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ट्रैक्टर-बसे की भिड़ंत से मचा हड़कंप, यात्रियों को निकाला गया बाहर।।JSN NEWS।।
नीलेश विश्वकर्मा
ट्रैक्टर-बसे की भिड़ंत से मचा हड़कंप, यात्रियों को निकाला गया बाहर।।JSN NEWS।।
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- BG WEALTH SHARING DSJ EXCHENGE यह एक बहुत बड़ा स्कैम है जो की इंडिया में अपने पैर पसार चुका है ऐसी कोई भी पैसे डबल करने के झांसे मत पड़े ,ऐसी चीजों से सावधान रहे हो सतर्क रहें,1
- Post by नीलेश विश्वकर्मा1
- पथरिया नगर में इन दिनों लोग घरेलू और व्यापारी कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने के बाबजूद समय पर गैस सिलेंडर न मिल जाने पर खासे परेशान है। वहीं आज सोमवार दोपहर 3 बजे बड़ी संख्या में लोग शहर की एक मात्र थाना रोड स्थित महाकाल गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगकर बुकिंग के बाबजूद भी गैस न मिल पाने पर खड़े हुए नजर आए। मौजूद लोगों ने कर्मचारियों पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए नामी ग्रामी लोगो को तत्काल गौस सिलेंडर दिए जाने के आरोप लगाए। वहीं लाइन में खड़े लोगों का एक वीडियो सकने आया है। जो सोमवार शाम 6 बजे से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- Post by Vikas Soni1
- Post by Shailesh Shrivastava1
- एंकर/- हटा नगर में इन दिनों पेयजल संकट गहराया हुआ है। नगरवासियों के घरों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इस विकट स्थिति की शिकायत पर दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार की शाम हटा नगर पालिका में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।1
- अमर सेन पटेरा === कुम्हारी नगरी बनी धर्म की नगरी सकल जैन समुदाय के सौजन्य से पंच कल्याण महोउत्सव मानस्तंभ प्रतिष्ठा और गौशाला शिलान्यास होने जा रहा! परम पूज्य मंगलानंद महाराज जी के सानिध्य में कार्यक्रम महोत्सव में मंगल सागर महाराज जी प्रतिष्ठाचार्य धीरज भैया बाल ब्रह्मचारी नीलेश भैया सहित सकल जैन समाज सहयोगी बनी! जन्म उत्सव में झूम उठे सभी, भव्य शोभायात्रा निकली नगर मे स्वप्न-फल एवं पूर्वाभास को जानकर राजा महाबल ने अपने पुत्र अतिबल को राज्य में नवीनकर सिद्ध कूट चैत्यालय में संलेखना धारण की। धर्मध्यान बने देह त्याग कर वे ईशान स्वर्ग में ललितांग नामक देव। आगे अनेक भावों में पुण्य, दान और सम्यग्दर्शन के प्रभाव से उनकी आत्मा को वास्तविक रूप से सर्वोच्च स्तर प्राप्त हुआ है।ऋषभदेव का गर्भावतार और कल्याण जन्म अंततः सर्वार्थसिद्धि विमान से च्युत आकाश भगवान ऋषभदेव ने माता मरुदेवी के गर्भ में अवतार लिया। गर्भावतरण से पूर्व माता ने सेल शुभ स्वप्न देखा, फल तीर्थंकर जन्म के रूप में बताया गया। चैत्र कृष्ण नवमी के दिन प्रभु का जन्म हुआ, जिसे संपूर्ण ब्रह्माण्ड ने लौकिक उत्सव के रूप में अनुभव किया। इंद्रों द्वारा सुमेरु पर्वत पर 1008 कलशों से क्षीराभिषेक किया माता-पिता और जन्मस्थान आदिनाथ जी के पिता नाभिराज और माता मरुदेवी थीं। उनका जन्म अयोध्या के प्रसिद्ध इक्ष्वाकु वंश में हुआ।गर्भ के दौरान 16 स्वप्न: जैन मान्यता के अनुसार, तीर्थंकर के जन्म से पहले उनकी माता को 16 शुभ स्वप्न आते हैं, जो उनकी दिव्य संतान के सूचक होते हैं।जन्मोत्सव: उनके जन्म पर इंद्र ने अपने इक्षु (गन्ने) के दंड से बालक के जन्म का संकेत दिया, जिससे उनका नाम ऋषभदेव और वंश इक्ष्वाकु पड़ा।दिव्य स्नान (जन्माभिषेक) 64 इंद्रों ने स्वर्ग से आकर शिशु का पांडुक शिला (मेरु पर्वत) पर दिव्य जल से अभिषेक किया।ज्ञान और शिक्षा उन्हें जन्म से ही ज्ञान था और बाद में उन्होंने दुनिया को कृषि, विद्या, और सभ्यता का पाठ पढ़ाया1
- Post by नीलेश विश्वकर्मा1