैदा करती हैं। इस नाग आकृति की चर्चा फैलने के बाद से बिशाय जंगल में लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं और इसे आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी वैज्ञानिक संस्था या प्रशासनिक विभाग ने इस आकृति के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या निष्कर्ष जारी नहीं किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चाहे इसे प्राकृतिक संयोग माना जाए या आस्था का प्रतीक, यह आकृति अब लोगों के बीच आकर्षण, जिज्ञासा और श्रद्धा का केंद्र बन गई है।1
- हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत पेलावल दक्षिणी पंचायत में रविवार, 31 मई 2026 को विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बहुप्रतीक्षित पीसीसी पथ निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया। राजन के घर से अल हिरा स्कूल तक बनने वाले इस पथ की नींव विधायक प्रदीप प्रसाद ने विधिवत रखी, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया। सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को जनसमर्थन और जनविश्वास का प्रतीक बना दिया। इस सड़क निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में वर्षों से उम्मीद थी, और इसे धरातल पर उतारने में पेलावल दक्षिणी पंचायत की मुखिया नूरजहां की भूमिका को बेहद सराहनीय माना जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, मुखिया नूरजहां बीते लगभग 10 वर्षों से इस सड़क निर्माण के लिए निरंतर संघर्षरत रहीं। उन्होंने विभागीय पहल से लेकर जनप्रतिनिधियों के समक्ष लगातार आवाज उठाई और इस सड़क को पंचायत की प्राथमिक जरूरत के रूप में स्थापित किया। उनकी निरंतर मेहनत, सक्रियता और जनहित के प्रति समर्पण के कारण ही यह सपना साकार होने की दिशा में बढ़ा, जिसकी उपस्थिति लोगों ने खुलकर प्रशंसा की। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी तत्परता और लगातार प्रयासों ने क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगाई है, जिससे महिलाओं और युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य मंजू नंदिनी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण और सराहनीय बताया गया, क्योंकि उनके सहयोग और प्रयासों से इस महत्वपूर्ण योजना को गति मिली। शिलान्यास कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि वीरेंद्र कुमार उर्फ विरू, जिला परिषद प्रतिनिधि मनीष ठाकुर, मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद शफीक, उप मुखिया शबनम परवीन, गदोखर पंचायत मुखिया नारायण साउ, अली मुराद खान, जावेद, मोहम्मद तुफैल, फारूक अंसारी, अयान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों का मानना है कि राजन के घर से अल हिरा स्कूल तक बनने वाला यह पीसीसी पथ न केवल आवागमन को आसान बनाएगा, बल्कि बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को बरसात के दिनों में होने वाली कठिनाइयों से भी राहत देगा। क्षेत्र के लोगों ने इसे विकास की नई शुरुआत बताते हुए मुखिया नूरजहां की संघर्षशील कार्यशैली और जनसमर्पण की सराहना की।4
- हजारीबाग के पौता जंगल में तीन युवाओं की संदिग्ध मौत का मामला एक महीने बाद भी अनसुलझा बना हुआ है। मुफ्फसिल थाना क्षेत्र से 23 अप्रैल को लापता हुई दो लड़कियों और एक लड़के का शव 27 अप्रैल को जंगल से बरामद किया गया था। घटना के खुलासे में हो रही देरी से नाराज परिजन हजारीबाग पहुंचीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी से मिले और उनसे न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित परिवार ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि वे पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं हैं और दोषियों की अब तक गिरफ्तारी न होने से वे निराश हैं। इस पर अन्नपूर्णा देवी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत के बावजूद मामले का खुलासा नहीं होना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने मौके पर ही एसपी अमन कुमार को जल्द मामले के उद्भेदन का निर्देश दिया। एसपी अमन कुमार ने इस संबंध में बताया कि एफएसएल रिपोर्ट और मोबाइल जांच से कुछ अहम जानकारियां मिली हैं तथा परिवार को जांच की प्रगति से अवगत कराया जाएगा। वहीं, परिजन इस मामले में संदिग्ध यूट्यूबर सोहेल किरमानी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।1
- झारखंड ग्रामीण बैंक वर्तमान में 77 लाख से अधिक ग्राहकों को अपनी व्यापक बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह बैंक विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और छोटे व्यवसायियों सहित विभिन्न वर्गों को सशक्त बनाना है। बैंक का मानना है कि ग्राहकों का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। इसी विश्वास के साथ, झारखंड ग्रामीण बैंक सुरक्षित और सशक्त बैंकिंग के माध्यम से विकास की नई ऊंचाइयों को छूने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करता है।1
- झारखंड के रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत कुजू स्थित अक्षत बैंक्वेट हॉल के सभागार में संथाल समाज दिशोम माँझी परगना का 30वां स्थापना दिवस समारोह पारंपरिक संथाली संस्कृति और गौरवशाली विरासत के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस समारोह में झारखंड सरकार समन्वय समिति के सदस्य दर्जा प्राप्त मंत्री एवं संथाल समाज दिशोम माँझी परगना के केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार से बड़ी संख्या में समाज की महिला-पुरुष पारंपरिक संथाली वेशभूषा में शामिल हुए। समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के पारंपरिक संथाली रीति-रिवाज, ढोल-मांदर की थाप और उत्साहपूर्ण स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद उन्हें पगड़ी, अंगवस्त्र, पुष्पमाला, बैज और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता एवं दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने अपने संबोधन में बताया कि संथाल समाज दिशोम माँझी परगना संथाल समुदाय का एक सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना 30-31 मई 1997 को हुई थी। उन्होंने पूर्वजों द्वारा सौंपी गई सामाजिक व्यवस्था, स्वशासन, ग्राम सभा, संस्कृति, परंपरा, न्याय व्यवस्था, प्रकृति पूजा और सामाजिक मूल्यों की विरासत को संरक्षित रखने को सभी की जिम्मेदारी बताया। बेसरा ने संथाली भाषा, संस्कृति और धर्म की रक्षा के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन तथा संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान किया। कार्यक्रम को केंद्रीय महासचिव सोनाराम हेंब्रम और केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो वास्के ने भी संबोधित करते हुए समाज की एकता, संगठन की मजबूती और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। इस अवसर पर केंद्रीय मांझी बुढ़ी लीलमुनी देवी, मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति के केंद्रीय महासचिव हिरालाल मांझी, केंद्रीय उपाध्यक्ष अलख कुमार मांझी, सोनोत संथाल समाज के केंद्रीय सचिव अनिल टुडू, केंद्रीय कोषाध्यक्ष रतीलाल टुडू, डाड़ी प्रखंड प्रमुख सह केंद्रीय सचिव महिला सेल दीपा देवी, बड़कागांव प्रखंड अध्यक्ष सुरज बेसरा, चुरचू प्रखंड अध्यक्ष सहदेव किस्कू, पतरातू प्रखंड अध्यक्ष शंकर मुर्मू सहित टीरु मांझी, पन्नालाल मुर्मू, मनोहर मुर्मू, बिरजू सोरेन, अशोक मुर्मू, विनोद हेंब्रम और रामचंद्र टुडू समेत समाज के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष फागु बेसरा ने की, जबकि संचालन केंद्रीय कोषाध्यक्ष एतो वास्के ने किया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों और विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र, बैज एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।1
- रामगढ़ के कुजू में संथाल समाज ने अपने 30वें स्थापना दिवस के अवसर पर जोरदार एकजुटता प्रदर्शित की, जहाँ उन्होंने अपनी पैतृक 'जल-जंगल-जमीन' की रक्षा के लिए प्रबल आह्वान किया। यह आयोजन संथाल संस्कृति और आदिवासी पहचान को सुरक्षित रखने के महत्व पर केंद्रित रहा। दिशोम मांझी परगना के बैनर तले, संथाल समाज ने अपने संवैधानिक अधिकारों और आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर, समाज ने अपनी अनूठी विरासत और परंपरागत जीवनशैली को बनाए रखने के लिए संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि उनके समुदाय के अधिकारों को सशक्त किया जा सके।1
- हजारीबाग जिले में अवैध शराब के निर्माण और तस्करी के खिलाफ प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत, उत्पाद विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है। उपायुक्त के निर्देशों पर हुए इस अभियान में, सदर और बड़ा बाजार थाना क्षेत्रों के पारनाला स्थित गहरे नालों के गड्ढों में छिपाकर संचालित की जा रही पाँच अवैध महुआ शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान, टीम ने मौके पर ही लगभग 1400 किलोग्राम जावा महुआ को नष्ट कर दिया। इसके अतिरिक्त, 370 लीटर अवैध चुलाई शराब भी जब्त की गई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अवैध शराब के निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरणों को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है, ताकि ऐसी गतिविधियों को भविष्य में दोबारा संचालित न किया जा सके। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के कारोबार के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसमें संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1