“1076 हेल्पलाइन की बेटियों के साथ ये क्या हुआ ? 😳 सच्चाई देखिए!” “बेटी बचाओ या आवाज दबाओ ? ये वीडियो हट भी सकता है!” “1076 हेल्पलाइन प्रोटेस्ट का सच 😡 सरकार पर बड़ा सवाल!” बाँदा से घासीराम निषाद की विशेष रिपोर्ट...✍️ "लोकतंत्र या लाठीतंत्र ? 1076 की बेटियों पर बरसीं लाठियाँ और दावों की ढपली!" दिनांक: 02 अप्रैल 2026 लखनऊ की सड़कों से जो तस्वीरें आई हैं, उन्होंने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 'रामराज्य' की परिभाषा अब थोड़ी बदल गई है। अब यहाँ न्याय माँगने वाली बेटियों को 'दुआ' नहीं, बल्कि पुलिस की 'दहशत' मिलती है। 1. वर्दी की तानाशाही: सरकार का नया 'हैंडीक्राफ्ट' सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरानों ने पुलिस को कानून की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए 'बाउंसर' की तरह इस्तेमाल करना सीख लिया है। जब 1076 हेल्पलाइन की बेटियाँ अपना हक माँगने निकलीं, तो यूपी पुलिस ने अपनी "कार्यकुशलता" का ऐसा परिचय दिया कि लोग दंग रह गए। व्यंग्य: "शायद पुलिस को ऊपर से निर्देश थे कि बेटियाँ सुरक्षित रहनी चाहिए—चाहे इसके लिए उन्हें घसीटकर बस में ही क्यों न डालना पड़े! आखिर सड़क पर आंदोलन करना 'सुरक्षा' के लिए खतरा जो है।" 2. 'चिंदीचोरों' और ठेकेदारों की 'कवच' बनी सरकार आम जनता की सरकार होने का दम भरने वाली सत्ता आज किनके कदमों में बिछी है? जवाब साफ है—उन आउटसोर्सिंग कंपनियों और ठेकेदारों के कदमों में, जो इन बेटियों का खून चूसकर अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं। सबका साथ, ठेकेदारों का विकास: सरकार ने मान लिया है कि विकास का मतलब आम आदमी की जेब भरना नहीं, बल्कि चंद उद्योगपतियों और 'चिंदीचोर' ठेकेदारों को मनमानी की छूट देना है। नियमों की बलि: लेबर लॉ की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं कि खुद कानून भी शर्मिंदा हो जाए, लेकिन मजाल है कि सरकार इन चहेते ठेकेदारों पर 'बुलडोजर' तो दूर, एक नोटिस भी ढंग से चला दे। 3. 'बेटी बचाओ' या 'आवाज दबाओ'? होर्डिंग्स पर मुस्कुराती बेटियों की तस्वीरों और सड़क पर रोती इन लड़कियों के बीच का अंतर ही इस सरकार की असली उपलब्धि है। सीधा सवाल: क्या 'सबका विश्वास' जीतने का मतलब उन बेटियों का भरोसा तोड़ना है जो दिन-रात मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लोगों की मदद करती हैं? या फिर सरकार अब 'जनता की सरकार' का चोला उतारकर शुद्ध रूप से 'ठेकेदारों की पीआर एजेंसी' बन चुकी है? 4. तानाशाही का नया मॉडल व्यवस्था के नाम पर पुलिसिया तानाशाही को जिस तरह बढ़ावा दिया जा रहा है, वह बताता है कि अब संवाद की जगह 'डंडे' ने ले ली है। जब भी कोई अपने हक के लिए मुँह खोलता है, व्यवस्था उसे 'शांति भंग' का अपराधी बना देती है। ₹7000-8000 की नौकरी करने वाली इन बेटियों से व्यवस्था को इतना डर लगने लगा कि पूरी की पूरी पुलिस फोर्स उतार दी गई। 5. उपसंहार: खोखले नारों की प्रदर्शनी अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा व्यवस्था अब 'जनसेवा' के मोड से हटकर 'ठेकेदार सेवा' मोड में आ चुकी है। उद्योगपतियों की गोद में बैठी यह सत्ता अब आम आदमी की चीखें नहीं सुन सकती, क्योंकि इसके कानों में ठेकेदारों के मुनाफे का शोर बहुत ज्यादा है। साहब! ये 1076 की बेटियाँ नहीं, आपके खोखले दावों की जीती-जाती गवाह हैं। अगली बार जब 'नारी वंदन' का भाषण तैयार करें, तो लखनऊ की सड़कों पर पड़े उन जूतों और घसीटी गई उन बेटियों को जरूर याद कर लीजिएगा।
“1076 हेल्पलाइन की बेटियों के साथ ये क्या हुआ ? 😳 सच्चाई देखिए!” “बेटी बचाओ या आवाज दबाओ ? ये वीडियो हट भी सकता है!” “1076 हेल्पलाइन प्रोटेस्ट का सच 😡 सरकार पर बड़ा सवाल!” बाँदा से घासीराम निषाद की विशेष रिपोर्ट...✍️ "लोकतंत्र या लाठीतंत्र ? 1076 की बेटियों पर बरसीं लाठियाँ और दावों की ढपली!" दिनांक: 02 अप्रैल 2026 लखनऊ की सड़कों से जो तस्वीरें आई हैं, उन्होंने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 'रामराज्य' की परिभाषा अब थोड़ी बदल गई है। अब यहाँ न्याय माँगने वाली बेटियों को 'दुआ' नहीं, बल्कि पुलिस की 'दहशत' मिलती है। 1. वर्दी की तानाशाही: सरकार का नया 'हैंडीक्राफ्ट' सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरानों ने पुलिस को कानून की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए 'बाउंसर' की तरह इस्तेमाल करना सीख लिया है। जब 1076 हेल्पलाइन की बेटियाँ अपना हक माँगने निकलीं, तो यूपी पुलिस ने अपनी "कार्यकुशलता" का ऐसा परिचय दिया कि लोग दंग रह गए। व्यंग्य: "शायद पुलिस को ऊपर से निर्देश थे कि बेटियाँ सुरक्षित रहनी चाहिए—चाहे इसके लिए उन्हें घसीटकर बस में ही क्यों न डालना पड़े! आखिर सड़क पर आंदोलन करना 'सुरक्षा' के लिए खतरा जो है।" 2. 'चिंदीचोरों' और ठेकेदारों की 'कवच' बनी सरकार आम जनता की सरकार होने का दम भरने वाली सत्ता आज किनके कदमों में बिछी है? जवाब साफ है—उन आउटसोर्सिंग कंपनियों और ठेकेदारों के कदमों में, जो इन बेटियों का खून चूसकर अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं। सबका साथ, ठेकेदारों का विकास: सरकार ने मान लिया है कि विकास का मतलब आम आदमी की जेब भरना नहीं, बल्कि चंद उद्योगपतियों और 'चिंदीचोर' ठेकेदारों को मनमानी की छूट देना है। नियमों की बलि: लेबर लॉ की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं कि खुद कानून भी शर्मिंदा हो जाए, लेकिन मजाल है कि सरकार इन चहेते ठेकेदारों पर 'बुलडोजर' तो दूर, एक नोटिस भी ढंग से चला दे। 3. 'बेटी बचाओ' या 'आवाज दबाओ'? होर्डिंग्स पर मुस्कुराती बेटियों की तस्वीरों और सड़क पर रोती इन लड़कियों के बीच का अंतर ही इस सरकार की असली उपलब्धि है। सीधा सवाल: क्या 'सबका विश्वास' जीतने का मतलब उन बेटियों का भरोसा तोड़ना है जो दिन-रात मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लोगों की मदद करती हैं? या फिर सरकार अब 'जनता की सरकार' का चोला उतारकर शुद्ध रूप से 'ठेकेदारों की पीआर एजेंसी' बन चुकी है? 4. तानाशाही का नया मॉडल व्यवस्था के नाम पर पुलिसिया तानाशाही को जिस तरह बढ़ावा दिया जा रहा है, वह बताता है कि अब संवाद की जगह 'डंडे' ने ले ली है। जब भी कोई अपने हक के लिए मुँह खोलता है, व्यवस्था उसे 'शांति भंग' का अपराधी बना देती है। ₹7000-8000 की नौकरी करने वाली इन बेटियों से व्यवस्था को इतना डर लगने लगा कि पूरी की पूरी पुलिस फोर्स उतार दी गई। 5. उपसंहार: खोखले नारों की प्रदर्शनी अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा व्यवस्था अब 'जनसेवा' के मोड से हटकर 'ठेकेदार सेवा' मोड में आ चुकी है। उद्योगपतियों की गोद में बैठी यह सत्ता अब आम आदमी की चीखें नहीं सुन सकती, क्योंकि इसके कानों में ठेकेदारों के मुनाफे का शोर बहुत ज्यादा है। साहब! ये 1076 की बेटियाँ नहीं, आपके खोखले दावों की जीती-जाती गवाह हैं। अगली बार जब 'नारी वंदन' का भाषण तैयार करें, तो लखनऊ की सड़कों पर पड़े उन जूतों और घसीटी गई उन बेटियों को जरूर याद कर लीजिएगा।
- अंतरराज्यीय भैंस चोरी करने वाले गिरोह के 3 शातिर बदमाशों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है।1
- बांदा – हनुमान जयंती के पावन अवसर पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने अपने साथियों के साथ मिलकर भगवान कामतानाथ को दंडवत प्रणाम किया और परिक्रमा लगाई।इस अवसर पर अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने कहा कि इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच भीषण महायुद्ध अब 34 दिन से जारी है, जिसके कारण लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। रोजगार, धंधे चौपट हैं और पेट्रोल, डीजल, गैस जैसी बुनियादी वस्तुएं भी लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं।उन्होंने ब्रिटेन की पहल की सराहना की, जिसमें 60 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। दीक्षित जी ने कहा, "हमारी प्रार्थना है कि परमपिता परमेश्वर श्री कामतानाथ जी शीघ्र इस महायुद्ध को समाप्त करें और विश्व में शांति स्थापित हो।"इस अवसर पर कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रभारी संतोष द्विवेदी, सनत अवस्थी और लालबाबू राजपूत भी मौजूद रहे। आइए हम सब मिलकर शांति और भाईचारे का संदेश फैलाएं!1
- “1076 हेल्पलाइन प्रोटेस्ट का सच 😡 सरकार पर बड़ा सवाल!” बाँदा से घासीराम निषाद की विशेष रिपोर्ट...✍️ "लोकतंत्र या लाठीतंत्र ? 1076 की बेटियों पर बरसीं लाठियाँ और दावों की ढपली!" दिनांक: 02 अप्रैल 2026 लखनऊ की सड़कों से जो तस्वीरें आई हैं, उन्होंने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 'रामराज्य' की परिभाषा अब थोड़ी बदल गई है। अब यहाँ न्याय माँगने वाली बेटियों को 'दुआ' नहीं, बल्कि पुलिस की 'दहशत' मिलती है। 1. वर्दी की तानाशाही: सरकार का नया 'हैंडीक्राफ्ट' सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरानों ने पुलिस को कानून की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए 'बाउंसर' की तरह इस्तेमाल करना सीख लिया है। जब 1076 हेल्पलाइन की बेटियाँ अपना हक माँगने निकलीं, तो यूपी पुलिस ने अपनी "कार्यकुशलता" का ऐसा परिचय दिया कि लोग दंग रह गए। व्यंग्य: "शायद पुलिस को ऊपर से निर्देश थे कि बेटियाँ सुरक्षित रहनी चाहिए—चाहे इसके लिए उन्हें घसीटकर बस में ही क्यों न डालना पड़े! आखिर सड़क पर आंदोलन करना 'सुरक्षा' के लिए खतरा जो है।" 2. 'चिंदीचोरों' और ठेकेदारों की 'कवच' बनी सरकार आम जनता की सरकार होने का दम भरने वाली सत्ता आज किनके कदमों में बिछी है? जवाब साफ है—उन आउटसोर्सिंग कंपनियों और ठेकेदारों के कदमों में, जो इन बेटियों का खून चूसकर अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं। सबका साथ, ठेकेदारों का विकास: सरकार ने मान लिया है कि विकास का मतलब आम आदमी की जेब भरना नहीं, बल्कि चंद उद्योगपतियों और 'चिंदीचोर' ठेकेदारों को मनमानी की छूट देना है। नियमों की बलि: लेबर लॉ की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं कि खुद कानून भी शर्मिंदा हो जाए, लेकिन मजाल है कि सरकार इन चहेते ठेकेदारों पर 'बुलडोजर' तो दूर, एक नोटिस भी ढंग से चला दे। 3. 'बेटी बचाओ' या 'आवाज दबाओ'? होर्डिंग्स पर मुस्कुराती बेटियों की तस्वीरों और सड़क पर रोती इन लड़कियों के बीच का अंतर ही इस सरकार की असली उपलब्धि है। सीधा सवाल: क्या 'सबका विश्वास' जीतने का मतलब उन बेटियों का भरोसा तोड़ना है जो दिन-रात मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लोगों की मदद करती हैं? या फिर सरकार अब 'जनता की सरकार' का चोला उतारकर शुद्ध रूप से 'ठेकेदारों की पीआर एजेंसी' बन चुकी है? 4. तानाशाही का नया मॉडल व्यवस्था के नाम पर पुलिसिया तानाशाही को जिस तरह बढ़ावा दिया जा रहा है, वह बताता है कि अब संवाद की जगह 'डंडे' ने ले ली है। जब भी कोई अपने हक के लिए मुँह खोलता है, व्यवस्था उसे 'शांति भंग' का अपराधी बना देती है। ₹7000-8000 की नौकरी करने वाली इन बेटियों से व्यवस्था को इतना डर लगने लगा कि पूरी की पूरी पुलिस फोर्स उतार दी गई। 5. उपसंहार: खोखले नारों की प्रदर्शनी अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा व्यवस्था अब 'जनसेवा' के मोड से हटकर 'ठेकेदार सेवा' मोड में आ चुकी है। उद्योगपतियों की गोद में बैठी यह सत्ता अब आम आदमी की चीखें नहीं सुन सकती, क्योंकि इसके कानों में ठेकेदारों के मुनाफे का शोर बहुत ज्यादा है। साहब! ये 1076 की बेटियाँ नहीं, आपके खोखले दावों की जीती-जाती गवाह हैं। अगली बार जब 'नारी वंदन' का भाषण तैयार करें, तो लखनऊ की सड़कों पर पड़े उन जूतों और घसीटी गई उन बेटियों को जरूर याद कर लीजिएगा।1
- बांदा। दिनांक 02 अप्रैल 2026 को थाना कोतवाली देहात पुलिस एवं एसओजी की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय भैंस चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस मुठभेड़ के दौरान 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से एक अभियुक्त के पैर में गोली लगी है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से चोरी की गई 3 भैंस/पड़िया/पड़ा, 95,000 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त एक पिकअप लोडर, 2 अवैध तमंचे, 2 जिंदा कारतूस तथा 4 खोखा कारतूस बरामद किए गए हैं। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे पूर्व नियोजित योजना के तहत रात्रि में पिकअप लोडर से विभिन्न स्थानों पर जाकर भैंस चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। चोरी की गई भैंसों को जनपद बांदा के थाना बिसंडा, कोतवाली नगर और कोतवाली देहात क्षेत्रों से चुराकर जनपद उन्नाव के स्लॉटर हाउस में बेच दिया जाता था। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई घटनाओं में इनकी संलिप्तता सामने आ रही है। गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस पूरे मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक बांदा शिवराज ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस टीम को काफी समय से इस गिरोह की तलाश थी, जिसे आज सफलता पूर्वक पकड़ लिया गया। आगे भी पूछताछ जारी है, जिससे अन्य घटनाओं का खुलासा होने की संभावना है।1
- बड़ा गांव में तालाब में डूबने से 9 वर्षीय बच्चे की हुई मौत, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा मामला बबेरू तहसील क्षेत्र अंतर्गत बिसंडा थाना क्षेत्र के बड़ागांव का है। जहां के रहने वाले राहुल पुत्र कमलेश खेंगर उम्र करीब 9 वर्ष आज मंगलवार की दोपहर अपने 3 वर्षीय बहन कोमल के साथ तालाब में नहाने के लिए गए थे, तभी नहाते समय गहरे पानी में चले जाने से राहुल की मौत हो गई। वहीं बहन रोते रोते घर पहुंची कुछ बात नहीं पाई, ग्रामीणों ने तुरंत तालाब में जाकर खोजबीन की काफी देर के बाद बच्चा राहुल का शव मिला, जब तक उसकी मौत हो चुकी थी, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज बांदा भेज दिया है। इस घटना को देखते हुए परिवार जनों का रो-रोकर बुरा हाल है।1
- वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत अब लाभार्थी देश के किसी भी राज्य में राशन प्राप्त कर सकते हैं। सरकार द्वारा पोर्टेबल राशन सुविधा लागू की गई है जिससे मजदूर और जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। योजना का उद्देश्य पूरे देश में एक समान राशन वितरण प्रणाली लागू करना है।1
- मौदहा तहसील में अधिवक्ताओं का जोरदार प्रदर्शन। SDM करणवीर सिंह व पेशकार पीयूष सक्सेना के स्थानांतरण की मांग। अभद्र व्यवहार के आरोप लगाकर की जमकर नारेबाजी। बार एसोसिएशन अध्यक्ष शिवलाल पाल के नेतृत्व में प्रदर्शन। मांग पूरी न होने तक राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का ऐलान।1
- शहर के सुतरखाने मोहल्ले में कोतवाली नगर पुलिस ने गुटखा बनाने की अवैध फैक्ट्री मारा छापा,पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार।1