*"विकास का गढ़" रीवा में घंटों जाम में फंसी उप मुख्यमंत्री की गाड़ी, खुली सिस्टम की पोल* *भाषणों में दौड़ता विकास, सड़कों पर रेंगती हकीकत: जाम में फंसा शहर, फंसे खुद उप मुख्यमंत्री* *रीवा | उमेश पाठक* रीवा को “विकास का गढ़” बताने वाली सरकार की असल तस्वीर आज फिर सड़क पर दिखाई दे गई। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल की गाड़ी खुद घंटों तक जाम में फंसी रही। *जब सत्ता ही जाम में फंसे तो आम जनता का क्या?* सोचिए, जब सत्ता के सबसे ताकतवर लोगों का यह हाल है, तो आम जनता रोज किस पीड़ा से गुजरती होगी? स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल भागते मरीज, दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारी, हर कोई रोजाना घंटों जाम में अपना समय और धैर्य खो रहा है। *भाषणों में विकास, जमीन पर जाम* रीवा की बदहाल यातायात व्यवस्था, अधूरे इंतज़ाम और अव्यवस्थित विकास मॉडल ने पूरे शहर को परेशानी का केंद्र बना दिया है। सड़कें चौड़ी करने के नाम पर सालों से खुदाई चल रही है, डायवर्जन का कोई प्लान नहीं, ट्रैफिक पुलिस नदारद। नतीजा, पूरा शहर हर दिन जाम का दंश झेल रहा है। *होर्डिंग्स पर दौड़ता विकास, सड़क पर खड़ी सरकार* भाषणों और होर्डिंग्स में “विकास” दौड़ रहा है, लेकिन ज़मीन पर जनता और खुद सरकार जाम में खड़ी है। फ्लाईओवर के वादे, रिंग रोड के सपने, स्मार्ट सिटी की बातें, सब कागजों और मंचों तक सीमित हैं। *सवाल जो सड़क पर रेंग रहे हैं* आज उप मुख्यमंत्री की गाड़ी घंटों जाम में फंसी तो सिस्टम की पोल खुल गई। लेकिन बड़ा सवाल यही है: विकास के दावों का सच सड़क पर रेंगता क्यों दिख रहा है? जब शहर का विधायक और प्रदेश का उप मुख्यमंत्री खुद जाम से नहीं बच पा रहा, तो आम रीवा वासी किससे उम्मीद लगाए? रीवा को “विकास का गढ़” बनाने से पहले जरूरी है कि यहां की सड़कों को चलने लायक बनाया जाए। वरना विकास सिर्फ माइक पर चीखेगा और जनता जाम में पिसती रहेगी।
*"विकास का गढ़" रीवा में घंटों जाम में फंसी उप मुख्यमंत्री की गाड़ी, खुली सिस्टम की पोल* *भाषणों में दौड़ता विकास, सड़कों पर रेंगती हकीकत: जाम में फंसा शहर, फंसे खुद उप मुख्यमंत्री* *रीवा | उमेश पाठक* रीवा को “विकास का गढ़” बताने वाली सरकार की असल तस्वीर आज फिर सड़क पर दिखाई दे गई। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल की गाड़ी खुद घंटों तक जाम में फंसी रही। *जब सत्ता ही जाम में फंसे तो आम जनता का क्या?* सोचिए, जब सत्ता के सबसे ताकतवर लोगों का यह हाल है, तो आम जनता रोज किस पीड़ा से गुजरती होगी? स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल भागते मरीज, दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारी, हर कोई रोजाना घंटों जाम में अपना समय और धैर्य खो रहा है। *भाषणों में विकास, जमीन पर जाम* रीवा की बदहाल यातायात व्यवस्था, अधूरे इंतज़ाम और अव्यवस्थित विकास मॉडल ने पूरे शहर को परेशानी का केंद्र बना दिया है। सड़कें चौड़ी करने के नाम पर सालों से खुदाई चल रही है, डायवर्जन का कोई प्लान नहीं, ट्रैफिक पुलिस नदारद। नतीजा, पूरा शहर हर दिन जाम का दंश झेल रहा है। *होर्डिंग्स पर दौड़ता विकास, सड़क पर खड़ी सरकार* भाषणों और होर्डिंग्स में “विकास” दौड़ रहा है, लेकिन ज़मीन पर जनता और खुद सरकार जाम में खड़ी है। फ्लाईओवर के वादे, रिंग रोड के सपने, स्मार्ट सिटी की बातें, सब कागजों और मंचों तक सीमित हैं। *सवाल जो सड़क पर रेंग रहे हैं* आज उप मुख्यमंत्री की गाड़ी घंटों जाम में फंसी तो सिस्टम की पोल खुल गई। लेकिन बड़ा सवाल यही है: विकास के दावों का सच सड़क पर रेंगता क्यों दिख रहा है? जब शहर का विधायक और प्रदेश का उप मुख्यमंत्री खुद जाम से नहीं बच पा रहा, तो आम रीवा वासी किससे उम्मीद लगाए? रीवा को “विकास का गढ़” बनाने से पहले जरूरी है कि यहां की सड़कों को चलने लायक बनाया जाए। वरना विकास सिर्फ माइक पर चीखेगा और जनता जाम में पिसती रहेगी।
- *"विकास का गढ़" रीवा में घंटों जाम में फंसी उप मुख्यमंत्री की गाड़ी, खुली सिस्टम की पोल* *भाषणों में दौड़ता विकास, सड़कों पर रेंगती हकीकत: जाम में फंसा शहर, फंसे खुद उप मुख्यमंत्री* *रीवा | उमेश पाठक* रीवा को “विकास का गढ़” बताने वाली सरकार की असल तस्वीर आज फिर सड़क पर दिखाई दे गई। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल की गाड़ी खुद घंटों तक जाम में फंसी रही। *जब सत्ता ही जाम में फंसे तो आम जनता का क्या?* सोचिए, जब सत्ता के सबसे ताकतवर लोगों का यह हाल है, तो आम जनता रोज किस पीड़ा से गुजरती होगी? स्कूल जाने वाले बच्चे, अस्पताल भागते मरीज, दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारी, हर कोई रोजाना घंटों जाम में अपना समय और धैर्य खो रहा है। *भाषणों में विकास, जमीन पर जाम* रीवा की बदहाल यातायात व्यवस्था, अधूरे इंतज़ाम और अव्यवस्थित विकास मॉडल ने पूरे शहर को परेशानी का केंद्र बना दिया है। सड़कें चौड़ी करने के नाम पर सालों से खुदाई चल रही है, डायवर्जन का कोई प्लान नहीं, ट्रैफिक पुलिस नदारद। नतीजा, पूरा शहर हर दिन जाम का दंश झेल रहा है। *होर्डिंग्स पर दौड़ता विकास, सड़क पर खड़ी सरकार* भाषणों और होर्डिंग्स में “विकास” दौड़ रहा है, लेकिन ज़मीन पर जनता और खुद सरकार जाम में खड़ी है। फ्लाईओवर के वादे, रिंग रोड के सपने, स्मार्ट सिटी की बातें, सब कागजों और मंचों तक सीमित हैं। *सवाल जो सड़क पर रेंग रहे हैं* आज उप मुख्यमंत्री की गाड़ी घंटों जाम में फंसी तो सिस्टम की पोल खुल गई। लेकिन बड़ा सवाल यही है: विकास के दावों का सच सड़क पर रेंगता क्यों दिख रहा है? जब शहर का विधायक और प्रदेश का उप मुख्यमंत्री खुद जाम से नहीं बच पा रहा, तो आम रीवा वासी किससे उम्मीद लगाए? रीवा को “विकास का गढ़” बनाने से पहले जरूरी है कि यहां की सड़कों को चलने लायक बनाया जाए। वरना विकास सिर्फ माइक पर चीखेगा और जनता जाम में पिसती रहेगी।1
- बंगाल में महाभारत! BJP vs TMC Full Story बंगाल की राजनीति में आखिर ऐसा क्या हो गया कि पूरे देश में हड़कंप मच गया? 😳 इस वीडियो में जानिए: ⚡ ममता बनर्जी इस्तीफा क्यों नहीं दे रहीं ⚡ बीजेपी की ऐतिहासिक जीत कैसे हुई ⚡ EVM और वोटर लिस्ट विवाद ⚡ बंगाल में हिंसा और मौत की घटनाएं ⚡ Murshidabad तनाव का पूरा मामला ⚡ जनता आखिर किससे नाराज़ थी? इस वीडियो में हमने बंगाल चुनाव और उससे जुड़े हर बड़े मुद्दे को A to Z आसान भाषा में समझाया है। वीडियो अंत तक जरूर देखें 🔥 #BengalPolitics #MamataBanerjee #BJPvsTMC #WestBengalNews #PrakashPathak1
- नेशनल लोक अदालत का हुआ शुभारंभ दूर-दूर से आए पक्षकारों ने1
- रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने शक रवतट गांव में जमीन पर जमाया जन चौपाल1
- Post by JOURNALIST RIPPU PANDEY3
- Available for Rent Locality : रीवा प्रयागराज रोड महर्षि विद्या मंदिर स्कूल के बगल में पुराना कचड़ा प्लांट के सामने Area (dimensions) : 55000 Monthly Rent (₹) : 120000 Property Type : Industrial Land / Plot Posted By : Owner यह जमीन किराए पर देना है इच्छुक व्यक्ति संपर्क करें 91310630815
- मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक बुजुर्ग आदिवासी के साथ अमानवीय कृत्य का मामला सामने आया है। दूध मनिया निवासी श्याम जायसवाल पर सराई थाना क्षेत्र के झारा गांव में इस वारदात को अंजाम देने का आरोप है। इस घटना से पूरे इलाके में गहरा आक्रोश फैल गया है।1
- रीवा कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने वृद्धाश्रम का दौरा कर माताओं व वृद्धजनों से संवाद किया। माताओं ने अपने नाती-पोतों के लिए नौकरी या व्यवसाय की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। कलेक्टर ने उन्हें पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं से आर्थिक मदद के रूप में ऋण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।1