Shuru
Apke Nagar Ki App…
झालावाड़ स्थापना दिवस पर गढ़ भवन में गूंजी झालावाड़ की गौरवगाथा। झालावाड़, 8 अप्रैल। जिले के 188वें स्थापना दिवस पर गढ़ भवन से कवि शैलेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने काव्य प्रस्तुति दी। अपनी रचना के माध्यम से उन्होंने झालावाड़ के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कवि की प्रस्तुति की सराहना की और जिले की गौरवशाली विरासत को याद किया।
SOHAN LAL KOLI
झालावाड़ स्थापना दिवस पर गढ़ भवन में गूंजी झालावाड़ की गौरवगाथा। झालावाड़, 8 अप्रैल। जिले के 188वें स्थापना दिवस पर गढ़ भवन से कवि शैलेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने काव्य प्रस्तुति दी। अपनी रचना के माध्यम से उन्होंने झालावाड़ के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कवि की प्रस्तुति की सराहना की और जिले की गौरवशाली विरासत को याद किया।
More news from राजस्थान and nearby areas
- झालावाड़-अपना 189 वां स्थापना दिवस मना रहा है । इस अवसर पर झालावाड़ शहर की पर्यटन विकास समिति ने शहर के हरिश्चन्द्र पुस्तकालय मे झालावाड़ स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र व मेडल देकर सम्मानित भी किया । इस दौरान कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों व पर्यटन प्रेमियों ने जिले की पुरातात्विक ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव के लिए सरकार से पर्याप्त बजट देने की मांग की तो वहीं झालावाड़ के गौरवशाली इतिहास को लेकर भी कार्यक्रम में जानकारियां दी गई । झालावाड के 189 वें स्थापना दिवस समारोह में आयोजन समिति सदस्यो ने बताया कि झालावाड़ रियासत की स्थापना 8 अप्रैल 1838 मे हुई थी । इसके जिला बनने के बाद यहां पर तत्कालीन राज परिवार के शासको ने सरकारी कार्यालय चलाने के लिए अपना गढ़ भवन सरकार को दान किया । वहीं झालावाड़ की ऐतिहासिक उत्तर भारत की पहली ओपेरा शैली की भवानी नाट्यशाला, मदन विलास पैलेस, जिले का गागरोन किला सहित झालरापाटन का सूर्य मंदिर प्रमुख दर्शनीय और पर्यटक स्थल के रूप में स्थापित है। जिन्हें हर वर्ष कई देशी विदेशी पर्यटक देखने के लिए झालावाड़ जिले में पहुंचते हैं । लेकिन सरकार द्वारा इन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर अब तक पर्याप्त जन सुविधा विकसित नहीं की जा सकी है । वहीं इन ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव और संरक्षण के लिए भी पर्याप्त बजट देने की आवश्यकता है तो साथ ही उनके साथ संभाल के लिए कर्मचारियों की भी तैनाती होनी चाहिए । झालावाड स्थापना दिवस के कार्यक्रम मे नगर के समाज सेवी दिलीप मित्तल को सेठ विनोदीराम बालचन्द परिवार द्वारा प्रदान किये जाने वाला ‘‘झालावाड़ गौरव’’ सम्मान से सम्मानित किया गया।3
- झालावाड़, 8 अप्रैल। जिले के 188वें स्थापना दिवस पर गढ़ भवन से कवि शैलेंद्र जैन ‘गुनगुना’ ने काव्य प्रस्तुति दी। अपनी रचना के माध्यम से उन्होंने झालावाड़ के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कवि की प्रस्तुति की सराहना की और जिले की गौरवशाली विरासत को याद किया।1
- सुंदर चौक दरा जंगल क्षेत्र में ट्रेलर और भूसे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में ट्रेलर चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया और करीब आधे घंटे तक बाहर नहीं निकल सका। सूचना मिलते ही कनवास और मोड़क थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कनवास थाने के कांस्टेबल बीरबल ने साहस दिखाते हुए केबिन के अंदर घुसकर फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला। इस दौरान हाईवे पर करीब एक घंटे तक जाम के हालात बने रहे और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे कांस्टेबल बीरबल ने बताया कि सवाई माधोपुर निवासी रिजवान खाली ट्रेलर लेकर झालावाड़ की ओर जा रहा था, जबकि ट्रैक्टर-ट्रॉली कोटा की तरफ से आ रही थी। इसी दौरान दोनों के बीच आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया।1
- सुंदर चौक दरा जंगल क्षेत्र में ट्रेलर और भूसे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में ट्रेलर चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया और करीब आधे घंटे तक बाहर नहीं निकल सका। सूचना मिलते ही कनवास और मोड़क थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कनवास थाने के कांस्टेबल बीरबल ने साहस दिखाते हुए केबिन के अंदर घुसकर फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला। इस दौरान हाईवे पर करीब एक घंटे तक जाम के हालात बने रहे और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे कांस्टेबल बीरबल ने बताया कि सवाई माधोपुर निवासी रिजवान खाली ट्रेलर लेकर झालावाड़ की ओर जा रहा था, जबकि ट्रैक्टर-ट्रॉली कोटा की तरफ से आ रही थी। इसी दौरान दोनों के बीच आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया।1
- Post by Shyam pokra1
- झालावाड़, 07 अप्रैल। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने मंगलवार को तहसील कार्यालय बकानी का औचक निरीक्षण कर विभिन्न राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने निर्देश दिए कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वसूली कार्य राज्य सरकार के निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 256-257 के अंतर्गत लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने आंतरिक लेखा जांच दल द्वारा इंगित आय संबंधी बकाया पैराज की पालना शीघ्र भिजवाने, भू-अभिलेख शाखा में लंबित अभिलेखों को जिला अभिलेखागार में जमा कराने तथा पंजीयन कार्य में चालू वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए।जिला कलेक्टर ने बकाया 34 नामांतरण एवं 9 सीमाज्ञान प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण करने को कहा। साथ ही 20 वर्ष पुराने तलफी योग्य रिकॉर्ड के निस्तारण हेतु विशेष अभियान चलाकर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने तहसीलदार को भू-अभिलेख शाखा के कार्यों पर विशेष नियंत्रण रखने के लिए भी निर्देशित किया।निरीक्षण के दौरान फिडिलिटी बांड तैयार करने, पटवार भवनों के आवंटन में आ रही समस्याओं के शीघ्र समाधान तथा चरागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।1
- Post by Sanjay Kumar yati1
- झालावाड़-शहर की गढ़ परिसर स्थित ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला अपनी स्थापना के 105 वर्ष पूरे कर चुकी है । उत्तर भारत की ओपेरा शैली मे बनी ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला लगातार प्रशासनिक उपेक्षा व बजट की कमी से अपनी आभा खोती जा रही है । जिले की पर्यटन विकास समिति व गणमान्य लोगों ने ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला को वर्ष भर पर्यटकों के लिए खुला रखने की मांग की है। साथ ही इसके रखरखाव के लिए सरकार से पर्याप्त बजट दिए जाने और यहां नाट्य अकादमी शुरू किए जाने की भी मांग की है । पर्यटन विकास समिति के संयोजक झालावाड की ऐतिहासिक ओपेरा शैली मे बनी भवानी नाट्य शाला की स्थापना झालावाड रियासत के तत्कालीन महाराज राणा भवानी सिंह जी ने ब्रिटिश काल मे वर्ष 1921 में की थी। उत्तर भारत की इस प्रसिद्ध ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला में ब्रिटिश काल के दौरान कई प्रसिद्ध नाटक का मंचन हो चुका है । महाकवि कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञान शकुंतलम का सबसे पहली बार यहां मंचन हुआ था । यहां होने वाले नाटक सजीव चित्रण प्रस्तुत करते थे जिसमें नाट्यशाला के मंच पर असली हाथी घोड़े रथ लाये जाते थे और नाट्य प्रस्तुतियां दी जाती थी । तो साथ ही इस भवानी नाट्यशाला के झरोखे मेहराब सहित यहां की वास्तुकला भी दर्शनीय है ।3