थाने से अदालत तक पहुंचा व्यापारी: पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल, ठगी और धमकी के आरोपों में न्यायालय की शरण एसपी, कलेक्टर और सीएम जनशिकायत पोर्टल में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप; 7 मोबाइल फोन ले जाने और चेक बाउंस का मामला बलौदाबाजार। बलौदाबाजार शहर में एक व्यापारी द्वारा पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। व्यापारी का आरोप है कि कथित ठगी, गाली-गलौज और परिवार को जान से मारने तथा बच्चों के अपहरण की धमकी से संबंधित शिकायतों पर कई स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद उसे अब तक अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं मिली। आखिरकार न्याय की उम्मीद लेकर व्यापारी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM), बलौदाबाजार की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। व्यापारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद के अनुसार मामला मोबाइल फोन के लेन-देन, कथित बकाया रकम, चेक बाउंस तथा बाद में कथित धमकी और गाली-गलौज से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत देने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। सात प्रीमियम मोबाइल फोन ले जाने का आरोप मिली जानकारी के अनुसार, बजरंग चौक, बलौदाबाजार स्थित वलेचा मार्केटिंग, जो मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान का व्यवसाय करता है, के संचालक राजकुमार वलेचा (45) ने भाटापारा निवासी निर्माण उर्फ नीर किंगरानी के खिलाफ न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर दुकान से सात प्रीमियम मोबाइल फोन देखने और पसंद करने के नाम पर ले गया था। व्यापारी का आरोप है कि मोबाइल ले जाने के बाद न तो संबंधित मोबाइल वापस किए गए और न ही उनकी कीमत का भुगतान किया गया। व्यापारी का कहना है कि उसने कई बार बकाया राशि के लिए संपर्क किया और भुगतान करने का आग्रह किया, लेकिन कथित तौर पर उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद मामला और गंभीर तब हो गया, जब भुगतान के लिए चेक के माध्यम से रकम दिलाने की कोशिश की गई। चेक बाउंस होने से बढ़ा विवाद परिवाद में व्यापारी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने स्वयं चेक देने के बजाय जयपुर से एक चेक उसके बैंक खाते में लगवाया। व्यापारी के अनुसार, संबंधित चेक बाद में बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि चेक बाउंस होने के कारण उसके बैंक खाते से पेनल्टी की राशि काट ली गई। व्यापारी का आरोप है कि एक ओर उसे मोबाइल की रकम प्राप्त नहीं हुई, वहीं दूसरी ओर चेक बाउंस होने के कारण उसे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसके बाद उसने मामले को लेकर पुलिस से संपर्क किया। बकाया रकम मांगने पर कथित गाली-गलौज और धमकी शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने अपनी बकाया राशि वापस मांगी तो कथित रूप से विवाद बढ़ गया। व्यापारी का आरोप है कि उसे गाली-गलौज की गई और बाद में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। परिवाद में 21 अप्रैल 2026 की एक कथित घटना का उल्लेख किया गया है। व्यापारी के अनुसार, उस दिन आरोपी ने व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से उसे कथित तौर पर अश्लील गालियां दीं तथा जान से मारने और उसके बच्चों को उठवा लेने जैसी गंभीर धमकी दी। व्यापारी का कहना है कि इस घटना के बाद वह और उसका परिवार भय के माहौल में रहने को मजबूर हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसने कथित कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखी और शिकायत के साथ इसे प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किए जाने की बात कही है। सिटी कोतवाली से लेकर एसपी और कलेक्टर कार्यालय तक शिकायत व्यापारी के मुताबिक उसने घटना की जानकारी सबसे पहले स्थानीय पुलिस को दी। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी शिकायतें प्रस्तुत कीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने अपनी शिकायत के साथ कथित धमकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग वाली सीडी भी उपलब्ध कराई, ताकि पुलिस मामले की जांच कर सके और संबंधित कॉल की सत्यता की पुष्टि की जा सके। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए व्यापारी ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष दोबारा अपनी समस्या रखी। सीएम जनशिकायत पोर्टल पर भी लगाई गुहार व्यापारी ने केवल स्थानीय स्तर पर ही शिकायत नहीं की, बल्कि राज्य सरकार के जनशिकायत तंत्र के माध्यम से भी अपनी समस्या दर्ज कराने का दावा किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने सीएम जनशिकायत पोर्टल पर भी मामले की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उसका आरोप है कि वहां शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। इस घटनाक्रम के बाद व्यापारी ने सवाल उठाया है कि यदि स्थानीय थाने से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और शासन के शिकायत तंत्र तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर किस दरवाजे पर जाए? हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस अथवा आरोपी पक्ष का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप व्यापारी ने अपने परिवाद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि मामले में पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उसे कथित तौर पर समय देने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिस के एक अधिकारी ने उससे फोन पर बातचीत के दौरान कथित रूप से यह कहा कि आरोपी के पिता से उनके अच्छे संबंध हैं और इसलिए आरोपी को कुछ और समय दिया जाए। व्यापारी का आरोप है कि इसी तरह की कथित समझाइश और देरी के कारण मामला लंबा खिंचता चला गया और उसे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस कार्रवाई नहीं होने का दावा, इसलिए अदालत की शरण व्यापारी का कहना है कि उसने न्याय पाने के लिए पहले पुलिस और प्रशासन के सभी उपलब्ध माध्यमों का उपयोग किया। लेकिन जब उसे वहां से अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली तो उसने न्यायालय का रुख किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बलौदाबाजार के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में व्यापारी ने मामले की जांच और आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने अपने परिवाद में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 296 एवं 351(3) के तहत अपराध दर्ज करने और संबंधित पुलिस थाने को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कई सवालों के बीच पहुंचा मामला न्यायालय पूरे घटनाक्रम ने पुलिस व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। यदि व्यापारी द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल यह है कि गंभीर धमकी की शिकायत और उपलब्ध कराए गए कथित ऑडियो साक्ष्य पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? दूसरी ओर, यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच के दौरान वास्तविक स्थिति सामने आना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि मामले में निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। व्यापारी का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि कथित रूप से हुए आर्थिक नुकसान, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के मामले में कानूनी न्याय प्राप्त करना है। अदालत की प्रक्रिया से कार्रवाई की उम्मीद लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाने वाले व्यापारी ने अब न्यायालय से उम्मीद जताई है कि उसके परिवाद पर विधि के अनुरूप सुनवाई होगी और यदि प्रथमदृष्टया अपराध बनता है तो संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। फिलहाल यह मामला अदालत के समक्ष है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। आरोपी पक्ष का बयान अथवा पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। सवाल जो जवाब मांगते हैं सात मोबाइल फोन से जुड़े कथित लेन-देन की वास्तविक स्थिति क्या है? चेक किसके माध्यम से जारी हुआ और वह किस कारण से बाउंस हुआ? कथित धमकी वाले व्हाट्सऐप कॉल की तकनीकी जांच हुई या नहीं? व्यापारी द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग का सत्यापन हुआ या नहीं? थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई? सीएम जनशिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत का निस्तारण किस स्तर पर हुआ? पुलिस पर लगाए गए आरोपी को संरक्षण देने के आरोपों की जांच होगी या नहीं? इन सवालों के जवाब जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल व्यापारी की निगाहें अदालत पर टिकी हैं। पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बाद अब मामला न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस परिवाद पर क्या रुख अपनाती है और जांच के दौरान कथित ठगी, धमकी तथा पुलिस की भूमिका से जुड़े आरोपों की वास्तविकता किस प्रकार सामने आती है।
थाने से अदालत तक पहुंचा व्यापारी: पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल, ठगी और धमकी के आरोपों में न्यायालय की शरण एसपी, कलेक्टर और सीएम जनशिकायत पोर्टल में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप; 7 मोबाइल फोन ले जाने और चेक बाउंस का मामला बलौदाबाजार। बलौदाबाजार शहर में एक व्यापारी द्वारा पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। व्यापारी का आरोप है कि कथित ठगी, गाली-गलौज और परिवार को जान से मारने तथा बच्चों के अपहरण की धमकी से संबंधित शिकायतों पर कई स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद उसे अब तक अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं मिली। आखिरकार न्याय की उम्मीद लेकर व्यापारी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM), बलौदाबाजार की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। व्यापारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद के अनुसार मामला मोबाइल फोन के लेन-देन, कथित बकाया रकम, चेक बाउंस तथा बाद में कथित धमकी और गाली-गलौज से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत देने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। सात प्रीमियम मोबाइल फोन ले जाने का आरोप मिली जानकारी के अनुसार, बजरंग चौक, बलौदाबाजार स्थित वलेचा मार्केटिंग, जो मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान का व्यवसाय करता है, के संचालक राजकुमार वलेचा (45) ने भाटापारा निवासी निर्माण उर्फ नीर किंगरानी के खिलाफ न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर दुकान से सात प्रीमियम मोबाइल फोन देखने और पसंद करने के नाम पर ले गया था। व्यापारी का आरोप है कि मोबाइल ले जाने के बाद न तो संबंधित मोबाइल वापस किए गए और न ही उनकी कीमत का भुगतान किया गया। व्यापारी का कहना है कि उसने कई बार बकाया राशि के लिए संपर्क किया और भुगतान करने का आग्रह किया, लेकिन कथित तौर पर उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद मामला और गंभीर तब हो गया, जब भुगतान के लिए चेक के माध्यम से रकम दिलाने की कोशिश की गई। चेक बाउंस होने से बढ़ा विवाद परिवाद में व्यापारी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने स्वयं चेक देने के बजाय जयपुर से एक चेक उसके बैंक खाते में लगवाया। व्यापारी के अनुसार, संबंधित चेक बाद में बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि चेक बाउंस होने के कारण उसके बैंक खाते से पेनल्टी की राशि काट ली गई। व्यापारी का आरोप है कि एक ओर उसे मोबाइल की रकम प्राप्त नहीं हुई, वहीं दूसरी ओर चेक बाउंस होने के कारण उसे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसके बाद उसने मामले को लेकर पुलिस से संपर्क किया। बकाया रकम मांगने पर कथित गाली-गलौज और धमकी शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने अपनी बकाया राशि वापस मांगी तो कथित रूप से विवाद बढ़ गया। व्यापारी का आरोप है कि उसे गाली-गलौज की गई और बाद में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। परिवाद में 21 अप्रैल 2026 की एक कथित घटना का उल्लेख किया गया है। व्यापारी के अनुसार, उस दिन आरोपी ने व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से उसे कथित तौर पर अश्लील गालियां दीं तथा जान से मारने और उसके बच्चों को उठवा लेने जैसी गंभीर धमकी दी। व्यापारी का कहना है कि इस घटना के बाद वह और उसका परिवार भय के माहौल में रहने को मजबूर हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसने कथित कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखी और शिकायत के साथ इसे प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किए जाने की बात कही है। सिटी कोतवाली से लेकर एसपी और कलेक्टर कार्यालय तक शिकायत व्यापारी के मुताबिक उसने घटना की जानकारी सबसे पहले स्थानीय पुलिस को दी। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी शिकायतें प्रस्तुत कीं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने अपनी शिकायत के साथ कथित धमकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग वाली सीडी भी उपलब्ध कराई, ताकि पुलिस मामले की जांच कर सके और संबंधित कॉल की सत्यता की पुष्टि की जा सके। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए व्यापारी ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष दोबारा अपनी समस्या रखी। सीएम जनशिकायत पोर्टल पर भी लगाई गुहार व्यापारी ने केवल स्थानीय स्तर पर ही शिकायत नहीं की, बल्कि राज्य सरकार के जनशिकायत तंत्र के माध्यम से भी अपनी समस्या दर्ज कराने का दावा किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने सीएम जनशिकायत पोर्टल पर भी मामले की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उसका आरोप है कि वहां शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। इस घटनाक्रम के बाद व्यापारी ने सवाल उठाया है कि यदि स्थानीय थाने से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और शासन के शिकायत तंत्र तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर किस दरवाजे पर जाए? हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस अथवा आरोपी पक्ष का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप व्यापारी ने अपने परिवाद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि मामले में पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उसे कथित तौर पर समय देने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिस के एक अधिकारी ने उससे फोन पर बातचीत के दौरान कथित रूप से यह कहा कि आरोपी के पिता से उनके अच्छे संबंध हैं और इसलिए आरोपी को कुछ और समय दिया जाए। व्यापारी का आरोप है कि इसी तरह की कथित समझाइश और देरी के कारण मामला लंबा खिंचता चला गया और उसे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस कार्रवाई नहीं होने का दावा, इसलिए अदालत की शरण व्यापारी का कहना है कि उसने न्याय पाने के लिए पहले पुलिस और प्रशासन के सभी उपलब्ध माध्यमों का उपयोग किया। लेकिन जब उसे वहां से अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली तो उसने न्यायालय का रुख किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बलौदाबाजार के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में व्यापारी ने मामले की जांच और आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने अपने परिवाद में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 296 एवं 351(3) के तहत अपराध दर्ज करने और संबंधित पुलिस थाने को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कई सवालों के बीच पहुंचा मामला न्यायालय पूरे घटनाक्रम ने पुलिस व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। यदि व्यापारी द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल यह है कि गंभीर धमकी की शिकायत और उपलब्ध कराए गए कथित ऑडियो साक्ष्य पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? दूसरी ओर, यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच के दौरान वास्तविक स्थिति सामने आना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि मामले में निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। व्यापारी का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि कथित रूप से हुए आर्थिक नुकसान, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के मामले में कानूनी न्याय प्राप्त करना है। अदालत की प्रक्रिया से कार्रवाई की उम्मीद लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाने वाले व्यापारी ने अब न्यायालय से उम्मीद जताई है कि उसके परिवाद पर विधि के अनुरूप सुनवाई होगी और यदि प्रथमदृष्टया अपराध बनता है तो संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। फिलहाल यह मामला अदालत के समक्ष है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। आरोपी पक्ष का बयान अथवा पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। सवाल जो जवाब मांगते हैं सात मोबाइल फोन से जुड़े कथित लेन-देन की वास्तविक स्थिति क्या है? चेक किसके माध्यम से जारी हुआ और वह किस कारण से बाउंस हुआ? कथित धमकी वाले व्हाट्सऐप कॉल की तकनीकी जांच हुई या नहीं? व्यापारी द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग का सत्यापन हुआ या नहीं? थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई? सीएम जनशिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत का निस्तारण किस स्तर पर हुआ? पुलिस पर लगाए गए आरोपी को संरक्षण देने के आरोपों की जांच होगी या नहीं? इन सवालों के जवाब जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल व्यापारी की निगाहें अदालत पर टिकी हैं। पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बाद अब मामला न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस परिवाद पर क्या रुख अपनाती है और जांच के दौरान कथित ठगी, धमकी तथा पुलिस की भूमिका से जुड़े आरोपों की वास्तविकता किस प्रकार सामने आती है।
- *धान-चावल के बीजों से सजेगी इस बार राखी, भाई-बहन के स्नेह के साथ मिलेगा हरियाली का संदेश* *कलेक्टर, एसपी और डीएफओ को बिहान दीदियों ने पहनाई बीज राखी* ताराचंद कठोत्रे बलौदाबाजार-भाटापारा, 25 अगस्त 2026/ जिले में इस बार रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा। बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं धान, चावल, लौकी, करेला, सेमी सहित स्थानीय बीजों से आकर्षक और पर्यावरण हितैषी राखियां तैयार कर रही हैं। ग्राम लाहोद की महिलाओं द्वारा तैयार इन बीज राखियों की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। इसी क्रम में बिहान की महिलाओं ने मंगलवार को संयुक्त जिला कार्यालय में बिक्री हेतु स्टॉल लगाया।स्टॉल का अवलोकन करने पहुंचे कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, वनमंडलाधिकारी पंकज कुमार कमल एवं जिला पंचायत सीईओ सुश्री दिव्या अग्रवाल को दीदियों ने अपने हाथों से तैयार बीज राखियां पहनाईं। कलेक्टर श्री कुलदीप शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप महिलाओं को नवाचार और आजीविका से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बिहान दीदियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बीज राखी महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश भी देती है।4
- अवैध शराब पर बिल्हा पुलिस का प्रहार 60 नग देशी शराब बिक्री करते अपचारी बालक पर क अवैध शराब पर बिल्हा पुलिस का प्रहार 60 नग देशी शराब बिक्री करते अपचारी बालक पर की गयी विधि सम्मत कार्यवाही आज मंगलवार की दोपहर 3. 15 बजे बिल्हा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी अनुसार मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि उमनि एवं वपुअ महोदय श्री रजनेश सिंह बिलासपुर (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना/चौंकी की प्रभारीयों को अवैध शराब ब्रिकी/शराब परिवहन करने वाले व्यक्तियों पर अंकुश लगाने हेतु निर्देशित किया गया था, आदेश के परिपालन मे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदया मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक महोदय चकरभाठा श्री राजेश जोशी के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी द्वारा थाना स्तर पर सिविल टीम गठित कर बिल्हा क्षेत्र के ग्रामीणो से सम्पर्क कर अवैध शराब ब्रिकी एवं परिवहन करने वाले व्यक्तियों के बारे मे जानकारी प्राप्त कर विश्वस्त मुखबीर के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी इसी क्रम मे दिनांक 24.08.2026 कोे मुखबीर सूचना मिला कि वार्ड क्र. 09 बिल्हा मे मनोज गेंदले का लडका घर मे भारी मात्रा मे शराब रख कर ब्रिकी कर रहा है सूचना पर तत्काल थाना प्रभारी बिल्हा द्वारा सिविल टीम गठित कर वार्ड क्रमांक 09 बिल्हा के पते पर जाकर तस्दीक किया जहाॅ अपचारी बालक मिला जिसके समक्ष घर की तलाशी लेने पर एक सफेद रंग के प्लास्टिक बोरी मे 30 नग देशी प्लेन व 30 नग देशी मसाला कुल मात्रा 10.800 लीटर कीमती जुमला 5400 रूपये व अपचारी बालक के जेब मे रखे शराब ब्रिकी रकम 500 रूपये रखा मिला जिसे जप्त कर अपचारी बालक को माननीय किशोर न्यायबोर्ड बिलासपुर पेश किया गया है। आगे भी अवैध गतिविधियों पर लगातार कार्यवाही जारी रहेगी। उक्त कार्यवाही मे थाना प्रभारी निरीक्षक तोपसिंह नवरंग, प्र.आर. 786 अनिल बंजारे, आरक्षक 1390 संतोष मरकाम, 1431 अर्जुन जांगडे का विशेष योगदान रहा।1
- तिरंगा लेकर शिक्षकों ने सड़क पर किया प्रदर्शन, पांच सूत्री मांग पूरी नहीं हुई तो आगे होगा आंदोलन! बिलासपुर में साझा मंच के बैनर तले सैकड़ों शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, मोदी की गारंटी लागू करने और वेतन विसंगति दूर करने समेत कई मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेशभर के सभी जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। बिलासपुर में भी बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।1
- हाईकोर्ट बोला- थानों के CCTV हर समय चालू रहें:18 महीने का बैकअप जरूरी; NDPS केस में फुटेज डिलीट होने पर पुलिस को दिए निर्देश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बैंच ने कहा कि थानों में केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है।सीसीटीवी हर समय चालू रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम से कम 18 महीने तक के फुटेज सुरक्षित रखना जरूरी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सीसीटीवी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करने के साथ पर्याप्त स्टोरेज और पावर बैकअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण इलेक्ट्रॉनिक सबूत नष्ट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।1
- छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत SECL मुख्यालय, बिलासपुर में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित1
- महेशराम टंडन दिबयांग कवि ।ग्राम पंडरीखार तेंदूकोना जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ । राष्ट्रीय गीत-बलिदानों का बलिदान ।कभी ना भुलेगा हिंदुस्तान ।1
- लगातार एम इंडिया न्यूज की टीम ने शबरी सेतु पुल, केरा रोड, तुषमा रोड को लेकर सीधे मुद्दे पर सवाल और शिकायत के बाद आज काम शुरू 25/8/2026 से 25/9/2026 तक यातायात प्रभावित रहेगा एम इंडिया न्यूज की टीम शबरी सेतु को लेकर लगातार प्रयास के बाद संबंधित विभाग सेतु विभाग, पी डब्लू डी विभाग के आलाधिकारी ने कल दुर्घटना के बाद पुल मरम्मत कार्य तेजी से मरम्मत कार्य शुरू यह 300 मी तक पुल चौक तक मरम्मत होगी शगर में कुछ ऐसे प्रतिनिधि हैं जो काम के पहले कोई बात नहीं करते जब काम शुरू होता है तो हमारी प्रयास से प्रचार प्रसार करने वाले से सावधान लगातार हमारी प्रयास और आपके सपोर्ट पर सरकार जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे मुद्दे की बात पर खबर प्रकाशित किया गया ऐसा आपका सपोर्ट प्यार बना रहे हम नगर की अर्थव्यवस्था पर सीधे सवाल के लिए संपर्क करें 9589522219 अपने आस पास की खबर के लिए हमें फालो वाटसाप करे यदि आपको कोई समस्या परेशान विभाग से कोई प्रताड़ित या घुमाया जा रहा तो हमसे संपर्क करें धन्यवाद इसविडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि लोगों का अधिकार दिलाना हमारी प्राथमिकता है जय जोहार जय छत्तीसगढ़1
- चकरभाठा पुलिस का अवैध शराब बिक्री के विरुद्ध कार्यवाही आरोपी गौरी शंकर बघेल निवा चकरभाठा पुलिस का अवैध शराब बिक्री के विरुद्ध कार्यवाही आरोपी गौरी शंकर बघेल निवासी पिरैया को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल सोमवार की रात 9:00 बजे चकरभाठा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार ⚡✨ *आरोपी के कब्जे से कुल 60 लीटर कच्ची महुवा शराब कुल कीमती 12000 रुपए किया गया जप्त* ⚡✨ *आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत की गई कार्यवाही* *नाम आरोपी -* * 01.गौरी शंकर बघेल पिता बोधराम बघेल उम्र 21वर्ष निवासी पिरैया थाना चकरभाठा जिला बिलासपुर। *घटना का विवरण -* मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय बिलासपुर श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) द्वारा जिले में नशे के अवैध कारोबार एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाही के निर्देश दिए गए हैं. उक्त निर्देश के परिपालन में श्रीमान् अति.पुलिस अधीक्षक महोदय ग्रामीण बिलासपुर श्रीमति मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक चकरभाठा पुलिस श्री राजेश कुमार जोशी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी चकरभाठा को मुखबीर के माध्यम से दिनाक 23.08.2026 को अवैध रूप से अधिक मात्रा में कच्ची महुवा शराब बिक्री करने व रखने के संबंध में सूचना प्राप्त हुई. थाना पुलिस टीम द्वारा प्राप्त सूचना में त्वरित कार्रवाही कर गौरीशंकर बघेल उर्फ पोडो पिता बोधीराम बघेल उम्र 21 वर्ष निवासी ग्राम पिरैया मिडिल स्कूल के पास थाना चकरभाठा जिला बिलासपुर के कब्जे से 04 नग पीले रंग के 15 बल्क लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक के डिब्बा प्रत्येक में 15-15 लीटर हाथ भट्ठी से बना कच्ची महुंआ शराब कुल 60 लीटर कीमती 12,000/- रूपये को छत्तीसगढ आबकारी एक्ट के प्रावधानो के तहत जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर रिमाण्ड में जेल भेजा गया। 🚨 *चकरभाठा पुलिस की जनअपील - सभी नागरिकों से निवेदन है कि अवैध कार्य में लिप्त अपराधियों की सूचना तुरंत स्थानीय थाना या डायल 112 पर दें।*1