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एक बयान में ईसाई समुदाय पर आरक्षण और रीति-रिवाजों को छीनने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके चलते 'डीलिस्टिंग' की पुरज़ोर मांग की गई है। इस दौरान यह बात सामने रखी गई कि 'हमारा आरक्षण' का लाभ उठाते हुए ईसाई समुदाय के 10 से अधिक सदस्य विधायक बन चुके हैं। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि 'डीलिस्टिंग' होनी चाहिए।
Badri Narayan Sahu
एक बयान में ईसाई समुदाय पर आरक्षण और रीति-रिवाजों को छीनने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके चलते 'डीलिस्टिंग' की पुरज़ोर मांग की गई है। इस दौरान यह बात सामने रखी गई कि 'हमारा आरक्षण' का लाभ उठाते हुए ईसाई समुदाय के 10 से अधिक सदस्य विधायक बन चुके हैं। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि 'डीलिस्टिंग' होनी चाहिए।
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- एक बयान में ईसाई समुदाय पर आरक्षण और रीति-रिवाजों को छीनने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके चलते 'डीलिस्टिंग' की पुरज़ोर मांग की गई है। इस दौरान यह बात सामने रखी गई कि 'हमारा आरक्षण' का लाभ उठाते हुए ईसाई समुदाय के 10 से अधिक सदस्य विधायक बन चुके हैं। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि 'डीलिस्टिंग' होनी चाहिए।1
- झारखंड के लोहरदगा जिले में दिनदहाड़े अवैध बालू की ढोलाई धड़ल्ले से जारी है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है, मानो वह गहरी नींद में सो रहा हो।1
- गोविंद ग्वाला फिट कंपनी ने एक नई सेवा का शुभारंभ किया है। इस नई पहल को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।1
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- कुड़ू थाना क्षेत्र के अंतर्गत बरवाटोली के दोबा गांव में एक महिला को जिंदा जला दिया गया। बताया गया है कि घटना रात के समय हुई थी, जिसकी तस्वीरें भी रात को ही ली गईं। गांव के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला है कि इस महिला को कहीं बाहर से बलात्कार करके लाया गया था। इसके बाद, उसे रस्सी से बांधा गया और फिर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात में गांव में घूमकर रोते हुए एक हल्की परछाई दिखाई देती है।3
- देव आनंदपुर बंडेल रोड पर एक पेड़ गिरने का हादसा सामने आया है। इस घटना में, रोड के बीच में एक बहुत बड़ा पेड़ गिर गया है। जानकारी के अनुसार, यह हादसा 'घर में' हुआ है।1
- झारखंड के लातेहार जिले के कैमा क्षेत्र में ग्रामीण, विशेषकर आदिवासी, अपने जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे को रोकने के लिए एकजुट हो गए हैं। उनकी आवाज बुलंद हो गई है और उन्होंने अपने हक की लड़ाई को तेज कर दिया है। ग्रामीण स्पष्ट रूप से पुकार कर रहे हैं: "जंगल-जमीन बचाओ"। यह लड़ाई उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अतिक्रमण के खिलाफ है, जिसमें ग्रामीण और आदिवासी दृढ़ता से खड़े हैं। वे यह सुनिश्चित करने पर आमादा हैं कि उनके पारंपरिक जल, जंगल और जमीन पर कोई भी बाहरी शक्ति कब्जा न कर सके। उनकी एकजुटता और संघर्ष से यह संदेश दिया जा रहा है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।1
- चतरा जिले में सड़कों पर आम लोगों की जान को खतरे में डालने वाले कोयला वाहनों के खतरनाक स्टंट और ओवरटेक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अश्लील गानों के साथ वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर कोयला ढोने वाले हाइवा वाहन बेलगाम रफ्तार से दौड़ते और खतरनाक स्टंट करते हुए ओवरटेक करते दिख रहे हैं, जहाँ एक वाहन अनियंत्रित होकर पलटने से बाल-बाल बचा। इस वायरल वीडियो की पुष्टि हालांकि खबर नहीं करती, लेकिन इसे चतरा जिले के टंडवा-सिमरिया रोड का बताया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक नियमों की घोर अनदेखी और लोगों की जान से खिलवाड़ का मामला सामने आ रहा है। वायरल वीडियो पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में भारी वाहन चालक सड़कों को रेसिंग ट्रैक समझकर दौड़ रहे हैं, और क्या कुछ चालक जानबूझकर सोशल मीडिया पर रील व वीडियो वायरल करने के लिए लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों लोगों की मौत होने के बावजूद भी आखिर सिस्टम क्यों चुप है, और शाम होते ही कई मार्गों पर भारी वाहनों का ऐसा दबदबा हो जाता है कि आम लोग डर के साये में सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। जिले में आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही हैं, फिर भी तेज रफ्तार और खतरनाक ओवरटेकिंग पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। जिले के जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से लोग सवाल कर रहे हैं कि और कितनी जानें जाने के बाद सड़कों पर गति नियंत्रण, निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था होगी। लोगों की मांग है कि भारी वाहनों की गति पर निगरानी के लिए स्पीड कैमरे लगाए जाएं, नियम तोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई हो, और सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि सड़कें हर नागरिक की सुरक्षा और आवाजाही के लिए होती हैं।1