पूर्वी चम्पारण के घोड़ासहन में मानसून की पहली बारिश ने ही घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी है। रविवार रात को हुई झमाझम बारिश के बाद पूरा अस्पताल परिसर जलजमाव की चपेट में आ गया है। अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर ओपीडी (OPD) और आपातकालीन वार्ड तक जाने वाले रास्तों पर गंदा पानी भर गया है, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। परिसर में जमा कचरा पानी के ऊपर तैर रहा है, जिससे उठने वाली तीव्र बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस बदहाली के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोगों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के अंदर जाने का कोई साफ रास्ता नहीं बचा है और लोगों को कीचड़ व गंदे पानी में पैर रखकर जाना पड़ रहा है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लोग यहाँ बीमारी ठीक कराने आते हैं, लेकिन यहाँ की गंदगी और मच्छरों के प्रकोप के कारण डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियां लेकर घर लौटेंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, करोड़ों रुपये की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंद्र में जल निकासी की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है, जिससे हर साल बारिश में यही हाल होता है। बारिश से पहले न तो नालों की सफाई कराई गई और न ही जलजमाव से निपटने की तैयारी की गई, जिससे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर से जल निकासी की अविलंब व्यवस्था की जाए और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करवाकर गंदगी की सफाई कराई जाए, ताकि मरीजों को इस दयनीय स्थिति से राहत मिल सके।
पूर्वी चम्पारण के घोड़ासहन में मानसून की पहली बारिश ने ही घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी है। रविवार रात को हुई झमाझम बारिश के बाद पूरा अस्पताल परिसर जलजमाव की चपेट में आ गया है। अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर ओपीडी (OPD) और आपातकालीन वार्ड तक जाने वाले रास्तों पर गंदा पानी भर गया है, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। परिसर में जमा कचरा पानी के ऊपर तैर रहा है, जिससे उठने वाली तीव्र बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस बदहाली के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोगों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के अंदर जाने का कोई साफ रास्ता नहीं बचा है और लोगों को कीचड़ व गंदे पानी में पैर रखकर जाना पड़ रहा है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लोग यहाँ बीमारी ठीक कराने आते हैं, लेकिन यहाँ की गंदगी और मच्छरों के प्रकोप के कारण डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियां लेकर घर लौटेंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, करोड़ों रुपये की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंद्र में जल निकासी की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है, जिससे हर साल बारिश में यही हाल होता है। बारिश से पहले न तो नालों की सफाई कराई गई और न ही जलजमाव से निपटने की तैयारी की गई, जिससे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर से जल निकासी की अविलंब व्यवस्था की जाए और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करवाकर गंदगी की सफाई कराई जाए, ताकि मरीजों को इस दयनीय स्थिति से राहत मिल सके।
- पूर्वी चम्पारण के घोड़ासहन में मानसून की पहली बारिश ने ही घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी है। रविवार रात को हुई झमाझम बारिश के बाद पूरा अस्पताल परिसर जलजमाव की चपेट में आ गया है। अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर ओपीडी (OPD) और आपातकालीन वार्ड तक जाने वाले रास्तों पर गंदा पानी भर गया है, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। परिसर में जमा कचरा पानी के ऊपर तैर रहा है, जिससे उठने वाली तीव्र बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस बदहाली के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोगों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के अंदर जाने का कोई साफ रास्ता नहीं बचा है और लोगों को कीचड़ व गंदे पानी में पैर रखकर जाना पड़ रहा है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लोग यहाँ बीमारी ठीक कराने आते हैं, लेकिन यहाँ की गंदगी और मच्छरों के प्रकोप के कारण डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियां लेकर घर लौटेंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, करोड़ों रुपये की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंद्र में जल निकासी की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है, जिससे हर साल बारिश में यही हाल होता है। बारिश से पहले न तो नालों की सफाई कराई गई और न ही जलजमाव से निपटने की तैयारी की गई, जिससे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिविल सर्जन से गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि घोड़ासहन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर से जल निकासी की अविलंब व्यवस्था की जाए और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करवाकर गंदगी की सफाई कराई जाए, ताकि मरीजों को इस दयनीय स्थिति से राहत मिल सके।1
- पूर्वी चंपारण के सिरहाकोठी में नवहन यज्ञ के लिए चंदा मांगने पहुंचे ब्राह्मणों और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों के बीच अयोध्या के राम मंदिर, बद्रीनाथ धाम और थावे मंदिर में चंदा चोरी व गबन की घटनाओं को लेकर गंभीर चर्चा हुई। सिरहा गांव स्थित भार्गव भवन में दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक रवि कुमार भार्गव के आतिथ्य में हुई इस चर्चा में बेडिबंध मधुबन सीताकुंड से आए ब्राह्मण मुकेश कुमार पांडे, सुनील कुमार पांडे और सिरहा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पति श्री संजय कुमार श्रीवास्तव शामिल हुए। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि राम मंदिर अयोध्या और बद्रीनाथ धाम में जनता द्वारा आस्था से चढ़ाए गए चंदे की राशि के गबन और थावे स्थित माता दुर्गा के मंदिर से मुकुट व मूर्ति चोरी होने जैसी घटनाओं से देश की जनता की आस्था को भारी ठेस पहुंची है। मुकेश कुमार पांडे ने इस घटना को एक बेहद गंभीर विषय बताया। इन घटनाओं का असर अब देहात क्षेत्रों में भी दिखने लगा है, जिससे लोग अब धार्मिक कार्यों के लिए चंदा देने से कतराने लगे हैं। इस पूरे मामले पर गंभीर रोष व्यक्त करते हुए सुनील कुमार पांडे ने मांग की है कि भगवान के नाम पर चढ़ाई गई चंदे की राशि या आस्था की सामग्री चोरी और गबन करने वाले व्यक्ति को सरकार द्वारा उम्र कैद की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने देश के बड़े अधिकारियों और मंत्रियों द्वारा जांच बिठाकर मामलों को वर्षों तक लंबित रखने की प्रथा की कड़ी आलोचना की, जिससे आरोपी बाद में मुक्त हो जाते हैं। उनका मानना है कि गलती करने वाले स्थान पर ही तुरंत सजा दी जानी चाहिए। इसी सुर में श्री संजय कुमार श्रीवास्तव ने भी कहा कि जांच जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर आरोपियों को लाभ पहुंचाना बंद होना चाहिए और दोषियों को घटनास्थल पर ही सजा मिलनी चाहिए ताकि जनता की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति दोबारा न हो सके।1
- पूर्वी चंपारण के कोटवा अंचल से एक बड़ा नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस के जरिए यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि किसी का भूमि पर कोई दावा है, तो वह अपने साक्ष्यों के साथ वहां उपस्थित हो।1
- Post by Chandra Mohan Kumar1
- पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में दर्द विशेषज्ञ डॉ. गोपाल ने कमर दर्द एवं साइटिका के दर्द से परेशान मरीजों को सावधानी बरतने के संबंध में जानकारी साझा की है।1
- बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर राजस्व कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों और राजस्व विभाग द्वारा अपने ही फैसलों को लागू न करने के विरोध में कर्मचारी कार्य ठप कर धरने पर बैठ गए हैं। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार इन कर्मचारियों के दम पर अपनी पीठ थपथपाती है, लेकिन उनकी जायज मांगों को लगातार अनसुना कर रही है। धरना स्थल पर मौजूद संघ के जिला मंत्री श्री बच्चा बिहारी सिंह, जिला सचिव नीतीश कुमार और जिला अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बताया कि विभाग ने उनकी 17 सूत्री मांगों को मान तो लिया था, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया। इससे पहले 02 जून 2025 को प्रधान सचिव के साथ सफल वार्ता के बाद भी मांगें लंबित रहीं। इसके बाद 11 फरवरी 2026 से 10 मई 2026 तक राज्यव्यापी आंदोलन और हड़ताल की गई, जिसे विभाग के सचिव द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद वापस लिया गया था। सचिव ने विभागीय मामलों को एक हफ्ते और अन्य मामलों को एक महीने में निपटाने का भरोसा दिया था, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी समझौता कागजों तक ही सीमित है और पोर्टल खोलने के बाद भी स्थानांतरण नहीं किया गया। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में ग्रेड पे को 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) और स्नातक योग्यता के आधार पर 4200 करना, नवनियुक्त कर्मियों को गृह जिले के बगल में पदस्थापित करना, और 10 साल की सेवा पूरी करने वालों को राजस्व अधिकारी के रूप में पदोन्नति देना शामिल है। इसके अलावा, पिछले 5 वर्षों से लंबित ACP/MACP लाभ देने, 3.5 वर्षों से लंबित सेवा संपुष्टि करने, और सरकारी काम के लिए लैपटॉप, मोबाइल, इंटरनेट, प्रिंटर, फर्नीचर व फील्ड विजिट की सुविधाएं देने की मांग की गई है। कर्मचारियों ने हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान करने, रविवार या राजपत्रित अवकाश के दिन काम लेने की परिपाटी बंद करने, निर्धारित कार्य अवधि (सुबह 10 से शाम 5 बजे) के अतिरिक्त काम न लेने, मानसिक तनाव से बचने के लिए एक कर्मचारी को केवल एक हल्का या पंचायत का प्रभार देने और पदनाम बदलकर 'सहायक राजस्व पदाधिकारी' करने की भी मांग उठाई है। विभागीय उदासीनता से तंग आकर संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत 15 से 17 जुलाई 2026 तक केवल ऑफलाइन और विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों से ही कार्य निष्पादित कर असहयोग आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद, 18 जुलाई 2026 से पटना में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि इस आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक कठिनाई, कार्यों के लंबित होने या राजस्व संबंधी प्रतिकूल स्थिति के लिए पूर्ण रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जिम्मेदार होगा।1
- पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन अंतर्गत शेखौना में मोटरसाइकिल चोरी करते हुए एक चोर को पकड़ा गया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।1