डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है। इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है। हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।
डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है। इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है। हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।
- उमरिया में एक फरियादी युवक ने सिविल सर्जन पर अशोभनीय हरकत करने का गंभीर आरोप लगाया है। युवक ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मामले में तत्काल कार्यवाही करने की माँग की है।1
- मनावर में एक व्यापारी का ढाय लाख रुपए का बैग गायब हो गया था। मनावर पुलिस ने इस घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ ही समय में गुम हुए बैग को ढूंढ निकाला। पुलिस की इस तत्परता के कारण व्यापारी को उसका बैग सुरक्षित वापस मिल गया, जिसके लिए व्यापारी ने पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया।1
- 2 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से किए गए सौंदर्यीकरण कार्य पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। यह विवाद डिवाइडर के निर्माण और अन्य सौंदर्यीकरण परियोजनाओं से संबंधित है, जहाँ दावा किया जा रहा है कि काम कागजों में तो पूर्ण हो चुका है, लेकिन वास्तविक धरातल पर अभी भी अधूरा पड़ा है। इस पूरे मामले को लेकर जनता अब जवाब की मांग कर रही है, और साथ ही इसकी गहन जांच की आवश्यकता भी बताई जा रही है।1
- मंडला जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जनमन योजना के तहत ग्राम मल्ठार से बैगा टोला तक बन रही सड़क में कथित तौर पर भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि सड़क के अर्थवर्क के दौरान बिना पानी डाले और बिना रोलर चलाए ही सीधे गिट्टी पर डामरीकरण कर दिया गया। इसके साथ ही, वर्ष 2022-23 में बनी पुरानी ग्रेवल सड़क के ऊपर ही नई परत बिछाकर कागजी खानापूर्ति की जा रही है। निर्माण कार्य में सड़क की चौड़ाई और ऊंचाई भी निर्धारित मानकों से कम पाई गई है। इस गंभीर अनियमितता को लेकर ग्रामीणों ने नारायणगंज जनपद अध्यक्ष आसाराम भारतीया से मुलाकात कर घटिया निर्माण की शिकायत की, जिसके बाद जनपद अध्यक्ष मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने जनपद अध्यक्ष से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही, उन्होंने मंडला कलेक्टर से भी सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की अपील की है।1
- मंत्री परिषद की एक बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन निर्णयों में विशेष रूप से दलहन, तिलहन, रागी, कोदो और कुटकी जैसी फसलों से संबंधित अहम बातें शामिल हैं।1
- मंडला में कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने माटी कला के साधक बलराम चक्रवर्ती के निवास पर पहुंचकर उनसे आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों के निर्माण कार्य का अवलोकन किया और माटी कला के संरक्षण तथा इसके पुनर्प्रचार को लेकर विस्तृत चर्चा की। कलेक्टर ने इस बात पर बल दिया कि पारंपरिक कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करना अत्यंत आवश्यक है। मुलाकात के क्रम में माटी कला से जुड़े अनुभवों और भविष्य की संभावनाओं पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।1
- डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस अभिरक्षा से फरार हुए युवक उमेश कुमार एक नया मोड़ लेते मामले में सोमवार सुबह गोरखपुर डेम से सटे जंगल में गंभीर अवस्था में पाए गए हैं। इससे पहले रविवार रात लगभग 10 बजे पुलिस अभिरक्षा से युवक के फरार होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसे जंगल में अचेत अवस्था में बेशर्म की झाड़ियों के बीच से बरामद करने का दावा किया गया। परिजनों ने युवक की गंभीर हालत पर कई सवाल खड़े किए हैं, उनका कहना है कि युवक सामान्य रूप से बातचीत नहीं कर पा रहा था और उसके मुंह में पत्ते भरे हुए थे, जिन्हें निकालना पड़ा। साथ ही, उसके बाएं पैर में सूजन और चोट के निशान भी दिखाई दिए। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि युवक डरा-सहमा हुआ था और पुलिस के पास जाने से इनकार कर रहा था। उपचार कर रहे चिकित्सक डॉ. नितिन देशमुख के अनुसार, प्रारंभिक जांच में युवक का ब्लड प्रेशर और शुगर स्तर सामान्य से कम पाया गया है, और उसका इलाज चिकित्सकीय निगरानी में जारी है। इस मामले में एसडीओपी शहपुरा ने बताया कि युवक का उपचार जारी है, और स्वास्थ्य स्थिति स्थिर होने तथा बयान दर्ज होने के बाद तथ्यों के आधार पर विस्तृत जांच प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि युवक की मां ने इससे पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से अपने बेटे की तलाश की गुहार लगाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब युवक के मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और वास्तविक स्थिति को सामने लाने की मांग और तेज हो गई है।3
- शहडोल जिले में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से चल रही एक कोयला खदान पर माइनिंग विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा है। यह कार्रवाई 'काले हीरे' (कोयले) के अवैध उत्खनन को रोकने के उद्देश्य से की गई।1
- मध्य प्रदेश के अनूपपुर में वर्क शेड के निर्माण में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद, स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित मामले की गहन जाँच की माँग उठाई है।1