शहडोल जिले में भूजल संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा बोर उत्खनन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सोहागपुर जनपद क्षेत्र में ये आदेश केवल कागजों तक ही सीमित नज़र आ रहे हैं, क्योंकि प्रतिबंध के बावजूद कई गांवों में रात के अंधेरे में बोरिंग मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं और जिम्मेदार विभाग इस पर चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत खोल्हाड, सिंदुरी, कल्याणपुर, पचगांव, सिंहपुर, जोधपुर, अमरहा सहित कई गांवों में प्रतिदिन बोर उत्खनन का कार्य जारी है। आरोप है कि कुछ बोर कंपनियां प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं; वे रात के समय मशीनें चलाकर कार्रवाई से बचने की कोशिश करती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन ने बिना अनुमति बोर उत्खनन पर रोक लगा रखी है, तो इन मशीनों को संरक्षण कौन दे रहा है। ग्रामीणों में यह चर्चा आम है कि प्रभावशाली लोगों और विभागीय मेहरबानी के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। हालाँकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, पर लगातार चल रहे इस उत्खनन ने जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रतिबंध का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, वे अब तक कोई ठोस कार्रवाई करते नज़र नहीं आए हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों और कंपनियों को खुली छूट मिली हुई है। इस अनियंत्रित बोर उत्खनन के कारण भूजल स्तर तेज़ी से नीचे गिर सकता है, जिसका गंभीर खामियाजा आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है। संबंधित विभाग की यह चुप्पी कई और सवालों को जन्म दे रही है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि यदि ये शिकायतें सही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और अवैध उत्खनन कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अन्यथा, यह मानने में देर नहीं लगेगी कि बोर उत्खनन पर लगाया गया प्रतिबंध केवल एक दिखावा है और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को पूरी तरह से अभयदान मिला हुआ है।
शहडोल जिले में भूजल संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा बोर उत्खनन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सोहागपुर जनपद क्षेत्र में ये आदेश केवल कागजों तक ही सीमित नज़र आ रहे हैं, क्योंकि प्रतिबंध के बावजूद कई गांवों में रात के अंधेरे में बोरिंग मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं और जिम्मेदार विभाग इस पर चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत खोल्हाड, सिंदुरी, कल्याणपुर, पचगांव, सिंहपुर, जोधपुर, अमरहा सहित कई गांवों में प्रतिदिन बोर उत्खनन का कार्य जारी है। आरोप है कि कुछ बोर कंपनियां प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं; वे रात के समय मशीनें चलाकर कार्रवाई से बचने की कोशिश करती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन ने बिना अनुमति बोर उत्खनन पर रोक लगा रखी है, तो इन मशीनों को संरक्षण कौन दे रहा है। ग्रामीणों में यह चर्चा आम है कि प्रभावशाली लोगों और विभागीय मेहरबानी के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। हालाँकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई
है, पर लगातार चल रहे इस उत्खनन ने जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रतिबंध का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, वे अब तक कोई ठोस कार्रवाई करते नज़र नहीं आए हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों और कंपनियों को खुली छूट मिली हुई है। इस अनियंत्रित बोर उत्खनन के कारण भूजल स्तर तेज़ी से नीचे गिर सकता है, जिसका गंभीर खामियाजा आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है। संबंधित विभाग की यह चुप्पी कई और सवालों को जन्म दे रही है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि यदि ये शिकायतें सही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और अवैध उत्खनन कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अन्यथा, यह मानने में देर नहीं लगेगी कि बोर उत्खनन पर लगाया गया प्रतिबंध केवल एक दिखावा है और नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को पूरी तरह से अभयदान मिला हुआ है।
- शहडोल जिले के जयसिंहनगर थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 350.500 किलोग्राम गांजा, दो चार पहिया वाहन और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस मामले में मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश के निवासी 20 वर्षीय राहुल कुमार चर्मकार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर जनकपुर रोड बाईपास मार्ग पर की गई नाकाबंदी के दौरान हुई। पुलिस ने एक स्विफ्ट कार और एक इनोवा वाहन की तलाशी ली, जिसमें से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत 35.05 लाख रुपये बताई गई है, और जब्त की गई कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य लगभग 61.12 लाख रुपये है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1
- डिंडौरी जिले के सीमावर्ती ग्राम बुढ़न के आवास टोला में रहने वाले बैगा परिवार इन दिनों गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन का काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जिसके कारण आज तक उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है। पानी की कमी के कारण महिलाओं और बच्चों को पीने का पानी लाने के लिए रोजाना एक से दो किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें भीषण गर्मी के बीच और भी बढ़ गई हैं। गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों को बताई है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। स्थिति से त्रस्त, बैगा जनजाति के लोगों ने अब जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कलेक्टर डिंडौरी से गुहार लगाई है कि नल-जल योजना के अधूरे कार्य को जल्द पूरा किया जाए और गाँव में नियमित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।1
- समनापुर जनपद के सरईमाल में स्थित खुसरा टोला की पूरी बस्ती पीने के पानी के लिए एक झिरिया पर निर्भर है। रिपोर्ट के अनुसार, इस टोले के सभी निवासी अपनी पेयजल की ज़रूरतें इसी झिरिया से पूरी करते हैं।4
- अनूपपुर के बिजूरी में बढ़ते अपराधों से आम जनता में गहरा आक्रोश है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अपनी 'मस्ती में मस्त' दिखाई दे रही है। इसका एक स्पष्ट उदाहरण शुक्रवार देर रात तब सामने आया जब एक अवैध रेत खनन माफिया का डंपर हरीश मेडिकल के सामने बिजली के पोल से टकरा गया। इस टक्कर में डंपर चकनाचूर हो गया और विद्युत पोल भी गिरने की कगार पर पहुँच गया। हैरानी की बात यह रही कि घटनास्थल से चंद कदमों की दूरी पर होने के बावजूद पुलिस केवल 'तमाशा देखती रही' और कोई कार्रवाई नहीं की। इस घटना पर टिप्पणी करते हुए, स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि हनुमान मंदिर और स्टेशन चौक जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर ऐसी स्थिति है, तो पूरे नगर की कानून-व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।1