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अनूपपुर जिले में मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में जिला स्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना कुमारी ने कुल 82 आवेदनों पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर कमलेश पुरी और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राशी अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याओं को सुना। जनसुनवाई में कई तरह की समस्याओं के समाधान हेतु आवेदन प्राप्त हुए। इनमें तहसील कोतमा के ग्राम कोठी निवासी अभय सिंह ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने, जैतहरी के वार्ड नं. 3 निवासी पुरुषोत्तम दास वर्मा ने नक्शा तरमीम कराने, और तहसील अनूपपुर के ग्राम परसवार निवासी धना सिंह गोंड़ ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाने के लिए आवेदन दिया। इसी क्रम में, तहसील पुष्पराजगढ़ के ग्राम खाटी निवासी कुवर सिंह ने सीमांकन कराने, तहसील कोतमा के ग्राम रेउला निवासी विष्णु सिंह उइके ने वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टा प्रदाय करने, और पुष्पराजगढ़ के अचलपुर निवासी राजेन्द्र कुमार संत ने घरेलू विद्युत सप्लाई वायर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कराने की अपील की। अन्य महत्वपूर्ण आवेदनों में बिजुरी निवासी श्रीमती ऊषा बंसल ने पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर सहायता राशि मांगी, पुष्पराजगढ़ के ग्राम गिरवी निवासी प्रेम सिंह गोंड़ ने भूमि का बंटवारा कराने, और नगर परिषद बनगवॉ निवासी महेश कुमार ने आयुष्मान कार्ड बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त, जैतहरी के ग्राम झाईताल निवासी रवि यादव ने अपने पिता की आकस्मिक मृत्यु होने पर संबल कार्ड के तहत सहायता राशि के लिए भी आवेदन दिया।

23 hrs ago
user_Anupam Singh patrkar
Anupam Singh patrkar
अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
23 hrs ago

अनूपपुर जिले में मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में जिला स्तरीय जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना कुमारी ने कुल 82 आवेदनों पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर कमलेश पुरी और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राशी अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याओं को सुना। जनसुनवाई में कई तरह की समस्याओं के समाधान हेतु आवेदन प्राप्त हुए। इनमें तहसील कोतमा के ग्राम कोठी निवासी अभय सिंह ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने, जैतहरी के वार्ड नं. 3 निवासी पुरुषोत्तम दास वर्मा ने नक्शा तरमीम कराने, और तहसील अनूपपुर के ग्राम परसवार निवासी धना सिंह गोंड़ ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाने के लिए आवेदन दिया। इसी क्रम में, तहसील पुष्पराजगढ़ के ग्राम खाटी निवासी कुवर सिंह ने सीमांकन कराने, तहसील कोतमा के ग्राम रेउला निवासी विष्णु सिंह उइके ने वनाधिकार अधिनियम के तहत पट्टा प्रदाय करने, और पुष्पराजगढ़ के अचलपुर निवासी राजेन्द्र कुमार संत ने घरेलू विद्युत सप्लाई वायर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कराने की अपील की। अन्य महत्वपूर्ण आवेदनों में बिजुरी निवासी श्रीमती ऊषा बंसल ने पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर सहायता राशि मांगी, पुष्पराजगढ़ के ग्राम गिरवी निवासी प्रेम सिंह गोंड़ ने भूमि का बंटवारा कराने, और नगर परिषद बनगवॉ निवासी महेश कुमार ने आयुष्मान कार्ड बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त, जैतहरी के ग्राम झाईताल निवासी रवि यादव ने अपने पिता की आकस्मिक मृत्यु होने पर संबल कार्ड के तहत सहायता राशि के लिए भी आवेदन दिया।

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  • शहडोल जिले में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से चल रही एक कोयला खदान पर माइनिंग विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा है। यह कार्रवाई 'काले हीरे' (कोयले) के अवैध उत्खनन को रोकने के उद्देश्य से की गई।
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    शहडोल जिले में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से चल रही एक कोयला खदान पर माइनिंग विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा है। यह कार्रवाई 'काले हीरे' (कोयले) के अवैध उत्खनन को रोकने के उद्देश्य से की गई।
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Astrologer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग 24 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में महिला उत्पीड़न से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए एक विशेष सुनवाई का आयोजन करेगा। जनपद पंचायत एमसीबी के अमृत सभाकक्ष में सुबह 11 बजे से आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य प्रियम्बदा सिंह जूदेव की न्यायपीठ कुल 9 प्रकरणों पर सुनवाई करेगी। आयोग ने एमसीबी, कोरिया, सरगुजा और सूरजपुर के पुलिस अधीक्षकों को संबंधित पक्षों को नोटिस तामील कराने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना तथा लंबित मामलों का प्रभावी ढंग से निराकरण करना है।
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    छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग 24 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में महिला उत्पीड़न से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए एक विशेष सुनवाई का आयोजन करेगा। जनपद पंचायत एमसीबी के अमृत सभाकक्ष में सुबह 11 बजे से आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य प्रियम्बदा सिंह जूदेव की न्यायपीठ कुल 9 प्रकरणों पर सुनवाई करेगी।

आयोग ने एमसीबी, कोरिया, सरगुजा और सूरजपुर के पुलिस अधीक्षकों को संबंधित पक्षों को नोटिस तामील कराने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती भी सुनिश्चित की जाएगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना तथा लंबित मामलों का प्रभावी ढंग से निराकरण करना है।
    user_Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Local News Reporter Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    4 hrs ago
  • मनेन्द्रगढ़ जिले के मुसरा पंचायत से एक महिला अपनी विधवा पेंशन संबंधी समस्या लेकर कलेक्टर जनदर्शन में पहुंची।
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    मनेन्द्रगढ़ जिले के मुसरा पंचायत से एक महिला अपनी विधवा पेंशन संबंधी समस्या लेकर कलेक्टर जनदर्शन में पहुंची।
    user_Mahendra Shukla
    Mahendra Shukla
    Newspaper publisher Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    10 hrs ago
  • बजाग ब्लॉक के अंतर्गत आमाडोंगरी में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य के दौरान पेयजल की पाइपलाइन टूट जाने से क्षेत्र की पानी आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। इस घटना के कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त हो गया, जिसके चलते उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का गुस्सा पाइपलाइन फोड़ने से उत्पन्न हुई पेयजल समस्या को लेकर था। यह चक्का जाम संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन और समझौते के बाद ही समाप्त किया गया।
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    बजाग ब्लॉक के अंतर्गत आमाडोंगरी में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य के दौरान पेयजल की पाइपलाइन टूट जाने से क्षेत्र की पानी आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। इस घटना के कारण ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त हो गया, जिसके चलते उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का गुस्सा पाइपलाइन फोड़ने से उत्पन्न हुई पेयजल समस्या को लेकर था। यह चक्का जाम संबंधित विभाग और प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन और समझौते के बाद ही समाप्त किया गया।
    user_Santosh Ahirwar
    Santosh Ahirwar
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • डिंडौरी जिले में किसानों को जैविक खेती और नवाचार से जोड़ने के लिए नर्मदांचल गौ सेवा समिति ढोंढ़ा के जैविक कृषि विशेषज्ञ एवं भारतीय किसान संघ डिंडौरी के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने एक पहल की है। वे किसानों को धान की बेहतर पैदावार के लिए जैविक विधि से बीजोपचार और नर्सरी तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। साहू का कहना है कि बीजों का समय पर उपचार करने से उक्ठा सहित कई बीजजनित और मृदाजनित रोगों से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, धान की अच्छी उपज के लिए सीधे बुवाई के बजाय नर्सरी तैयार कर रोपाई करना अधिक लाभकारी है। यदि बीजोपचार जैविक तरीके से किया जाए, तो अंकुरण क्षमता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है। बीजोपचार के लिए 'बीजामृत' नामक जैविक घोल तैयार किया जाता है, जिसके निर्माण में लगभग 10 किलोग्राम गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 500 ग्राम खाने का चूना, 5 लीटर साफ पानी और एक पाव कच्चे दूध का उपयोग होता है। इन सभी सामग्रियों को मिलाकर 24 घंटे छाया में रखा जाता है। तैयार मिश्रण का छिड़काव 100 किलोग्राम बीज पर कर उसे अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि सभी बीजों पर एक समान परत बन जाए। उपचारित बीजों को छाया में सुखाकर अगले दिन बोआई करने की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया से बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने और पौधों की जड़ों के बेहतर विकास में मदद मिल सकती है। बिहारी लाल साहू ने किसान भाइयों से आग्रह किया कि वे बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें, क्योंकि जैविक विधि अपनाने से लागत कम करने और फसल की शुरुआती सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
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    डिंडौरी जिले में किसानों को जैविक खेती और नवाचार से जोड़ने के लिए नर्मदांचल गौ सेवा समिति ढोंढ़ा के जैविक कृषि विशेषज्ञ एवं भारतीय किसान संघ डिंडौरी के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू ने एक पहल की है। वे किसानों को धान की बेहतर पैदावार के लिए जैविक विधि से बीजोपचार और नर्सरी तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। साहू का कहना है कि बीजों का समय पर उपचार करने से उक्ठा सहित कई बीजजनित और मृदाजनित रोगों से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, धान की अच्छी उपज के लिए सीधे बुवाई के बजाय नर्सरी तैयार कर रोपाई करना अधिक लाभकारी है। यदि बीजोपचार जैविक तरीके से किया जाए, तो अंकुरण क्षमता बढ़ती है और पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है। बीजोपचार के लिए 'बीजामृत' नामक जैविक घोल तैयार किया जाता है, जिसके निर्माण में लगभग 10 किलोग्राम गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 500 ग्राम खाने का चूना, 5 लीटर साफ पानी और एक पाव कच्चे दूध का उपयोग होता है। इन सभी सामग्रियों को मिलाकर 24 घंटे छाया में रखा जाता है।

तैयार मिश्रण का छिड़काव 100 किलोग्राम बीज पर कर उसे अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि सभी बीजों पर एक समान परत बन जाए। उपचारित बीजों को छाया में सुखाकर अगले दिन बोआई करने की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया से बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने और पौधों की जड़ों के बेहतर विकास में मदद मिल सकती है। बिहारी लाल साहू ने किसान भाइयों से आग्रह किया कि वे बीज बोने से पहले बीजोपचार अवश्य करें, क्योंकि जैविक विधि अपनाने से लागत कम करने और फसल की शुरुआती सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है। इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है। हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।
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    डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है।

इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है।

इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है।

हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।
    user_Neeraj rajak
    Neeraj rajak
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
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    Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Astrologer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • एमसीबी के खड़गवां में कृषिविकास एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा "खेत बचाओ अभियान" के तहत एक जिला स्तरीय कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिन्होंने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। मंत्री जायसवाल ने जोर देकर कहा कि रासायनिक खादों के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसके कारण जैविक खेती आज की आवश्यकता बन गई है। उन्होंने उपस्थित किसानों को नैनो डीएपी, जैविक खाद और सनई की खेती से होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। सम्मेलन में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जिले भर से आए 300 से अधिक किसान उपस्थित रहे। साथ ही, किसानों को कृषि महाविद्यालयों से मिलने वाले विभिन्न लाभों के बारे में भी अवगत कराया गया।
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    एमसीबी के खड़गवां में कृषिविकास एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा "खेत बचाओ अभियान" के तहत एक जिला स्तरीय कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिन्होंने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

मंत्री जायसवाल ने जोर देकर कहा कि रासायनिक खादों के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसके कारण जैविक खेती आज की आवश्यकता बन गई है। उन्होंने उपस्थित किसानों को नैनो डीएपी, जैविक खाद और सनई की खेती से होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

सम्मेलन में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के तरीकों पर भी मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जिले भर से आए 300 से अधिक किसान उपस्थित रहे। साथ ही, किसानों को कृषि महाविद्यालयों से मिलने वाले विभिन्न लाभों के बारे में भी अवगत कराया गया।
    user_Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Ashok Shrivastava Khabar Fast
    Local News Reporter Manendragarh, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    4 hrs ago
  • डिंडौरी/शहपुरा के ढोंढ़ा स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति के जैव आदान संसाधन केंद्र (बीआरसी) और जैविक फार्म हाउस का हाल ही में जनजाति कल्याण केंद्र बरगांव के प्रकल्प प्रमुख व वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी, तथा महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स हेमराज बर्मन के साथ दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य जैविक खेती के महत्व को समझना और उसे बढ़ावा देना था, जिसे सभी ने सराहा। इस दौरान जैविक खेती को एकमात्र सही मार्ग बताते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि खेती केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुँचाया है, जिससे जमीन बंजर हो रही है और जल, वायु व खाद्य पदार्थ प्रदूषित हो रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहा है। ऐसे में गौवंश आधारित जैविक खेती को ही एकमात्र सही विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित करती है, और शुद्ध, सुरक्षित व स्वास्थ्यवर्धक फसलें देती है। यह खेती दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इसलिए यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती अपनाएं। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही बायोगैस संयंत्र और जीवामृत के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जिससे मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है, जो सीधे चूल्हे तक पहुंचती है। बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग होती है। करीब 6 फीट चौड़े और 10 फीट लंबे इस संयंत्र से वर्षों तक गैस प्राप्त की जा सकती है, जिससे ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण होता है। जीवामृत को देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद बताया गया। डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं। वे स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे विभिन्न मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित कई जिलों में जैविक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाते हैं, और वर्तमान में बनी गोबर गैस को भी जलाकर लोगों को प्रदर्शित किया गया। यह सारी जानकारी दिनांक 10/6/2026 को प्रदान की गई।
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    डिंडौरी/शहपुरा के ढोंढ़ा स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति के जैव आदान संसाधन केंद्र (बीआरसी) और जैविक फार्म हाउस का हाल ही में जनजाति कल्याण केंद्र बरगांव के प्रकल्प प्रमुख व वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी, तथा महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स हेमराज बर्मन के साथ दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य जैविक खेती के महत्व को समझना और उसे बढ़ावा देना था, जिसे सभी ने सराहा।

इस दौरान जैविक खेती को एकमात्र सही मार्ग बताते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि खेती केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुँचाया है, जिससे जमीन बंजर हो रही है और जल, वायु व खाद्य पदार्थ प्रदूषित हो रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहा है। ऐसे में गौवंश आधारित जैविक खेती को ही एकमात्र सही विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित करती है, और शुद्ध, सुरक्षित व स्वास्थ्यवर्धक फसलें देती है। यह खेती दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है।

इसलिए यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती अपनाएं। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही बायोगैस संयंत्र और जीवामृत के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जिससे मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है, जो सीधे चूल्हे तक पहुंचती है। बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग होती है। करीब 6 फीट चौड़े और 10 फीट लंबे इस संयंत्र से वर्षों तक गैस प्राप्त की जा सकती है, जिससे ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण होता है। जीवामृत को देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद बताया गया।

डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं। वे स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे विभिन्न मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित कई जिलों में जैविक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाते हैं, और वर्तमान में बनी गोबर गैस को भी जलाकर लोगों को प्रदर्शित किया गया। यह सारी जानकारी दिनांक 10/6/2026 को प्रदान की गई।
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    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
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