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लखनऊ में फायर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं, खासकर कोचिंग संस्थानों, होटलों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में। यह सामने आया है कि इन जगहों पर फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की प्रक्रिया अक्सर केवल कागजों पर ही पूरी कर ली जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हादसे फाइलों में नहीं होते, बल्कि वास्तविक जीवन में घटित होते हैं, और इनकी कीमत लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ती है। इसी संदर्भ में, यह मांग की गई है कि संबंधित विभागों को नियमित रूप से निरीक्षण करना चाहिए और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि किसी भी परिवार को अपने प्रियजनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।
राजेश कुमार पत्रकार
लखनऊ में फायर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं, खासकर कोचिंग संस्थानों, होटलों और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में। यह सामने आया है कि इन जगहों पर फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की प्रक्रिया अक्सर केवल कागजों पर ही पूरी कर ली जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हादसे फाइलों में नहीं होते, बल्कि वास्तविक जीवन में घटित होते हैं, और इनकी कीमत लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ती है। इसी संदर्भ में, यह मांग की गई है कि संबंधित विभागों को नियमित रूप से निरीक्षण करना चाहिए और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना चाहिए, ताकि किसी भी परिवार को अपने प्रियजनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।
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- कौशाम्बी जिले के चायल क्षेत्र में निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता पर शिव शंकर केशरवानी द्वारा एक बार फिर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के मद्देनजर, निवर्तमान विधायक संजय कुमार गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की है।1
- कौशांबी में भरवारी पुलिस चौकी पर एक पीड़ित पिता ने अपनी 11 दिन से लापता बेटी को ढूंढने में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित का आरोप है कि भरवारी चौकी इंचार्ज और कोखराज थाना इंचार्ज उसकी बेटी को खोजने में असमर्थ दिख रहे हैं। घरवालों के अनुसार, बेटी 11 दिन पहले घर से लापता हुई थी और तुरंत भरवारी पुलिस चौकी को सूचना दी गई थी, लेकिन चौकी इंचार्ज और थाना इंचार्ज ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मी थाने-चौकी में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और उन्हें खुद स्टेशन-स्टेशन भटकने के लिए कह रहे हैं। परिवार का कहना है कि वे रो-रोकर बेटी को खुद ढूंढ रहे हैं, लेकिन 11 दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने न तो सीसीटीवी फुटेज चेक किए, न आसपास पूछताछ की, और न ही कोई टीम बनाई। इसके बजाय, पीड़ित परिवार को ही लगातार इधर-उधर दौड़ाया जा रहा है। परिवार के सदस्यों का दर्द है, "पता नहीं वो किस हाल में होगी। रो-रोकर घर का बुरा हाल है।" पीड़ित परिवार ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच और बेटी को तुरंत बरामद करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कौशांबी के एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मामले को तुरंत संज्ञान में लेकर लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए और बेटी को जल्द से जल्द ढूंढा जाए। गौरतलब है कि कानून के अनुसार, लापता नाबालिग या महिला की सूचना मिलते ही एफआईआर दर्ज कर 24 घंटे के अंदर जांच शुरू करना पुलिस की जिम्मेदारी है। इस मामले में अभी तक पुलिस प्रशासन का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।1
- प्रयागराज में औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत रामपुर में दबंगों ने एक घर पर हमला कर पूरे परिवार के साथ मारपीट की। इस दौरान उन्होंने घर की महिलाओं के सिर फोड़ दिए, जिससे वे लहूलुहान हो गईं। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। जब हमलावरों ने देखा कि उनकी सारी करतूतें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही हैं, तो उन्होंने सीसीटीवी कैमरे को भी तोड़ दिया।1
- प्रयागराज के रौशन बाग़ स्थित इमामबाड़ा स्व मुस्तफा हुसैन से छठवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस अकीदत और ऐहतेराम के साथ निकाला गया। इस दौरान हज़रत अली असग़र के झूले की ज़ियारत के लिए अकीदतमंदों का भारी सैलाब उमड़ा। नागरिक सुरक्षा के पूर्व डिप्यूटी वार्डेन नासिर ज़ैदी और वार्डेन व जुलूस आयोजक खुशनूद रिज़वी की सरपरस्ती में देर रात हज़रत अली असग़र के झूले, दो विशाल अलम और हज़रत अली अकबर के ताबूत का यह जुलूस निकाला गया। अज़ाखाने में काज़िम अब्बास, अहमद जावेद 'कज्जन', ज़रग़ाम हैदर और ऐजाज़ हुसैन सहित अन्य लोगों ने गमगीन मर्सिया पढ़ा, जबकि ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने शहादत का गमगीन तज़केरा किया। मजलिस के बाद, शबीहे ताबूत हज़रत अली अकबर, हज़रत अली असग़र का झूला और दो विशाल अलम को गुलाब व चमेली के फूलों से सजाकर ज़ियारत के लिए बाहर निकाला गया। अंजुमन मोहाफिज़े अज़ा क़दीम दरियाबाद के नौहाख्वान गुलाम अब्बास नकवी और उनके साथियों ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस निकाला, जो रौशनबाग़, बख्शी बाज़ार और मस्जिद क़ाज़ी साहब से होकर क़ाज़ी गंज स्थित इमामबाड़ा फूटा दायरा पर जाकर सम्पन्न हुआ। इस जुलूस में नासिर ज़ैदी, खुशनूद रिज़वी, सैय्यद मोहम्मद अस्करी, पार्षद रमीज़ अहसन, ज़ाहिद भाई, शाने भाई, शादाब ज़मन, आसिफ रिज़वी, आमिर रिज़वी, अली रज़ा रिज़वी, वसीम असग़र, औन ज़ैदी, ज़ामिन हसन, शमीर ज़मन, शयान ज़मन, अमन जायसी, मुज्तबा हैदर 'क़दर', तारिक़, ज़हीन अब्बास और फरमान रिज़वी सहित कई लोग शामिल रहे।1
- प्रयागराज के औद्योगिक थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर में दबंगों ने एक परिवार पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया है। दबंगों ने घर में घुसकर पूरे परिवार को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा, जिसमें महिलाओं के सिर फूट गए और घर का कैमरा भी तोड़ दिया गया। पीड़ित परिवार के अनुसार, बबलू उर्फ अशफाक, अशफाक के पुत्र अरमान, अर्सलान और अयान, साथ ही अल्फाक और आफताब ने घर में घुसकर यह भीषण मारपीट की। पीड़ितों ने बताया कि हमलावरों में से एक, अरमान, अशफाक का पुत्र है, जिस पर पिछले साल अवैध असलहे का प्रदर्शन करने और उसके वीडियो व फोटो वायरल होने पर कार्रवाई भी हुई थी। इस घटना के बाद, पीड़ित परिवार ने औद्योगिक क्षेत्र की पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, यह कहते हुए कि दबंगों को पुलिस का कोई डर नहीं है। रामपुर पुलिस पर भी आरोपियों को बचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। घायल पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंचा है, लेकिन उनकी शिकायत है कि थाने पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।1
- बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जहाँ बिहार पुलिस ने स्वयं अपनी लापरवाही को स्वीकार किया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडीजी ने इस बात को माना कि पुलिस समय पर और सही तरीके से आरोपी को अपने नियंत्रण में नहीं ले पाई। इस गंभीर चूक के चलते, एसएचओ सहित छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले पुलिस ने दावा किया था कि भरत तिवारी ने फायरिंग की थी, लेकिन परिजनों का आरोप इसके बिल्कुल विपरीत है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। इस घटना के बाद, 'शहीद भरत तिवारी' के लिए न्याय की लगातार माँग की जा रही है, और लोग 'बगावत दिवस 17 जून' स्मरण करते हुए इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की भी उम्मीद कर रहे हैं।1
- लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अग्निकांड स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) पहुँचकर हादसे में घायल हुए लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से घायलों के इलाज के बारे में विस्तृत जानकारी ली और मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री योगी ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि घायलों का इलाज सर्वोच्च प्राथमिकता पर जारी है। साथ ही, सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृतकों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल वितरित की जाए।1