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*इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है। *इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है।

2 hrs ago
user_Amin sisgar
Amin sisgar
इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

*इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है। *इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है।

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  • *इंदौर में क्राइम ब्रांच का बड़ा प्रहार: 12 लाख की ‘MD’ ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार* इंदौर: शहर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध मादक पदार्थ “MD” के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 121 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 12 लाख 10 हजार रुपए बताई जा रही है। पुलिस को यह सफलता मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर मिली। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की और आरोपी को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शैलेंद्र चौहान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नाहरगढ़, सीतामऊ, जिला मंदसौर का निवासी है और वर्तमान में इंदौर में सक्रिय था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही मंदसौर जिले के नाहरगढ़ थाने में मारपीट से संबंधित एक मामला दर्ज है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 121 ग्राम एमडी के अलावा एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। जब्त किए गए कुल मश्रूका की कीमत करीब 12 लाख 50 हजार रुपए आंकी गई है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह यह मादक पदार्थ कहां से लाया और शहर में किन-किन लोगों तक इसकी सप्लाई करता था। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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    *इंदौर में क्राइम ब्रांच का बड़ा प्रहार: 12 लाख की ‘MD’ ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार*
इंदौर: शहर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध मादक पदार्थ “MD” के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 121 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 12 लाख 10 हजार रुपए बताई जा रही है।
पुलिस को यह सफलता मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर मिली। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की और आरोपी को धर दबोचा।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान शैलेंद्र चौहान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नाहरगढ़, सीतामऊ, जिला मंदसौर का निवासी है और वर्तमान में इंदौर में सक्रिय था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही मंदसौर जिले के नाहरगढ़ थाने में मारपीट से संबंधित एक मामला दर्ज है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 121 ग्राम एमडी के अलावा एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। जब्त किए गए कुल मश्रूका की कीमत करीब 12 लाख 50 हजार रुपए आंकी गई है।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह यह मादक पदार्थ कहां से लाया और शहर में किन-किन लोगों तक इसकी सप्लाई करता था। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
    user_Amin sisgar
    Amin sisgar
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • दिल्ली शहर में एक दर्दनाक हादसे में युवती की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक युवती थार गाड़ी की छत पर चढ़कर शराब पी रही थी और मस्ती कर रही थी। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गई। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के वक्त युवती के साथ और कौन मौजूद था। #Foryou #viral #reelsindia #viralreel
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    दिल्ली शहर में एक दर्दनाक हादसे में युवती की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक युवती थार गाड़ी की छत पर चढ़कर शराब पी रही थी और मस्ती कर रही थी। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गई। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के वक्त युवती के साथ और कौन मौजूद था। #Foryou #viral #reelsindia #viralreel
    user_SUNDARAM EXPRESS NEWS
    SUNDARAM EXPRESS NEWS
    मल्हारगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर
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    गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में 
विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर
    user_सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Ck_news
    1
    Post by Ck_news
    user_Ck_news
    Ck_news
    Video Creator इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • चोरी का माल और दबंगई की ढाल! खजराना के रिहायशी इलाके में मौत को दावत देता अवैध भंगार कारोबार।" खजराना में अवैध भंगार माफिया का आतंक! 🛑 रिहायशी इलाके में जान जोखिम में डालकर चल रहा है मौत का कारोबार। आरोप है कि यहाँ चोरी का माल खपाया जाता है और विरोध करने वालों को धमकाया जाता है। आखिर प्रशासन की चुप्पी का राज क्या है? न्याय के लिए इस वीडियो को शेयर करें! 📢 #Khajrana #Indore #ViralNews #IndoreDiaries #Justice ScrapMafia PradeshExpress StreetReport IndorePolice MadhyaPradesh
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    चोरी का माल और दबंगई की ढाल! खजराना के रिहायशी इलाके में मौत को दावत देता अवैध भंगार कारोबार।"
खजराना में अवैध भंगार माफिया का आतंक! 🛑
रिहायशी इलाके में जान जोखिम में डालकर चल रहा है मौत का कारोबार। आरोप है कि यहाँ चोरी का माल खपाया जाता है और विरोध करने वालों को धमकाया जाता है। आखिर प्रशासन की चुप्पी का राज क्या है?
न्याय के लिए इस वीडियो को शेयर करें! 📢
#Khajrana #Indore #ViralNews #IndoreDiaries #Justice ScrapMafia PradeshExpress StreetReport IndorePolice MadhyaPradesh
    user_Tikhi baat
    Tikhi baat
    News Anchor इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • मध्यप्रदेश के इंदौर में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नकली टाटा नमक बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकली नमक, कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई है।
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    मध्यप्रदेश के इंदौर में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नकली टाटा नमक बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकली नमक, कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई है।
    user_एस. एस. न्यूज सर्विस
    एस. एस. न्यूज सर्विस
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Post by Vishal Jadhav
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    Post by Vishal Jadhav
    user_Vishal Jadhav
    Vishal Jadhav
    पत्रकार NCR समाचार इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • पश्चिम बंगाल की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी रैली के दौरान विवादित बयान दे दिया… सीएम योगी ने कहा कि “कोई मौलाना क्या बक रहा है, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है… BJP सरकार आने दीजिए, ये सभी बंगाल की सड़कों पर झाड़ू लगाते नजर आएंगे…” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है…#viralnews #CMYogi #yogi #bangal #bangalchunav
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    पश्चिम बंगाल की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी रैली के दौरान विवादित बयान दे दिया…
सीएम योगी ने कहा कि “कोई मौलाना क्या बक रहा है, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है… BJP सरकार आने दीजिए, ये सभी बंगाल की सड़कों पर झाड़ू लगाते नजर आएंगे…”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है…#viralnews #CMYogi #yogi #bangal #bangalchunav
    user_SUNDARAM EXPRESS NEWS
    SUNDARAM EXPRESS NEWS
    मल्हारगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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