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रांची के चुटिया थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। सिटी डीएसपी के नेतृत्व में चुटिया, लोअर बाजार और लालपुर थाना प्रभारियों ने अपने दलबल के साथ केतारी बागान घाट रोड स्थित एक मकान में छापेमारी की। इस अभियान के दौरान पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लिया। ये युवक पैसे लेकर अवैध तरीके से नौकरी लगवाने के मामले में संलिप्त बताए जा रहे हैं। पुलिस द्वारा इन तीनों युवकों से पूछताछ अभी जारी है।
Ehsan Raja
रांची के चुटिया थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। सिटी डीएसपी के नेतृत्व में चुटिया, लोअर बाजार और लालपुर थाना प्रभारियों ने अपने दलबल के साथ केतारी बागान घाट रोड स्थित एक मकान में छापेमारी की। इस अभियान के दौरान पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लिया। ये युवक पैसे लेकर अवैध तरीके से नौकरी लगवाने के मामले में संलिप्त बताए जा रहे हैं। पुलिस द्वारा इन तीनों युवकों से पूछताछ अभी जारी है।
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- झारखंड में 30 जून 2026 से मतदाता सूची (Voter List) के विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म उपलब्ध कराएंगे, ताकि सभी पात्र नागरिक अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा सकें या अपडेट करा सकें। के. रवि कुमार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सहभागी और संविधान के अनुरूप बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया, जिसमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है, एन्यूमरेशन फॉर्म कैसे भरा जाए, BLO कब घर आएंगे, प्रवासी मतदाता अपने फॉर्म कैसे जमा करेंगे, तथा किन लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा जैसे विषय शामिल थे। इसके अतिरिक्त, यह भी सूचित किया गया कि प्रारूप मतदाता सूची 5 अगस्त को जारी की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया सूचनात्मक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है ताकि सभी योग्य मतदाताओं को वोटर लिस्ट से संबंधित जानकारी मिल सके और वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।1
- गोला, रामगढ़ में हेठ खाखरा-फुलझरिया सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। स्थानीय निवासियों ने इस महत्वपूर्ण सड़क के तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर निर्माण की मांग की है।1
- रामगढ़ जिले के मांडू में एक रजिस्ट्रार की हत्या कर दी गई है। यह घटना जमीन विवाद के कारण हुई बताई जा रही है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए मांडू पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।1
- रेल सुरक्षा बल (RPF) ने अपने 'ऑपरेशन सतर्क' के तहत रांची रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 24 बोतल अवैध शराब बरामद की और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई दिनांक 29.06.2026 को फ्लाइंग टीम/रांची और आरपीएफ पोस्ट/रांची के अधिकारियों व जवानों द्वारा चलाए गए सघन जांच अभियान के दौरान की गई। जांच अभियान के दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-01 स्थित पार्सल कार्यालय गेट के पास एक युवक भूरे रंग का ट्रॉली बैग लिए संदिग्ध अवस्था में खड़ा पाया गया। संदेह होने पर उसे रोका गया और उसके सामान की तलाशी ली गई, जिसमें कुल 24 बोतल व्हिस्की बरामद हुईं। पकड़े गए युवक की पहचान विवेक कुमार सिंह (लगभग 19 वर्ष) पुत्र विपिन कुमार सिंह, निवासी बिहारी बीघा, थाना पंडारक, जिला पटना (बिहार) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह यह शराब रांची से खरीदकर बिहार में अधिक कीमत पर बेचने के उद्देश्य से ले जा रहा था। उप निरीक्षक रवि शेखर, आरपीएफ फ्लाइंग टीम/रांची द्वारा शराब की सभी बोतलों को विधिवत जब्त किया गया, जिनकी अनुमानित कीमत ₹19,000/- बताई गई है। रेलवे परिसर में प्रतिबंधित वस्तुओं के परिवहन पर रोक होने के कारण आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को दिनांक 30.06.2026 को बरामद शराब सहित उत्पाद विभाग, रांची के सुपुर्द कर दिया गया ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस कार्रवाई में फ्लाइंग टीम/रांची से उपनिरीक्षक रवि शेखर, आरक्षक प्रदीप और आरक्षक डी.के. जितरवाल, तथा आरपीएफ पोस्ट/रांची से उपनिरीक्षक रंजीत कुमार शामिल थे।1
- जीएम ऑफिस में हुल क्रांति दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर अरगडा क्षेत्र के जीएम साहब जी ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर श्रद्धा सुमन अर्पित की।1
- हजारीबाग में 30 जून 2026 को सिद्धू कान्हू मुर्मू चौक पर आदिवासी समाज द्वारा हूल दिवस बड़े धूमधाम, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित हुए और सभी ने माल्यार्पण कर महान क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सिद्धू-कान्हू के संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकार की मशाल को आज भी प्रज्वलित बताया। दरअसल, 30 जून 1855 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जब वीर क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू मुर्मू ने अंग्रेजी हुकूमत, जमींदारी शोषण और अन्याय के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका था। यह जल-जंगल-जमीन, स्वाभिमान, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज की एक ऐतिहासिक हुंकार थी। सिद्धू-कान्हू, भाई चांद-भैरव और बहनें फूलो-झानो के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और स्वाभिमान की अमिट मिसाल कायम की। यह क्रांति 1857 के सिपाही विद्रोह से दो साल पहले 30 जून 1855 को झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव में शुरू हुई थी। उस दिन लगभग 400 गांवों से 50,000 से अधिक आदिवासी इकट्ठा हुए थे, जहां सिद्धू-कान्हू ने अंग्रेजों के खिलाफ 'हूल' (विद्रोह) का बिगुल फूंका था। इस आंदोलन का प्रसिद्ध नारा "करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो" इतिहास में अमर है। अंग्रेजों और उनके चाटुकार जमींदारों द्वारा आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर कब्जे, अत्यधिक लगान, कर्ज के जाल और पुलिस-कचहरी द्वारा शासकों का साथ देने के कारण यह विद्रोह बेहद हिंसक और व्यापक था। इस लड़ाई में पारंपरिक हथियारों से लैस लगभग 20,000 आदिवासियों ने अपनी मातृभूमि के लिए शहादत दी, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को आदिवासियों की शक्ति का एहसास हुआ और उन्हें पीछे हटना पड़ा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता (चाईबासा) किस्टो कुमार बेसरा ने कहा कि महापुरुषों के संघर्ष से सीख लेकर समाज को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज उनके दिखाए मार्ग पर चलकर शिक्षा, अधिकार और एकता के लिए काम नहीं करेगा, तब तक श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी, और यह क्रांति अन्याय के खिलाफ खड़े होने तथा अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की सीख देती है। आदिवासी सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने कहा कि हूल दिवस आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है, तथा संगठन, संस्कृति और संघर्ष ही समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया। आदिवासी समाज के संयोजक रमेश कुमार हेम्ब्रोम ने बताया कि महापुरुषों का सपना अभी पूरी तरह साकार नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से महापुरुषों के वंशजों को गोद लेने और एस.पी.टी. एवं सी.एन.टी एक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग की। पवन तिग्गा ने कहा कि सिद्धू-कान्हू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक है, और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष तथा एकजुटता, जागरूकता बेहद जरूरी है। इस मौके पर आदिवासी सरना समिति के सचिव सुनिल लकड़ा, सुशील ओड़िया, महालाल हंसदा, मुखिया संझली मुर्मू, पूर्व मुखिया महादेव सोरेन, रवि लिंडा, पाहन बंधन टोप्पो, बंधन एक्का, निरज कुमार बेसरा, शिवजी टुडू, पप्पू एक्का, प्रदीप बेदिया, ललीता सोरेन, प्रतिमा सोरेन, मुखिया दयामनी टोप्पो, संजय टोप्पो, प्रमिला मुर्मू, अम्बिका टोप्पो, प्रदीप मुर्मू, सुधीर बासके, जगन कच्छप, आनन्द बासके, रघु हंसदा, कैलाश किस्कू, सुनील सोरेन, रिना सोरेन, बगुन सोरेन, मनी टोप्पो, सोहन किस्कू, प्रदीप कुमार मांझी, सोनी टोप्पो, अनामिका तिर्की, रीना तिर्की, रीना सोरेन, पप्पू एक्का, वीरेंद्र महली, बसंत सोरेन सहित आदिवासी समाज के हजारों महिला-पुरुष उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, गर्व और एकता से ओतप्रोत रहा, जिसने एक बार फिर संदेश दिया कि सिद्धू-कान्हू और अन्य वीर शहीदों का संघर्ष आज भी समाज को अपने अधिकारों, अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होने को प्रेरित करता है।1
- गिरिडीह में एक रेजिस्टर की निर्मम हत्या कर दी गई है। यह घटना जमीन विवाद के कारण हुई है। इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।1
- रांची में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल की जा रही है।1
- जमशेदपुर में हिमांशु सिंह की मौत के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल है। इस मामले को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। साथ ही, पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच, एसपी सिटी की गाड़ी से जुड़ी एक अन्य घटना भी शहर में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। पूरे घटनाक्रम की जानकारी उपलब्ध और सत्यापित तथ्यों के आधार पर दी जा रही है। पुलिस की जांच फिलहाल जारी है और मामले में आधिकारिक अपडेट्स का इंतजार किया जा रहा है। यह जानकारी केवल सूचना और जन जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या पक्ष को दोषी ठहराना नहीं है, क्योंकि इस मामले पर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।1