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पहली ही बारिश में डूबी शिक्षा की राह, सेमरी तरहार में दलदल से जूझ रहा बचपन आज ये हाल है, लगातार बारिश हुई तो कैसे पहुंचेगा नौनिहाल? जिम्मेदारों की खामोशी पर उठे तीखे सवाल सेमरी तरहार,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम सभा सेमरी तरहार से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की परतें खोलने के लिए काफी हैं। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल में बदल चुकी है। बरसात का मौसम अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है, लेकिन विद्यालय तक जाने वाली डामर सड़क पहले ही जलभराव और कीचड़ में डूब चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है और उस पर भरा पानी किसी तालाब का आभास करा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश होने पर इस मार्ग की क्या दशा होगी और मासूम बच्चे विद्यालय तक आखिर कैसे पहुंचेंगे? यह खबर विद्यालय की नहीं, बल्कि विद्यालय तक पहुंचने वाले बदहाल मार्ग की हकीकत बयान कर रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी कीचड़, फिसलन और जलभराव से होकर शिक्षा का दीप जलाने निकलते हैं। हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बदहाल हो जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश हुई, तो यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है और विद्यालय तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में सबसे अधिक प्रभावित वे मासूम होंगे, जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है। अब निगाहें जिलाधिकारी प्रयागराज, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। आवश्यकता केवल निरीक्षण की नहीं, बल्कि तत्काल सड़क के पुनर्निर्माण और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। क्योंकि विकास के दावों की असली परीक्षा राजधानी के मंचों पर नहीं, बल्कि सेमरी तरहार जैसे गांवों की उन्हीं सड़कों पर होती है, जहां आज भी मासूम बच्चों का भविष्य बारिश के पानी और दलदल के बीच फंसकर रह गया है।

5 hrs ago
user_राजेश कुमार
राजेश कुमार
रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago

पहली ही बारिश में डूबी शिक्षा की राह, सेमरी तरहार में दलदल से जूझ रहा बचपन आज ये हाल है, लगातार बारिश हुई तो कैसे पहुंचेगा नौनिहाल? जिम्मेदारों की खामोशी पर उठे तीखे सवाल सेमरी तरहार,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम सभा सेमरी तरहार से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की परतें खोलने के लिए काफी हैं। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल में बदल चुकी है। बरसात का मौसम अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है, लेकिन विद्यालय तक जाने वाली डामर सड़क पहले ही जलभराव और कीचड़ में डूब चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है और उस पर भरा पानी किसी तालाब का आभास करा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश होने पर इस मार्ग की क्या दशा होगी और मासूम बच्चे विद्यालय तक आखिर कैसे पहुंचेंगे? यह खबर विद्यालय की नहीं, बल्कि विद्यालय तक पहुंचने वाले बदहाल मार्ग की हकीकत बयान कर रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी कीचड़, फिसलन और जलभराव से होकर शिक्षा का दीप जलाने निकलते हैं। हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बदहाल हो जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश हुई, तो यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है और विद्यालय तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में सबसे अधिक प्रभावित वे मासूम होंगे, जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है। अब निगाहें जिलाधिकारी प्रयागराज, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। आवश्यकता केवल निरीक्षण की नहीं, बल्कि तत्काल सड़क के पुनर्निर्माण और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। क्योंकि विकास के दावों की असली परीक्षा राजधानी के मंचों पर नहीं, बल्कि सेमरी तरहार जैसे गांवों की उन्हीं सड़कों पर होती है, जहां आज भी मासूम बच्चों का भविष्य बारिश के पानी और दलदल के बीच फंसकर रह गया है।

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    पहली ही बारिश में डूबी शिक्षा की राह, सेमरी तरहार में दलदल से जूझ रहा बचपन
आज ये हाल है, लगातार बारिश हुई तो कैसे पहुंचेगा नौनिहाल? जिम्मेदारों की खामोशी पर उठे तीखे सवाल
सेमरी तरहार,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम सभा सेमरी तरहार से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की परतें खोलने के लिए काफी हैं। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल में बदल चुकी है। बरसात का मौसम अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है, लेकिन विद्यालय तक जाने वाली डामर सड़क पहले ही जलभराव और कीचड़ में डूब चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है और उस पर भरा पानी किसी तालाब का आभास करा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश होने पर इस मार्ग की क्या दशा होगी और मासूम बच्चे विद्यालय तक आखिर कैसे पहुंचेंगे? यह खबर विद्यालय की नहीं, बल्कि विद्यालय तक पहुंचने वाले बदहाल मार्ग की हकीकत बयान कर रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी कीचड़, फिसलन और जलभराव से होकर शिक्षा का दीप जलाने निकलते हैं। हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बदहाल हो जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश हुई, तो यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है और विद्यालय तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में सबसे अधिक प्रभावित वे मासूम होंगे, जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है। अब निगाहें जिलाधिकारी प्रयागराज, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। आवश्यकता केवल निरीक्षण की नहीं, बल्कि तत्काल सड़क के पुनर्निर्माण और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। क्योंकि विकास के दावों की असली परीक्षा राजधानी के मंचों पर नहीं, बल्कि सेमरी तरहार जैसे गांवों की उन्हीं सड़कों पर होती है, जहां आज भी मासूम बच्चों का भविष्य बारिश के पानी और दलदल के बीच फंसकर रह गया है।
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Gandi nali sadak
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    Gandi nali sadak
    user_Rk singh
    Rk singh
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद समेत दो लोगों की सड़क हादसे में मौत। झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हाईवे पर कार डिवाइडर से टकराई। हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती। सभी प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे। टक्कर इतनी भीषण कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मृतकों में आबान अहमद और अहजम (प्रयागराज) की पुष्टि। घायलों में मोहम्मद जैद, उमर समेत अन्य शामिल। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, घायलों को अस्पताल भेजा। अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी जेल से झांसी जेल शिफ्ट किया गया था। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
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    अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद समेत दो लोगों की सड़क हादसे में मौत।
झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हाईवे पर कार डिवाइडर से टकराई।
हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती।
सभी प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे।
टक्कर इतनी भीषण कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
मृतकों में आबान अहमद और अहजम (प्रयागराज) की पुष्टि।
घायलों में मोहम्मद जैद, उमर समेत अन्य शामिल।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, घायलों को अस्पताल भेजा।
अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी जेल से झांसी जेल शिफ्ट किया गया था।
पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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