*जल ही जीवन… और इसी जीवन को बचाने का संकल्प बना जनआंदोलन* *एतिहासिक धरोहर को बचाने का प्रयास मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन द्वारा* *जल गंगा संवर्धन अभियान के सह पाठी बनी राहत समर्पण सेवा समिति, प्राशासनिक सहयोग भी प्राप्त* विजयराघवगढ़ एक ओर जहां आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान और परंपराएं धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं वहीं ग्राम सिंघवारा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने उम्मीद की नई किरण जगा दी। जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ के साथ न सिर्फ जल संरक्षण का संदेश दिया गया बल्कि एक पिछड़े गांव को संवारने की सशक्त पहल भी शुरू हुई।करीब 100 वर्ष पुरानी प्राचीन बावडी जो कभी गांव की जीवनरेखा हुआ करती थी आज उपेक्षा और समय की मार से जर्जर हो चुकी थी। लेकिन 19 मार्च का दिन इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए नया सवेरा लेकर आया। पूजा-अर्चना के साथ जैसे ही श्रमदान शुरू हुआ ऐसा लगा मानो गांव की आत्मा फिर से जाग उठी हो। मिट्टी और कचरे से भरी बावड़ी को साफ करते ग्रामीणों के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और गर्व साफ दिखाई दे रहा था। यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं था बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और भविष्य को सुरक्षित करने का भावनात्मक प्रयास था।इस सराहनीय मुहिम के केंद्र में रहे जनपद पंचायत सीईओ ब्रतेश जैन जिनकी पहल ने इस भूले बिसरे जल स्रोत को फिर से जीवंत करने का रास्ता दिखाया। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गिरते भू-जल स्तर को बचाने के लिए पुराने जल स्रोतों का संरक्षण ही सबसे बड़ा समाधान है।मुख्य अतिथि उदयराज सिंह चौहान ने भी भावुक शब्दों में कहा कि जल केवल संसाधन नहींहजीवन का आधार है। अगर आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।इस अभियान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद नवांकुर संस्था राहत समर्पण सेवा समिति और एसीसी अदानी फाउंडेशन की टीम ने जिस समर्पण के साथ श्रमदान किया वह समाज के लिए प्रेरणा श्रोत रहा । ग्रामीणों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया और यह साबित कर दिया कि जब जनभागीदारी जुड़ती है तो बदलाव निश्चित होता है।यह पहल सिर्फ एक बावड़ी की सफाई तक सीमित नहीं है बल्कि एक पिछड़े गांव को नई पहचान देने का प्रयास है। एक ऐसा प्रयास जो इतिहास को सहेजते हुए भविष्य को संवारने का काम कर रहा है।कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया की हम अपने जल स्रोतों को बचाएंगे अपनी धरोहर को संजोएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देंगे। हम सब मिल कर गाव गाव यही संदेश पहुचाएगे। ग्राम सिंघवारा की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है जहां एक छोटी सी शुरुआत ने पूरे समाज को जागरूक करने की ताकत दिखा दी। आने वाले समय मे योजनाओं के मार्गदर्शक मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन ने प्रातः काल सहयोगी टीमों को लेकर सिघवारा गाव पहुचे गाव के लोगों को एकत्र कर उन्हे श्रमदान करने के लिए प्रेरित कर खुद भी एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए श्रमदान किया और ग्रामीणो को जागरूक करते हुए कहा जल संरक्षण के लिए तरह तरह से कार्य किए जाएगे सभी लोग बरसात के पानी को भी एकत्र करने के लिए अपने घरो के नजदीक सोकता बनाए ताकी आसपास का जल स्तर सामान्य बना रहे। वही श्रीजैन ने यह भी कहा की शासकीय योजनाओं को तभी फलीभूत किया जा सकता है जब स्थानीय लोगों मे जागरूक मिले और उनका सहयोग भी मिले। उन्होंने सिघवारा गाव के लिए कहा इस गाव की एतिहासिक धरोहर को सुरक्षित के साथ इस गाव को जिले मे प्रथम स्थान पर लाना है ताकि यह गाव पिछड़ा ना रहे *जल ही जीवन… और इसी जीवन को बचाने का संकल्प बना जनआंदोलन* *एतिहासिक धरोहर को बचाने का प्रयास मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन द्वारा* *जल गंगा संवर्धन अभियान के सह पाठी बनी राहत समर्पण सेवा समिति, प्राशासनिक सहयोग भी प्राप्त* विजयराघवगढ़ एक ओर जहां आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान और परंपराएं धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं वहीं ग्राम सिंघवारा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने उम्मीद की नई किरण जगा दी। जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ के साथ न सिर्फ जल संरक्षण का संदेश दिया गया बल्कि एक पिछड़े गांव को संवारने की सशक्त पहल भी शुरू हुई।करीब 100 वर्ष पुरानी प्राचीन बावडी जो कभी गांव की जीवनरेखा हुआ करती थी आज उपेक्षा और समय की मार से जर्जर हो चुकी थी। लेकिन 19 मार्च का दिन इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए नया सवेरा लेकर आया। पूजा-अर्चना के साथ जैसे ही श्रमदान शुरू हुआ ऐसा लगा मानो गांव की आत्मा फिर से जाग उठी हो। मिट्टी और कचरे से भरी बावड़ी को साफ करते ग्रामीणों के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और गर्व साफ दिखाई दे रहा था। यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं था बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और भविष्य को सुरक्षित करने का भावनात्मक प्रयास था।इस सराहनीय मुहिम के केंद्र में रहे जनपद पंचायत सीईओ ब्रतेश जैन जिनकी पहल ने इस भूले बिसरे जल स्रोत को फिर से जीवंत करने का रास्ता दिखाया। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गिरते भू-जल स्तर को बचाने के लिए पुराने जल स्रोतों का संरक्षण ही सबसे बड़ा समाधान है।मुख्य अतिथि उदयराज सिंह चौहान ने भी भावुक शब्दों में कहा कि जल केवल संसाधन नहींहजीवन का आधार है। अगर आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।इस अभियान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद नवांकुर संस्था राहत समर्पण सेवा समिति और एसीसी अदानी फाउंडेशन की टीम ने जिस समर्पण के साथ श्रमदान किया वह समाज के लिए प्रेरणा श्रोत रहा । ग्रामीणों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया और यह साबित कर दिया कि जब जनभागीदारी जुड़ती है तो बदलाव निश्चित होता है।यह पहल सिर्फ एक बावड़ी की सफाई तक सीमित नहीं है बल्कि एक पिछड़े गांव को नई पहचान देने का प्रयास है। एक ऐसा प्रयास जो इतिहास को सहेजते हुए भविष्य को संवारने का काम कर रहा है।कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया की हम अपने जल स्रोतों को बचाएंगे अपनी धरोहर को संजोएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देंगे। हम सब मिल कर गाव गाव यही संदेश पहुचाएगे। ग्राम सिंघवारा की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है जहां एक छोटी सी शुरुआत ने पूरे समाज को जागरूक करने की ताकत दिखा दी। आने वाले समय मे योजनाओं के मार्गदर्शक मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन ने प्रातः काल सहयोगी टीमों को लेकर सिघवारा गाव पहुचे गाव के लोगों को एकत्र कर उन्हे श्रमदान करने के लिए प्रेरित कर खुद भी एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए श्रमदान किया और ग्रामीणो को जागरूक करते हुए कहा जल संरक्षण के लिए तरह तरह से कार्य किए जाएगे सभी लोग बरसात के पानी को भी एकत्र करने के लिए अपने घरो के नजदीक सोकता बनाए ताकी आसपास का जल स्तर सामान्य बना रहे। वही श्रीजैन ने यह भी कहा की शासकीय योजनाओं को तभी फलीभूत किया जा सकता है जब स्थानीय लोगों मे जागरूक मिले और उनका सहयोग भी मिले। उन्होंने सिघवारा गाव के लिए कहा इस गाव की एतिहासिक धरोहर को सुरक्षित के साथ इस गाव को जिले मे प्रथम स्थान पर लाना है ताकि यह गाव पिछड़ा ना रहे
*जल ही जीवन… और इसी जीवन को बचाने का संकल्प बना जनआंदोलन* *एतिहासिक धरोहर को बचाने का प्रयास मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन द्वारा* *जल गंगा संवर्धन अभियान के सह पाठी बनी राहत समर्पण सेवा समिति, प्राशासनिक सहयोग भी प्राप्त* विजयराघवगढ़ एक ओर जहां आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान और परंपराएं धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं वहीं ग्राम सिंघवारा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने उम्मीद की नई किरण जगा दी। जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ के साथ न सिर्फ जल संरक्षण का संदेश दिया गया बल्कि एक पिछड़े गांव को संवारने की सशक्त पहल भी शुरू हुई।करीब 100 वर्ष पुरानी प्राचीन बावडी जो कभी गांव की जीवनरेखा हुआ करती थी आज उपेक्षा और समय की मार से जर्जर हो चुकी थी। लेकिन 19 मार्च का दिन इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए नया सवेरा लेकर आया। पूजा-अर्चना के साथ जैसे ही श्रमदान शुरू हुआ ऐसा लगा मानो गांव की आत्मा फिर से जाग उठी हो। मिट्टी और कचरे से भरी बावड़ी को साफ करते ग्रामीणों के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और गर्व साफ दिखाई दे रहा था। यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं था बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और भविष्य को सुरक्षित करने का भावनात्मक प्रयास था।इस सराहनीय मुहिम के केंद्र में रहे जनपद पंचायत सीईओ ब्रतेश जैन जिनकी पहल ने इस भूले बिसरे जल स्रोत को फिर से जीवंत करने का रास्ता दिखाया। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गिरते भू-जल स्तर को बचाने के लिए पुराने जल स्रोतों का संरक्षण ही सबसे बड़ा समाधान है।मुख्य अतिथि उदयराज सिंह चौहान ने भी भावुक शब्दों में कहा कि जल केवल संसाधन नहींहजीवन का आधार है। अगर आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।इस अभियान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद नवांकुर संस्था राहत समर्पण सेवा समिति और एसीसी अदानी फाउंडेशन की टीम ने जिस समर्पण के साथ श्रमदान किया वह समाज के लिए प्रेरणा श्रोत रहा । ग्रामीणों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया और यह साबित कर दिया कि जब जनभागीदारी जुड़ती है तो बदलाव निश्चित होता है।यह पहल सिर्फ एक बावड़ी की सफाई तक सीमित नहीं है बल्कि एक पिछड़े गांव को नई पहचान देने का प्रयास है। एक ऐसा प्रयास जो इतिहास को सहेजते हुए भविष्य को संवारने का काम कर रहा है।कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया की हम अपने जल स्रोतों को बचाएंगे अपनी धरोहर को संजोएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देंगे। हम सब मिल कर गाव गाव यही संदेश पहुचाएगे। ग्राम सिंघवारा की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है जहां एक छोटी सी शुरुआत ने पूरे समाज को जागरूक करने की ताकत दिखा दी। आने वाले समय मे योजनाओं के मार्गदर्शक मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन ने प्रातः काल सहयोगी टीमों को लेकर सिघवारा गाव पहुचे गाव के लोगों को एकत्र कर उन्हे श्रमदान करने के लिए प्रेरित कर खुद भी एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए श्रमदान किया और ग्रामीणो को जागरूक करते हुए कहा जल संरक्षण के लिए तरह तरह से कार्य किए जाएगे सभी लोग बरसात के पानी को भी एकत्र करने के लिए अपने घरो के नजदीक सोकता बनाए ताकी आसपास का जल स्तर सामान्य बना रहे। वही श्रीजैन ने यह भी कहा की शासकीय योजनाओं को तभी फलीभूत किया जा सकता है जब स्थानीय लोगों मे जागरूक मिले और उनका सहयोग भी मिले। उन्होंने सिघवारा गाव के लिए कहा इस गाव की एतिहासिक धरोहर को सुरक्षित के साथ इस गाव को जिले मे प्रथम स्थान पर लाना है ताकि यह गाव पिछड़ा ना रहे *जल ही जीवन… और इसी जीवन को बचाने का संकल्प बना जनआंदोलन* *एतिहासिक धरोहर को बचाने का प्रयास मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन द्वारा* *जल गंगा संवर्धन अभियान के सह पाठी बनी राहत समर्पण सेवा समिति, प्राशासनिक सहयोग भी प्राप्त* विजयराघवगढ़ एक ओर जहां आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान और परंपराएं धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं वहीं ग्राम सिंघवारा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने उम्मीद की नई किरण जगा दी। जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ के साथ न सिर्फ जल संरक्षण का संदेश दिया गया बल्कि एक पिछड़े गांव को संवारने की सशक्त पहल भी शुरू हुई।करीब 100 वर्ष पुरानी प्राचीन बावडी जो कभी गांव की जीवनरेखा हुआ करती थी आज उपेक्षा और समय की मार से जर्जर हो चुकी थी। लेकिन 19 मार्च का दिन इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए नया सवेरा लेकर आया। पूजा-अर्चना के साथ जैसे ही श्रमदान शुरू हुआ ऐसा लगा मानो गांव की आत्मा फिर से जाग उठी हो। मिट्टी और कचरे से भरी बावड़ी को साफ करते ग्रामीणों के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और गर्व साफ दिखाई दे रहा था। यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं था बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और भविष्य को सुरक्षित करने का भावनात्मक प्रयास था।इस सराहनीय मुहिम के केंद्र में रहे जनपद पंचायत सीईओ ब्रतेश जैन जिनकी पहल ने इस भूले बिसरे जल स्रोत को फिर से जीवंत करने का रास्ता दिखाया। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गिरते भू-जल स्तर को बचाने के लिए पुराने जल स्रोतों का संरक्षण ही सबसे बड़ा समाधान है।मुख्य अतिथि उदयराज सिंह चौहान ने भी भावुक शब्दों में कहा कि जल केवल संसाधन नहींहजीवन का आधार है। अगर आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।इस अभियान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद नवांकुर संस्था राहत समर्पण सेवा समिति और एसीसी अदानी फाउंडेशन की टीम ने जिस समर्पण के साथ श्रमदान किया वह समाज के लिए प्रेरणा श्रोत रहा । ग्रामीणों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया और यह साबित कर दिया कि जब जनभागीदारी जुड़ती है तो बदलाव निश्चित होता है।यह पहल सिर्फ एक बावड़ी की सफाई तक सीमित नहीं है बल्कि एक पिछड़े गांव को नई पहचान देने का प्रयास है। एक ऐसा प्रयास जो इतिहास को सहेजते हुए भविष्य को संवारने का काम कर रहा है।कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया की हम अपने जल स्रोतों को बचाएंगे अपनी धरोहर को संजोएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देंगे। हम सब मिल कर गाव गाव यही संदेश पहुचाएगे। ग्राम सिंघवारा की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है जहां एक छोटी सी शुरुआत ने पूरे समाज को जागरूक करने की ताकत दिखा दी। आने वाले समय मे योजनाओं के मार्गदर्शक मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन ने प्रातः काल सहयोगी टीमों को लेकर सिघवारा गाव पहुचे गाव के लोगों को एकत्र कर उन्हे श्रमदान करने के लिए प्रेरित कर खुद भी एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए श्रमदान किया और ग्रामीणो को जागरूक करते हुए कहा जल संरक्षण के लिए तरह तरह से कार्य किए जाएगे सभी लोग बरसात के पानी को भी एकत्र करने के लिए अपने घरो के नजदीक सोकता बनाए ताकी आसपास का जल स्तर सामान्य बना रहे। वही श्रीजैन ने यह भी कहा की शासकीय योजनाओं को तभी फलीभूत किया जा सकता है जब स्थानीय लोगों मे जागरूक मिले और उनका सहयोग भी मिले। उन्होंने सिघवारा गाव के लिए कहा इस गाव की एतिहासिक धरोहर को सुरक्षित के साथ इस गाव को जिले मे प्रथम स्थान पर लाना है ताकि यह गाव पिछड़ा ना रहे
- *जल ही जीवन… और इसी जीवन को बचाने का संकल्प बना जनआंदोलन* *एतिहासिक धरोहर को बचाने का प्रयास मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन द्वारा* *जल गंगा संवर्धन अभियान के सह पाठी बनी राहत समर्पण सेवा समिति, प्राशासनिक सहयोग भी प्राप्त* विजयराघवगढ़ एक ओर जहां आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान और परंपराएं धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं वहीं ग्राम सिंघवारा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने उम्मीद की नई किरण जगा दी। जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ के साथ न सिर्फ जल संरक्षण का संदेश दिया गया बल्कि एक पिछड़े गांव को संवारने की सशक्त पहल भी शुरू हुई।करीब 100 वर्ष पुरानी प्राचीन बावडी जो कभी गांव की जीवनरेखा हुआ करती थी आज उपेक्षा और समय की मार से जर्जर हो चुकी थी। लेकिन 19 मार्च का दिन इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए नया सवेरा लेकर आया। पूजा-अर्चना के साथ जैसे ही श्रमदान शुरू हुआ ऐसा लगा मानो गांव की आत्मा फिर से जाग उठी हो। मिट्टी और कचरे से भरी बावड़ी को साफ करते ग्रामीणों के चेहरे पर थकान नहीं बल्कि संतोष और गर्व साफ दिखाई दे रहा था। यह सिर्फ सफाई अभियान नहीं था बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और भविष्य को सुरक्षित करने का भावनात्मक प्रयास था।इस सराहनीय मुहिम के केंद्र में रहे जनपद पंचायत सीईओ ब्रतेश जैन जिनकी पहल ने इस भूले बिसरे जल स्रोत को फिर से जीवंत करने का रास्ता दिखाया। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गिरते भू-जल स्तर को बचाने के लिए पुराने जल स्रोतों का संरक्षण ही सबसे बड़ा समाधान है।मुख्य अतिथि उदयराज सिंह चौहान ने भी भावुक शब्दों में कहा कि जल केवल संसाधन नहींहजीवन का आधार है। अगर आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।इस अभियान में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद नवांकुर संस्था राहत समर्पण सेवा समिति और एसीसी अदानी फाउंडेशन की टीम ने जिस समर्पण के साथ श्रमदान किया वह समाज के लिए प्रेरणा श्रोत रहा । ग्रामीणों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया और यह साबित कर दिया कि जब जनभागीदारी जुड़ती है तो बदलाव निश्चित होता है।यह पहल सिर्फ एक बावड़ी की सफाई तक सीमित नहीं है बल्कि एक पिछड़े गांव को नई पहचान देने का प्रयास है। एक ऐसा प्रयास जो इतिहास को सहेजते हुए भविष्य को संवारने का काम कर रहा है।कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया की हम अपने जल स्रोतों को बचाएंगे अपनी धरोहर को संजोएंगे और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देंगे। हम सब मिल कर गाव गाव यही संदेश पहुचाएगे। ग्राम सिंघवारा की यह पहल अब एक मिसाल बन चुकी है जहां एक छोटी सी शुरुआत ने पूरे समाज को जागरूक करने की ताकत दिखा दी। आने वाले समय मे योजनाओं के मार्गदर्शक मुख्य कार्यपालन अधिकारी ब्रतेश जैन ने प्रातः काल सहयोगी टीमों को लेकर सिघवारा गाव पहुचे गाव के लोगों को एकत्र कर उन्हे श्रमदान करने के लिए प्रेरित कर खुद भी एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए श्रमदान किया और ग्रामीणो को जागरूक करते हुए कहा जल संरक्षण के लिए तरह तरह से कार्य किए जाएगे सभी लोग बरसात के पानी को भी एकत्र करने के लिए अपने घरो के नजदीक सोकता बनाए ताकी आसपास का जल स्तर सामान्य बना रहे। वही श्रीजैन ने यह भी कहा की शासकीय योजनाओं को तभी फलीभूत किया जा सकता है जब स्थानीय लोगों मे जागरूक मिले और उनका सहयोग भी मिले। उन्होंने सिघवारा गाव के लिए कहा इस गाव की एतिहासिक धरोहर को सुरक्षित के साथ इस गाव को जिले मे प्रथम स्थान पर लाना है ताकि यह गाव पिछड़ा ना रहे1
- मेरे सभी भारतवासीयो को चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष की ढेर सारी अनंत अनंत शुभकामना1
- आज दिनांक 19/03/2026 दिन गुरुवार सुबह दिलीप महतो द्वारा नगर पालिका निगम के कर्मचारियों ने की सफाई व्यवस्था आदिशक्ति माँ विंध्यवासनी मंदिर परिसर तक सड़क व्यवस्था नहीं होने के बावजूद नगर निगम कर्मचारियों द्वारा मंदिर परिसर तक सफ़ाई की मैं औऱ हमारी समिति नगर निगम कर्मचारियों का आभार प्रकट करते है जिस प्रकार साफ़ सफाई अभियान मंदिर परिसर तक चलाया जा रहा है उसी प्रकार सड़क मार्ग भी दूरस्थ करवाने की कृपा करें आदिशक्ति माँ विंध्यवासनी मंदिर राकेश निषाद #सफ़ाई अभियान #सड़क मार्ग #प्रकाश व्यवस्था4
- ghanshaym1
- मदन तिवारी ट्रैफिक पुलिस कटनी द्वारा चौधरी समाज (अनुसूचित जाति) को अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया SP Katni sir जल्द से जल्द इसके ऊपर fir हो और इस तरह के गंदी मानसिकता वाले को तुरंत निलम्बित किया जाए। नहीं तो भीम आर्मी एवं सभी समाज के लोग बहुत जल्द सड़कों पर होगे जिसकी पूरी जवाबदारी SP Katni की होगी2
- Inki setting full HD me, aur hamari life abhi bhi buffering 😅” . . #comedyvideo #funnyreels #desicomedy #singlelife #viralreels #trendingnow #lol #mojindia #reelsindia1
- Post by Deepak Tiwari (Sonu)1
- 🚨 बुजुर्ग से एटीएम ठगी करने वाले तीन शातिर बस स्टैंड से धराए, पूछताछ जारी 🚨 कटनी। शहर में बुजुर्गों को निशाना बनाकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। कोतवाली थाना क्षेत्र में 79 वर्षीय बुजुर्ग से एटीएम ठगी करने वाले तीनों शातिर आरोपियों को बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, शिवनगर कॉलोनी निवासी उमेश कुमार नामदेव (79) पिता स्व. छंगे लाल नामदेव चांडक चौक से बस स्टैंड की ओर जा रहे थे। इसी दौरान तीन अज्ञात बदमाशों ने मदद के बहाने उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया और बड़ी चालाकी से उनका एटीएम कार्ड बदल दिया। बुजुर्ग को इस धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगी। बदमाशों ने खाते से 15,000 रुपये नकद निकाल लिए, वहीं एटीएम कार्ड और पासबुक सहित कुल करीब 30,000 रुपये की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया। घटना की शिकायत मिलने पर कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके बाद पुलिस ने बस स्टैंड क्षेत्र में घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को दबोच लिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह ने और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। 👉 पुलिस ने आम जनता, खासकर बुजुर्गों से अपील की है कि अनजान लोगों से एटीएम या बैंक संबंधी मदद लेने से बचें, क्योंकि ऐसे गिरोह सक्रिय होकर लगातार ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे2