बनारस जिले के बरजी गांव में 47 वर्षीय भोथू यादव की शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। मारपीट में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह घटना बरजी गांव में कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है, खासकर भोथू यादव की अत्यंत गरीबी को देखते हुए। भोथू यादव अपने भाइयों में सबसे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले थे। एक दुर्घटना में उन्होंने अपनी एक आंख भी खो दी थी, जिसके बावजूद वह एक आंख से ही खेती और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उन्होंने अपनी चार बेटियों और दो बेटों की शादी में अपनी लगभग पाँच-सात बिस्वा जमीन तक बेच दी थी, और अंत में उनके पास सिर्फ चार बिस्वा जमीन बची थी। वह एक टीनशेड के घर में रहते थे, जिसकी दीवारें तो खड़ी थीं, लेकिन छत नहीं बन पाई थी। उनकी बड़ी बहन रसीला यादव के अनुसार, भोथू की मौत के बाद घर में मात्र 100 रुपये थे, और अंतिम संस्कार व कर्मकांड की व्यवस्था भी पड़ोसियों और भतीजों ने मिलकर की। आर्थिक तंगी ऐसी थी कि उनके बड़े बेटे ने तेरह दिन का पूरा कर्मकांड एक साथ कर दिया। आमतौर पर हत्याओं के पीछे जर (पैसा), जोरू (महिला) या जमीन का विवाद होता है, लेकिन बरजी गांव के लोग कहते हैं कि भोथू यादव के मामले में इनमें से कोई भी कारण दूर-दूर तक नहीं था। परिजनों का आरोप है कि भोथू यादव की हत्या सिर्फ मनबढ़ई और दबंगई दिखाने के लिए की गई। कथित आरोपी, जो अविवाहित है और भोथू यादव के घर से दो घर छोड़कर रहता है, पर आरोप है कि वह गांव की राजनीति में अपना दबदबा और एक ऐसी छवि बनाना चाहता था जिसके सामने कोई खड़ा न हो। परिवार ने कई घटनाओं का जिक्र किया है जो इस हत्या के पीछे के इरादों पर सवाल उठाती हैं। मई महीने की शुरुआत में बरजी गांव की राजभर बस्ती में आई एक बारात के दौरान भोथू यादव के बड़े बेटे की पिटाई हुई थी। परिजनों का दावा है कि इस मामले में कठिरांव चौकी और फूलपुर थाने में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 30 मई को बुलाई गई पंचायत में समझौते के बजाय भोथू यादव के परिवार को "तीन दिन में मार देंगे" की धमकी मिली। अगले ही दिन, 31 मई को बाजार से लौटते समय भोथू यादव की फिर पिटाई हुई, जिसके बाद उन्होंने और उनके बेटे ने पुलिस को तहरीर दी। परिवार का आरोप है कि इस बार भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, और फिर 6 जून को भोथू यादव की बरजी के वन क्षेत्र में स्थित एक मशीन पर हमला कर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद पुलिस सक्रिय हो गई है और गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी युवक के घर के आसपास पुलिस सुरक्षा दी गई है ताकि कोई भीड़ उत्तेजना में उसके घर को नुकसान न पहुंचाए, हालांकि भोथू यादव के घर या परिवार की सुरक्षा में कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं है। बरजी गांव में यह चर्चा गर्म है कि यदि पहले हुई शिकायतों और धमकियों पर कार्रवाई हुई होती, तो क्या भोथू यादव आज जिंदा होते। यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि बदलते ग्रामीण समाज की कहानी बनता जा रहा है, जहां विवाद अब सिर्फ जमीन से नहीं, बल्कि दबंग छवि बनाने और भय पैदा करने की कोशिशों से जन्म लेते हैं। बनारस जिले के पिण्डरा विधानसभा में भी इस साल की शुरुआत में इसी तरह की दो हत्याएं हो चुकी हैं।
बनारस जिले के बरजी गांव में 47 वर्षीय भोथू यादव की शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। मारपीट में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह घटना बरजी गांव में कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है, खासकर भोथू यादव की अत्यंत गरीबी को देखते हुए। भोथू यादव अपने भाइयों में सबसे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले थे। एक दुर्घटना में उन्होंने अपनी एक आंख भी खो दी थी, जिसके बावजूद वह एक आंख से ही खेती और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उन्होंने अपनी चार बेटियों और दो बेटों की शादी में अपनी लगभग पाँच-सात बिस्वा जमीन तक बेच दी थी, और अंत में उनके पास सिर्फ चार बिस्वा जमीन बची थी। वह एक टीनशेड के घर में रहते थे, जिसकी दीवारें तो खड़ी थीं, लेकिन छत नहीं बन पाई थी। उनकी बड़ी बहन रसीला यादव के अनुसार, भोथू की मौत के बाद घर में मात्र 100 रुपये थे, और अंतिम संस्कार व कर्मकांड की व्यवस्था भी पड़ोसियों और भतीजों ने मिलकर की। आर्थिक तंगी ऐसी थी कि उनके बड़े बेटे ने तेरह दिन का पूरा कर्मकांड एक साथ कर दिया। आमतौर पर हत्याओं के पीछे जर (पैसा), जोरू (महिला) या जमीन का विवाद होता है, लेकिन बरजी गांव के लोग कहते हैं कि भोथू यादव के मामले में इनमें से कोई भी कारण दूर-दूर तक नहीं था। परिजनों का आरोप है कि भोथू यादव की हत्या सिर्फ मनबढ़ई और दबंगई दिखाने के लिए की गई। कथित आरोपी, जो अविवाहित है और भोथू यादव के घर से दो घर छोड़कर रहता है, पर आरोप है कि वह गांव की राजनीति में अपना दबदबा और एक ऐसी छवि बनाना चाहता था जिसके सामने कोई खड़ा न हो। परिवार ने कई घटनाओं का जिक्र किया है जो इस हत्या के पीछे के इरादों पर सवाल उठाती हैं। मई महीने की शुरुआत में बरजी गांव की राजभर बस्ती में आई एक बारात के दौरान भोथू यादव के बड़े बेटे की पिटाई हुई थी। परिजनों का दावा है कि इस मामले में कठिरांव चौकी और फूलपुर थाने में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 30 मई को बुलाई गई पंचायत में समझौते के बजाय भोथू यादव के परिवार को "तीन दिन में मार देंगे" की धमकी मिली। अगले ही दिन, 31 मई को बाजार से लौटते समय भोथू यादव की फिर पिटाई हुई, जिसके बाद उन्होंने और उनके बेटे ने पुलिस को तहरीर दी। परिवार का आरोप है कि इस बार भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, और फिर 6 जून को भोथू यादव की बरजी के वन क्षेत्र में स्थित एक मशीन पर हमला कर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद पुलिस सक्रिय हो गई है और गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी युवक के घर के आसपास पुलिस सुरक्षा दी गई है ताकि कोई भीड़ उत्तेजना में उसके घर को नुकसान न पहुंचाए, हालांकि भोथू यादव के घर या परिवार की सुरक्षा में कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं है। बरजी गांव में यह चर्चा गर्म है कि यदि पहले हुई शिकायतों और धमकियों पर कार्रवाई हुई होती, तो क्या भोथू यादव आज जिंदा होते। यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि बदलते ग्रामीण समाज की कहानी बनता जा रहा है, जहां विवाद अब सिर्फ जमीन से नहीं, बल्कि दबंग छवि बनाने और भय पैदा करने की कोशिशों से जन्म लेते हैं। बनारस जिले के पिण्डरा विधानसभा में भी इस साल की शुरुआत में इसी तरह की दो हत्याएं हो चुकी हैं।
- वाराणसी के कैन्ट थाना क्षेत्र स्थित नदेशर निवासी एक परिवार ने स्थानीय पुलिस पर उनके मामले की सुनवाई न करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए एडीजी वाराणसी जोन कार्यालय और उसके बाद कमिश्नर वाराणसी से संपर्क किया। पीड़िता राजकुमारी देवी ने शिकायत में बताया कि संपत्ति विवाद के चलते 7 जून को संतोष सेठ ने उनके मकान में घुसकर कई कमरों में ताला लगा दिया था। इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस चौकी पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय पुलिस से निराशा हाथ लगने के बाद, परिवार के लगभग 25 सदस्यों ने एकजुट होकर पहले एडीजी कार्यालय और फिर कमिश्नर वाराणसी के पास पहुंचकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की। बताया गया है कि मामले को संबंधित अधिकारियों को जांच के लिए भेज दिया गया है।1
- थाना चौकी से न्याय न मिलने पर कमरे पर कब्जे का आरोप, न्याय की गुहार लेकर ढोल-नगाड़े के साथ IG कार्यालय पहुंचा परिवार* वाराणसी के नदेसर राजबाजार स्थित मकान संख्या S-17/23 में कमरे पर जबरन कब्जा किए जाने का आरोप लगाते हुए स्वर्गीय सुरेश चंद का परिवार सोमवार को ढोल-नगाड़ों के साथ IG जोन कार्यालय पहुंचा। परिजनों का कहना है कि सभी वैध दस्तावेज होने के बावजूद उनके कमरे में ताला लगाकर कब्जा कर लिया गया है। मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस चौकी में की गई, लेकिन कार्रवाई न होने और दूसरे पक्ष का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए परिवार ने उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की है।1
- वाराणसी के ग्राम चक्का में आदिवासी मुसहर समुदाय की जमीन पर यादव लोगों और ग्राम प्रधान मधुबन ने कब्जा कर लिया है, जिससे आदिवासी समुदाय के लोग बेहद परेशान हैं। जांच के दौरान यह सामने आया है कि कुल 10 बीघा जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है।1
- जौनपुर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत महेरव गांव के पास सड़क किनारे एक अज्ञात युवक का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना की सूचना मिलते ही जलालपुर थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और मृतक युवक के शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस अब इस मामले की छानबीन में जुट गई है।1
- वाराणसी में अखिल भारतीय सनातन न्यास द्वारा माँ बागेश्वरी देवी प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा के आठवें दिन महंत बालक देवाचार्य जी महाराज ने भरत चरित्र का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन प्रस्तुत किया। उनके प्रवचन को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विह्वल हो गए और उनकी आँखें नम हो गईं। महंत देवाचार्य ने अपने संबोधन में भरत को भारतीय संस्कृति में त्याग, समर्पण, भ्रातृप्रेम, धर्मनिष्ठा और आदर्श शासन का सर्वोच्च प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि सत्ता और वैभव से बढ़कर मर्यादा, कर्तव्य और पारिवारिक प्रेम होता है। कथा के अनुसार, जब भरत को भगवान श्रीराम के वनवास और महाराज दशरथ के निधन का समाचार मिला, तब उन्होंने अपनी माता कैकेयी के अनुचित वरदानों का कठोर विरोध किया। स्वयं को इस घटना के लिए उत्तरदायी मानते हुए उन्होंने गहरा दुःख व्यक्त किया, अयोध्या का राज सिंहासन स्वीकार करने से इंकार किया और चित्रकूट जाकर प्रभु श्रीराम से राजगद्दी संभालने का आग्रह किया। कथा व्यास ने इस प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाओं को अयोध्या के सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं एक सेवक के रूप में नंदीग्राम में रहकर राज्य का संचालन किया, जो विश्व इतिहास में दुर्लभ त्याग, निष्ठा और समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने वर्तमान सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन में भरत के आदर्शों की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि यदि व्यक्ति उनके चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का पालन करे, तो परिवार, समाज और राष्ट्र में सुख, शांति एवं सद्भाव का वातावरण स्थापित हो सकता है। इस कार्यक्रम में आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' की भी गरिमामयी उपस्थिति रही और उन्होंने व्यास पीठ की आरती उतारी। मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया। कथा की समाप्ति पर डॉ. अजय जायसवाल, रविशंकर सिंह, जयशंकर गुप्ता, प्रमोद यादव मुन्ना, वतन कुशवाहा, किशोर सेठ, विजय कुमार, राजेश गुप्ता, मुन्नू लाल, संजय महाराज, मंगल सेठ, रवि झुनझुनवाला, श्री प्रकाश, विपुल गुप्ता, विष्णु गुप्ता, डॉ. पुष्पा जायसवाल, रोशनी जी और अनामिका जी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, गणमान्य नागरिकों और धर्मप्रेमियों ने श्रीराम नाम संकीर्तन एवं आरती में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।1
- वाराणसी में 2026 की उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए चेतगंज पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। परीक्षा के मद्देनजर, चेतगंज थाना प्रभारी वी.के. शुक्ला ने अपनी टीम के साथ क्षेत्र के सभी परीक्षा केंद्रों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और लगातार गश्त के लिए आवश्यक निर्देश दिए। परीक्षा केंद्रों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है और लगातार पेट्रोलिंग के माध्यम से माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखा गया है। अभ्यर्थियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उन्होंने अभ्यर्थियों से बिना घबराए शांति से परीक्षा देने की अपील की। चेतगंज पुलिस इस यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है।1
- वाराणसी में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा 2026 को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए चेतगंज पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। चेतगंज थाना प्रभारी वी.के. शुक्ला ने अपनी टीम के साथ क्षेत्र के सभी परीक्षा केंद्रों का गहन निरीक्षण किया, जिसका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेना था। निरीक्षण के दौरान, थाना प्रभारी ने केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और लगातार गश्त करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर विशेष नजर रखी जा सके। लगातार पेट्रोलिंग से क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखा गया है और अभ्यर्थियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। थाना प्रभारी शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे बिना घबराए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी परीक्षा दें।1
- आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह बैठक ममता बनर्जी के 8 जून को होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने से ठीक पहले हुई है।1