मध्य प्रदेश के रीवा जिले स्थित अमहिया थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (मुंशी) अच्छेलाल सिंह का नशे की हालत में ड्यूटी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। थाने में शराब के नशे में धुत नजर आ रहे मुंशी खुद कैमरे के सामने शराब पीने की बात कबूल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने थाने के अंदर घंटों तक अजीब हरकतें कीं और वहां आए लोगों के साथ अभद्रता से बात की। एक तरफ जहां पुलिस विभाग द्वारा "नशे से दूरी है जरूरी" जैसे जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महकमे के जिम्मेदार कर्मचारी ही थाने जैसे अनुशासित परिसर में इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। कानून के रखवालों द्वारा की गई इस तरह की लापरवाही और नशेबाजी ने पुलिस विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद रीवा पुलिस के उच्च अधिकारी इस प्रधान आरक्षक पर क्या और कैसी कार्रवाई करते हैं।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले स्थित अमहिया थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (मुंशी) अच्छेलाल सिंह का नशे की हालत में ड्यूटी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। थाने में शराब के नशे में धुत नजर आ रहे मुंशी खुद कैमरे के सामने शराब पीने की बात कबूल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने थाने के अंदर घंटों तक अजीब हरकतें कीं और वहां आए लोगों के साथ अभद्रता से बात की। एक तरफ जहां पुलिस विभाग द्वारा "नशे से दूरी है जरूरी" जैसे जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महकमे के जिम्मेदार कर्मचारी ही थाने जैसे अनुशासित परिसर में इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। कानून के रखवालों द्वारा की गई इस तरह की लापरवाही और नशेबाजी ने पुलिस विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद रीवा पुलिस के उच्च अधिकारी इस प्रधान आरक्षक पर क्या और कैसी कार्रवाई करते हैं।
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले स्थित अमहिया थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक (मुंशी) अच्छेलाल सिंह का नशे की हालत में ड्यूटी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। थाने में शराब के नशे में धुत नजर आ रहे मुंशी खुद कैमरे के सामने शराब पीने की बात कबूल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने थाने के अंदर घंटों तक अजीब हरकतें कीं और वहां आए लोगों के साथ अभद्रता से बात की। एक तरफ जहां पुलिस विभाग द्वारा "नशे से दूरी है जरूरी" जैसे जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महकमे के जिम्मेदार कर्मचारी ही थाने जैसे अनुशासित परिसर में इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। कानून के रखवालों द्वारा की गई इस तरह की लापरवाही और नशेबाजी ने पुलिस विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद रीवा पुलिस के उच्च अधिकारी इस प्रधान आरक्षक पर क्या और कैसी कार्रवाई करते हैं।1
- चित्रकूट धाम में रजौला से आरोग्यधाम तक लगाई गईं रोड लाइटें महज शो पीस बनकर रह गई हैं। यह स्ट्रीट लाइटें केवल तभी जगमगाती हैं जब किसी मंत्री का दौरा होता है, जबकि आम दिनों में सड़क पर चलने वाले राहगीरों, यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए घुप अंधेरा कायम रहता है। सीसी सड़क के बीच में लगे धनुष-बाण के आकार वाली लाइटें दिन में तो दिखाई देती हैं, लेकिन रात के वक्त अंधेरे के कारण वे भी नजर नहीं आतीं। सड़कों पर पसरे इस अंधेरे के बीच, सीसी सड़क के बीचों-बीच बने सीवर लाइन के चैंबरों और गड्ढों के कारण स्थिति और भी जानलेवा बन चुकी है। इन गड्ढों और चैंबरों में गिरकर कई दोपहिया वाहन चालक घायल हो चुके हैं। इस गंभीर लापरवाही पर सवाल खड़ा हो रहा है कि हादसों का कारण बन रही इस अव्यवस्था के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है—बिजली विभाग या फिर नगर परिषद?1
- Post by BJMP जिला अध्यक्ष सतना भूपेंद्1
- मध्य प्रदेश के मैहर में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में दिल्ली में छात्रों पर हुए बर्बरतापूर्ण बल प्रयोग और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी के साथ किए गए बल प्रयोग के विरोध में एसडीएम महोदया को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई, युवाओं के रोजगार, लगातार हो रहे पेपर लीक, बदहाल शिक्षा व्यवस्था और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर भी कांग्रेस ने पुरजोर विरोध दर्ज कराया है। ज्ञापन में कहा गया है कि दिल्ली में अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे छात्रों पर जिस तरह बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया गया, वह लोकतंत्र की भावना के पूरी तरह विपरीत है। वहीं, छात्रों के समर्थन में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी के साथ किया गया बल प्रयोग भी अत्यंत निंदनीय है। आज देश का युवा रोजगार के गंभीर संकट से जूझ रहा है और प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इसके साथ ही बदहाल शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, जबकि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। बढ़ती महंगाई ने आम जनता का जीवन कठिन बना दिया है और किसान अपनी उपज के उचित मूल्य, खाद-बीज, सिंचाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। कांग्रेस ने एसडीएम से अनुरोध किया है कि इस ज्ञापन को राष्ट्रपति और भारत सरकार तक प्रेषित कर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।1
- मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बहुचर्चित अक्षया यादव हत्याकांड में करीब तीन साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार प्रमुख आरोपियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। अदालत को इस फैसले तक पहुँचाने में पुलिस की वैज्ञानिक जांच, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बरामद हथियार और 26 गवाहों की गवाही सबसे निर्णायक साबित हुई। यह वारदात 10 जुलाई 2023 की रात करीब 8 बजे की है, जब अक्षया यादव अपनी सहेली सोनाक्षी शर्मा के साथ कोचिंग से पढ़ाई पूरी कर स्कूटी से सिंधी कॉलोनी की ओर लौट रही थी। 'बेटी बचाओ चौराहे' के पास बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें घेरकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। सीने और हाथ में गोली लगने से अक्षया की मौत हो गई, जबकि सोनाक्षी बाल-बाल बच गई। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी सुमित रावत एकतरफा प्यार में सोनाक्षी का पीछा करता था और असल में निशाना सोनाक्षी ही थी, लेकिन गलती से गोली अक्षया को लग गई। वारदात के तुरंत बाद आरोपी उपदेश रावत उर्फ मोंटी ने अपने साथी बाला सुरवे को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा था — "गलत लड़की को गोली लग गई।" इसी चैट और कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुँची। इस सनसनीखेज मामले में कुल 8 आरोपी शामिल थे, जिनमें से 4 नाबालिगों का ट्रायल फिलहाल किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है। पुलिस ने मुख्य आरोपी सुमित रावत (जिस पर 2 हत्या सहित 6 मामले दर्ज हैं), हिस्ट्रीशीटर बाला सुरवे (27 मामले दर्ज), उपदेश रावत और साजिश में शामिल पृथ्वीराज चौहान को महाराष्ट्र, धौलपुर, दिल्ली, मुरैना और डबरा से गिरफ्तार किया था। न्यायालय के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए सोनाक्षी की मां करुणा शर्मा ने कहा कि इस फैसले से 3 साल से डर और दहशत में जी रहे परिवार को राहत और न्याय मिला है।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल से एक बेहद सुखद मामला सामने आया है, जहाँ सर्पदंश के बाद 12 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ने वाले दो मासूम बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गए हैं। रैगांव विधानसभा के करसरा गांव में सोते समय 11 साल की आंचल और उसके 8 साल के चचेरे भाई अनुराग को जहरीले सांप ने डस लिया था। बच्चों की हालत बिगड़ने पर परिजन बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल लाते ही बच्चों की बेहद नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, जहाँ वे करीब 5 दिनों तक रहे। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप द्विवेदी के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने बच्चों की लगातार निगरानी की और आखिरकार 12 दिनों के इलाज के बाद दोनों को बचा लिया। छुट्टी के वक्त डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने तालियां बजाकर और बच्चों के साथ केक काटकर इस पुनर्जन्म का जश्न मनाया। यह घटना सीख देती है कि अंधविश्वास या झाड़-फूंक में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना ही समझदारी है।1
- मध्यप्रदेश में मूंग की खरीदी न होने और निचले स्तर पर जारी भारी भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर तीखा निशाना साधा गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे अनशन और प्रदर्शन आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा गया कि सरकार अपने किए वादे भूल चुकी है और गरीबों को उनके आशियाने तक नहीं मिल पा रहे हैं। ई-टोकन सिस्टम में जमकर कालाबाजारी हो रही है, जिसको ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था में सुधार करने या इसे पूर्व की भांति लागू करने की मांग की गई है। ओटीपी, स्लॉट बुकिंग और अलग-अलग जगहों पर खाद आसानी से न मिलने के कारण समय, दूरी और भाग-दौड़ की समस्या बढ़ गई है। इसके अलावा नामांकन, सीमांकन और नक्शा तरमीन में हो रही भारी लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं और प्रदेश में बिजली कटौती को तुरंत बंद करने की मांग की गई है।3