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पानी बढ़ाने से लोगों को घर से निकलने की दिक्कत कड़ाई की नाव से आ जा रहे आज 5दिन हो गया मगर प्रधान अभी गांव में नहीं आए
Surjeet Thakur
पानी बढ़ाने से लोगों को घर से निकलने की दिक्कत कड़ाई की नाव से आ जा रहे आज 5दिन हो गया मगर प्रधान अभी गांव में नहीं आए
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- देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकारें 'सबका साथ, सबका विकास' और 'हर घर बिजली-पानी' के बड़े-बड़े दावे करती नहीं थकतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर डिजिटल भारत के दौर में सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव के लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं..." "यह पूरा मामला फर्रुखाबाद के विकास खंड शमशाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुआँ खेड़ा के मजरा 'गगइयां' का है। आधुनिक भारत में जहाँ 5G और डिजिटल क्रांति का डंका बज रहा है, वहीं गगइयां गांव के लोग आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं। शाम होते ही घरों में मोमबत्ती, दीये या फिर सौर ऊर्जा के छोटे-मोटे साधनों से रोशनी का जुगाड़ करना पड़ता है। गर्मी का मौसम हो या बच्चों की पढ़ाई, बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है।" सितम देखिए... ऐसा नहीं है कि गांव के आसपास से बिजली की लाइनें नहीं गुजरतीं। गांव से होकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन इस लाइन से सिर्फ नलकूपों (ट्यूबवेल) को कनेक्शन दिए गए हैं। यानी फसल सींचने के लिए तो बिजली दौड़ रही है, लेकिन जिन इंसानों ने इन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाया, उनके घर अंधेरे में डूबे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस मूलभूत समस्या को लेकर बिजली विभाग के चक्कर तो काटे ही, साथ ही क्षेत्रीय भाजपा सांसद मुकेश राजपूत से भी गुहार लगाई। लेकिन सांसद जी ने उनकी फरियाद सुनना तो दूर, ध्यान तक देना मुनासिब नहीं समझा।एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार हर गांव, हर घर तक बिजली और पक्की सड़कें पहुंचाने के सपने दिखा रही है, वहीं शमशाबाद का 'गगइयां' गांव सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।" "अब सवाल यह उठता है कि क्या 21वीं सदी में भी इन ग्रामीणों को बिजली के लिए ऐसे ही तरसना पड़ेगा? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस सोए हुए सिस्टम को जगाएंगे या गंगइया गांव के लोग यूं ही अंधेरे में दिन काटने को मजबूर रहेंगे? देश को आजाद हुए सात दशक से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। सरकारें 'सबका साथ, सबका विकास' और 'हर घर बिजली-पानी' के बड़े-बड़े दावे करती नहीं थकतीं। लेकिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर डिजिटल भारत के दौर में सिस्टम को कटघरे में खड़ा करती है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव के लोग बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को तरस रहे हैं..." "यह पूरा मामला फर्रुखाबाद के विकास खंड शमशाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुआँ खेड़ा के मजरा 'गंगइया का है। आधुनिक भारत में जहाँ 5G और डिजिटल क्रांति का डंका बज रहा है, वहीं गगइयां गांव के लोग आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं। शाम होते ही घरों में मोमबत्ती, दीये या फिर सौर ऊर्जा के छोटे-मोटे साधनों से रोशनी का जुगाड़ करना पड़ता है। गर्मी का मौसम हो या बच्चों की पढ़ाई, बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है।" सितम देखिए... ऐसा नहीं है कि गांव के आसपास से बिजली की लाइनें नहीं गुजरतीं। गांव से होकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है, लेकिन इस लाइन से सिर्फ नलकूपों (ट्यूबवेल) को कनेक्शन दिए गए हैं। यानी फसल सींचने के लिए तो बिजली दौड़ रही है, लेकिन जिन इंसानों ने इन्हें वोट देकर कुर्सी पर बैठाया, उनके घर अंधेरे में डूबे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी इस मूलभूत समस्या को लेकर बिजली विभाग के चक्कर तो काटे ही, साथ ही क्षेत्रीय भाजपा सांसद मुकेश राजपूत से भी गुहार लगाई। लेकिन सांसद जी ने उनकी फरियाद सुनना तो दूर, ध्यान तक देना मुनासिब नहीं समझा।एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार हर गांव, हर घर तक बिजली और पक्की सड़कें पहुंचाने के सपने दिखा रही है, वहीं शमशाबाद का 'गगइयां' गांव सरकारी तंत्र के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।" "अब सवाल यह उठता है कि क्या 21वीं सदी में भी इन ग्रामीणों को बिजली के लिए ऐसे ही तरसना पड़ेगा? क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस सोए हुए सिस्टम को जगाएंगे या गंगइया गांव के लोग यूं ही अंधेरे में दिन काटने को मजबूर रहेंगे?4
- परशुरामपुरी क्षेत्र में जेठ पर छेड़छाड़ का आरोप, विवाहिता ने दहेज उत्पीड़न व मारपीट की शिकायत दर्ज कराई जलालाबाद (शाहजहांपुर)। थाना जलालाबाद क्षेत्र के ग्राम पंचायत चकचन्द्रसेन की एक विवाहिता ने अपने जेठ समेत ससुराल पक्ष पर छेड़छाड़, मारपीट, दहेज उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि घर में अकेले होने पर जेठ ने उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर ननद ने पत्थर मारकर घायल कर दिया, जबकि सास और जेठानी ने मारपीट कर उसके कपड़े फाड़ दिए।1
- Post by संपादक गौरी शंकर त्रिवेदी1
- मैनपुरी में ई-रिक्शा चालकों की मनमानी, जान जोखिम में डालकर ढोई जा रहीं सवारियां जनपद मैनपुरी | रिपोर्टर अमित कौशिक मैनपुरी शहर में ई-रिक्शा चालकों की मनमानी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए कुछ चालक ई-रिक्शा के पीछे लोहे का जाल और अतिरिक्त बंपर लगाकर उसमें भारी मात्रा में सामान लादकर सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, कई ई-रिक्शा चालक निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। ताजा मामला उस समय सामने आया जब एक ई-रिक्शा चालक अपने वाहन के पीछे लगा जाल खोलकर उसके ऊपर सवारियां बैठाकर ले जाता हुआ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने जब चालक को समझाने का प्रयास किया तो वह उल्टा बहस करने लगा और झगड़े पर उतारू हो गया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। शहर के प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी ई-रिक्शा चालक बिना किसी रोक-टोक के सवारियां ढोते नजर आ रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यातायात पुलिस की लापरवाही के कारण ऐसे वाहन चालक बेखौफ होकर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से बड़े बंपर और अतिरिक्त ढांचे लगाकर चल रहे ई-रिक्शाओं के खिलाफ अभियान चलाया जाए। बिना नंबर प्लेट वाले ई-रिक्शाओं को तत्काल बंद किया जाए तथा जिन चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाए। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो ई-रिक्शाओं की यह मनमानी भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकती है। लोगों ने यातायात पुलिस और जिला प्रशासन से नियमित जांच अभियान चलाकर दोषी चालकों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुरक्षित और सुचारु बनी रहे।1
- फर्रुखाबाद ब्रेकिंग पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते लगातार छोड़ा जा रहा गंगा नदी में पानी गंगा का लगातार जल स्तर बढ़ने से ग्रामीणों की बढ़ रही मुश्किले किसानों की हजारों बीघा फसलें हुई जल मग्न पानी के बढ़ने से कई गांवों का सम्पर्क मार्ग हुआ बंद बाढ़ का पानी बढ़ने से जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने तहसील अमृतपुर क्षेत्र के गांवों का लिया जायजा गावो में पानी भरने से पूर्व शरणालय स्थलों पर ग्रामीणों को भेजने के दिए निर्देश नरौरा बांध से 17272 हजार क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 125061हजार क्यूसेक, हरिद्वार बैराज से 95586 हजार मीटर क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया गंगा का जल स्तर पहुंचा 136.85 सेंटीमीटर गंगा नदी में खतरे का निशान 137.10 सेंटीमीटर गंगा नदी खतरे के निशान से मात्र 25 सेंटीमीटर दूर फर्रुखाबाद की तीनों तहसीलों में बाढ़ का मामला फर्रुखाबाद ब्रेकिंग पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते लगातार छोड़ा जा रहा गंगा नदी में पानी गंगा का लगातार जल स्तर बढ़ने से ग्रामीणों की बढ़ रही मुश्किले किसानों की हजारों बीघा फसलें हुई जल मग्न पानी के बढ़ने से कई गांवों का सम्पर्क मार्ग हुआ बंद बाढ़ का पानी बढ़ने से जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने तहसील अमृतपुर क्षेत्र के गांवों का लिया जायजा गावो में पानी भरने से पूर्व शरणालय स्थलों पर ग्रामीणों को भेजने के दिए निर्देश नरौरा बांध से 17272 हजार क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 125061हजार क्यूसेक, हरिद्वार बैराज से 95586 हजार मीटर क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया गंगा का जल स्तर पहुंचा 136.85 सेंटीमीटर गंगा नदी में खतरे का निशान 137.10 सेंटीमीटर गंगा नदी खतरे के निशान से मात्र 25 सेंटीमीटर दूर फर्रुखाबाद की तीनों तहसीलों में बाढ़ का मामला4
- फर्रुखाबाद ब्यूरो रिपोर्ट फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है1
- उत्तर प्रदेश जनपद फर्रुखाबाद से खबर हर छोटी बड़ी खबर आप तक *तहसील समाधान दिवस में जिलाधिकारी ने सुनी जनसमस्याएं, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण के दिए निर्देश* फर्रुखाबाद : जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में अमृतपुर तहसील के सभा कक्ष में "तहसील समाधान दिवस" का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप तहसील समाधान दिवस का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजस्व, पुलिस, विकास, विद्युत, सिंचाई, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण एवं अन्य विभागों से संबंधित प्राप्त शिकायतों का मौके पर जाकर सत्यापन कर नियमानुसार निस्तारण किया जाए। किसी भी शिकायत के निस्तारण में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। समाधान दिवस के दौरान प्राप्त प्रार्थना पत्रों में मुख्य रूप से भूमि विवाद, पैमाइश, कब्जा, सड़क, जल निकासी, विद्युत आपूर्ति, पेंशन तथा अन्य जनसुविधाओं से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुईं। जिलाधिकारी ने गंभीर प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने तथा शिकायतकर्ताओं को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के उपरांत जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि समाधान दिवस में प्राप्त सभी प्रकरणों की नियमित समीक्षा की जाए तथा निस्तारण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे आमजन को पारदर्शी एवं प्रभावी प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध हो सकें। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अमृतपुर तहसील में आयोजित तहसील दिवस के दौरान कुल 138 प्रकरण प्राप्त हुए, जिसमें राजस्व विभाग के 55, पुलिस विभाग के 26, विकास विभाग के 22, विद्युत विभाग के 06, खाद्य एवं रसद विभाग के 08 एवं अन्य विभागों के 21 प्रकरण सम्मिलित रहे, इनमें से 04 प्रकरणों को मौके पर निस्तारित किया गया। तहसील दिवस के उपरांत जिलाधिकारी ने अमृतपुर तहसील परिसर में वृक्षारोपण किया, यहां पर उन्होंने आमजनमानस से अपील करते हुए कहा कि वह अपने जीवन में पेड़ अनिवार्य रूप से लगाए जिससे आने वाली पीढियों को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्धक वातावरण प्राप्त हो सके। इसके पश्चात जिलाधिकारी ने कुठला झील पर पर्यटन विकास की संभावनाओं की दृष्टिगत पर्यटन विभाग द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों का निरीक्षण किया यहां पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि झील पर व्यवस्थित रूप से साफ सफाई कराते हुए पर्यटन विकास के अंतर्गत आवश्यक कार्य पूर्ण करें, जिससे लोगों को पर्यटन योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्रीमती आरती सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी राजीव कुमार, उप जिलाधिकारी स्वेता साहू, परियोजना निदेशक डीआरडीए कपिल कुमार, क्षेत्राधिकारी अमृतपुर, तहसीलदार शशांक सिंह सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तथा तहसील स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। जिला सूचना कार्यालय, फर्रुखाबाद द्वारा प्रसारित।1