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बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के चलते मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वनकर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस समूह में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 5 वन रक्षक भी शामिल थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन द नेचर कंज़र्वेंसी और एसएनएपी फाउंडेशन ने किया। बाँधवगढ़ से वनरक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान वनकर्मियों को हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के ऑपरेशन, ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण, हाथियों के व्यवहार अध्ययन, कैम्प, हाथियों के प्रबंधन तथा शारीरिक बनावट के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के अधिकारियों, क्विक रिस्पॉन्स टीमों तथा स्थानीय समुदायों से भी संवाद कर मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की रणनीतियों को समझा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से बाँधवगढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और अब यह क्षेत्र उनके स्थायी रहवास के रूप में उभर रहा है। ऐसे में, यह विशेष प्रशिक्षण भविष्य में प्रभावी हाथी प्रबंधन और क्षेत्र के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाएगा।

21 hrs ago
user_पत्रकारिता
पत्रकारिता
बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
21 hrs ago

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के चलते मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वनकर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस समूह में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 5 वन रक्षक भी शामिल थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन

द नेचर कंज़र्वेंसी और एसएनएपी फाउंडेशन ने किया। बाँधवगढ़ से वनरक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान वनकर्मियों को हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के ऑपरेशन, ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण, हाथियों के व्यवहार अध्ययन, कैम्प, हाथियों के प्रबंधन तथा शारीरिक बनावट के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने गोरुमारा, कर्सिओंग,

बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के अधिकारियों, क्विक रिस्पॉन्स टीमों तथा स्थानीय समुदायों से भी संवाद कर मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की रणनीतियों को समझा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से बाँधवगढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और अब यह क्षेत्र उनके स्थायी रहवास के रूप में उभर रहा है। ऐसे में, यह विशेष प्रशिक्षण भविष्य में प्रभावी हाथी प्रबंधन और क्षेत्र के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाएगा।

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  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों के मद्देनजर वन विभाग अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वन कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन रक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा सहित कई कर्मी शामिल थे, जहाँ उन्होंने हाथी प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हाथियों के व्यवहार, उनकी निगरानी और आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के पहुँचने पर उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों का आकलन, हाथियों की प्रोफाइलिंग, कैम्प हाथियों का प्रबंधन तथा वन्यजीवों के व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने विभिन्न परिस्थितियों में हाथियों के साथ सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कार्य करने के उपाय भी बताए। इस दौरान, गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के आईएफएस अधिकारियों, वाइल्डलाइफ स्क्वाड, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद आयोजित किए गए। इन संवादों में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने, ग्रामीणों को जागरूक करने और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की रणनीतियों पर चर्चा हुई। यह उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले लगभग आठ वर्षों से जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और वर्तमान में यह क्षेत्र हाथियों के लिए एक स्थायी आवास के रूप में विकसित हो चुका है। वन विभाग का मानना है कि यह स्थिति यहाँ के समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र का संकेत है, हालाँकि हाथियों की मौजूदगी से रिजर्व से लगे गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। वन विभाग को विश्वास है कि इस विशेष प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव भविष्य में हाथियों के बेहतर प्रबंधन, ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
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    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों के मद्देनजर वन विभाग अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वन कर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित छह दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन रक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा सहित कई कर्मी शामिल थे, जहाँ उन्होंने हाथी प्रबंधन और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हाथियों के व्यवहार, उनकी निगरानी और आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के पहुँचने पर उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों का आकलन, हाथियों की प्रोफाइलिंग, कैम्प हाथियों का प्रबंधन तथा वन्यजीवों के व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने विभिन्न परिस्थितियों में हाथियों के साथ सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कार्य करने के उपाय भी बताए। इस दौरान, गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के आईएफएस अधिकारियों, वाइल्डलाइफ स्क्वाड, क्विक रिस्पॉन्स टीम और स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद आयोजित किए गए। इन संवादों में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने, ग्रामीणों को जागरूक करने और आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई की रणनीतियों पर चर्चा हुई।

यह उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले लगभग आठ वर्षों से जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और वर्तमान में यह क्षेत्र हाथियों के लिए एक स्थायी आवास के रूप में विकसित हो चुका है। वन विभाग का मानना है कि यह स्थिति यहाँ के समृद्ध और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र का संकेत है, हालाँकि हाथियों की मौजूदगी से रिजर्व से लगे गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। वन विभाग को विश्वास है कि इस विशेष प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव भविष्य में हाथियों के बेहतर प्रबंधन, ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
    user_Tapas Gupta
    Tapas Gupta
    पाली, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • कटनी जिले के बड़वारा में शराब भट्टी के ठीक सामने शराबियों द्वारा सरेआम शराब पीकर सड़कों पर नाली की तरह पड़े होने का हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया है। स्थानीय प्रशासन की कथित लापरवाही पर सवाल उठाते हुए, जागरूक नागरिकों ने इसे बड़वारा की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी का असली चेहरा बताया है। इस रास्ते से रोजाना बहन-बेटियां, स्कूली बच्चे और आम नागरिक गुजरते हैं, जिससे ऐसी खुलेआम अराजकता किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। इस स्थिति से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है और वे इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न करने की बात कह रहे हैं। बड़वारा के जागरूक नागरिकों ने स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग से तुरंत नींद से जागने और इस खुलेआम गुंडागर्दी व गंदगी पर पूर्णविराम लगाने की मांग की है।
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    कटनी जिले के बड़वारा में शराब भट्टी के ठीक सामने शराबियों द्वारा सरेआम शराब पीकर सड़कों पर नाली की तरह पड़े होने का हैरान कर देने वाला नजारा सामने आया है। स्थानीय प्रशासन की कथित लापरवाही पर सवाल उठाते हुए, जागरूक नागरिकों ने इसे बड़वारा की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी का असली चेहरा बताया है।

इस रास्ते से रोजाना बहन-बेटियां, स्कूली बच्चे और आम नागरिक गुजरते हैं, जिससे ऐसी खुलेआम अराजकता किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। इस स्थिति से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है और वे इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न करने की बात कह रहे हैं।

बड़वारा के जागरूक नागरिकों ने स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग से तुरंत नींद से जागने और इस खुलेआम गुंडागर्दी व गंदगी पर पूर्णविराम लगाने की मांग की है।
    user_Jay Suryavanshi
    Jay Suryavanshi
    बड़वारा, कटनी, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • पवित्र सोमवती अमावस्या के अवसर पर कटनी स्थित माँ जालपा देवी मंदिर परिसर में एक भव्य दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में सैकड़ों दीप प्रज्वलित किए, जिससे पूरा मंदिर प्रांगण दीपों की मनमोहक कतारों और अलौकिक आभा से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने माँ जालपा से नगर की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की, साथ ही अपने परिवार और नगरवासियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। इस विशेष अवसर पर नगर की महापौर प्रीति संजीव सूरी भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान विधि-विधान से माँ जालपा का पूजन-अर्चन किया गया, जिसके पश्चात् मंदिर समिति एवं पंडा जी द्वारा उपस्थित जनों को आशीर्वाद प्रदान किया गया। महापौर प्रीति संजीव सूरी ने दीपदान के इस आयोजन के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोमवती अमावस्या पर दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व है। उन्होंने माँ जालपा को कटनी की अधिष्ठात्री देवी बताया और कहा कि उनके आशीर्वाद से नगर में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि हमारी सनातन संस्कृति और परंपराएं ही समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान भजनों, शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ दीपदान कर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।
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    पवित्र सोमवती अमावस्या के अवसर पर कटनी स्थित माँ जालपा देवी मंदिर परिसर में एक भव्य दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में सैकड़ों दीप प्रज्वलित किए, जिससे पूरा मंदिर प्रांगण दीपों की मनमोहक कतारों और अलौकिक आभा से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने माँ जालपा से नगर की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की, साथ ही अपने परिवार और नगरवासियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

इस विशेष अवसर पर नगर की महापौर प्रीति संजीव सूरी भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान विधि-विधान से माँ जालपा का पूजन-अर्चन किया गया, जिसके पश्चात् मंदिर समिति एवं पंडा जी द्वारा उपस्थित जनों को आशीर्वाद प्रदान किया गया।

महापौर प्रीति संजीव सूरी ने दीपदान के इस आयोजन के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोमवती अमावस्या पर दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व है। उन्होंने माँ जालपा को कटनी की अधिष्ठात्री देवी बताया और कहा कि उनके आशीर्वाद से नगर में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि हमारी सनातन संस्कृति और परंपराएं ही समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान भजनों, शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ दीपदान कर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।
    user_आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदि
    आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदि
    Social worker कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • माता रानी की दिव्य छवि हर भक्त के मन को आनंद और शांति से भर देती है। उनके मुखमंडल की मुस्कान, चमकता हुआ तेज और करुणा से भरी दृष्टि सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। लाल चुनरी, सुंदर आभूषणों से सजी और सिंह पर विराजमान माता रानी का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और अद्भुत दिखाई देता है। उनके दर्शन मात्र से ही मन में श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्तों का मानना है कि माता रानी अपने बच्चों पर सदा कृपा बनाए रखती हैं और हर संकट में उनका साथ देती हैं। मंदिरों में सजे फूल, दीपों की रोशनी और भजनों की मधुर ध्वनि माता के दरबार की सुंदरता को और भी बढ़ा देती है, खासकर नवरात्रि और अन्य पर्वों पर माता रानी का श्रृंगार देखते ही बनता है। उनकी यह दिव्य छवि केवल बाहरी सुंदरता ही नहीं, बल्कि प्रेम, दया, शक्ति और ममता का प्रतीक भी है। कटनी नगर के निमिहा धाम में आदिशक्ति माँ भवानी के रूप में माँ विंध्यवासिनी विराजमान हैं, और उनके चरणों में सच्ची श्रद्धा रखने वाला हर भक्त उनके आशीर्वाद से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करता है। जय माता दी।
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    माता रानी की दिव्य छवि हर भक्त के मन को आनंद और शांति से भर देती है। उनके मुखमंडल की मुस्कान, चमकता हुआ तेज और करुणा से भरी दृष्टि सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। लाल चुनरी, सुंदर आभूषणों से सजी और सिंह पर विराजमान माता रानी का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और अद्भुत दिखाई देता है। उनके दर्शन मात्र से ही मन में श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्तों का मानना है कि माता रानी अपने बच्चों पर सदा कृपा बनाए रखती हैं और हर संकट में उनका साथ देती हैं।

मंदिरों में सजे फूल, दीपों की रोशनी और भजनों की मधुर ध्वनि माता के दरबार की सुंदरता को और भी बढ़ा देती है, खासकर नवरात्रि और अन्य पर्वों पर माता रानी का श्रृंगार देखते ही बनता है। उनकी यह दिव्य छवि केवल बाहरी सुंदरता ही नहीं, बल्कि प्रेम, दया, शक्ति और ममता का प्रतीक भी है। कटनी नगर के निमिहा धाम में आदिशक्ति माँ भवानी के रूप में माँ विंध्यवासिनी विराजमान हैं, और उनके चरणों में सच्ची श्रद्धा रखने वाला हर भक्त उनके आशीर्वाद से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त करता है। जय माता दी।
    user_राशि निषाद
    राशि निषाद
    Psychologist कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • कटनी जिले के विजयराघवगढ़ स्थित थाना परिसर में आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता नवागत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमल मौर्य ने की, जिसमें प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शांति समिति के सदस्यों और बड़ी संख्या में पत्रकारों की उपस्थिति रही। बैठक के दौरान थाना प्रभारी अभिषेक चौबे, नायब तहसीलदार सुनील श्रीवास्तव, विद्युत विभाग के अधिकारी सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने ताजिया जुलूस, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति और विद्युत व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। आमजन से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया। एएसपी श्री कमल मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता के प्रतीक होते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अफवाहों से दूर रहने, सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य सभी पर्वों को गरिमामय और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराना है, जिसमें जनसहयोग सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन को लेकर भी विशेष चर्चा की गई; थाना प्रभारी अभिषेक चौबे ने आगामी वर्षा ऋतु के मद्देनजर नागरिकों को जलभराव वाले क्षेत्रों, उफनते नदी-नालों या बाढ़ जैसी स्थिति में सड़क पार करने का जोखिम न उठाने की सलाह दी। उन्होंने सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार शुरू कराने को जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय बताया। बैठक में उपस्थित सभी धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों, शांति समिति के सदस्यों और नागरिकों ने मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। अंत में थाना प्रभारी अभिषेक चौबे ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, और समाज के नाम एक संदेश में कहा गया कि त्योहार एकता और विश्वास की पहचान होते हैं, जो भाईचारे को मजबूत करते हैं; अतः अफवाहों से बचें, कानून का सम्मान करें और आपदा के समय सतर्कता बरतें, क्योंकि जागरूक नागरिक ही सुरक्षित और सशक्त समाज की नींव होते हैं।
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    कटनी जिले के विजयराघवगढ़ स्थित थाना परिसर में आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता नवागत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमल मौर्य ने की, जिसमें प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शांति समिति के सदस्यों और बड़ी संख्या में पत्रकारों की उपस्थिति रही। बैठक के दौरान थाना प्रभारी अभिषेक चौबे, नायब तहसीलदार सुनील श्रीवास्तव, विद्युत विभाग के अधिकारी सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने ताजिया जुलूस, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति और विद्युत व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। आमजन से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया।

एएसपी श्री कमल मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता के प्रतीक होते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अफवाहों से दूर रहने, सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य सभी पर्वों को गरिमामय और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराना है, जिसमें जनसहयोग सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन को लेकर भी विशेष चर्चा की गई; थाना प्रभारी अभिषेक चौबे ने आगामी वर्षा ऋतु के मद्देनजर नागरिकों को जलभराव वाले क्षेत्रों, उफनते नदी-नालों या बाढ़ जैसी स्थिति में सड़क पार करने का जोखिम न उठाने की सलाह दी। उन्होंने सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार शुरू कराने को जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय बताया।

बैठक में उपस्थित सभी धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों, शांति समिति के सदस्यों और नागरिकों ने मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। अंत में थाना प्रभारी अभिषेक चौबे ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, और समाज के नाम एक संदेश में कहा गया कि त्योहार एकता और विश्वास की पहचान होते हैं, जो भाईचारे को मजबूत करते हैं; अतः अफवाहों से बचें, कानून का सम्मान करें और आपदा के समय सतर्कता बरतें, क्योंकि जागरूक नागरिक ही सुरक्षित और सशक्त समाज की नींव होते हैं।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के चलते मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वनकर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस समूह में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 5 वन रक्षक भी शामिल थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन द नेचर कंज़र्वेंसी और एसएनएपी फाउंडेशन ने किया। बाँधवगढ़ से वनरक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान वनकर्मियों को हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के ऑपरेशन, ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण, हाथियों के व्यवहार अध्ययन, कैम्प, हाथियों के प्रबंधन तथा शारीरिक बनावट के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के अधिकारियों, क्विक रिस्पॉन्स टीमों तथा स्थानीय समुदायों से भी संवाद कर मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की रणनीतियों को समझा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से बाँधवगढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और अब यह क्षेत्र उनके स्थायी रहवास के रूप में उभर रहा है। ऐसे में, यह विशेष प्रशिक्षण भविष्य में प्रभावी हाथी प्रबंधन और क्षेत्र के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाएगा।
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    बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के चलते मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश वन विभाग के 30 वनकर्मियों ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस समूह में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 5 वन रक्षक भी शामिल थे।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का संचालन द नेचर कंज़र्वेंसी और एसएनएपी फाउंडेशन ने किया। बाँधवगढ़ से वनरक्षक लवकेश प्रसाद कुशवाहा, धीरेंद्र शुक्ल, कैलाश चौधरी, लवकेश गुप्ता और रवि कुमार वर्मा ने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण के दौरान वनकर्मियों को हाथियों को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजने के ऑपरेशन, ट्रांसेक्ट सर्वे, गोबर विश्लेषण, हाथियों के व्यवहार अध्ययन, कैम्प, हाथियों के प्रबंधन तथा शारीरिक बनावट के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने गोरुमारा, कर्सिओंग, बैकुंठपुर और जलपाईगुड़ी वन मंडलों के अधिकारियों, क्विक रिस्पॉन्स टीमों तथा स्थानीय समुदायों से भी संवाद कर मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की रणनीतियों को समझा।

यह उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से बाँधवगढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों का नियमित विचरण बना हुआ है और अब यह क्षेत्र उनके स्थायी रहवास के रूप में उभर रहा है। ऐसे में, यह विशेष प्रशिक्षण भविष्य में प्रभावी हाथी प्रबंधन और क्षेत्र के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाएगा।
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजय राघवगढ़ तहसील के ग्राम सिकनपुरा बकेली स्थित प्राचीन शिव मंदिर में कथित आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस वायरल वीडियो में मंदिर परिसर और गांव में दुकान लगाकर मरीजों को उपचार दिए जाने की बात कही गई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए मंदिर परिसर का निरीक्षण भी किया था। 'निडर आवाज' की टीम ने जब मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो ग्रामीणों और ग्राम पंचायत बकेली की सरपंच सरिता सिंह ने बताया कि यह वीडियो बहुत पुराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर में वर्षों से आस्था और आयुर्वेदिक परंपरा के तहत उपचार किया जाता रहा है और इससे किसी को कोई हानि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना था कि "भोलेनाथ स्वयंभू हैं" और उनकी ईश्वरीय अनुकंपा तथा आस्था के कारण ही दूर-दूर से लोग यहां आकर ठीक होते हैं। उन्होंने उपचार के दौरान किसी भी मरीज की मृत्यु या जनहानि होने के आरोप को एक स्वर में खारिज करते हुए कहा कि यहां कोई जबरदस्ती नहीं आता, बल्कि जो श्रद्धा और विश्वास से आते हैं, वे ही लाभ प्राप्त करते हैं। वायरल खबरों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया था और मंदिर परिसर का निरीक्षण किया था। हालांकि, 'निडर आवाज' की टीम जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह से विभागीय जांच के निष्कर्षों पर उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं कर सकी। आयुर्वेदिक उपचार की वैधता और नियमों के संबंध में आयुष विभाग के नियम लागू होते हैं, और बिना पंजीकृत चिकित्सक द्वारा उपचार या दवाओं की बिक्री पर इन्हीं नियमों का पालन करना होता है। मामले में विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट होने पर ही आगे की जानकारी मिल पाएगी। यह खबर ग्रामीणों के बयानों, वायरल वीडियो और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण की जानकारी पर आधारित है, और इसमें वर्णित 'आस्था से ठीक होने' संबंधी बातें ग्रामीणों की मान्यता को दर्शाती हैं। 'निडर आवाज' किसी उपचार पद्धति का समर्थन या विरोध नहीं करता, बल्कि केवल दोनों पक्षों को पाठकों के समक्ष रख रहा है।
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    मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजय राघवगढ़ तहसील के ग्राम सिकनपुरा बकेली स्थित प्राचीन शिव मंदिर में कथित आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस वायरल वीडियो में मंदिर परिसर और गांव में दुकान लगाकर मरीजों को उपचार दिए जाने की बात कही गई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए मंदिर परिसर का निरीक्षण भी किया था।

'निडर आवाज' की टीम ने जब मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो ग्रामीणों और ग्राम पंचायत बकेली की सरपंच सरिता सिंह ने बताया कि यह वीडियो बहुत पुराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर में वर्षों से आस्था और आयुर्वेदिक परंपरा के तहत उपचार किया जाता रहा है और इससे किसी को कोई हानि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना था कि "भोलेनाथ स्वयंभू हैं" और उनकी ईश्वरीय अनुकंपा तथा आस्था के कारण ही दूर-दूर से लोग यहां आकर ठीक होते हैं। उन्होंने उपचार के दौरान किसी भी मरीज की मृत्यु या जनहानि होने के आरोप को एक स्वर में खारिज करते हुए कहा कि यहां कोई जबरदस्ती नहीं आता, बल्कि जो श्रद्धा और विश्वास से आते हैं, वे ही लाभ प्राप्त करते हैं।

वायरल खबरों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया था और मंदिर परिसर का निरीक्षण किया था। हालांकि, 'निडर आवाज' की टीम जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह से विभागीय जांच के निष्कर्षों पर उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं कर सकी। आयुर्वेदिक उपचार की वैधता और नियमों के संबंध में आयुष विभाग के नियम लागू होते हैं, और बिना पंजीकृत चिकित्सक द्वारा उपचार या दवाओं की बिक्री पर इन्हीं नियमों का पालन करना होता है। मामले में विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट होने पर ही आगे की जानकारी मिल पाएगी। यह खबर ग्रामीणों के बयानों, वायरल वीडियो और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण की जानकारी पर आधारित है, और इसमें वर्णित 'आस्था से ठीक होने' संबंधी बातें ग्रामीणों की मान्यता को दर्शाती हैं। 'निडर आवाज' किसी उपचार पद्धति का समर्थन या विरोध नहीं करता, बल्कि केवल दोनों पक्षों को पाठकों के समक्ष रख रहा है।
    user_Pawan Shrivastava
    Pawan Shrivastava
    Local News Reporter कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • कटनी के लमतरा मोड़ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में आज दोपहर करीब 2 बजे एक तेज रफ्तार डंपर और बस के बीच भीषण भिड़ंत हो गई, जिससे सवारियों से भरी बस सड़क पर ही पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 30 लोग घायल हुए हैं, जबकि 3 लोगों की असमय मौत बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुँचा और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए, हादसे के तुरंत बाद स्थानीय आम नागरिक भी तत्परता से मदद के लिए आगे आए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर मलबे में दबे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला, पलटी हुई बस को सीधा किया, और घायलों को तत्काल कटनी जिला अस्पताल पहुँचाने में सहयोग किया। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और इस हादसे में घायल हुए सभी लोग जल्द से जल्द स्वस्थ हों।
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    कटनी के लमतरा मोड़ स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में आज दोपहर करीब 2 बजे एक तेज रफ्तार डंपर और बस के बीच भीषण भिड़ंत हो गई, जिससे सवारियों से भरी बस सड़क पर ही पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 30 लोग घायल हुए हैं, जबकि 3 लोगों की असमय मौत बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुँचा और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए, हादसे के तुरंत बाद स्थानीय आम नागरिक भी तत्परता से मदद के लिए आगे आए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर मलबे में दबे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला, पलटी हुई बस को सीधा किया, और घायलों को तत्काल कटनी जिला अस्पताल पहुँचाने में सहयोग किया।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और इस हादसे में घायल हुए सभी लोग जल्द से जल्द स्वस्थ हों।
    user_NITIN NISHAD
    NITIN NISHAD
    Classified ads newspaper publisher कटनी, कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
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