बरही में रास्ता रोका तो हाईकोर्ट तक पहुँचा मामला! संवाददाता बालकिशन नामदेव क्रेशर प्लांट मालिक के दबदबे पर उठे सवाल — अब कलेक्टर और ठेकेदार होंगे कोर्ट में पेश कटनी। बरही तहसील का एक विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर सीधे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक जा पहुँचा है। मामला ग्राम बिचपुरा से ददराटोला के बीच के उस कच्चे मार्ग का है, जिस पर ग्रामीण पीढ़ियों से आ-जा रहे थे। मगर, कथित प्रभावशाली क्रेशर प्लांट संचालक तिलकराज ग्रोवर ने इस रास्ते को बंद कर ग्रामीणों की ज़िंदगी ही रोक दी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब राजस्व और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। अब जब मामला अदालत तक जा पहुँचा है, तो पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। --- ₹200 वार्षिक किराए और ₹50 स्टाम्प पर 65 हेक्टेयर ज़मीन! जानकारी के मुताबिक ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की लगभग 65 हेक्टेयर भूमि को मात्र ₹200 वार्षिक शुल्क और ₹50 के साधारण स्टाम्प पर क्रेशर प्लांट के लिए आवंटित किया गया था। शर्त थी — भूमि का उपयोग सिर्फ लीज अवधि तक ही किया जा सकेगा। लेकिन लीज अवधि 28 जुलाई को समाप्त होने के बावजूद प्लांट का संचालन जारी है। यह न केवल सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाना है, बल्कि ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। अब कोर्ट में जवाब देंगे कलेक्टर और ठेकेदार ग्रामीणों – संदीप जायसवाल (करौंदीखुर्द), रंजीत सिंह (बिचपुरा), बृजभान द्विवेदी (कन्नौर) – ने इस अन्याय के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार और अक्षत अरजरिया ने अदालत को बताया कि पूर्व आदेश के बावजूद क्रेशर संचालक विवादित स्थल पर मलबा फेंकता रहा। मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा — > “आदेश की अवहेलना को गंभीर अवमानना माना जाएगा।” कोर्ट ने कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं। ग्रामीणों में उबाल — ‘न्याय सिर्फ अदालत से!’ ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता उनके बच्चों की पढ़ाई, खेती और अस्पताल जाने का एकमात्र मार्ग था। अब उन्हें किलोमीटरों घूमकर जाना पड़ता है। फिर भी प्रशासन मौन है। ग्रामीणों का आरोप है कि “लीज खत्म हो चुकी ज़मीन पर अगर आज भी खुदाई और मलबा फेंका जा रहा है, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि जनता के साथ खुला अन्याय है!” अब सबकी नज़र हाईकोर्ट पर है — कि बरही के ग्रामीणों को न्याय मिलेगा या प्रशासनिक प्रभाव हावी रहेगा। यह मामला न केवल बरही, बल्कि पूरे कटनी जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
बरही में रास्ता रोका तो हाईकोर्ट तक पहुँचा मामला! संवाददाता बालकिशन नामदेव क्रेशर प्लांट मालिक के दबदबे पर उठे सवाल — अब कलेक्टर और ठेकेदार होंगे कोर्ट में पेश कटनी। बरही तहसील का एक विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर सीधे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक जा पहुँचा है। मामला ग्राम बिचपुरा से ददराटोला के बीच के उस कच्चे मार्ग का है, जिस पर ग्रामीण पीढ़ियों से आ-जा रहे थे। मगर, कथित प्रभावशाली क्रेशर प्लांट संचालक तिलकराज ग्रोवर ने इस रास्ते को बंद कर ग्रामीणों की ज़िंदगी ही रोक दी। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब राजस्व और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। अब जब मामला अदालत तक जा पहुँचा है, तो पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। --- ₹200 वार्षिक किराए और ₹50 स्टाम्प पर 65 हेक्टेयर ज़मीन! जानकारी के मुताबिक ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की लगभग 65 हेक्टेयर भूमि को मात्र ₹200 वार्षिक शुल्क और ₹50 के साधारण स्टाम्प पर क्रेशर प्लांट के लिए आवंटित किया गया था। शर्त थी — भूमि का उपयोग सिर्फ लीज अवधि तक ही किया जा सकेगा। लेकिन लीज अवधि 28 जुलाई को समाप्त होने के बावजूद प्लांट का संचालन जारी है। यह न केवल सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाना है, बल्कि ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। अब कोर्ट में जवाब देंगे कलेक्टर और ठेकेदार ग्रामीणों – संदीप जायसवाल (करौंदीखुर्द), रंजीत सिंह (बिचपुरा), बृजभान द्विवेदी (कन्नौर) – ने इस अन्याय के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार और अक्षत अरजरिया ने अदालत को बताया कि पूर्व आदेश के बावजूद क्रेशर संचालक विवादित स्थल पर मलबा फेंकता रहा। मुख्य न्यायाधीश संजय सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा — > “आदेश की अवहेलना को गंभीर अवमानना माना जाएगा।” कोर्ट ने कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के आदेश दिए हैं। ग्रामीणों में उबाल — ‘न्याय सिर्फ अदालत से!’ ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता उनके बच्चों की पढ़ाई, खेती और अस्पताल जाने का एकमात्र मार्ग था। अब उन्हें किलोमीटरों घूमकर जाना पड़ता है। फिर भी प्रशासन मौन है। ग्रामीणों का आरोप है कि “लीज खत्म हो चुकी ज़मीन पर अगर आज भी खुदाई और मलबा फेंका जा रहा है, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि जनता के साथ खुला अन्याय है!” अब सबकी नज़र हाईकोर्ट पर है — कि बरही के ग्रामीणों को न्याय मिलेगा या प्रशासनिक प्रभाव हावी रहेगा। यह मामला न केवल बरही, बल्कि पूरे कटनी जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
- जबलपुर के अमझर गांव में रिंग रोड निर्माण के दौरान एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। काम के दौरान रोड रोलर के नीचे आने से मौके पर ही उसकी जान चली गई। --- 📍 घटना का विवरण ▪ निर्माण स्थल पर चल रहा था काम ▪ मजदूर पत्थर जमाने में लगा था ▪ अचानक रोलर की चपेट में आ गया --- ⚠ शुरुआती जानकारी ▪ मजदूर को रोलर के आने का पता नहीं चल पाया ▪ हादसा अचानक हुआ ▪ मौके पर ही मौत हो गई --- 👤 मृतक ▪ सुभाष ऋषि ▪ निवासी: बिहार (पूर्णिया) --- 🚔 पुलिस अपडेट ▪ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की ▪ शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ▪ हादसे के कारणों की जांच जारी --- 📍 स्थान: जबलपुर, मध्यप्रदेश 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा1
- जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) की बैठक सोमवार को आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के बीच संपन्न हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट पारित कर दिया गया, लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर जनप्रतिनिधियों ने गंभीर असंतोष जताया। - 📍 क्या हुआ बैठक में ▪ हंगामे के बीच बजट पारित ▪ सत्ता और विपक्ष दोनों ने उठाए सवाल ▪ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असंतोष - ⚠ मुख्य मुद्दे ▪ बजट के सही उपयोग पर सवाल ▪ राशि लैप्स होने पर नाराजगी ▪ वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर आरोप - 🏛 जनप्रतिनिधियों का रुख▪ सुधार न होने पर विरोध की चेतावनी ▪ जवाबदेही तय करने की मांग ▪ प्रशासन पर दबाव बढ़ा - 📅 आगे क्या होगा ▪ 27 अप्रैल को समीक्षा बैठक ▪ विभागों से प्रगति रिपोर्ट मांगी गई ▪ लंबित मामलों की जांच होगी - ⚠ अन्य चिंताएं ▪ पेंशन मामलों में देरी ▪ भुगतान लंबित, कोर्ट केस बढ़ रहे ▪ विश्वविद्यालय की साख पर असर - 📍 स्थान: जबलपुर, मध्यप्रदेश 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा - 👉 क्या हंगामे के बीच बजट पास होना सही है? 👇 अपनी राय जरूर दें1
- मध्य प्रदेश का किसान एक बार फिर व्यवस्था की चक्की में पिसने को मजबूर है। एक तरफ राज्य की मोहन सरकार ने 1 अप्रैल से समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का ढिंढोरा पीटा, तो दूसरी तरफ हकीकत के धरातल पर किसान अपनी उपज लेकर दर-दर भटक रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार, कई संभागों में खरीदी की तारीख को आगे बढ़ाकर 10 से 15 अप्रैल कर दिया गया है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। शिवराज सिंह के '8 गुना आय' वाले दावे पर सवाल सदन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में दावा किया कि केंद्र के प्रयासों से किसानों की आय कई मामलों में 8 गुना तक बढ़ गई है। लेकिन विपक्ष और किसान संगठनों का कहना है कि ये दावे केवल कागजों और दूरबीनों तक सीमित हैं। हकीकत का आईना: जमीनी स्तर पर किसान कर्ज के बोझ तले दबा है। तारीखों का खेल: कर्ज की किश्त (KCC) चुकाने की आखिरी तारीख (31 मार्च) निकल चुकी है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर खरीदी शुरू न होने के कारण किसान को मजबूरी में अपना अनाज कम दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। "मध्य प्रदेश का लाल, किसानों का हाल बेहाल" सबसे बड़ा कटाक्ष देश के कृषि मंत्री पर हो रहा है, जो स्वयं मध्य प्रदेश की माटी से आते हैं। आरोप लग रहे हैं कि जिस राज्य ने उन्हें इस ऊंचाई तक पहुँचाया, आज वहीं का किसान सुरक्षा, संवेदना और समाधान के लिए तरस रहा है। "सरकार ने पहले 16 मार्च की तारीख दी, फिर 1 अप्रैल और अब इसे फिर बढ़ा दिया गया है। क्या सरकार के पास बारदाने (जूट बैग) की कमी है या किसान की मेहनत की कोई कीमत नहीं?" — विपक्षी दलों का तीखा हमला। मुख्य मुद्दे जो किसानों को सता रहे हैं: कर्ज का चक्र: 31 मार्च तक कर्ज न चुका पाने पर ब्याज की छूट (Interest Subvention) खत्म हो जाती है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ गया है। लापरवाही का आलम: बार-बार खरीदी की तारीखें बदलना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। मजबूरी में कम दाम: सरकारी तुलाई शुरू न होने से बिचौलिए सक्रिय हैं और किसान ₹2625 (बोनस सहित MSP) की जगह औने-पौने दामों पर फसल बेच रहा है। निष्कर्ष: क्या कृषि मंत्री के 'आठ गुना आय' वाले दावों में मध्य प्रदेश के उन किसानों की गिनती भी शामिल है जो आज अपनी फसल के सही दाम के लिए उपार्जन केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं? यह सवाल आज प्रदेश के हर खेत-खलिहान में गूंज रहा है।1
- शराब दुकान के खिलाफ रहवासियों का प्रदर्शन, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल1
- घंसौर: मोटरसाइकिल स्लिप होने से युवक गंभीर घायल घंसौर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सारसडोल के पास मंगलवार, 31 मार्च 2026 को एक सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुनीश धुर्वे मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी अचानक वाहन अनियंत्रित होकर स्लिप हो गया। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल 108 एम्बुलेंस की मदद से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंसौर पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। यह घटना घंसौर थाना क्षेत्र के सारसडोल गांव के पास की बताई जा रही है।1
- खेरे धाम (सगोड़ी खुर्द) में 2 अप्रैल को जवारे घट विसर्जन, भव्य शोभायात्रा से गूंजेगा नगर1
- मोदी के निकम्मे चमचे इधर रुपया गिरा इनको लग रहा है सब ठीक है1
- जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बावजूद वार्षिक बजट पारित कर दिया गया। 📍 क्या हुआ ▪ बैठक में गरम माहौल ▪ नेताओं ने प्रशासन को घेरा ▪ कई मुद्दों पर तीखी बहस ⚠ क्यों हुआ विवाद ▪ बजट के उपयोग पर सवाल ▪ राशि लैप्स होने पर नाराजगी ▪ वित्तीय गड़बड़ी के आरोप 🏛 नेताओं का रुख ▪ सुधार नहीं हुआ तो विरोध ▪ प्रशासन से जवाब मांगा गया ▪ जिम्मेदारी तय करने की मांग 📅 अब आगे ▪ 27 अप्रैल को बड़ी समीक्षा बैठक ▪ सभी विभागों से रिपोर्ट मांगी गई ▪ लंबित मामलों की जांच होगी ⚠ अन्य मुद्दे ▪ पेंशन में देरी ▪ भुगतान लंबित ▪ बढ़ते कोर्ट केस 📍 स्थान: जबलपुर (MP) 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा 👉 हंगामे के बीच बजट पास होना सही है? 👇 Comment में बताएं1