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मध्य प्रदेश के अनूपपुर में वर्क शेड के निर्माण में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद, स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित मामले की गहन जाँच की माँग उठाई है।
JIYAUDDIN ANSARI
मध्य प्रदेश के अनूपपुर में वर्क शेड के निर्माण में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद, स्थानीय ग्रामीणों ने संबंधित मामले की गहन जाँच की माँग उठाई है।
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- उमरिया में एक फरियादी युवक ने सिविल सर्जन पर अशोभनीय हरकत करने का गंभीर आरोप लगाया है। युवक ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मामले में तत्काल कार्यवाही करने की माँग की है।1
- डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में जनजाति कल्याण केन्द्र बरगांव प्रकल्प प्रमुख, वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी और महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने दौरा किया। इस प्रवास के दौरान, उन्होंने जैविक खेती के महत्व पर विशेष जोर देते हुए इसे मानव जीवन, पशु-पक्षियों तथा पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेत की जमीन और मिट्टी ही अन्न उत्पन्न करने की मूल शक्ति है, जिससे मानव तथा अन्य जीवों का जीवन चलता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण और उसकी उर्वरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को हुए नुकसान, जमीन के बंजर होने, तथा जल, वायु और खाद्य पदार्थों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। इसके परिणामस्वरूप मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहे सीधे प्रभाव को देखते हुए, गौवंश आधारित जैविक खेती को एकमात्र सही विकल्प के रूप में सामने रखा गया। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित रखती है, और शुद्ध, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यवर्धक फसलें उत्पन्न करती है। यह पद्धति दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इस संदर्भ में, यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती को अपनाएँ। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि अपने खेत, मिट्टी, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक खेती को अपनाना ही एकमात्र ऐसा मार्ग है, जो एक स्वस्थ, समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर ले जाता है। इस प्रवास के दौरान बायोगैस संयंत्र और जीवामृत जैसी जैविक खेती की महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी चर्चा की गई। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जहाँ बिना ऑक्सीजन के जैविक पदार्थों के विघटन से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस सीधे चूल्हे तक पहुँचती है, जबकि बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है। इसी प्रकार, जीवामृत देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद है। हाल ही में, डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू ने, जो विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं, जनजाति कल्याण केन्द्र महाकौशल बरगांव प्रकल्प प्रमुख (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) श्याम जी भाईसाहब, महाकौशल प्रांत के गौसेवा प्रमुख (आर एस एस के प्रचारक) घनश्याम जी भाईसाहब, और यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स के हेमराज बर्मन के साथ नर्मदांचल गौ सेवा केन्द्र ढोंढ़ा में संचालित बीआरसी और जैविक फार्म हाउस का दौरा किया। बिहारी लाल साहू स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे अनेक मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित विभिन्न जिलों में जैविक खेती का अमूल्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाया, जिसमें गोबर गैस संयंत्र को जलता हुआ प्रदर्शित किया गया। सभी आगंतुकों ने उनके इन प्रयासों की सराहना की। यह जानकारी डिंडौरी ब्यूरो से नीरज रजक द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को प्रदान की गई।1
- डिंडौरी/शहपुरा के ढोंढ़ा स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति के जैव आदान संसाधन केंद्र (बीआरसी) और जैविक फार्म हाउस का हाल ही में जनजाति कल्याण केंद्र बरगांव के प्रकल्प प्रमुख व वरिष्ठ प्रचारक श्याम जी, तथा महाकौशल प्रांत गौसेवा प्रमुख घनश्याम जी ने यूट्यूबर बर्मन ब्लॉग्स हेमराज बर्मन के साथ दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य जैविक खेती के महत्व को समझना और उसे बढ़ावा देना था, जिसे सभी ने सराहा। इस दौरान जैविक खेती को एकमात्र सही मार्ग बताते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि खेती केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पूरे पर्यावरण के अस्तित्व का आधार है। रासायनिक खेती के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुँचाया है, जिससे जमीन बंजर हो रही है और जल, वायु व खाद्य पदार्थ प्रदूषित हो रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य, पशुओं और पर्यावरण पर पड़ रहा है। ऐसे में गौवंश आधारित जैविक खेती को ही एकमात्र सही विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैविक खेती प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, पर्यावरण को संतुलित करती है, और शुद्ध, सुरक्षित व स्वास्थ्यवर्धक फसलें देती है। यह खेती दीर्घकालीन लाभ प्रदान करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को सुरक्षित रखती है। इसलिए यह आवश्यक बताया गया कि अधिक से अधिक किसान जैविक खेती अपनाएं। साथ ही, केंद्र सरकार को भी जैविक खेती करने वाले किसानों को सीधे सहयोग प्रदान करना चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, बाजार की सुविधा और उचित मूल्य की व्यवस्था शामिल है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही बायोगैस संयंत्र और जीवामृत के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को पानी में घोलकर टैंक में डाला जाता है, जिससे मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है, जो सीधे चूल्हे तक पहुंचती है। बची हुई स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग होती है। करीब 6 फीट चौड़े और 10 फीट लंबे इस संयंत्र से वर्षों तक गैस प्राप्त की जा सकती है, जिससे ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण होता है। जीवामृत को देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन (दाल का आटा) और खेत की मिट्टी से बना एक प्राकृतिक तरल जैविक खाद बताया गया। डिंडौरी जिले के जाने-माने बहुचर्चित ऑर्गेनिक फार्मिंग एक्सपर्ट बिहारी लाल साहू विगत 10 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं। वे स्वयं जैविक खेती करने के साथ-साथ ग्रामीण किसान बंधुओं, महाविद्यालयों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और एनजीओ जैसे विभिन्न मंचों के माध्यम से डिंडौरी सहित कई जिलों में जैविक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे अपने फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी दिखाते हैं, और वर्तमान में बनी गोबर गैस को भी जलाकर लोगों को प्रदर्शित किया गया। यह सारी जानकारी दिनांक 10/6/2026 को प्रदान की गई।3
- दिनांक 10/06/2026 को मध्य प्रदेश श्रमजीवी सफाई कर्मचारी संघ, संबंध भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री रमेश लहरिया जी ने नगरीय प्रशासन आयुक्त महोदय से भेंट की। इस दौरान मध्य प्रदेश के नगर पालिका एवं नगर निगम कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। श्री लहरिया जी ने आयुक्त महोदय से अनुरोध किया कि संभाग एवं जिला स्तर पर कर्मचारियों से संबंधित कार्यों के निराकरण के लिए आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाए, ताकि उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। आयुक्त महोदय द्वारा इस पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया। इसके उपरांत, प्रदेश अध्यक्ष श्री रमेश लहरिया जी ने मध्य प्रदेश के सभी सफाई कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों से निवेदन किया है कि वे कर्मचारियों के विकास, सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा हेतु पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करें। उन्होंने प्रदेश के सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कर्मचारियों की समस्याओं एवं मांगों को संगठन तक पहुँचाएँ, जिससे उनका उचित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि भोपाल स्थित कार्यालय के माध्यम से संबंधित अधिकारियों एवं विभागों से निरंतर संपर्क एवं चर्चा कर कर्मचारियों के हितों की रक्षा तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। संगठन ने अपनी पूरी शक्ति एवं प्रतिबद्धता के साथ सफाई कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण के लिए कार्य करते रहने का संकल्प दोहराया।3
- कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने शासन की जनकल्याणकारी और संवेदनशील प्रशासन की भावना के अनुरूप एक दिव्यांग आवेदक के प्रति विशेष मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया है। उन्होंने स्वयं आवेदक के पास पहुंचकर उनकी समस्या को गंभीरतापूर्वक सुना। इसके पश्चात्, कलेक्टर श्रीमती सहाय ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए, जिसमें प्रकरण के त्वरित और प्रभावी निराकरण को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। यह पहल सामान्य जन और विशेषकर दिव्यांगजनों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।1
- शहडोल जिले में शासकीय भूमि पर अवैध रूप से चल रही एक कोयला खदान पर माइनिंग विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा है। यह कार्रवाई 'काले हीरे' (कोयले) के अवैध उत्खनन को रोकने के उद्देश्य से की गई।1
- डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस अभिरक्षा से फरार हुए युवक उमेश कुमार एक नया मोड़ लेते मामले में सोमवार सुबह गोरखपुर डेम से सटे जंगल में गंभीर अवस्था में पाए गए हैं। इससे पहले रविवार रात लगभग 10 बजे पुलिस अभिरक्षा से युवक के फरार होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसे जंगल में अचेत अवस्था में बेशर्म की झाड़ियों के बीच से बरामद करने का दावा किया गया। परिजनों ने युवक की गंभीर हालत पर कई सवाल खड़े किए हैं, उनका कहना है कि युवक सामान्य रूप से बातचीत नहीं कर पा रहा था और उसके मुंह में पत्ते भरे हुए थे, जिन्हें निकालना पड़ा। साथ ही, उसके बाएं पैर में सूजन और चोट के निशान भी दिखाई दिए। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि युवक डरा-सहमा हुआ था और पुलिस के पास जाने से इनकार कर रहा था। उपचार कर रहे चिकित्सक डॉ. नितिन देशमुख के अनुसार, प्रारंभिक जांच में युवक का ब्लड प्रेशर और शुगर स्तर सामान्य से कम पाया गया है, और उसका इलाज चिकित्सकीय निगरानी में जारी है। इस मामले में एसडीओपी शहपुरा ने बताया कि युवक का उपचार जारी है, और स्वास्थ्य स्थिति स्थिर होने तथा बयान दर्ज होने के बाद तथ्यों के आधार पर विस्तृत जांच प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भेजा जाएगा। गौरतलब है कि युवक की मां ने इससे पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से अपने बेटे की तलाश की गुहार लगाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब युवक के मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और वास्तविक स्थिति को सामने लाने की मांग और तेज हो गई है।3
- उमरिया कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने एक दिव्यांग आवेदक के पास स्वयं पहुंचकर उसकी समस्या को गंभीरता से सुना। इसके बाद, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश दिए, ताकि प्रकरण का त्वरित और प्रभावी ढंग से निराकरण सुनिश्चित किया जा सके। कलेक्टर की यह पहल सामान्य नागरिकों, विशेषकर दिव्यांगजनों के प्रति शासन की संवेदनशीलता, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को उजागर करती है।1
- डिंडौरी जिले के शाहपुर थाने से पुलिस अभिरक्षा से फरार हुए युवक उमेश कुमार का मामला अब और गंभीर होता दिख रहा है। युवक सोमवार सुबह गोरखपुर डेम से लगे जंगल क्षेत्र में गंभीर अवस्था में मिलने का दावा किया गया है, जिसके बाद परिजनों ने उसकी हालत को लेकर कई सवाल उठाए हैं। युवक रविवार रात करीब 10 बजे पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ था और सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसे बेशर्म की झाड़ियों के बीच अचेत अवस्था में बरामद किया गया। परिजनों के अनुसार, युवक की हालत बेहद खराब थी और वह सामान्य रूप से बात नहीं कर पा रहा था। दावा किया गया कि उसके मुंह में पत्ते भरे हुए थे, जिन्हें बाहर निकाला गया, और उसके बाएं पैर में सूजन व चोट के निशान भी थे। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल डिंडौरी ले गए। उपचार कर रहे डॉ. नितिन देशमुख के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मरीज का ब्लड प्रेशर और शुगर स्तर कम पाया गया है, और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। युवक की मां सिंधिया बाई ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को टीआई साहब द्वारा बहुत टॉर्चर किया गया है और उसे न्याय मिलना चाहिए। परिजनों का यह भी आरोप है कि युवक डरा हुआ था और पुलिस के पास जाने से मना कर रहा था, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। गौरतलब है कि युवक की मां पहले ही डिंडौरी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से बेटे की तलाश की गुहार लगाते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगा चुकी थीं। इस मामले को लेकर एसडीओपी शहपुरा ने कहा कि युवक का उपचार जारी है, और उसके बयान तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भेजा जाएगा। युवक के मिलने के बाद अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग तेज हो गई है।4