*जब देश मना रहा था आजादी का जश्न, तब कस्तरा गांव में लोग अपनी जान बचाने का रास्ता खोज रहे थे* *मैहर / अमरपाटन।* जब पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा था, उस समय जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुना के कस्तरा टोला के 100 घरों में जश्न नहीं, बल्कि खौफ का मंजर था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों को एक ही चिंता सता रही थी कि कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित किया जाए। मन में एक ही डर था कि कहीं गांव में पानी घुस गया तो क्या होगा। रात के अंधेरे में लोग डर के मारे सहमे रहे और दूसरे दिन भी परेशानियों से जूझते रहे। कस्तरा गांव चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य मार्ग है। मुकुंदपुर मुख्य बाजार, जहां से ग्रामीण रोजमर्रा की खरीददारी करते हैं, उसी रास्ते से जाना पड़ता है, लेकिन हल्की सी बारिश में ही वह रास्ता उफान पर आ जाता है। *बीमार बुजुर्ग दवा को तरसे* रपटा पर पानी आने से गांव पूरी तरह कैद हो गया। गांव में मौजूद बीमार बुजुर्ग दवाइयों के लिए तरस रहे हैं। जरूरत की सामग्री तक नहीं पहुंच पा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण सिर्फ एक रास्ते के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। *कुमार अर्जुन सिंह के समय का जर्जर रपटा* ग्रामीणों ने बताया कि मुर्जुआ नाले में जो रपटा बना है, वह कुमार अर्जुन सिंह के समय का है। वह अब बहुत गहराई में चला गया है, जर्जर हो चुका है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही उसके ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक रपटा से पानी नीचे नहीं उतरता, ग्रामीण गांव में ही कैद रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विपरीत परिस्थिति आ जाए तो हम खुद को कैसे बचाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। खबर अमरपाटन/ग्राम पंचायत जमुना कस्तरा ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन मैहर से मांग की है कि इस जर्जर रपटा की जगह ऊंचा पक्का पुल बनाया जाए, ताकि कस्तरा गांव के 100 परिवार मुख्य मार्ग से जुड़ सकें और उन्हें इस कैद से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके। खबर अमरपाटन/ग्राम पंचायत जमुना कस्तरा रपटे में पानी बढ़ते हैं ग्रामीण हुए कैद जान जोखिम में डालकर लोग करते हैं रपटा पर कस्तरा गांव के लोग#news#mihar#mpliveupdate #ख़बर1इंडिया #ndtvnews *जब देश मना रहा था आजादी का जश्न, तब कस्तरा गांव में लोग अपनी जान बचाने का रास्ता खोज रहे थे* *मैहर / अमरपाटन।* जब पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा था, उस समय जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुना के कस्तरा टोला के 100 घरों में जश्न नहीं, बल्कि खौफ का मंजर था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों को एक ही चिंता सता रही थी कि कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित किया जाए। मन में एक ही डर था कि कहीं गांव में पानी घुस गया तो क्या होगा। रात के अंधेरे में लोग डर के मारे सहमे रहे और दूसरे दिन भी परेशानियों से जूझते रहे। कस्तरा गांव चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य मार्ग है। मुकुंदपुर मुख्य बाजार, जहां से ग्रामीण रोजमर्रा की खरीददारी करते हैं, उसी रास्ते से जाना पड़ता है, लेकिन हल्की सी बारिश में ही वह रास्ता उफान पर आ जाता है। *बीमार बुजुर्ग दवा को तरसे* रपटा पर पानी आने से गांव पूरी तरह कैद हो गया। गांव में मौजूद बीमार बुजुर्ग दवाइयों के लिए तरस रहे हैं। जरूरत की सामग्री तक नहीं पहुंच पा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण सिर्फ एक रास्ते के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। *कुमार अर्जुन सिंह के समय का जर्जर रपटा* ग्रामीणों ने बताया कि मुर्जुआ नाले में जो रपटा बना है, वह कुमार अर्जुन सिंह के समय का है। वह अब बहुत गहराई में चला गया है, जर्जर हो चुका है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही उसके ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक रपटा से पानी नीचे नहीं उतरता, ग्रामीण गांव में ही कैद रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विपरीत परिस्थिति आ जाए तो हम खुद को कैसे बचाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन मैहर से मांग की है कि इस जर्जर रपटा की जगह ऊंचा पक्का पुल बनाया जाए, ताकि कस्तरा गांव के 100 परिवार मुख्य मार्ग से जुड़ सकें और उन्हें इस कैद से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके।
*जब देश मना रहा था आजादी का जश्न, तब कस्तरा गांव में लोग अपनी जान बचाने का रास्ता खोज रहे थे* *मैहर / अमरपाटन।* जब पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा था, उस समय जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुना के कस्तरा टोला के 100 घरों में जश्न नहीं, बल्कि खौफ का मंजर था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों को एक ही चिंता सता रही थी कि कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित किया जाए। मन में एक ही डर था कि कहीं गांव में पानी घुस गया तो क्या होगा। रात के अंधेरे में लोग डर के मारे सहमे रहे और दूसरे दिन भी परेशानियों से जूझते रहे। कस्तरा गांव चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य मार्ग है। मुकुंदपुर मुख्य बाजार, जहां से ग्रामीण रोजमर्रा की खरीददारी करते हैं, उसी रास्ते से जाना पड़ता है, लेकिन हल्की सी बारिश में ही वह रास्ता उफान पर आ जाता है। *बीमार बुजुर्ग दवा को तरसे* रपटा पर पानी आने से गांव पूरी तरह कैद हो गया। गांव में मौजूद बीमार बुजुर्ग दवाइयों के लिए तरस रहे हैं। जरूरत की सामग्री तक नहीं पहुंच पा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण सिर्फ एक रास्ते के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। *कुमार अर्जुन सिंह के समय का जर्जर रपटा* ग्रामीणों ने बताया कि मुर्जुआ नाले में जो रपटा बना है, वह कुमार अर्जुन सिंह के समय का है। वह अब बहुत गहराई में चला गया है, जर्जर हो चुका है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही उसके ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक रपटा से पानी नीचे नहीं उतरता, ग्रामीण गांव में ही कैद रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विपरीत परिस्थिति आ जाए तो हम खुद को कैसे बचाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। खबर अमरपाटन/ग्राम पंचायत जमुना कस्तरा ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन मैहर से मांग की है कि इस जर्जर रपटा की जगह ऊंचा पक्का पुल बनाया जाए, ताकि कस्तरा गांव के 100 परिवार मुख्य मार्ग से जुड़ सकें और उन्हें इस कैद से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके। खबर अमरपाटन/ग्राम पंचायत जमुना कस्तरा रपटे में पानी बढ़ते हैं ग्रामीण हुए कैद जान जोखिम में डालकर लोग करते हैं रपटा पर कस्तरा गांव के लोग#news#mihar#mpliveupdate #ख़बर1इंडिया #ndtvnews *जब देश मना रहा था आजादी का जश्न, तब कस्तरा गांव में लोग अपनी जान बचाने का रास्ता खोज रहे थे* *मैहर / अमरपाटन।* जब पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा था, उस समय जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुना के कस्तरा टोला के 100 घरों में जश्न नहीं, बल्कि खौफ का मंजर था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों को एक ही चिंता सता रही थी कि कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित किया जाए। मन में एक ही डर था कि कहीं गांव में पानी घुस गया तो क्या होगा। रात के अंधेरे में लोग डर के मारे सहमे रहे और दूसरे दिन भी परेशानियों से जूझते रहे। कस्तरा गांव चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य मार्ग है। मुकुंदपुर मुख्य बाजार, जहां से ग्रामीण रोजमर्रा की खरीददारी करते हैं, उसी रास्ते से जाना पड़ता है, लेकिन हल्की सी बारिश में ही वह रास्ता उफान पर आ जाता है। *बीमार बुजुर्ग दवा को तरसे* रपटा पर पानी आने से गांव पूरी तरह कैद हो गया। गांव में मौजूद बीमार बुजुर्ग दवाइयों के लिए तरस रहे हैं। जरूरत की सामग्री तक नहीं पहुंच पा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण सिर्फ एक रास्ते के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। *कुमार अर्जुन सिंह के समय का जर्जर रपटा* ग्रामीणों ने बताया कि मुर्जुआ नाले में जो रपटा बना है, वह कुमार अर्जुन सिंह के समय का है। वह अब बहुत गहराई में चला गया है, जर्जर हो चुका है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही उसके ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक रपटा से पानी नीचे नहीं उतरता, ग्रामीण गांव में ही कैद रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विपरीत परिस्थिति आ जाए तो हम खुद को कैसे बचाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन मैहर से मांग की है कि इस जर्जर रपटा की जगह ऊंचा पक्का पुल बनाया जाए, ताकि कस्तरा गांव के 100 परिवार मुख्य मार्ग से जुड़ सकें और उन्हें इस कैद से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके।
- खबर/मैहर/अमरपाटन मध्यप्रदेश टूरिज्म के अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ला ने मदीना भवन का किया निरीक्षण* *मध्यप्रदेश टूरिज्म के अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ला ने मदीना भवन का किया निरीक्षण* मैहर मे संगीत सम्राट बाबा उस्ताद अलाउद्दीन खां की समृद्ध संगीत विरासत को संरक्षित करने और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को उनकी कला एवं योगदान से परिचित कराने की दिशा में मैहर में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने सोमवार को मदीना भवन पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ला ने बाबा उस्ताद अलाउद्दीन खां से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का अवलोकन किया। उन्होंने बाबा द्वारा तैयार किए गए मैहर बैंड, नल तरंग सहित विभिन्न वाद्य यंत्रों तथा उनके उपयोग की जानकारी ली। उन्होंने मदीना भवन के पुनरुद्धार को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर मैहर कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी, एसडीएम, समाजसेवी डॉ. कैलाश जैन, मदीना भवन के ट्रस्टी सहित संबंधित अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।1
- चित्रकूट आज दिनांक 1 सितंबर प्रातः काल की स्थिति आरोग धाम में मां मंदाकिनी धीरे धीरे फिर से आ रही अपने रौद्र में सभी सावधान रहें सतर्क रहें।1
- रामपुर बघेलान क्षेत्र में गोवंश का बहुत ही बुरा हाल है जो की सड़कों पर एक्सीडेंटल गोवंश हर एक किलोमीटर के अंतराल पर देखने को मिल रही है क्या एक्सीडेंटल गोवंश सड़क की शोभा बढ़ाने के लिए पड़ी रहती हैं या की नेताओं के द्वारा क्षेत्र का विकास किया जा रहा है अमृत को वश सड़कों पर पड़े रहते हैं क्या इसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन के द्वारा दे नहीं हो रही सतना जिले के अंदर सड़क सुरक्षा के ऊपर कोई सुनने वाला कोई बोलने वाला नहीं है1
- सतना सांसद श्री गणेश सिंह अपने जारी एक बयान में कहा है कि रात से फिर से बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बनती जा रही है। सेमरावल नदी में काफी पानी बढ़ गया है और कोटर-बिरसिंहपुर का रास्ता भी लगभग बंद होने की स्थिति में आ चुका है और फिर से निचले स्तर पर पानी भरेगा। मैंने कलेक्टर महोदय से कहा है कि तत्काल टमस बराज बांध के सारे गेट खोल दिए जाएं ताकि पानी का जमाव न होने पाए। इसी तरह से चित्रकूट मंदाकिनी नदी में भी पानी की गति बढ़ती जा रही है, उसका जल स्तर बढ़ता जा रहा है। मै वहां के लोगों से भी अपील करता हूँ कि सब लोग सतर्क रहें, प्रशासन भी सतर्क रहे, जनसेवी संस्थाएं भी सतर्क रहें, कार्यकर्ता भी सतर्क रहें और हर एक परिवारों से मेरी अपेक्षा है कि कृपया करके सुरक्षित स्थान पर अपने आप को, अपने परिवार के लोगों को लेकर के पहुँचें। धन्यवाद। सतना सांसद श्री गणेश सिंह अपने जारी एक बयान में कहा है कि रात से फिर से बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बनती जा रही है। सेमरावल नदी में काफी पानी बढ़ गया है और कोटर-बिरसिंहपुर का रास्ता भी लगभग बंद होने की स्थिति में आ चुका है और फिर से निचले स्तर पर पानी भरेगा। मैंने कलेक्टर महोदय से कहा है कि तत्काल टमस बराज बांध के सारे गेट खोल दिए जाएं ताकि पानी का जमाव न होने पाए। इसी तरह से चित्रकूट मंदाकिनी नदी में भी पानी की गति बढ़ती जा रही है, उसका जल स्तर बढ़ता जा रहा है। मै वहां के लोगों से भी अपील करता हूँ कि सब लोग सतर्क रहें, प्रशासन भी सतर्क रहे, जनसेवी संस्थाएं भी सतर्क रहें, कार्यकर्ता भी सतर्क रहें और हर एक परिवारों से मेरी अपेक्षा है कि कृपया करके सुरक्षित स्थान पर अपने आप को, अपने परिवार के लोगों को लेकर के पहुँचें। धन्यवाद।1
- *बाढ़ प्रभावित वार्ड 6,7,8के निचली बस्ती में रहने वाले व्यक्तियों को रॉयल कॉम्पलेक्स और वार्ड नंबर 1 से 5 तक के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बालाजी पैलेस में रहने और खाने की व्यवस्था की गई* *बाढ़ प्रभावित वार्ड 6,7,8के निचली बस्ती में रहने वाले व्यक्तियों को रॉयल कॉम्पलेक्स और वार्ड नंबर 1 से 5 तक के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बालाजी पैलेस में रहने और खाने की व्यवस्था की गई*1
- *जब देश मना रहा था आजादी का जश्न, तब कस्तरा गांव में लोग अपनी जान बचाने का रास्ता खोज रहे थे* *मैहर / अमरपाटन।* जब पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा था, उस समय जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुना के कस्तरा टोला के 100 घरों में जश्न नहीं, बल्कि खौफ का मंजर था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों को एक ही चिंता सता रही थी कि कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित किया जाए। मन में एक ही डर था कि कहीं गांव में पानी घुस गया तो क्या होगा। रात के अंधेरे में लोग डर के मारे सहमे रहे और दूसरे दिन भी परेशानियों से जूझते रहे। कस्तरा गांव चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य मार्ग है। मुकुंदपुर मुख्य बाजार, जहां से ग्रामीण रोजमर्रा की खरीददारी करते हैं, उसी रास्ते से जाना पड़ता है, लेकिन हल्की सी बारिश में ही वह रास्ता उफान पर आ जाता है। *बीमार बुजुर्ग दवा को तरसे* रपटा पर पानी आने से गांव पूरी तरह कैद हो गया। गांव में मौजूद बीमार बुजुर्ग दवाइयों के लिए तरस रहे हैं। जरूरत की सामग्री तक नहीं पहुंच पा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण सिर्फ एक रास्ते के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। *कुमार अर्जुन सिंह के समय का जर्जर रपटा* ग्रामीणों ने बताया कि मुर्जुआ नाले में जो रपटा बना है, वह कुमार अर्जुन सिंह के समय का है। वह अब बहुत गहराई में चला गया है, जर्जर हो चुका है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही उसके ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक रपटा से पानी नीचे नहीं उतरता, ग्रामीण गांव में ही कैद रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विपरीत परिस्थिति आ जाए तो हम खुद को कैसे बचाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। खबर अमरपाटन/ग्राम पंचायत जमुना कस्तरा ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन मैहर से मांग की है कि इस जर्जर रपटा की जगह ऊंचा पक्का पुल बनाया जाए, ताकि कस्तरा गांव के 100 परिवार मुख्य मार्ग से जुड़ सकें और उन्हें इस कैद से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके। खबर अमरपाटन/ग्राम पंचायत जमुना कस्तरा रपटे में पानी बढ़ते हैं ग्रामीण हुए कैद जान जोखिम में डालकर लोग करते हैं रपटा पर कस्तरा गांव के लोग#news#mihar#mpliveupdate #ख़बर1इंडिया #ndtvnews *जब देश मना रहा था आजादी का जश्न, तब कस्तरा गांव में लोग अपनी जान बचाने का रास्ता खोज रहे थे* *मैहर / अमरपाटन।* जब पूरा भारत स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ मना रहा था, उस समय जनपद पंचायत अमरपाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुना के कस्तरा टोला के 100 घरों में जश्न नहीं, बल्कि खौफ का मंजर था। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों को एक ही चिंता सता रही थी कि कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित किया जाए। मन में एक ही डर था कि कहीं गांव में पानी घुस गया तो क्या होगा। रात के अंधेरे में लोग डर के मारे सहमे रहे और दूसरे दिन भी परेशानियों से जूझते रहे। कस्तरा गांव चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य मार्ग है। मुकुंदपुर मुख्य बाजार, जहां से ग्रामीण रोजमर्रा की खरीददारी करते हैं, उसी रास्ते से जाना पड़ता है, लेकिन हल्की सी बारिश में ही वह रास्ता उफान पर आ जाता है। *बीमार बुजुर्ग दवा को तरसे* रपटा पर पानी आने से गांव पूरी तरह कैद हो गया। गांव में मौजूद बीमार बुजुर्ग दवाइयों के लिए तरस रहे हैं। जरूरत की सामग्री तक नहीं पहुंच पा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण सिर्फ एक रास्ते के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। *कुमार अर्जुन सिंह के समय का जर्जर रपटा* ग्रामीणों ने बताया कि मुर्जुआ नाले में जो रपटा बना है, वह कुमार अर्जुन सिंह के समय का है। वह अब बहुत गहराई में चला गया है, जर्जर हो चुका है। थोड़ा सा पानी बढ़ते ही उसके ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक रपटा से पानी नीचे नहीं उतरता, ग्रामीण गांव में ही कैद रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विपरीत परिस्थिति आ जाए तो हम खुद को कैसे बचाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा। ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन मैहर से मांग की है कि इस जर्जर रपटा की जगह ऊंचा पक्का पुल बनाया जाए, ताकि कस्तरा गांव के 100 परिवार मुख्य मार्ग से जुड़ सकें और उन्हें इस कैद से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके।1
- सतना में हाहाकार! 10 दिन में तीसरी बार डूबा बिरसिंहपुर, CMO पर फूटा जनता का गुस्सा | अधूरी नहर बनी काल सतना जिले के बिरसिंहपुर में 10 दिनों के अंदर तीसरी बार बाढ़ ने तबाही मचा दी है। अधूरी पड़ी नहरों का पानी शहर में घुस रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर प्रशासन ने बारिश से पहले कोई तैयारी नहीं की, और पहली-दूसरी बाढ़ के बाद भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें भोजन के पैकेट तक नहीं मिल रहे हैं, जबकि कागजों में राशन वितरण दिखाया जा रहा है। इसी को लेकर आज नगर परिषद CMO के सामने लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और जमकर खरी-खोटी सुनाई। देखिए ग्राउंड रिपोर्ट... सतना में हाहाकार! 10 दिन में तीसरी बार डूबा बिरसिंहपुर, CMO पर फूटा जनता का गुस्सा | अधूरी नहर बनी काल सतना जिले के बिरसिंहपुर में 10 दिनों के अंदर तीसरी बार बाढ़ ने तबाही मचा दी है। अधूरी पड़ी नहरों का पानी शहर में घुस रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर प्रशासन ने बारिश से पहले कोई तैयारी नहीं की, और पहली-दूसरी बाढ़ के बाद भी कोई इंतजाम नहीं किया गया। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें भोजन के पैकेट तक नहीं मिल रहे हैं, जबकि कागजों में राशन वितरण दिखाया जा रहा है। इसी को लेकर आज नगर परिषद CMO के सामने लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और जमकर खरी-खोटी सुनाई। देखिए ग्राउंड रिपोर्ट...1
- सतना के गिद्दूरी बांध में दर्दनाक हादसा: 14 वर्षीय बालक का शव बरामद, क्षेत्र में शोक की लहर *सतना के गिद्दूरी बांध में दर्दनाक हादसा: 14 वर्षीय बालक का शव बरामद, क्षेत्र में शोक की लहर* सतना (मध्य प्रदेश): जैतवारा थाना क्षेत्र के गोरसरी निवासी और हाल ही में शास्त्री नगर (शेर गंज, थाना सिविल लाइन) में रह रहे 14 वर्षीय असीम उर्फ सनम कोल (पिता - संदीप कोल) का शव गिद्दूरी बांध से बरामद कर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, असीम कल पेटेक सिटी के पीछे बने गिद्दूरी बांध में नहाने गया था, जिसके बाद वह गहरे पानी में डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद आज सुबह बालक के शव को बांध से बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव को पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। #SatnaNews #MadhyaPradeshNews #BreakingNews #SatnaPolice #GidduriDam #Satna #UnchehraNews #Jaitwara #CivilLineSatna #MPNews #SatnaUpdate #CrimeNewsSatna1
- सतना जिले के बिरसिंहपुर में महज 10 दिनों के अंतराल में तीसरी बार बाढ़ आपदा झेल रहे बिरसिंहपुर के स्थानीय निवासियों का सब्र आखिरकार टूट गया। पीड़ितों ने तहसीलदार शैलेन्द्र शर्मा की उपस्थिति में नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) का घेराव कर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई । सतना जिले के बिरसिंहपुर, चित्रकूट और कोटर क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही और कुप्रबंधन के कारण बाढ़ का कहर लगातार जारी है। महज 10 दिनों के अंतराल में तीसरी बार बाढ़ आपदा झेल रहे बिरसिंहपुर के स्थानीय निवासियों का सब्र आखिरकार टूट गया। पीड़ितों ने तहसीलदार शैलेन्द्र शर्मा की उपस्थिति में नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) का घेराव कर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई और अपना भारी आक्रोश व्यक्त किया। अधूरी नहरें बनीं मुसीबत, प्रशासन ने फेरा मुंह स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर के डूबने की मुख्य वजह बरगी या बाणसागर परियोजना के तहत बनीं अधूरी नहरें हैं। इन अधूरी पड़ी नहरों का पानी सीधे रिहायशी इलाकों में घुस रहा है। गंभीर बात यह है कि जनता लगातार प्रशासन से गुहार लगाती रही, लेकिन नगर प्रशासन ने न तो बारिश से पहले कोई पुख्ता इंतजाम किए और न ही पहली और दूसरी बार आई बाढ़ से कोई सबक लिया। नतीजतन, क्षेत्रवासियों को 10 दिनों में तीसरी बार इस विभीषिका का सामना करना पड़ रहा है। कागजों में बंट रहा राशन, धरातल पर दाने-दाने को मोहताज जनता बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर प्रभावितों को भोजन के पैकेट तक नसीब नहीं हो रहे हैं। प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति कर राशन और भोजन बांटने का दावा कर रहा है। यह स्थिति तब है जब सूबे के मुख्यमंत्री ने स्वयं बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन लोगों के घर डूबे हैं, उनके रहने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था जिला प्रशासन करेगा। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बावजूद धरातल पर व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही हैं। चित्रकूट, बिरसिंहपुर और कोटर में हालात बेकाबू वर्तमान में बिरसिंहपुर के साथ-साथ चित्रकूट और कोटर के लगभग सभी गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। निचले इलाकों में स्थित मकान और दुकानें जलमग्न हो चुकी हैं। हालांकि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय होने का दावा कर रही हैं, लेकिन बाढ़ की विभीषिका के सामने प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह नाकाफी और लाचार साबित हो रही हैं। त्रस्त जनता अब जल्द से जल्द ठोस राहत और इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रही है। सुनील कुमार दाहिया3