*जलेसर उर्स मेला बना ‘शोर और शोषण’ का अड्डा' सरकारी बिजली पोलों पर अवैध लाउडस्पीकर से प्राइवेट विज्ञापनों की बरसात, कानून की खुली अवहेलना।* *रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट* जलेसर (एटा) ~उत्तर प्रदेश के जनपद एटा की जलेसर कस्बे में चल रहे उर्स मेले के नाम पर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मेले के निर्धारित परिसर से बाहर निकलकर पूरे कस्बे में सरकारी विद्युत पोलों पर लाउडस्पीकर बांध दिए गए हैं और इनके माध्यम से निजी व्यापारियों, दुकानदारों व उद्योगपतियों के प्राइवेट विज्ञापन लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं। यह मामला केवल शोर-शराबे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग, अनाधिकृत वाणिज्यिक गतिविधि और ध्वनि प्रदूषण नियमों के गंभीर उल्लंघन का प्रतीक बन चुका है। *ध्वनि प्रदूषण नियमों की खुली अनदेखी* ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के नियम 5 के अनुसार: बिना लिखित अनुमति किसी भी सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रयोग प्रतिबंधित है। अनुमति केवल जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक या अधिकृत अधिकारी द्वारा दी जा सकती है। रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पूर्णतः प्रतिबंधित हैं (कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर)। रिहायशी क्षेत्रों में ध्वनि सीमा दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल निर्धारित है। सूत्रों के अनुसार, मेले के नाम पर यह प्रसारण पूरे कस्बे में किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों की सीमा से बाहर है। *बिजली विभाग की संपत्ति का दुरुपयोग* जलेसर विद्युत उपखंड अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मेले के लिए केवल अस्थायी विद्युत कनेक्शन जारी किया गया है। सरकारी पोलों पर लाउडस्पीकर लगाने अथवा निजी विज्ञापन प्रसारण के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। *इससे स्पष्ट है कि:* सरकारी विद्युत पोलों का अनाधिकृत उपयोग किया गया। निजी विज्ञापनों के माध्यम से संभावित आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है। इस वसूली की कोई पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं है। यह आचरण सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। *संभावित दंडात्मक प्रावधान* पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत उल्लंघन पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना या 5 वर्ष तक कारावास या दोनों का प्रावधान है। सार्वजनिक उपद्रव के मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 268/290 (या भारतीय न्याय संहिता में समकक्ष प्रावधान) लागू हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में पूर्व में अवैध लाउडस्पीकरों पर व्यापक कार्यवाही की जा चुकी है; ऐसे में यह मामला प्रशासन की निष्क्रियता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। * बड़ा सवाल :* प्रशासन की चुप्पी क्यों? जब नियम स्पष्ट हैं, अनुमति नहीं है, और सरकारी संपत्ति का उपयोग हो रहा है—तो कार्यवाही क्यों नहीं? क्या यह केवल लापरवाही है या किसी स्तर पर मिलीभगत? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूरे कस्बे को ‘विज्ञापन मंडी’ बना दिया गया है, जबकि निवासियों को ध्वनि प्रदूषण झेलना पड़ रहा है। * प्रशासन से स्पष्ट मांग* तत्काल प्रभाव से सभी अवैध लाउडस्पीकर हटवाए जाएं। मेले कमेटी की वित्तीय जांच हो। वसूली गई राशि का हिसाब सार्वजनिक किया जाए। दोषियों पर विधिसम्मत दंडात्मक कार्यवाही हो। जलेसर का उर्स मेला आस्था और परंपरा का प्रतीक है, लेकिन यदि इसी के नाम पर कानून को कुचला जाएगा, तो यह उत्सव नहीं, बल्कि अवैध कमाई और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कानून का राज स्थापित करता है या शोर और स्वार्थ की राजनीति को संरक्षण देता है।
*जलेसर उर्स मेला बना ‘शोर और शोषण’ का अड्डा' सरकारी बिजली पोलों पर अवैध लाउडस्पीकर से प्राइवेट विज्ञापनों की बरसात, कानून की खुली अवहेलना।* *रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट* जलेसर (एटा) ~उत्तर प्रदेश के जनपद एटा की जलेसर कस्बे में चल रहे उर्स मेले के नाम पर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मेले के निर्धारित परिसर से बाहर निकलकर पूरे कस्बे में सरकारी विद्युत पोलों पर लाउडस्पीकर बांध दिए गए हैं और इनके माध्यम से निजी व्यापारियों, दुकानदारों व उद्योगपतियों के प्राइवेट विज्ञापन लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं। यह मामला केवल शोर-शराबे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग, अनाधिकृत वाणिज्यिक गतिविधि और ध्वनि प्रदूषण नियमों के गंभीर उल्लंघन का प्रतीक बन चुका है। *ध्वनि प्रदूषण नियमों की खुली अनदेखी* ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के नियम 5 के अनुसार: बिना लिखित अनुमति किसी भी सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रयोग प्रतिबंधित है। अनुमति केवल जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक या अधिकृत अधिकारी द्वारा दी जा सकती है। रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पूर्णतः प्रतिबंधित हैं (कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर)। रिहायशी क्षेत्रों में ध्वनि सीमा दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल निर्धारित है। सूत्रों के अनुसार, मेले के नाम पर यह प्रसारण पूरे कस्बे में किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों की सीमा से बाहर है। *बिजली विभाग की संपत्ति का दुरुपयोग* जलेसर विद्युत उपखंड अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मेले के लिए केवल अस्थायी विद्युत कनेक्शन जारी किया गया है। सरकारी पोलों पर लाउडस्पीकर लगाने अथवा निजी विज्ञापन प्रसारण के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। *इससे स्पष्ट है कि:* सरकारी विद्युत पोलों का अनाधिकृत उपयोग किया गया। निजी विज्ञापनों के माध्यम से संभावित आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है। इस वसूली की कोई पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं है। यह आचरण सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। *संभावित दंडात्मक प्रावधान* पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत उल्लंघन पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना या 5 वर्ष तक कारावास या दोनों का प्रावधान है। सार्वजनिक उपद्रव के मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 268/290 (या भारतीय न्याय संहिता में समकक्ष प्रावधान) लागू हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में पूर्व में अवैध लाउडस्पीकरों पर व्यापक कार्यवाही की जा चुकी है; ऐसे में यह मामला प्रशासन की निष्क्रियता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। * बड़ा सवाल :* प्रशासन की चुप्पी क्यों? जब नियम स्पष्ट हैं, अनुमति नहीं है, और सरकारी संपत्ति का उपयोग हो रहा है—तो कार्यवाही क्यों नहीं? क्या यह केवल लापरवाही है या किसी स्तर पर मिलीभगत? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूरे कस्बे को ‘विज्ञापन मंडी’ बना दिया गया है, जबकि निवासियों को ध्वनि प्रदूषण झेलना पड़ रहा है। * प्रशासन से स्पष्ट मांग* तत्काल प्रभाव से सभी अवैध लाउडस्पीकर हटवाए जाएं। मेले कमेटी की वित्तीय जांच हो। वसूली गई राशि का हिसाब सार्वजनिक किया जाए। दोषियों पर विधिसम्मत दंडात्मक कार्यवाही हो। जलेसर का उर्स मेला आस्था और परंपरा का प्रतीक है, लेकिन यदि इसी के नाम पर कानून को कुचला जाएगा, तो यह उत्सव नहीं, बल्कि अवैध कमाई और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कानून का राज स्थापित करता है या शोर और स्वार्थ की राजनीति को संरक्षण देता है।
- *जलेसर उर्स मेला बना ‘शोर और शोषण’ का अड्डा' सरकारी बिजली पोलों पर अवैध लाउडस्पीकर से प्राइवेट विज्ञापनों की बरसात, कानून की खुली अवहेलना।* *रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट* जलेसर (एटा) ~उत्तर प्रदेश के जनपद एटा की जलेसर कस्बे में चल रहे उर्स मेले के नाम पर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मेले के निर्धारित परिसर से बाहर निकलकर पूरे कस्बे में सरकारी विद्युत पोलों पर लाउडस्पीकर बांध दिए गए हैं और इनके माध्यम से निजी व्यापारियों, दुकानदारों व उद्योगपतियों के प्राइवेट विज्ञापन लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं। यह मामला केवल शोर-शराबे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग, अनाधिकृत वाणिज्यिक गतिविधि और ध्वनि प्रदूषण नियमों के गंभीर उल्लंघन का प्रतीक बन चुका है। *ध्वनि प्रदूषण नियमों की खुली अनदेखी* ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के नियम 5 के अनुसार: बिना लिखित अनुमति किसी भी सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रयोग प्रतिबंधित है। अनुमति केवल जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक या अधिकृत अधिकारी द्वारा दी जा सकती है। रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पूर्णतः प्रतिबंधित हैं (कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर)। रिहायशी क्षेत्रों में ध्वनि सीमा दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल निर्धारित है। सूत्रों के अनुसार, मेले के नाम पर यह प्रसारण पूरे कस्बे में किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों की सीमा से बाहर है। *बिजली विभाग की संपत्ति का दुरुपयोग* जलेसर विद्युत उपखंड अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मेले के लिए केवल अस्थायी विद्युत कनेक्शन जारी किया गया है। सरकारी पोलों पर लाउडस्पीकर लगाने अथवा निजी विज्ञापन प्रसारण के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। *इससे स्पष्ट है कि:* सरकारी विद्युत पोलों का अनाधिकृत उपयोग किया गया। निजी विज्ञापनों के माध्यम से संभावित आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है। इस वसूली की कोई पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं है। यह आचरण सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। *संभावित दंडात्मक प्रावधान* पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत उल्लंघन पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना या 5 वर्ष तक कारावास या दोनों का प्रावधान है। सार्वजनिक उपद्रव के मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 268/290 (या भारतीय न्याय संहिता में समकक्ष प्रावधान) लागू हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में पूर्व में अवैध लाउडस्पीकरों पर व्यापक कार्यवाही की जा चुकी है; ऐसे में यह मामला प्रशासन की निष्क्रियता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। * बड़ा सवाल :* प्रशासन की चुप्पी क्यों? जब नियम स्पष्ट हैं, अनुमति नहीं है, और सरकारी संपत्ति का उपयोग हो रहा है—तो कार्यवाही क्यों नहीं? क्या यह केवल लापरवाही है या किसी स्तर पर मिलीभगत? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूरे कस्बे को ‘विज्ञापन मंडी’ बना दिया गया है, जबकि निवासियों को ध्वनि प्रदूषण झेलना पड़ रहा है। * प्रशासन से स्पष्ट मांग* तत्काल प्रभाव से सभी अवैध लाउडस्पीकर हटवाए जाएं। मेले कमेटी की वित्तीय जांच हो। वसूली गई राशि का हिसाब सार्वजनिक किया जाए। दोषियों पर विधिसम्मत दंडात्मक कार्यवाही हो। जलेसर का उर्स मेला आस्था और परंपरा का प्रतीक है, लेकिन यदि इसी के नाम पर कानून को कुचला जाएगा, तो यह उत्सव नहीं, बल्कि अवैध कमाई और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कानून का राज स्थापित करता है या शोर और स्वार्थ की राजनीति को संरक्षण देता है।1
- यूपी बोर्ड की परीक्षाएं आज बुधवार से शुरू होगी।हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाओं के लिए इस बार खास तैयारी की गईं हैं। परीक्षा दो पाली में आयोजित होगी।पहली पाली सुबह 8:30 बजे से शुरू होकर 11:45 बजे खत्म होगी,जबकि दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। परीक्षा के लिए कुल 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं,जिसमें 596 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, 3453 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 3984 स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालय हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कुल पंजीकृत परीक्षार्थियों की संख्या 53,37,778 है,इसमें संस्थागत परीक्षार्थी 52,42,235 और व्यक्तिगत परीक्षार्थी 95,543 हैं। हाईस्कूल के 27,61,696 परीक्षार्थी हैं,जिसमें संस्थागत परीक्षार्थी 27,50,862 और व्यक्तिगत परीक्षार्थी 10,834 हैं। इंटरमीडिएट के 25,76,082 परीक्षार्थी हैं,जिसमें संस्थागत परीक्षार्थी 24,91,373 और व्यक्तिगत परीक्षार्थी 84,709 हैं। खास बात ये है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों परीक्षा में इस बार छात्राओं की संख्या छात्रों से कम है। यूपी के 18 जिले संवेदनशील घोषित किए गए हैं।इसमें आगरा,मथुरा,अलीगढ़,हाथरस,एटा,कासगंज,प्रयागराज, कौशांबी,प्रतापगढ़,हरदोई, कन्नौज,आजमगढ़,बलिया,मऊ, जौनपुर,गाजीपुर,देवरिया और गोंडा संवेदनशील घोषित किए गए हैं। 222 परीक्षा केंद्र अति संवेदनशील और 683 परीक्षा केंद्र संवेदनशील हैं। सभी 8033 परीक्षा केंद्र पर वॉइस रिकॉर्डर युक्त दो सीसीटीवी कैमरे,राउटर, डीवीआर और हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन दिया गया है। हर परीक्षा केंद्र के लिए एक केंद्र व्यवस्थापक,एक वाह्य केंद्र व्यवस्थापक और एक स्टेटिक मजिस्ट्रेट रहेगा। 1210 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 427 जोनल मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए गए हैं। नकल रोकने के लिए 69 मंडलीय और 440 जनपदीय सचल दलों का गठन किया गया है। 75 जनपद स्तरीय और 18 वरिष्ठ अधिकारियों को मंडल स्तरीय पर्यवेक्षक के रूप में नामित किया गया है। लखनऊ में शिक्षा निदेशक के शिविर कार्यालय और प्रयागराज में माध्यमिक शिक्षा परिषद मुख्यालय में एक-एक कंट्रोल रूम बनाया गया है।सभी 75 जिलों में भी जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इस बार परीक्षा में सभी विषय के प्रश्नपत्रों के अलावा रिजर्व सेट्स की भी व्यवस्था की गई है।उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली की आशंका रोकने के लिए इस बार चार रंग की उत्तर पुस्तिकाएं रहेंगी।उत्तर पुस्तिकाओं में माध्यमिक शिक्षा परिषद का लोगो भी अंकित रहेगा।1
- थाना सिकन्द्राराऊ क्षेत्रान्तर्गत अरनोट बंबा के पास जंगल में लकडी का अवैध कटान करने वाले व पुलिस के साथ अभद्रता करने वाले आरोपियों के विरूद्ध थाना सिकन्द्राराऊ पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है तथा पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए 01 आरोपी को गिरफ्तार किया गया तथा मौके से 02 ट्रैक्टर, कटान की गई लकडी बरामदगी आदि के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी सिकन्द्राराऊ की बाइट-* 👇🏻1
- आगरा ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इनचार्ज पर आगरा पागल खाने के पास कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा करवाने का आरोप #jameen #indiaankhondekhinews #AgraNews #NewsUpdate #trendingvideo #trendingpost #AgraPolice #uppolicenews1
- कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोर्ड की परीक्षाएं हुई शुरू कैमरों की निगरानी में बच्चों ने दी परीक्षा1
- Post by Mohit kumar2
- हाथरस फौजी अखिलेश हत्याकांड में हाथरस पुलिस का ऑपरेशन लंगड़ा जारी है। एसओजी टीम और पुलिस की फरार हत्यारों से मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में 50-50 हजार के दो इनामी आरोपी — भोला और अंकित — को पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया। यह मुठभेड़ थाना सादाबाद क्षेत्र के सलेमपुर बंबा के पास हुई। बीते 5 फरवरी को कोर्ट से तारीख कर लौट रहे फौजी अखिलेश की गोली मारकर हत्या की गई थी। प्रेम विवाह को लेकर विवाद बताया जा रहा है। अब तक 10 नामजद आरोपियों में से 7 गिरफ्तार, जबकि 75 हजार के 3 इनामी अभी फरार हैं। कार्रवाई एसपी के निर्देशन में जारी है।1
- रात 10:43 बजे डीजे का शोर, यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई पर हमला! छात्रों का भविष्य दांव पर, प्रशासन सोया हुआ? एटा जिले के कोतवाली क्षेत्र शकरौली अंतर्गत ग्राम धर्मपुर में एक बेहद गंभीर और लापरवाह मामला सामने आया है। यहां बिना किसी उत्सव या अनुमति के रात के 10:43 बजे तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा है, जबकि इस गांव/मुहल्ले में दर्जनभर स्कूली छात्र यूपी बोर्ड की महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इन छात्रों की पहली परीक्षा 18 फरवरी 2026 को हिंदी विषय से शुरू हो रही है (यूपीएमएसपी द्वारा जारी संशोधित डेटशीट के अनुसार, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक चलेंगी)। छात्रों की पढ़ाई पर सीधा हमला रात 10 बजे के बाद पूर्ण प्रतिबंध है (ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के तहत, सुप्रीम कोर्ट और यूपी सरकार के आदेशानुसार)। डीजे/लाउडस्पीकर का यह शोर स्कूली बच्चों की एकाग्रता भंग कर रहा है, नींद खराब कर रहा है और परीक्षा की तैयारी में भारी व्यवधान पैदा कर रहा है। यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है—जब पूरे प्रदेश में परीक्षा के समय शांत वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासन सतर्क रहते हैं, यहां ऐसा खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। नियम साफ, उल्लंघन गैर-कानूनी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कोई भी लाउडस्पीकर, डीजे या ध्वनि विस्तारक यंत्र बिल्कुल प्रतिबंधित। बिना लिखित अनुमति के तेज आवाज बजाना ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। परीक्षा के समय यूपी सरकार और CM योगी के निर्देशों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान—उपकरण जब्ती, FIR, भारी जुर्माना और जेल तक की सजा संभव।प्रशासन से तत्काल मांग, एटा जिला प्रशासन, DM एटा, SSP एटा और कोतवाली शकरौली थाना से तुरंत कार्रवाई की मांग की जाती है:मौके पर पहुंचकर डीजे/साउंड सिस्टम तत्काल बंद करवाएं और जब्त करें। दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर कानूनी एक्शन लें। गांव में पुलिस गश्त बढ़ाकर शांत वातावरण सुनिश्चित करें, ताकि छात्र बिना किसी व्यवधान के पढ़ाई कर सकें। छात्रों का भविष्य दांव पर है—प्रशासन की जिम्मेदारी है, कि वह तुरंत जागे और सख्त कदम उठाए। यह शोर सिर्फ आवाज नहीं, छात्रों के सपनों पर हमला है—रोकिए अब।1