एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** बेशक़ आज इस मैच का नतीजा भारत के हक़ में रहा और इस जीत ने भारतीय हॉकी प्रेमियों को आज रात सुकून की नींद सोने की वजह भी दे दी होगी। मगर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि बरसों बाद लोगों को एक ऐसा जबर्दस्त क्लासिकल हॉकी मुकाबला देखने को मिला, जिसकी रवानगी में पुराने ज़माने की हॉकी की खुशबू महसूस हुई। वैगनर स्टेडियम में मौजूद तक़रीबन 6,322 दर्शकों को आज शायद हॉकी की उस रूह को लाइव महसूस करने का मौका मिला, जो वक़्त की तेज़ रफ़्तार के साथ कहीं पीछे छूटती जा रही थी। मौजूदा ताबड़तोड़ हॉकी और उस दौर की क्लासिकल हॉकी के दरमियान का फर्क शायद आज हर उस शख्स ने महसूस किया होगा, जिसकी आंखों के सामने गेंद सिर्फ़ तेज़ी से दौड़ती हुई चीज़ नहीं थी, बल्कि कभी पास में ठहरती, कभी स्टिक से बतियाती और फिर अचानक गोल की तरफ़ निकल जाती थी। आज के मुकाबले में रफ़्तार थी, ताक़त थी, रोमांच था और गोलों की बारिश भी। मगर इन सबके बीच एक ऐसा ठहराव भी था, जो अच्छे हॉकी मुकाबले को महज़ एक खेल नहीं रहने देता—उसे एक यादगार शाम में बदल देता है। शायद यही वजह है कि भारत की 5-3 की जीत का जश्न अपनी जगह है, लेकिन इस मुकाबले की असली खूबसूरती सिर्फ़ जीत-हार के दायरे में कैद नहीं की जा सकती। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को सिर्फ़ खेलते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ जीते हुए देखा। भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत में वैसे भी कुछ ऐसा है, जिसे आंकड़ों की भाषा में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ़ दो टीमों के बीच का मुकाबला नहीं था। इसके साथ इतिहास था, यादें थीं ,पुरानी तस्वीरें थीं और उन तमाम मुकाबलों की आवाज़ें भी थीं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने अपनी आंखों से देखा होगा। ...पर आज की शाम में एक फर्क था। इस बार दोनों टीमें जैसे पुराने हॉकी के उस आईने के सामने खड़ी थीं, जिसमें रफ्तार के साथ हुनर भी दिखाई दिया और ताकत के साथ तमीज़ भी। भारत ने शुरुआत से ही अपनी मंशा साफ कर दी थी। पांचवें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला तो भारतीय खेमे में खुशी की पहली लहर उठी। कप्तान का गोल सिर्फ़ स्कोर खोलने वाला गोल नहीं था। यह उस शाम के तेवर का पहला नज़ारा था। 11वें मिनट में अभिषेक ने मैदानी गोल कर भारत की बढ़त 2-0 कर दी। दो गोल पीछे होने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। मगर भारतीय आक्रमण की धार ऐसी थी कि उसे अपनी रक्षापंक्ति को लगातार समेटकर रखना पड़ रहा था। 21वें मिनट में हरमनप्रीत ने फिर वही कमाल दिखाया। पेनल्टी कॉर्नर।ड्रैग-फ्लिक। गोल। 3-0। कप्तान की स्टिक जैसे आज पाकिस्तान के गोलपोस्ट से सवाल पर सवाल कर रही थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबला इतनी आसानी से किसी एक तरफ़ नहीं झुकता। 22वें मिनट में हन्नान शाहिद ने पाकिस्तान का पहला गोल कर दिया। स्कोर 3-1। अचानक मुकाबले में एक नई सांस आ गई। भारत ने इस सांस को ज्यादा लंबा नहीं होने दिया। 24वें मिनट में अभिषेक ने अपना दूसरा गोल किया और भारत फिर तीन गोल आगे हो गया। अब स्कोर बोर्ड पर 4-1 चमक बिखेरी रहा था। लेकिन यह चमक तब कुछ धुंधली पड़ गई जब उसी मिनट सुफियान खान ने पाकिस्तान की ओर से गोल दाग दिया। स्कोर 4-2। कुछ ही पलों में मुकाबला फिर से खुल चुका था। गोलों की यह आवाजाही बता रही थी कि दोनों टीमें सिर्फ़ जीतने नहीं, अपना पूरा वजूद मैदान पर छोड़ने आई हैं और शायद यही वह लम्हा था, जब वैगनर स्टेडियम में बैठे दर्शकों को एहसास हुआ होगा कि वे एक असाधारण हॉकी मुकाबले का हिस्सा बन चुके हैं। तीसरे क्वार्टर में 35वें मिनट पर हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त 5-2 कर दी। यह गोल भारतीय टीम के लिए उस वक्त एक मजबूत सहारा था। लेकिन पाकिस्तान की जिद अभी बाकी थी। 46वें मिनट में हन्नान शाहिद ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। स्कोर लाइन 5-3। अब आखिरी चौथे क्वार्टर में तनाव फिर लौट आया था। पाकिस्तान ने हमले बढ़ाए। भारतीय सर्किल के आसपास हलचल बढ़ी। हर गेंद के साथ रोमांच और गहरा होता गया। लेकिन इस बार भारत ने अपने धैर्य को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। इंग्लैंड के खिलाफ जिस दूसरे हाफ ने भारत के हाथ से मुकाबला छीन लिया था, उस अनुभव से शायद टीम ने कुछ सीखा था। इस बार बढ़त मिली तो उसे सिर्फ़ बचाया नहीं गया, उसके साथ संयम भी रखा गया। आखिरी सीटी बजी। भारत 5-3 से जीत चुका था। हरमनप्रीत के दो गोल, अभिषेक के दो गोल और हार्दिक सिंह का एक गोल—भारत की जीत की पूरी कहानी इन पांच गोलों में दर्ज थी। लेकिन सच पूछिए तो इस मैच की कहानी इन पांच गोलों से कहीं बड़ी थी। भारत ने 57.7 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रखा। 17 शॉट लिए और 28 बार सर्किल में पहुंचा। पाकिस्तान ने भी जवाब दिया और 11 शॉट तथा 16 सर्किल एंट्री के साथ मुकाबले को आखिरी तक जिंदा रखा। आंकड़े बताते हैं कि भारत बेहतर था। मगर आंखें बताती हैं कि मुकाबला खूबसूरत था। यही फर्क इस शाम को खास बनाता है। क्योंकि हॉकी सिर्फ़ गोल का खेल नहीं है। यह उस पास का भी खेल है, जो गोल से पहले रास्ता बनाता है। यह उस ड्रिबल का भी खेल है, जिसमें खिलाड़ी विरोधी को छकाकर आगे निकलता है। यह उस डिफेंडर के धैर्य का भी खेल है, जो आखिरी क्षण तक अपने गोल की हिफाज़त करता है। ...और यह उस एहसास का खेल है, जिसमें हजारों दर्शक एक साथ सांस लेते हैं—हमला होता है तो सांस रुकती है और गोल होता है तो पूरा स्टेडियम सांस छोड़ता है। आज भारत ने पाकिस्तान को हराया। विश्व कप में उसके खिलाफ अपनी चौथी जीत दर्ज की। अगले चक्र में जगह बनाई। लेकिन शायद इस रात की सबसे बड़ी जीत यह रही कि हॉकी ने खुद को एक बार फिर महसूस कराया। मौजूदा दौर की हॉकी तेज़ है। बेहद तेज़। उसमें ताकत है, फिटनेस है, प्रेसिंग है और पलक झपकते ही बदलता खेल है। मगर आज के मुकाबले ने याद दिलाया कि हॉकी की खूबसूरती सिर्फ़ रफ्तार में नहीं होती। उसमें एक ठहराव भी चाहिए। एक नज़ाकत चाहिए। गेंद के साथ वह रिश्ता चाहिए, जो खेल को सिर्फ़ परिणाम नहीं, एक अनुभव बना देता है। शायद इसीलिए 6,322 दर्शकों की मौजूदगी में खेला गया यह मुकाबला सिर्फ़ भारत की जीत बनकर नहीं रहेगा। यह उस शाम की याद भी रहेगा, जब दो पुराने प्रतिद्वंद्वी मैदान पर उतरे और हॉकी ने अपने पुराने रंग फिर से दिखा दिए। भारत अब अगले चक्र में है ...और अब सामने नीदरलैंड्स होगा और उसके बाद अर्जेंटीना या न्यूजीलैंड में से कोई एक चुनौती। वहां मुकाबले और मुश्किल होंगे। वहां हर गलती की कीमत ज्यादा होगी। वहां सिर्फ़ जुनून काफी नहीं होगा—खेल का स्तर भी लगातार ऊंचा रखना होगा। लेकिन आज की रात भारतीय टीम के पास एक ऐसी जीत है, जो सिर्फ़ अंक नहीं देती। यह भरोसा देती है। इंग्लैंड की हार के बाद जो सवाल उठे थे, पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने उनका जवाब स्टिक से दिया है और इस जवाब में पांच गोल थे। दो हरमनप्रीत के। दो अभिषेक के। एक हार्दिक के। लेकिन इन पांच गोलों के पीछे एक पूरी टीम थी, जिसने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। आज भारत जीता है। मगर इस जीत से भी बड़ी बात यह है कि आज हॉकी जीती है। कई बरस बाद शायद किसी भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने यह एहसास कराया है कि हॉकी की रूह अभी कहीं गई नहीं है। वह यहीं है। मैदान में। गेंद में। स्टिक में। दर्शकों की धड़कनों में और उन आंखों में, जो आखिरी सीटी के बाद भी कुछ देर तक मैदान को देखती रह जाती हैं। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ खेलते हुए देखा। #HockeyWorldCup2026 #INDvsPAK #IndianHockey #HockeyWorldCup #HarmanpreetSingh #Abhishek #HardikSingh #ClassicalHockey #HockeyLovers
एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** बेशक़ आज इस मैच का नतीजा भारत के हक़ में रहा और इस जीत ने भारतीय हॉकी प्रेमियों को आज रात सुकून की नींद सोने की वजह भी दे दी होगी। मगर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि बरसों बाद लोगों को एक ऐसा जबर्दस्त क्लासिकल हॉकी मुकाबला देखने को मिला, जिसकी रवानगी में पुराने ज़माने की हॉकी की खुशबू महसूस हुई। वैगनर स्टेडियम में मौजूद तक़रीबन 6,322 दर्शकों को आज शायद हॉकी की उस रूह को लाइव महसूस करने का मौका मिला, जो वक़्त की तेज़ रफ़्तार के साथ कहीं पीछे छूटती जा रही थी। मौजूदा ताबड़तोड़ हॉकी और उस दौर की क्लासिकल हॉकी के दरमियान का फर्क शायद आज हर उस शख्स ने महसूस किया होगा, जिसकी आंखों के सामने गेंद सिर्फ़ तेज़ी से दौड़ती हुई चीज़ नहीं थी, बल्कि कभी पास में ठहरती, कभी स्टिक से बतियाती और फिर अचानक गोल की तरफ़ निकल जाती थी। आज के मुकाबले में रफ़्तार थी, ताक़त थी, रोमांच था और गोलों की बारिश भी। मगर इन सबके बीच एक ऐसा ठहराव भी था, जो अच्छे हॉकी मुकाबले को महज़ एक खेल नहीं रहने देता—उसे एक यादगार शाम में बदल देता है। शायद यही वजह है कि भारत की 5-3 की जीत का जश्न अपनी जगह है, लेकिन इस मुकाबले की असली खूबसूरती सिर्फ़ जीत-हार के दायरे में कैद नहीं की जा सकती। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को सिर्फ़ खेलते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ जीते हुए देखा। भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत में वैसे भी कुछ ऐसा है, जिसे आंकड़ों की भाषा में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ़ दो टीमों के बीच का मुकाबला नहीं था। इसके साथ इतिहास था, यादें थीं ,पुरानी तस्वीरें थीं और उन तमाम मुकाबलों की आवाज़ें भी थीं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने अपनी आंखों से देखा होगा। ...पर आज की शाम में एक फर्क था। इस बार दोनों टीमें जैसे पुराने हॉकी के उस आईने के सामने खड़ी थीं, जिसमें रफ्तार के साथ हुनर भी दिखाई दिया और ताकत के साथ तमीज़ भी। भारत ने शुरुआत से ही अपनी मंशा साफ कर दी थी। पांचवें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला तो भारतीय खेमे में खुशी की पहली लहर उठी। कप्तान का गोल सिर्फ़ स्कोर खोलने वाला गोल नहीं था। यह उस शाम के तेवर का पहला नज़ारा था। 11वें मिनट में अभिषेक ने मैदानी गोल कर भारत की बढ़त 2-0 कर दी। दो गोल पीछे होने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। मगर भारतीय आक्रमण की धार ऐसी थी कि उसे अपनी रक्षापंक्ति को लगातार समेटकर रखना पड़ रहा था। 21वें मिनट में हरमनप्रीत ने फिर वही कमाल दिखाया। पेनल्टी कॉर्नर।ड्रैग-फ्लिक। गोल। 3-0। कप्तान की स्टिक जैसे आज पाकिस्तान के गोलपोस्ट से सवाल पर सवाल कर रही थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबला इतनी आसानी से किसी एक तरफ़ नहीं झुकता। 22वें मिनट में हन्नान शाहिद ने पाकिस्तान का पहला गोल कर दिया। स्कोर 3-1। अचानक मुकाबले में एक नई सांस आ गई। भारत ने इस सांस को ज्यादा लंबा नहीं होने दिया। 24वें मिनट में अभिषेक ने अपना दूसरा गोल किया और भारत फिर तीन गोल आगे हो गया। अब स्कोर बोर्ड पर 4-1 चमक बिखेरी रहा था। लेकिन यह चमक तब कुछ धुंधली पड़ गई जब उसी मिनट सुफियान खान ने पाकिस्तान की ओर से गोल दाग दिया। स्कोर 4-2। कुछ ही पलों में मुकाबला फिर से खुल चुका था। गोलों की यह आवाजाही बता रही थी कि दोनों टीमें सिर्फ़ जीतने नहीं, अपना पूरा वजूद मैदान पर छोड़ने आई हैं और शायद यही वह लम्हा था, जब वैगनर स्टेडियम में बैठे दर्शकों को एहसास हुआ होगा कि वे एक असाधारण हॉकी मुकाबले का हिस्सा बन चुके हैं। तीसरे क्वार्टर में 35वें मिनट पर हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त 5-2 कर दी। यह गोल भारतीय टीम के लिए उस वक्त एक मजबूत सहारा था। लेकिन पाकिस्तान की जिद अभी बाकी थी। 46वें मिनट में हन्नान शाहिद ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। स्कोर लाइन 5-3। अब आखिरी चौथे क्वार्टर में तनाव फिर लौट आया था। पाकिस्तान ने हमले बढ़ाए। भारतीय सर्किल के आसपास हलचल बढ़ी। हर गेंद के साथ रोमांच और गहरा होता गया। लेकिन इस बार भारत ने अपने धैर्य को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। इंग्लैंड के खिलाफ जिस दूसरे हाफ ने भारत के हाथ से मुकाबला छीन लिया था, उस अनुभव से शायद टीम ने कुछ सीखा था। इस बार बढ़त मिली तो उसे सिर्फ़ बचाया नहीं गया, उसके साथ संयम भी रखा गया। आखिरी सीटी बजी। भारत 5-3 से जीत चुका था। हरमनप्रीत के दो गोल, अभिषेक के दो गोल और हार्दिक सिंह का एक गोल—भारत की जीत की पूरी कहानी इन पांच गोलों में दर्ज थी। लेकिन सच पूछिए तो इस मैच की कहानी इन पांच गोलों से कहीं बड़ी थी। भारत ने 57.7 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रखा। 17 शॉट लिए और 28 बार सर्किल में पहुंचा। पाकिस्तान ने भी जवाब दिया और 11 शॉट तथा 16 सर्किल एंट्री के साथ मुकाबले को आखिरी तक जिंदा रखा। आंकड़े बताते हैं कि भारत बेहतर था। मगर आंखें बताती हैं कि मुकाबला खूबसूरत था। यही फर्क इस शाम को खास बनाता है। क्योंकि हॉकी सिर्फ़ गोल का खेल नहीं है। यह उस पास का भी खेल है, जो गोल से पहले रास्ता बनाता है। यह उस ड्रिबल का भी खेल है, जिसमें खिलाड़ी विरोधी को छकाकर आगे निकलता है। यह उस डिफेंडर के धैर्य का भी खेल है, जो आखिरी क्षण तक अपने गोल की हिफाज़त करता है। ...और यह उस एहसास का खेल है, जिसमें हजारों दर्शक एक साथ सांस लेते हैं—हमला होता है तो सांस रुकती है और गोल होता है तो पूरा स्टेडियम सांस छोड़ता है। आज भारत ने पाकिस्तान को हराया। विश्व कप में उसके खिलाफ अपनी चौथी जीत दर्ज की। अगले चक्र में जगह बनाई। लेकिन शायद इस रात की सबसे बड़ी जीत यह रही कि हॉकी ने खुद को एक बार फिर महसूस कराया। मौजूदा दौर की हॉकी तेज़ है। बेहद तेज़। उसमें ताकत है, फिटनेस है, प्रेसिंग है और पलक झपकते ही बदलता खेल है। मगर आज के मुकाबले ने याद दिलाया कि हॉकी की खूबसूरती सिर्फ़ रफ्तार में नहीं होती। उसमें एक ठहराव भी चाहिए। एक नज़ाकत चाहिए। गेंद के साथ वह रिश्ता चाहिए, जो खेल को सिर्फ़ परिणाम नहीं, एक अनुभव बना देता है। शायद इसीलिए 6,322 दर्शकों की मौजूदगी में खेला गया यह मुकाबला सिर्फ़ भारत की जीत बनकर नहीं रहेगा। यह उस शाम की याद भी रहेगा, जब दो पुराने प्रतिद्वंद्वी मैदान पर उतरे और हॉकी ने अपने पुराने रंग फिर से दिखा दिए। भारत अब अगले चक्र में है ...और अब सामने नीदरलैंड्स होगा और उसके बाद अर्जेंटीना या न्यूजीलैंड में से कोई एक चुनौती। वहां मुकाबले और मुश्किल होंगे। वहां हर गलती की कीमत ज्यादा होगी। वहां सिर्फ़ जुनून काफी नहीं होगा—खेल का स्तर भी लगातार ऊंचा रखना होगा। लेकिन आज की रात भारतीय टीम के पास एक ऐसी जीत है, जो सिर्फ़ अंक नहीं देती। यह भरोसा देती है। इंग्लैंड की हार के बाद जो सवाल उठे थे, पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने उनका जवाब स्टिक से दिया है और इस जवाब में पांच गोल थे। दो हरमनप्रीत के। दो अभिषेक के। एक हार्दिक के। लेकिन इन पांच गोलों के पीछे एक पूरी टीम थी, जिसने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। आज भारत जीता है। मगर इस जीत से भी बड़ी बात यह है कि आज हॉकी जीती है। कई बरस बाद शायद किसी भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने यह एहसास कराया है कि हॉकी की रूह अभी कहीं गई नहीं है। वह यहीं है। मैदान में। गेंद में। स्टिक में। दर्शकों की धड़कनों में और उन आंखों में, जो आखिरी सीटी के बाद भी कुछ देर तक मैदान को देखती रह जाती हैं। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ खेलते हुए देखा। #HockeyWorldCup2026 #INDvsPAK #IndianHockey #HockeyWorldCup #HarmanpreetSingh #Abhishek #HardikSingh #ClassicalHockey #HockeyLovers
- वाराणसी में मां गंगा ने पखारे मां शीतला के चरण,गर्भगृह में घुसा बाढ़ का पानी वाराणसी। काशी में मां गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।गंगा का पानी अब घाटों से होते हुए मंदिरों के गर्भगृह तक पहुंच गया है।बनारस में इसे बहुत शुभ माना जाता है। तस्वीर में दिख रहा यह दृश्य दशाश्वमेध स्थित मां शीतला माता मंदिर का है,जहां बाढ़ का पानी मां के दरबार में प्रवेश कर गया है और मां के चरणों को स्पर्श कर रहा है। मान्यता है कि जब-जब गंगा का पानी बढ़कर मां शीतला के पैर पखारता है,तो यह बहुत ही शुभ संकेत होता है।इसे मां गंगा द्वारा मां शीतला का अभिषेक माना जाता है।मंदिर के गर्भगृह में करीब घुटने तक पानी भर गया है, फिर भी माता का श्रृंगार वैसा ही दिव्य बना हुआ है।फूल-मालाओं से सजी मां की मुस्कुराती हुई मूर्ति भक्तों को आशीर्वाद दे रही है। उधर, गंगा का बढ़ाव इतना तेज है कि पानी जल पुलिस चौकी के ऊपर तक पहुंचने लगा है। जल पुलिस और एनडीआरएफ को अलर्ट पर रखा गया है। घाटों का संपर्क टूट गया है और सभी घाट जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन लगातार लोगों से घाटों से दूर रहने की अपील कर रहा है। भक्त इसे आपदा नहीं, बल्कि दो माताओं का मिलन बता रहे हैं। जय मां गंगे! जय मां शीतला!1
- खूंखार सांड ने बुजुर्ग पर किया हमला, गंभीर रूप से घायल; ग्रामीणों में दहशत जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली टांडाकला (चंदौली)। स्थानीय ग्राम सभा निवासी 60 वर्षीय प्रमोद यादव पर गुरुवार को एक खूंखार सांड ने अचानक हमला कर दिया। सांड के हमले में प्रमोद यादव के चेहरे, कंधे और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। घायल अवस्था में उनकी तस्वीर सामने आई है। पीड़ित प्रमोद यादव के अनुसार, उनके दरवाजे पर बंधी गाय रस्सी तोड़कर पास के खेत की ओर चली गई थी। वह गाय की रस्सी पकड़कर वापस घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए सांड ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया। प्रमोद यादव ने साहस दिखाते हुए सांड के सींग को पकड़ लिया और मदद के लिए अपने बड़े भाई बीरेंद्र को आवाज लगाई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को आता देख सांड वहां से भाग गया, जिससे प्रमोद यादव की जान बच सकी। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त सांड बेहद आक्रामक और खतरनाक हो चुका है। आरोप है कि इस वर्ष अब तक वह कई लोगों को घायल कर चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि खतरनाक एवं आवारा सांडों को जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान अथवा गौशाला भेजा जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।1
- एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप -10 ** ...जब हॉकी अपनी रूह के साथ खेली गई ** बेशक़ आज इस मैच का नतीजा भारत के हक़ में रहा और इस जीत ने भारतीय हॉकी प्रेमियों को आज रात सुकून की नींद सोने की वजह भी दे दी होगी। मगर इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि बरसों बाद लोगों को एक ऐसा जबर्दस्त क्लासिकल हॉकी मुकाबला देखने को मिला, जिसकी रवानगी में पुराने ज़माने की हॉकी की खुशबू महसूस हुई। वैगनर स्टेडियम में मौजूद तक़रीबन 6,322 दर्शकों को आज शायद हॉकी की उस रूह को लाइव महसूस करने का मौका मिला, जो वक़्त की तेज़ रफ़्तार के साथ कहीं पीछे छूटती जा रही थी। मौजूदा ताबड़तोड़ हॉकी और उस दौर की क्लासिकल हॉकी के दरमियान का फर्क शायद आज हर उस शख्स ने महसूस किया होगा, जिसकी आंखों के सामने गेंद सिर्फ़ तेज़ी से दौड़ती हुई चीज़ नहीं थी, बल्कि कभी पास में ठहरती, कभी स्टिक से बतियाती और फिर अचानक गोल की तरफ़ निकल जाती थी। आज के मुकाबले में रफ़्तार थी, ताक़त थी, रोमांच था और गोलों की बारिश भी। मगर इन सबके बीच एक ऐसा ठहराव भी था, जो अच्छे हॉकी मुकाबले को महज़ एक खेल नहीं रहने देता—उसे एक यादगार शाम में बदल देता है। शायद यही वजह है कि भारत की 5-3 की जीत का जश्न अपनी जगह है, लेकिन इस मुकाबले की असली खूबसूरती सिर्फ़ जीत-हार के दायरे में कैद नहीं की जा सकती। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को सिर्फ़ खेलते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ जीते हुए देखा। भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत में वैसे भी कुछ ऐसा है, जिसे आंकड़ों की भाषा में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ़ दो टीमों के बीच का मुकाबला नहीं था। इसके साथ इतिहास था, यादें थीं ,पुरानी तस्वीरें थीं और उन तमाम मुकाबलों की आवाज़ें भी थीं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने अपनी आंखों से देखा होगा। ...पर आज की शाम में एक फर्क था। इस बार दोनों टीमें जैसे पुराने हॉकी के उस आईने के सामने खड़ी थीं, जिसमें रफ्तार के साथ हुनर भी दिखाई दिया और ताकत के साथ तमीज़ भी। भारत ने शुरुआत से ही अपनी मंशा साफ कर दी थी। पांचवें मिनट में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला तो भारतीय खेमे में खुशी की पहली लहर उठी। कप्तान का गोल सिर्फ़ स्कोर खोलने वाला गोल नहीं था। यह उस शाम के तेवर का पहला नज़ारा था। 11वें मिनट में अभिषेक ने मैदानी गोल कर भारत की बढ़त 2-0 कर दी। दो गोल पीछे होने के बावजूद पाकिस्तान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। मगर भारतीय आक्रमण की धार ऐसी थी कि उसे अपनी रक्षापंक्ति को लगातार समेटकर रखना पड़ रहा था। 21वें मिनट में हरमनप्रीत ने फिर वही कमाल दिखाया। पेनल्टी कॉर्नर।ड्रैग-फ्लिक। गोल। 3-0। कप्तान की स्टिक जैसे आज पाकिस्तान के गोलपोस्ट से सवाल पर सवाल कर रही थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबला इतनी आसानी से किसी एक तरफ़ नहीं झुकता। 22वें मिनट में हन्नान शाहिद ने पाकिस्तान का पहला गोल कर दिया। स्कोर 3-1। अचानक मुकाबले में एक नई सांस आ गई। भारत ने इस सांस को ज्यादा लंबा नहीं होने दिया। 24वें मिनट में अभिषेक ने अपना दूसरा गोल किया और भारत फिर तीन गोल आगे हो गया। अब स्कोर बोर्ड पर 4-1 चमक बिखेरी रहा था। लेकिन यह चमक तब कुछ धुंधली पड़ गई जब उसी मिनट सुफियान खान ने पाकिस्तान की ओर से गोल दाग दिया। स्कोर 4-2। कुछ ही पलों में मुकाबला फिर से खुल चुका था। गोलों की यह आवाजाही बता रही थी कि दोनों टीमें सिर्फ़ जीतने नहीं, अपना पूरा वजूद मैदान पर छोड़ने आई हैं और शायद यही वह लम्हा था, जब वैगनर स्टेडियम में बैठे दर्शकों को एहसास हुआ होगा कि वे एक असाधारण हॉकी मुकाबले का हिस्सा बन चुके हैं। तीसरे क्वार्टर में 35वें मिनट पर हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त 5-2 कर दी। यह गोल भारतीय टीम के लिए उस वक्त एक मजबूत सहारा था। लेकिन पाकिस्तान की जिद अभी बाकी थी। 46वें मिनट में हन्नान शाहिद ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। स्कोर लाइन 5-3। अब आखिरी चौथे क्वार्टर में तनाव फिर लौट आया था। पाकिस्तान ने हमले बढ़ाए। भारतीय सर्किल के आसपास हलचल बढ़ी। हर गेंद के साथ रोमांच और गहरा होता गया। लेकिन इस बार भारत ने अपने धैर्य को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। इंग्लैंड के खिलाफ जिस दूसरे हाफ ने भारत के हाथ से मुकाबला छीन लिया था, उस अनुभव से शायद टीम ने कुछ सीखा था। इस बार बढ़त मिली तो उसे सिर्फ़ बचाया नहीं गया, उसके साथ संयम भी रखा गया। आखिरी सीटी बजी। भारत 5-3 से जीत चुका था। हरमनप्रीत के दो गोल, अभिषेक के दो गोल और हार्दिक सिंह का एक गोल—भारत की जीत की पूरी कहानी इन पांच गोलों में दर्ज थी। लेकिन सच पूछिए तो इस मैच की कहानी इन पांच गोलों से कहीं बड़ी थी। भारत ने 57.7 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रखा। 17 शॉट लिए और 28 बार सर्किल में पहुंचा। पाकिस्तान ने भी जवाब दिया और 11 शॉट तथा 16 सर्किल एंट्री के साथ मुकाबले को आखिरी तक जिंदा रखा। आंकड़े बताते हैं कि भारत बेहतर था। मगर आंखें बताती हैं कि मुकाबला खूबसूरत था। यही फर्क इस शाम को खास बनाता है। क्योंकि हॉकी सिर्फ़ गोल का खेल नहीं है। यह उस पास का भी खेल है, जो गोल से पहले रास्ता बनाता है। यह उस ड्रिबल का भी खेल है, जिसमें खिलाड़ी विरोधी को छकाकर आगे निकलता है। यह उस डिफेंडर के धैर्य का भी खेल है, जो आखिरी क्षण तक अपने गोल की हिफाज़त करता है। ...और यह उस एहसास का खेल है, जिसमें हजारों दर्शक एक साथ सांस लेते हैं—हमला होता है तो सांस रुकती है और गोल होता है तो पूरा स्टेडियम सांस छोड़ता है। आज भारत ने पाकिस्तान को हराया। विश्व कप में उसके खिलाफ अपनी चौथी जीत दर्ज की। अगले चक्र में जगह बनाई। लेकिन शायद इस रात की सबसे बड़ी जीत यह रही कि हॉकी ने खुद को एक बार फिर महसूस कराया। मौजूदा दौर की हॉकी तेज़ है। बेहद तेज़। उसमें ताकत है, फिटनेस है, प्रेसिंग है और पलक झपकते ही बदलता खेल है। मगर आज के मुकाबले ने याद दिलाया कि हॉकी की खूबसूरती सिर्फ़ रफ्तार में नहीं होती। उसमें एक ठहराव भी चाहिए। एक नज़ाकत चाहिए। गेंद के साथ वह रिश्ता चाहिए, जो खेल को सिर्फ़ परिणाम नहीं, एक अनुभव बना देता है। शायद इसीलिए 6,322 दर्शकों की मौजूदगी में खेला गया यह मुकाबला सिर्फ़ भारत की जीत बनकर नहीं रहेगा। यह उस शाम की याद भी रहेगा, जब दो पुराने प्रतिद्वंद्वी मैदान पर उतरे और हॉकी ने अपने पुराने रंग फिर से दिखा दिए। भारत अब अगले चक्र में है ...और अब सामने नीदरलैंड्स होगा और उसके बाद अर्जेंटीना या न्यूजीलैंड में से कोई एक चुनौती। वहां मुकाबले और मुश्किल होंगे। वहां हर गलती की कीमत ज्यादा होगी। वहां सिर्फ़ जुनून काफी नहीं होगा—खेल का स्तर भी लगातार ऊंचा रखना होगा। लेकिन आज की रात भारतीय टीम के पास एक ऐसी जीत है, जो सिर्फ़ अंक नहीं देती। यह भरोसा देती है। इंग्लैंड की हार के बाद जो सवाल उठे थे, पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने उनका जवाब स्टिक से दिया है और इस जवाब में पांच गोल थे। दो हरमनप्रीत के। दो अभिषेक के। एक हार्दिक के। लेकिन इन पांच गोलों के पीछे एक पूरी टीम थी, जिसने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। आज भारत जीता है। मगर इस जीत से भी बड़ी बात यह है कि आज हॉकी जीती है। कई बरस बाद शायद किसी भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने यह एहसास कराया है कि हॉकी की रूह अभी कहीं गई नहीं है। वह यहीं है। मैदान में। गेंद में। स्टिक में। दर्शकों की धड़कनों में और उन आंखों में, जो आखिरी सीटी के बाद भी कुछ देर तक मैदान को देखती रह जाती हैं। आज वैगनर स्टेडियम ने सिर्फ़ भारत को पाकिस्तान पर जीतते हुए नहीं देखा। उसने हॉकी को अपनी पूरी रूह के साथ खेलते हुए देखा। #HockeyWorldCup2026 #INDvsPAK #IndianHockey #HockeyWorldCup #HarmanpreetSingh #Abhishek #HardikSingh #ClassicalHockey #HockeyLovers1
- स्वास्थ्य विभाग अयोध्या ने बचायी बच्चे की जान अयोध्या जिला चिकित्सालय में हुआ इलाज स्वास्थ्य विभाग अयोध्या ने बचायी बच्चे की जान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ प्रेम चंद भारती द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान बीकापुर ब्लॉक के चकसेनपुर गांव में एक 9 वर्षीय बच्चे में diptheria से प्रभावित संदिग्ध लक्षण पाये जाने पर तत्काल जिला चिकित्सालय को सन्दर्भित कराया, जिला चिकित्सालय में बच्चे की जाँच में पाया गया कि बच्चे में diptheria के पूरे लक्षण हैं और बच्चे को साँस लेने में तकलीफ है और गले में सफेद झिल्ली भी है जो कि अत्यन्त गंभीर स्थिति है। बच्चे को तत्काल मेडिकल कॉलेज अयोध्या को रिफर किया गया जहां चिकित्सकों की टीम द्वारा बेहतर ईलाज कर बच्चे के जीवन की सुरक्षा की और बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। बच्चे की इस हालत पर मेडिकल कॉलेज की चिकित्सीय टीम ने अवगत कराया कि यदि बच्चे को पेंटावेलेंट ,डी पी टी एवं एम आर की वैक्सीन लगी होती तो बच्चे को diptheria जैसी बीमारी नही होती और बच्चे का जीवन भी खतरे में नही पड़ता। मेडिकल कॉलेज की चिकित्सीय टीम, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी की सभी जनपदवासियों से अपील है कि वो अपने बच्चों को सभी टीके जरूर लगवाएं और अपने बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित करें। सम्पूर्ण टीकाकरण स्वस्थ और खुशहाल बचपन का आधार है3
- वाराणसी में दबंगों का आतंक से परेशान ग्रामीण रास्ता रोकने का आरोप वाराणसी मे ग्रामीण लोगों ने आरोप लगाया है कि दबंगों द्वारा रास्ता रोक लिया गया। पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पेश है पूरी रिपोर्ट। Varanasi Breking News2
- street light खंबे की एक स्ट्रीट लाइट है मेरे घर के सामने जो हफ्ते भरते नहीं जल रही है कृपया इसे सही करने का कष्ट करें लाइट ना जलने की वजह से पूरे घर के सामने अंधेरा मौजूद रहता है और दुर्घटना होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है1
- कंगना ने नीले ड्रम की तस्वीर शेयर कर मॉडर्न डेटिंग पर उठाए सवाल, कहा- रिश्ते बॉडी काउंट तक सिमट गए हैं अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में बेंगलुरु में हुए एक दोहरे हत्याकांड पर प्रतिक्रिया देते हुए मॉडर्न डेटिंग और पश्चिमी संस्कृति (Western Culture) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक नीले ड्रम की तस्वीर साझा की और युवाओं को चेतावनी दी कि आधुनिक रिश्तों में संवेदनशीलता खत्म हो रही है।कंगना के बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:मामले की पृष्ठभूमिबेंगलुरु के चिक्काबनावरा में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर कथित तौर पर अपने पति और 4 साल के मासूम बेटे की हत्या कर दी। कंगना ने इसी खौफनाक वारदात की न्यूज रिपोर्ट शेयर करते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया।कंगना रनौत के बयान की मुख्य बातें'बॉडी काउंट' पर आपत्ति: कंगना ने मॉडर्न डेटिंग में इस्तेमाल होने वाले शब्द 'बॉडी काउंट' (शारीरिक संबंधों की संख्या गिनना) पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि इंसानी रिश्तों को सिर्फ शरीरों की गिनती तक सीमित करना खतरनाक है।पश्चिमी संस्कृति को जिम्मेदार ठहराया: कंगना के मुताबिक, भारत में बढ़ता पश्चिमीकरण लोगों को रिश्तों के प्रति असंवेदनशील बना रहा है। लोग बिना सोचे-समझे इस दिखावे वाले कल्चर को अपना रहे हैं।आधुनिक शब्दावलियों पर प्रहार: उन्होंने आधुनिक डेटिंग ट्रेंड्स जैसे 'बेंचिंग' (Benching), 'घोस्टिंग' (Ghosting), और 'क्रमबिंग' (Crumbing) को सामान्य मानने (Normalise) से मना किया।नीले ड्रम की चेतावनी: कंगना ने लिखा, "जब तक आपका अपना बच्चा किसी ड्रम में नहीं मिलता, तब तक यह सब बहुत कूल लगता है। जाग जाइए, जब आप खुद एक लाश बन जाएंगे, तब रोइएगा मत। मुझे ट्रोल करने के लिए तैयार रहिए, लेकिन याद रखिए कि आपके आस-पास भी एक नीला ड्रम हो सकता है।" ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा दैनिक समाचार पत्र1
- *MSC छात्रा की प्रेमी के बाथरूम से मिली लाश:* वाराणसी में 3 दिन से लापता थी, कॉलेज के लिए निकली थी इकलौती बेटी बाथरूम से बरामदगी: युवती की मां जब उसकी तलाश करते हुए आरोपी विवेक चौबे के बच्छांव स्थित किराये के कमरे पर पहुंची, तो कमरा बंद था। दरवाजा खुलवाने पर वहां से भीषण दुर्गंध आ रही थी, जिसके बाद बाथरूम के अंदर छात्रा का सड़ा-गला शव बरामद हुआ।हत्या का कारण (संभावित प्रेम प्रसंग): मृतका की शादी कुछ समय पहले ही उसके परिजनों ने पड़ोस के गांव में तय की थी, जो नवंबर में होने वाली थी। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, शादी तय होने से नाराज होकर प्रेमी विवेक चौबे ने इस वारदात को अंजाम दिया।मुकदमा और जांच: पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर पर नामजद आरोपी विवेक चौबे के खिलाफ हत्या और शव छिपाने की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।फरार आरोपी की तलाश: वाराणसी पुलिस (एडीसीपी क्राइम नीतू कात्यान) ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष टीमों का गठन किया है। फॉरेंसिक और फील्ड यूनिट की टीमों ने मौके से साक्ष्य जुटाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा दैनिक समाचार पत्र1