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सीतापुर रोड पर लहरपुर में भूसे से लदी एक भारी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के कारण एक हादसा हो गया। बताया गया है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली ओवरलोड होने और साइड न मिलने के कारण सामने से आ रहा एक ट्रक पलट गया। इस घटना में किसी को कोई बड़ी चोट नहीं लगी, लेकिन जो लोग मामूली रूप से घायल हुए, उन्हें इलाज के लिए लहरपुर के स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया है। इस हादसे में भूसे से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ-साथ ट्रक भी शामिल था, जिससे दोनों के ट्रॉली, ट्रैक्टर और ट्रक क्षतिग्रस्त हुए।
Baba pathan
सीतापुर रोड पर लहरपुर में भूसे से लदी एक भारी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के कारण एक हादसा हो गया। बताया गया है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली ओवरलोड होने और साइड न मिलने के कारण सामने से आ रहा एक ट्रक पलट गया। इस घटना में किसी को कोई बड़ी चोट नहीं लगी, लेकिन जो लोग मामूली रूप से घायल हुए, उन्हें इलाज के लिए लहरपुर के स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया है। इस हादसे में भूसे से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ-साथ ट्रक भी शामिल था, जिससे दोनों के ट्रॉली, ट्रैक्टर और ट्रक क्षतिग्रस्त हुए।
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- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम कचनार में तालाब की सरकारी जमीन पर पिछले 15 साल से बने एक अवैध मदरसे 'जामिया अब्दुल्लाह बिन मसऊद' को उसके संचालकों ने बुलडोजर कार्रवाई और भारी जुर्माने के डर से खुद ही ढहाना शुरू कर दिया है। यह स्वैच्छिक ध्वस्तीकरण पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला ग्राम कचनार का है, जहां करीब चार बीघा तालाब की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मदरसे का निर्माण किया गया था। ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसील प्रशासन की जांच में यह अवैध कब्जा उजागर हुआ। इस पर जिलाधिकारी न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए 8 जून को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने न केवल मदरसा खाली कर तालाब की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का निर्देश दिया, बल्कि अवैध निर्माण कराने वाले भू-माफियाओं और संचालकों पर 10.50 लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया। निर्माण हटाने के लिए महज 15 दिन की समय सीमा तय की गई थी। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मदरसा संचालकों को डर था कि यदि तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन का पीला पंजा (बुलडोजर) चलेगा और उसका अतिरिक्त खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। इसी संभावित कार्रवाई और कानूनी अड़चनों से बचने के लिए उन्होंने खुद ही मजदूर बुलाकर भवन को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में हैमर, हथौड़े और आधुनिक उपकरणों की मदद से यह अवैध निर्माण तेजी से ढहाया जा रहा है, जिस पर तहसील प्रशासन की टीम मौके पर रहकर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का साफ कहना है कि योगी सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन का पूरा फोकस अब जल स्रोतों और तालाबों की जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर है और सरकारी जमीन पूरी तरह मुक्त होने के बाद तालाब को उसके पुराने और प्राकृतिक स्वरूप में वापस लाया जाएगा।1
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी उचित कारण के जेल भेजा जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अफ़सरों को हर्ज़ाना भरना होगा।1
- बहराइच के चित्तौरा झील के अंदर स्थित एक दुकान पर पानी मनमाने ढंग से और अधिक कीमतों पर बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। इस गंभीर आरोप के साथ, लोगों से यह आग्रह किया गया है कि वे झील के अंदर की दुकान से कोई भी सामान खरीदने से बचें।1
- जंतर मंतर पर 'कॉकराच जनता पार्टी' के पहले प्रदर्शन को लेकर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि इसमें कितने लोग शामिल हुए, या विशेष रूप से कितने 'कॉकराच' आए। इस सवाल के पीछे की वजहों को एक वीडियो के माध्यम से तलाशने का दावा किया गया है। वीडियो के अनुसार, अभिजीत दीपके ने अमेरिका से दिल्ली आकर उस भय के आवरण को भेदा है, जो पूरे भारत पर फैला दिया गया था, जिसके चलते लोगों के मन में प्रदर्शन का विचार तक नहीं आता था। इस प्रदर्शन ने ऐसे डर को दूर करने में भूमिका निभाई है। वर्तमान में, कौन इसके पीछे है या कितने लोग इसमें शामिल हैं, यह महत्व नहीं रखता। हालांकि, जब यह पार्टी एक राजनीतिक दल का रूप लेगी, तब उसे इन सवालों का सामना करना होगा और ऐसा होना भी चाहिए। दर्शकों से आग्रह किया गया है कि वे वीडियो को पूरा देखें।1
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में 'संविधान बचाओ संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सांसद राकेश राठौर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर एक बड़ा हमला बोला। उन्होंने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी एक महत्वपूर्ण बयान दिया।1
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