लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?, गाड़ी में डालकर पीटा! खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी
लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?, गाड़ी में डालकर पीटा! खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी
- मलिहाबाद तहसील क्षेत्र के बेलगढ़ा और बड़ी गढ़ी की ओर से रात से सुबह तक मिट्टी लदी ट्रैक्टर-ट्रालियों के गुजरने का मामला सामने आया है। लखनऊ। मलिहाबाद थाना क्षेत्र में अवैध खनन रात से लेकर अभी तक जारी स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अब तक एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर-ट्रालियां निकल चुकी हैं, जबकि मिट्टी की खुदाई जारी होने का दावा किया जा रहा है। लेखपाल और दरोगा की भूमिका पर आरोप स्थानीय सूत्रों ने कई दिनों से कथित अवैध मिट्टी खनन होने का आरोप लगाया है। साथ ही क्षेत्रीय लेखपाल की कथित मिलीभगत और मलिहाबाद क्षेत्र के एक दरोगा पर धन लेकर खनन की अनुमति देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग मामले में संबंधित प्रशासनिक एवं खनन अधिकारियों से मौके पर जांच कराने, खनन की वैधता और मिट्टी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करने की मांग की गई है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या किसी कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।1
- लखनऊ: फैजुल्लागंज बंधे पर ट्रैफिक पुलिस पर वसूली का आरोप, वीडियो बनाने पर युवक का मोबाइल तोड़ने का दावा लखनऊ: फैजुल्लागंज बंधे पर ट्रैफिक पुलिस पर वसूली का आरोप, वीडियो बनाने पर युवक का मोबाइल तोड़ने का दावा लखनऊ। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज बंधे पर ट्रैफिक पुलिस की कथित वसूली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की गतिविधियों का वीडियो बनाने पर एक युवक को विरोध का सामना करना पड़ा और उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया गया। युवक का आरोप है कि जब उसने कथित वसूली की सच्चाई को कैमरे में रिकॉर्ड करने का प्रयास किया, तो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उसके साथ विवाद किया। इतना ही नहीं, युवक का यह भी दावा है कि बाद में उसी पर पुलिसकर्मियों से पैसे मांगने का आरोप लगा दिया गया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली, आम नागरिकों के अधिकारों और कथित वसूली के आरोपों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि युवक के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई आवश्यक होगी। उच्चाधिकारियों से जांच की मांग मामले की निष्पक्ष जांच कर घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जानी चाहिए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके। साथ ही, संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि विवाद किन परिस्थितियों में हुआ और मोबाइल फोन को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल, घटना के संबंध में ट्रैफिक पुलिस का आधिकारिक पक्ष और किसी जांच या कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इंडिया लाइव न्यूज़ | लखनऊ1
- ब्रह्मचारिणी मैया की जय हो प्रेम से बोलो जय माता की #हाईलाइट ब्रह्मचारिणी मैया की जय हो प्रेम से बोलो जय माता की #हाईलाइट1
- ब्रह्मचारिणी मैया की जय हो प्रेम से बोलो जय माता की #हाईलाइट ब्रह्मचारिणी मैया की जय हो प्रेम से बोलो जय माता की #हाईलाइट1
- लखनऊ थाना बाजार खाला क्षेत्र कच्ची कॉलोनी में बिजली के खंभे में लगी आग लखनऊ के थाना बाजारखाला क्षेत्र स्थित कच्ची कॉलोनी में बिजली के तारों वाले खंभे में आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग देखकर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। घटना का वीडियो सामने आया है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। सवाल: बिजली के खंभे में आग लगने की सूचना पर संबंधित विभाग ने क्या कार्रवाई की?1
- सेखपुरवा और मऊरा गांव के पीछे 150+ से अधिक फल देने वाले आम के पेड़ों पर कथित रूप से लकड़ी ठेकेदार ने चलाया आर अधिकारियों के शिकायत के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं, लखनऊ। दुबग्गा वन रेंज एवं थाना दुबग्गा क्षेत्र के सेखपुरवा गांव हारून कोठी से इंटरलॉकिंग रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर कच्चे गलियारे पर उल्टे हाथ स्थित टेबल के आगे से भी गए के बैग को काटकर नष्ट नाबूत कर दिया गया वन दरोगा बिजेंद्र सिंह और वन दरोगा शिव सहाय के सहयोग से अवैध कटान हो पाया, करीब 6 बीघा बाग में लगे पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाग में लगे 150+ पेड़ों को कथित रूप से बिना अनुमति अवैध तरीके से काटा गया। मामले में वन दरोगा बीजेंद्र सिंह और शिव सहाय की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। भूमिका की दरोगा की जांच की मांग, आरोप है कि कटान की जानकारी 2 दिन पहले जीपीएस लोकेशन वीडियो व्हाट्सएप लोकेशन के माध्यम से एसडीओ और डीएफओ स्तर के अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की मौके पर जांच कराकर पेड़ों की कटाई की अनुमति, अभिलेख एवं संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। यदि कटान बिना अनुमति पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। बिजेंदर सिंह और शिवा सहाय की कथित मिली भगत से क्षेत्र में अवैध कटान चल रहा है इन लोगों की भी भूमिका की जांच होनी चाहिए कॉल स्टोरी देखी जानी चाहिए वन विभाग की कथित मिलीभगत से अवैध कटान हुआ या अधिकारियों की लापरवाही रही—यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।1
- लखनऊ: महिगवां थाना क्षेत्र में दलित पत्रकार ज्ञानेंद्र को अवैध खनन माफिया ने जमकर पीट पीड़ित परिवार ने शासन प्रशासन से लगायी न्याय की गुहार खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी?, गाड़ी में डालकर पीटा! खनन कारोबारी की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ 20 तारीख को घटना होने का दावा, मुकदमा दर्ज न होने पर उठे सवाल लखनऊ। राजधानी लखनऊ के महिगवां थाना क्षेत्र में एक दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि 20 तारीख को खनन कारोबारी से जुड़ी खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को कुछ लोगों ने गाड़ी में डालकर लात-घूंसों से पीटा। पीड़ित ने जाति को लेकर भी दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा पीड़ित पत्रकार का कहना है कि घटना के बाद भी अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने की स्थिति और पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है। बड़ा सवाल: दलित पत्रकार को न्याय कब मिलेगा? खबर की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ मारपीट और जातिगत भेदभाव के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि महिगवां पुलिस इस मामले में कब संज्ञान लेगी? क्या पीड़ित की शिकायत पर उचित कार्रवाई होगी? क्या कथित मारपीट और जातिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी? जनता पूछ रही है जवाब — आखिर दलित पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई कब होगी1
- प्रॉपर्टी डीलर पर हमले की कड़ी निंदा, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग ग्रामीण पत्रकार कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के प्रदेश सचिव मोहम्मद इमरान मंसूरी के साथ हुई घटना को अत्यंत निंदनीय बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की गई है। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए काकोरी पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और घटना का सही खुलासा करने की मांग की गई है। मांग की गई है कि घटना में शामिल वास्तविक आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आम नागरिकों की सुरक्षा और पीड़ित को न्याय दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए।1