चंदौली जिले के चहनिया विकास खंड के नादी गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जहाँ गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नियुक्त सफाईकर्मी लंबे समय से गांव में दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण और छोटे बच्चे स्वयं झाड़ू उठाकर सफाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी केवल कागजों में उपस्थिति दर्ज कराकर वेतन उठा रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई कार्य नहीं दिख रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी कभी-कभार आते भी हैं तो केवल ग्राम प्रधान या प्रभावशाली लोगों के आसपास ही नजर आते हैं, बाकी पूरे गांव की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। ग्रामीणों ने चहनिया ब्लॉक प्रशासन, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), सहायक विकास अधिकारी पंचायत (एडीओ पंचायत), जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और जनपद के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, पूछ रहे हैं कि जब महीनों से सफाई नहीं हो रही तो ये अधिकारी क्या कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नादी गांव की स्थिति दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं केवल फाइलों और फोटो सेशन तक सीमित रह गई हैं, और प्रभावी निरीक्षण तथा जवाबदेही की कमी के कारण यह दुर्दशा हुई है। आरोप है कि चहनिया ब्लॉक के कई गांवों में यही हाल है, जहाँ सफाईकर्मी काम नहीं कर रहे लेकिन उनके वेतन पर कोई रोक नहीं। यह स्थिति निगरानी व्यवस्था की पूर्ण विफलता को दर्शाती है। बरसात का मौसम निकट होने से गंदगी और जाम नालियों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिसे अगर जल्द ठीक नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है। इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार होंगे। आक्रोशित ग्रामीणों ने 'नो वर्क नो पे' नीति लागू करने की मांग की है, उनका कहना है कि काम न करने वाले कर्मचारियों को जनता के पैसे से वेतन देना अनुचित है। उन्होंने जिलाधिकारी चंदौली से नादी गांव सहित चहनिया ब्लॉक के सभी गांवों की सफाई व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच, लापरवाह सफाईकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि केवल कागजी रिपोर्ट और बैठकों से गांव साफ नहीं होंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदारी से कार्य करने की आवश्यकता है। नादी गांव की यह गंभीर तस्वीर स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और स्वच्छ भारत मिशन के दावों की पोल खोलती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों को गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
चंदौली जिले के चहनिया विकास खंड के नादी गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जहाँ गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नियुक्त सफाईकर्मी लंबे समय से गांव में दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण और छोटे बच्चे स्वयं झाड़ू उठाकर सफाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी केवल कागजों में उपस्थिति दर्ज कराकर वेतन उठा रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई कार्य नहीं दिख रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी कभी-कभार आते भी हैं तो केवल ग्राम प्रधान या प्रभावशाली लोगों के आसपास ही नजर आते हैं, बाकी पूरे गांव की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। ग्रामीणों ने चहनिया ब्लॉक प्रशासन, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), सहायक विकास अधिकारी पंचायत (एडीओ पंचायत), जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और जनपद के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, पूछ रहे हैं कि जब महीनों से सफाई नहीं हो रही तो ये अधिकारी क्या कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नादी गांव की स्थिति दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं केवल फाइलों और फोटो सेशन तक सीमित रह गई हैं, और प्रभावी निरीक्षण तथा जवाबदेही की कमी के कारण यह दुर्दशा हुई है। आरोप है कि चहनिया ब्लॉक के कई गांवों में यही हाल है, जहाँ सफाईकर्मी काम नहीं कर रहे लेकिन उनके वेतन पर कोई रोक नहीं। यह स्थिति निगरानी व्यवस्था की पूर्ण विफलता को दर्शाती है। बरसात का मौसम निकट होने से गंदगी और जाम नालियों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिसे अगर जल्द ठीक नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है। इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार होंगे। आक्रोशित ग्रामीणों ने 'नो वर्क नो पे' नीति लागू करने की मांग की है, उनका कहना है कि काम न करने वाले कर्मचारियों को जनता के पैसे से वेतन देना अनुचित है। उन्होंने जिलाधिकारी चंदौली से नादी गांव सहित चहनिया ब्लॉक के सभी गांवों की सफाई व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच, लापरवाह सफाईकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि केवल कागजी रिपोर्ट और बैठकों से गांव साफ नहीं होंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदारी से कार्य करने की आवश्यकता है। नादी गांव की यह गंभीर तस्वीर स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और स्वच्छ भारत मिशन के दावों की पोल खोलती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों को गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
- बनारस के भेलूपुरा इलाके में शराब के नशे में धुत एक युवक ने अपनी थार गाड़ी को डिवाइडर पर चढ़ा दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बनारस में आए दिन शराब के नशे में होने वाले सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे पहले भी, बिहार नंबर की एक जीप में सवार युवकों ने शराब पीकर एक एक्सीडेंट को अंजाम दिया था।1
- गाजियाबाद के चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि "दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी मंजूर नहीं" और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएम योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराधियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है और इस मामले के दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी। इस हत्याकांड को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश है, और पुलिस मामले की लगातार जांच में जुटी हुई है।1
- एक बुजुर्ग और घायल सांड के उपचार के लिए ग्रामीण आगे आए। ग्रामीणों की पहल और सहयोग से, एक पशु चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर सांड का आवश्यक उपचार किया।1
- वाराणसी जिले के पिंडरा विकास खण्ड के रमई पट्टी ग्राम पंचायत में बनाया गया अमृत सरोवर इस समय गंदगी के अंबार और टूटी हुई सीढ़ियों के साथ बदहाल स्थिति में है। जानकारी के अनुसार, बीते वर्ष 2023-24 में इस अमृत सरोवर का निर्माण ग्राम प्रधान सविता देवी (पत्नी रामविलास यादव), सचिव वीरेन्द्र कुमार और तकनीकी सहायक विनोद सिंह की देखरेख में किया गया था। इस परियोजना पर कुल 11 लाख 65 हजार 572 रुपये की लागत आई थी, लेकिन निर्माण के बावजूद सरोवर की दयनीय दशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।2
- जनगणना के संबंध में सकलडीहा तहसील में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में SDM कुंदन राज कपूर और तहसीलदार अनुराग सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे। उनके साथ अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।1
- चंदौली जिले के खड़ान गांव में पिछले दो से तीन साल से एक नाली का निर्माण हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, इस नाली पर अभी तक ढक्कन नहीं रखा गया है, जिसके कारण यह अधूरी पड़ी है।1
- आज बनारस के लंका थाना पर अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। अधिवक्ता इस बात से नाराज़ थे कि एक आरोपी को थाने के अंदर कुर्सी देकर उसकी 'सेवा' की जा रही थी। इसी नाराजगी के चलते अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई।1
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के राजवाड़ी गांव में स्थित गोमती नदी पुल पर सोमवार तड़के करीब साढ़े पांच बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। इस दुर्घटना में एक ट्रक चालक रणजीत पाल (52) की पुल से नीचे गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। रणजीत पाल सोनभद्र जनपद के सरौली निवासी स्वर्गीय प्रसिद्ध नारायण पाल के पुत्र थे और रविवार रात गोरखपुर से अहरौरा गिट्टी लादने जा रहे थे। कैथी चौकी प्रभारी पवन राय के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब गाजीपुर की ओर से वाराणसी आ रहे रणजीत पाल के ट्रक की टक्कर पीछे से एक स्विफ्ट डिजायर कार में लग गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार कुछ दूर तक घिसटती चली गई और उसके शीशे चकनाचूर हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के मुताबिक, दुर्घटना के बाद चालक रणजीत पाल घबरा गया और ट्रक से उतरकर पुल का डिवाइडर पार कर दूसरी ओर जाने का प्रयास करने लगा। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पुल से नीचे गिर गया, जिससे गंभीर चोटें आने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। स्विफ्ट डिजायर कार में प्रशांत कुमार सिंह, अंजली सिंह, आशा सिंह तथा दो बच्चे सवार थे, जिन्हें मामूली झटका लगा, हालांकि किसी को गंभीर चोट नहीं आई। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी। थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि कार सवार सभी लोगों की पहचान कर ली गई है और दुर्घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत पड़ताल के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। मृतक रणजीत पाल के रिश्तेदार राजकुमार पाल ने बताया कि उनकी पत्नी लालती देवी हैं और उनका एक पुत्र था जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। इस दुखद खबर से परिवार में कोहराम मच गया है।1
- लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास 5, कालिदास मार्ग के बाहर रोडवेज के संविदाकर्मियों ने आत्मदाह का प्रयास किया। इन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री आवास के सामने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या करने की कोशिश की। ये संविदाकर्मी अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से दुबग्गा डिपो पर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मुख्य मांग चालकों और परिचालकों का निजी कंपनी एसएस इंटरप्राइजेज में विलय करना है। अपनी इन्हीं मांगों को लेकर रोडवेज के चार कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने आत्मदाह का प्रयास करने वाले इन युवकों को तुरंत रोका। इसके बाद संविदाकर्मियों को थाने ले जाया गया, जहाँ पुलिस द्वारा उनसे पूछताछ जारी है।1