खीरी के प्राचीन शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन 27 अक्टूबर से शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान, 3 नवंबर तक होगा कथा वाचन; 4 नवंबर को महाप्रसाद भंडारा प्रयागराज। खीरी क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ 27 अक्टूबर को कलश यात्रा एवं वेदी पूजन के साथ हुआ। 28 अक्टूबर से शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा 3 नवंबर को कथा समापन एवं हवन-पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी। इसके उपरांत 4 नवंबर को महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। गुरु पुत्र पं. गुरु प्रसाद (शास्त्री जी) देऊपा के सानिध्य में कथा का रसपान पं. रामजी पांडेय (शास्त्री जी), प्रधानाचार्य संस्कृत विद्यालय खीरी द्वारा कराया जा रहा है। कथा के मुख्य श्रोता डॉ. पारसनाथ केशरवानी (छोटे लोहिया) एवं नारायणी देवी हैं। आयोजकों के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से हरि इच्छा तक चलेगी। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, धर्म और आध्यात्मिक ज्ञान का श्रवण करने का अवसर मिल रहा है। धार्मिक आयोजन से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। आयोजकों ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने तथा 4 नवंबर को आयोजित महाप्रसाद भंडारे में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
खीरी के प्राचीन शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन 27 अक्टूबर से शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान, 3 नवंबर तक होगा कथा वाचन; 4 नवंबर को महाप्रसाद भंडारा प्रयागराज। खीरी क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ 27 अक्टूबर को कलश यात्रा एवं वेदी पूजन के साथ हुआ। 28 अक्टूबर से शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा 3 नवंबर
को कथा समापन एवं हवन-पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी। इसके उपरांत 4 नवंबर को महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। गुरु पुत्र पं. गुरु प्रसाद (शास्त्री जी) देऊपा के सानिध्य में कथा का रसपान पं. रामजी पांडेय (शास्त्री जी), प्रधानाचार्य संस्कृत विद्यालय खीरी द्वारा कराया जा रहा है। कथा के मुख्य श्रोता डॉ. पारसनाथ केशरवानी (छोटे लोहिया) एवं नारायणी देवी हैं। आयोजकों के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से हरि
इच्छा तक चलेगी। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, धर्म और आध्यात्मिक ज्ञान का श्रवण करने का अवसर मिल रहा है। धार्मिक आयोजन से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। आयोजकों ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने तथा 4 नवंबर को आयोजित महाप्रसाद भंडारे में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
- खीरी के प्राचीन शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन 27 अक्टूबर से शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान, 3 नवंबर तक होगा कथा वाचन; 4 नवंबर को महाप्रसाद भंडारा प्रयागराज। खीरी क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ 27 अक्टूबर को कलश यात्रा एवं वेदी पूजन के साथ हुआ। 28 अक्टूबर से शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा 3 नवंबर को कथा समापन एवं हवन-पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी। इसके उपरांत 4 नवंबर को महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। गुरु पुत्र पं. गुरु प्रसाद (शास्त्री जी) देऊपा के सानिध्य में कथा का रसपान पं. रामजी पांडेय (शास्त्री जी), प्रधानाचार्य संस्कृत विद्यालय खीरी द्वारा कराया जा रहा है। कथा के मुख्य श्रोता डॉ. पारसनाथ केशरवानी (छोटे लोहिया) एवं नारायणी देवी हैं। आयोजकों के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से हरि इच्छा तक चलेगी। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, धर्म और आध्यात्मिक ज्ञान का श्रवण करने का अवसर मिल रहा है। धार्मिक आयोजन से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। आयोजकों ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने तथा 4 नवंबर को आयोजित महाप्रसाद भंडारे में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।3
- प्रयागराज माता वैष्णो राम कथा समिति के तत्वावधान में तिकोनिया पार्क, नीमसराय में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिन श्री विभूषित स्वामी अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और धर्म का संदेश दिया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। प्रयागराज माता वैष्णो राम कथा समिति के तत्वावधान में तिकोनिया पार्क, नीमसराय में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिन श्री विभूषित स्वामी अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और धर्म का संदेश दिया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।1
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- सरदार वल्लभभाई पटेल का भारत की राजनीति और राष्ट्र-निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान रहा .. सरदार वल्लभभाई पटेल की 151 वीं जयंती के पूर्व संध्या..... नैनी प्रयागराज/लौह पुरुष ,भारत रत्न, किसानों के मसीहा, अखंड भारत के रचयिता एवं राष्ट्रीय एकता के प्रतीक श्रेष्ठ भारत के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल की 151 वीं जयंती के पूर्व संध्या के अवसर पर सुमित्रा देवी ग्रामीण सेवा संस्थान के तत्वाधान में नंदन तालाब मे चौपाल का आयोजन किया गया। सभी उपस्थित बच्चे- बूढ़े और नौजवान ने सर्वप्रथम उनके पोर्ट्रेट चित्र पर आरती उतारी। इस अवसर पर सुविख्यात समाजसेवी व भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्याय सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है देश की रियासतों का एकीकरण कर एक सूत्र में पिरोने मे सरदार वल्लभभाई पटेल का भारत की राजनीति और राष्ट्र-निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्हें भारत के 'लौह पुरुष' और 'राजनीतिक एकीकरण के जनक' के रूप में जाना जाता है। कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत का राजनीतिक एकीकरण (560 से अधिक रियासतों का विलय) 1947 में जब देश आज़ाद हुआ, तब भारत छोटे-बड़े लगभग 565 से अधिक स्वतंत्र देशी रियासतों में बंटा हुआ था। सरदार पटेल ने अपनी असाधारण कूटनीति, संवाद और दृढ़ इच्छाशक्ति से लगभग सभी रियासतों को भारतीय संघ में शांतिपूर्वक मिलाया। जहाँ कूटनीति काम नहीं आई (जैसे जूनागढ़ और हैदराबाद), वहाँ उन्होंने कठोर और निर्णायक कदम उठाए। सौरभ यादव ने कहा कि आज़ादी के बाद 1947 से 1950 तक उन्होंने देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। देश के विभाजन के बाद उत्पन्न शरणार्थी समस्या, आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों को संभालने में उनकी मुख्य भूमिका रही।तेजस यादव,परी पांडे,सोहेल अहमद,यथार्थ मिश्रा,योगेन्द्र पांडे, मन्नत मिश्रा,नीलेश चतुर्वेदी, सुमित सिंह कृष्ण शर्मा आर्य,सौरव यादव सरदार पतविंदर सिंह,संजय श्रीवास्तव सहित कई सामाजिक राजनीतिक गणमान्यजन लोगों ने अपने विचार रखें। सरदार वल्लभभाई पटेल का भारत की राजनीति और राष्ट्र-निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान रहा .. सरदार वल्लभभाई पटेल की 151 वीं जयंती के पूर्व संध्या..... नैनी प्रयागराज/लौह पुरुष ,भारत रत्न, किसानों के मसीहा, अखंड भारत के रचयिता एवं राष्ट्रीय एकता के प्रतीक श्रेष्ठ भारत के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल की 151 वीं जयंती के पूर्व संध्या के अवसर पर सुमित्रा देवी ग्रामीण सेवा संस्थान के तत्वाधान में नंदन तालाब मे चौपाल का आयोजन किया गया। सभी उपस्थित बच्चे- बूढ़े और नौजवान ने सर्वप्रथम उनके पोर्ट्रेट चित्र पर आरती उतारी। इस अवसर पर सुविख्यात समाजसेवी व भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्याय सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है देश की रियासतों का एकीकरण कर एक सूत्र में पिरोने मे सरदार वल्लभभाई पटेल का भारत की राजनीति और राष्ट्र-निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्हें भारत के 'लौह पुरुष' और 'राजनीतिक एकीकरण के जनक' के रूप में जाना जाता है। कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत का राजनीतिक एकीकरण (560 से अधिक रियासतों का विलय) 1947 में जब देश आज़ाद हुआ, तब भारत छोटे-बड़े लगभग 565 से अधिक स्वतंत्र देशी रियासतों में बंटा हुआ था। सरदार पटेल ने अपनी असाधारण कूटनीति, संवाद और दृढ़ इच्छाशक्ति से लगभग सभी रियासतों को भारतीय संघ में शांतिपूर्वक मिलाया। जहाँ कूटनीति काम नहीं आई (जैसे जूनागढ़ और हैदराबाद), वहाँ उन्होंने कठोर और निर्णायक कदम उठाए। सौरभ यादव ने कहा कि आज़ादी के बाद 1947 से 1950 तक उन्होंने देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। देश के विभाजन के बाद उत्पन्न शरणार्थी समस्या, आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों को संभालने में उनकी मुख्य भूमिका रही।तेजस यादव,परी पांडे,सोहेल अहमद,यथार्थ मिश्रा,योगेन्द्र पांडे, मन्नत मिश्रा,नीलेश चतुर्वेदी, सुमित सिंह कृष्ण शर्मा आर्य,सौरव यादव सरदार पतविंदर सिंह,संजय श्रीवास्तव सहित कई सामाजिक राजनीतिक गणमान्यजन लोगों ने अपने विचार रखें।1
- किसानो की मेहनत पर फिरा पानी बारिश के कारण धान की फसल हुई नष्ट😥🙏🌦🌧 करछना प्रयागराज #viralvideo #Foryou #fb #trending #reels #farme1
- श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा से भक्तिमय हुआ नीमसराय का तिकोनिया पार्क श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा से भक्तिमय हुआ नीमसराय का तिकोनिया पार्क श्रीमद्भागवत कथा में कंस वध और गोपी-उद्धव संवाद का प्रसंग सुन श्रद्धालुओं ने लिया भक्ति रस का आनंद प्रयागराज। नीमसराय कॉलोनी के तिकोनिया पार्क में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। श्री विभूषित स्वामी अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कथा के दौरान कंस वध और गोपी-उद्धव संवाद का भी विस्तार से वर्णन किया। महाराज जी ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग के माध्यम से प्रेम, विश्वास और समर्पण की महत्ता बताई। वहीं, गोपी-उद्धव संवाद के जरिए भगवान के प्रति अनन्य भक्ति और निष्काम प्रेम का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में पहुंचे। कथा के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा और श्रद्धालु एकाग्रता के साथ कथा का श्रवण करते रहे। आयोजन में माता वैष्णो राम कथा समिति के अध्यक्ष विनोद पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रशेखर ओझा, महामंत्री नरेंद्र द्विवेदी, संरक्षक विनोद सिंह, कोषाध्यक्ष हरिचंद शर्मा, सहकोषाध्यक्ष अरविंद दुबे, उपाध्यक्ष धनेन्द्र शर्मा, व्यवस्थापक मंडल के अशोक शर्मा और मंच संचालक गुप्तेश्वर नाथ पांडेय सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।1
- बारिश के बीच भी जारी रही श्रीमद्भागवत कथा, छठे दिन पंडाल में पानी भरने के बावजूद भक्तों की आस्था रही अटूट, कल धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान का विवाह उत्सव प्रयागराज। शहर में पुष्पांजलि सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में खराब मौसम और बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। नंदन मृदुल जी महाराज के श्रीमुख से सुनाई जा रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बारिश के बीच भी कथा का आयोजन जारी रहा। 25 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हुए इस धार्मिक आयोजन में सैनिक कॉलोनी के निवासी बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। लगातार बारिश के कारण कथा पंडाल में कई स्थानों पर पानी भर गया, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहे। मौसम खराब होने के कारण आज कथा में मंगलाचरण सहित कुछ प्रसंगों का ही वर्णन किया गया। शेष कथा और भगवान के विवाह उत्सव को कल धूमधाम एवं भव्यता के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। आयोजक पुष्पांजलि सेवा संस्थान ट्रस्ट की ओर से सैनिक कॉलोनी सहित क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को इस पावन कथा एवं यज्ञ में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है। बारिश के बीच भी जारी रही श्रीमद्भागवत कथा, छठे दिन पंडाल में पानी भरने के बावजूद भक्तों की आस्था रही अटूट, कल धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान का विवाह उत्सव प्रयागराज। शहर में पुष्पांजलि सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में खराब मौसम और बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। नंदन मृदुल जी महाराज के श्रीमुख से सुनाई जा रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बारिश के बीच भी कथा का आयोजन जारी रहा। 25 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ हुए इस धार्मिक आयोजन में सैनिक कॉलोनी के निवासी बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं। लगातार बारिश के कारण कथा पंडाल में कई स्थानों पर पानी भर गया, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहे। मौसम खराब होने के कारण आज कथा में मंगलाचरण सहित कुछ प्रसंगों का ही वर्णन किया गया। शेष कथा और भगवान के विवाह उत्सव को कल धूमधाम एवं भव्यता के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। आयोजक पुष्पांजलि सेवा संस्थान ट्रस्ट की ओर से सैनिक कॉलोनी सहित क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को इस पावन कथा एवं यज्ञ में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।1
- वार्ड नंबर 50 में बारिश के चलते फिसला टैंकर, पलटने से मचा हड़कंप; बड़ा हादसा टला वार्ड नंबर 50 में बारिश के चलते फिसला टैंकर, पलटने से मचा हड़कंप; बड़ा हादसा टला झूंसी, प्रयागराज। नगर निगम के वार्ड नंबर 50 में बारिश के कारण सड़क पर फिसलन होने से एक पानी का टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर पलटते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि बारिश के चलते सड़क पर फिसलन बढ़ गई थी, जिसके कारण चालक टैंकर पर नियंत्रण नहीं रख सका और वाहन पलट गया। हादसे में चालक की जान बाल-बाल बच गई। गनीमत रही कि टैंकर की चपेट में कोई अन्य व्यक्ति नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने सड़क पर जलभराव और फिसलन को लेकर चिंता जताई। बारिश के मौसम में भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।1