मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरिद्वार में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के नेतृत्व में चलाए गए सत्यापन अभियान के दौरान मदरसों में नामांकन संबंधी बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा हुआ है। जाँच में सामने आया कि मार्च 2026 में अभिलेखों में दर्ज 31,780 विद्यार्थियों की संख्या सत्यापन में घटकर मात्र 19,491 रह गई, जिससे 12,289 रजिस्ट्रेशन फर्जी पाए गए। जिलाधिकारी मयूर के अनुसार, मदरसा संचालक इन फर्जी नामांकनों के आधार पर केंद्र व राज्य सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के तहत अनुचित तरीके से सरकारी लाभ प्राप्त कर रहे थे। अब दोषी पाए गए मदरसों से विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति और मिड डे मील वितरण के आंकड़ों में पाई गई असमानता के आधार पर सरकारी धन की वसूली की जाएगी। इस अभियान के बाद कई मदरसों ने स्वयं ही बंदी के लिए आवेदन भी दिया है। उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि फर्जी नामांकन की शिकायतें पहले से ही सरकार को मिल रही थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह जाँच शुरू की गई। हरिद्वार के बाद यह सत्यापन अभियान अन्य जनपदों में भी चलाया जा रहा है। जुलाई 2026 से पूर्व सभी मदरसों को नई पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना होगा, और जो संस्थाएँ पंजीकरण नहीं कराएंगी, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरिद्वार में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के नेतृत्व में चलाए गए सत्यापन अभियान के दौरान मदरसों में नामांकन संबंधी बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा हुआ है। जाँच में सामने आया कि मार्च 2026 में अभिलेखों में दर्ज 31,780 विद्यार्थियों की संख्या सत्यापन में घटकर मात्र 19,491 रह गई, जिससे 12,289 रजिस्ट्रेशन फर्जी पाए गए। जिलाधिकारी मयूर के अनुसार, मदरसा संचालक इन फर्जी नामांकनों के आधार पर केंद्र व राज्य सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के तहत अनुचित तरीके से सरकारी लाभ प्राप्त कर रहे थे। अब दोषी पाए गए मदरसों से विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति और मिड डे मील वितरण के आंकड़ों में पाई गई असमानता के आधार पर सरकारी धन की वसूली की जाएगी। इस अभियान के बाद कई मदरसों ने स्वयं ही बंदी के लिए आवेदन भी दिया है। उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि फर्जी नामांकन की शिकायतें पहले से ही सरकार को मिल रही थीं, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह जाँच शुरू की गई। हरिद्वार के बाद यह सत्यापन अभियान अन्य जनपदों में भी चलाया जा रहा है। जुलाई 2026 से पूर्व सभी मदरसों को नई पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना होगा, और जो संस्थाएँ पंजीकरण नहीं कराएंगी, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
- उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन प्रहार' अभियान के तहत, हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशों पर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में, पुलिस टीम ने 30 मई 2026 को पिरान कलियर क्षेत्र से एक व्यक्ति को अवैध रूप से सट्टे की खाईबाड़ी करते हुए रंगेहाथ पकड़ा। गिरफ्तार किए गए आरोपित की पहचान मोहम्मद अरकान पुत्र मुख्तार हुसैन के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल जिले के शहबाजपुरा खेड़ा, थाना रायसत्ती का निवासी है और वर्तमान में कलियर के मुकर्रबपुर में रईश के मकान में रह रहा था। पुलिस ने उसके कब्जे से एक सट्टा डायरी, एक पेन और कुल ₹1650/- नकद बरामद किए हैं। आरोपित मोहम्मद अरकान के खिलाफ जुआ अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में कांस्टेबल सुबोध कुमार और होमगार्ड राजेंद्र सिंह शामिल थे।1
- लक्सर में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आसमान में घनी काली घटा छा जाने के बाद, इलाके में जमकर बारिश हुई। इस बारिश के चलते लोगों को गर्मी और लू की मार से काफी राहत मिली।1
- khatarnak1
- हरिद्वार जनपद के विकासखंड लक्सर अंतर्गत ग्राम पंचायत अकोढ़ा कला में अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता की अध्यक्षता में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर पहुँचे, जिन्होंने प्रशासन के सामने बिजली, पेयजल, सड़क, पेंशन और राजस्व से जुड़ी विभिन्न समस्याएँ रखीं। अपर जिलाधिकारी ने कई शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया, जबकि शेष मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए। इस जनता दरबार में खंड विकास अधिकारी, तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।1
- यह पोस्ट पैसे को आकर्षित करने के तरीकों के बारे में सवाल उठाती है। इसमें पूछा गया है कि पैसे को कैसे आकर्षित किया जाता है और इसके क्या उपाय हैं।1
- गतवर्ष मनसा देवी सीढ़ी मार्ग पर हुई दुर्घटना में 9 लोगों की जान चली गई थी। उस समय प्रथमदृष्टया माना गया था कि किसी खंबे से बिजली का तार टूटने के बाद मची भगदड़ में लोग हादसे का शिकार हुए थे। इस घटना के बाद व्यवस्थाओं में सुधार के दावे तो किए गए, लेकिन अब भी हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर बिजली के खंभे ही टूटकर गिरने को तैयार खड़े हैं, जो बिजली के बल्ब और तारों का बोझ भी नहीं संभाल पा रहे हैं। हालाँकि सीढ़ी मार्ग प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए बंद करा रखा है, लेकिन आने वाले दिनों में भीड़ बढ़ने पर इस मार्ग को खोलने की ज़रूरत कभी भी पड़ सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ खंभों को तो विभाग ने नीचे से ईंट और लकड़ी का सहारा देकर अस्थायी 'जुगाड़' से टिका रखा है। लगभग एक माह पूर्व भी यहाँ एक बिजली का पोल गिर गया था, जिसे बाद में फिर जुगाड़ से खड़ा कर दिया गया था। अब कांवड़ मेला नजदीक है और ऐसे में इस मार्ग पर बिजली के ये झूलते खंभे फिर किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बनने के लिए तैयार खड़े हैं, जो बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।1