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कौशाम्बी जिले के चायल क्षेत्र में निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता पर शिव शंकर केशरवानी द्वारा एक बार फिर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के मद्देनजर, निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की है।
सुनील कुमार पत्रकार
कौशाम्बी जिले के चायल क्षेत्र में निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता पर शिव शंकर केशरवानी द्वारा एक बार फिर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के मद्देनजर, निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की है।
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- कौशांबी में, शिव शंकर केशरवानी द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में चायल के निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस विधायक गुप्ता पर लगाए गए आरोपों को लेकर आयोजित की गई थी।1
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ के दुबग्गा स्थित जेहटा चौकी क्षेत्र में एक महिला से छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर (संख्या 0167/2026, बीएनएस 74) दर्ज होने के 22 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह मामला 30 मई से संबंधित बताया जा रहा है, और अब तक कोई कार्रवाई न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच, जेहटा चौकी इंचार्ज सुमित श्रीवास्तव का एक कथित वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में उन्हें कथित तौर पर 'विपक्षी' से यह कहते हुए सुना जा रहा है कि पुलिस उनकी मदद कर रही है। इस घटनाक्रम के बाद, मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है, जिसमें वायरल वीडियो, संबंधित बयान और एफआईआर को भी संलग्न किया गया है। अधिकारियों से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की अपील की गई है।2
- प्रयागराज में औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत रामपुर में दबंगों ने एक घर पर हमला कर पूरे परिवार के साथ मारपीट की। इस दौरान उन्होंने घर की महिलाओं के सिर फोड़ दिए, जिससे वे लहूलुहान हो गईं। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। जब हमलावरों ने देखा कि उनकी सारी करतूतें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही हैं, तो उन्होंने सीसीटीवी कैमरे को भी तोड़ दिया।1
- लखनऊ में फायर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं, खासकर कोचिंग संस्थानों, होटलों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में। यह सामने आया है कि इन जगहों पर फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की प्रक्रिया अक्सर केवल कागजों पर ही पूरी कर ली जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हादसे फाइलों में नहीं होते, बल्कि वास्तविक जीवन में घटित होते हैं, और इनकी कीमत लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ती है। इसी संदर्भ में, यह मांग की गई है कि संबंधित विभागों को नियमित रूप से निरीक्षण करना चाहिए और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि किसी भी परिवार को अपने प्रियजनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।1