logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

मंडला जिले में गौंड राजवंश की कुलदेवी मां राजराजेश्वरी, आस्था और वीरता का अद्भुत संगम मध्यप्रदेश के मण्डला से एक ऐसी कहानी जहाँ आस्था सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत विरासत है। गौंडवाना साम्राज्य की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि में भक्ति का विशाल केंद्र बना हुआ है.जहाँ हर शंखनाद के साथ गूंजती है वीरता की गाथा और हर आरती में झलकता है अटूट विश्वास।

2 hrs ago
user_प्रशांत पटैल
प्रशांत पटैल
Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

मंडला जिले में गौंड राजवंश की कुलदेवी मां राजराजेश्वरी, आस्था और वीरता का अद्भुत संगम मध्यप्रदेश के मण्डला से एक ऐसी कहानी जहाँ आस्था सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत विरासत है। गौंडवाना साम्राज्य की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि में भक्ति का विशाल केंद्र बना हुआ है.जहाँ हर शंखनाद के साथ गूंजती है वीरता की गाथा और हर आरती में झलकता है अटूट विश्वास।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मंडला मे पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा के निर्देशन में जिला मंडला में साइकिल रैली (साइक्लोथॉन) का आयोजन किया गया। यह आयोजन *जिला मुख्यालय के साथ-साथ थाना क्षेत्रों में भी* संचालित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, एकता, अनुशासन एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना रहा। पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा द्वारा पुलिस लाइन मंडला में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर शहर के मुख्य मार्गों में भ्रमण हेतु रवाना किया गया। साइकिल रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः पुलिस परेड ग्राउंड में संपन्न हुई
    1
    मंडला  मे पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा के निर्देशन में जिला मंडला में  साइकिल रैली (साइक्लोथॉन) का आयोजन किया गया। यह आयोजन *जिला मुख्यालय के साथ-साथ थाना क्षेत्रों में भी* संचालित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, एकता, अनुशासन एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना रहा।
पुलिस अधीक्षक मंडला रजत सकलेचा द्वारा पुलिस लाइन मंडला में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर शहर के मुख्य मार्गों में भ्रमण हेतु रवाना किया गया। साइकिल रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः पुलिस परेड ग्राउंड में संपन्न हुई
    user_Ashish Choudhry
    Ashish Choudhry
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    30 min ago
  • महाराजपुर थाना के पास संदिग्ध हालत में मिला युवक का शव,सिर पर चोट के निशान, हत्या की आशंका जांच में जुटी पुलिस
    1
    महाराजपुर थाना के पास संदिग्ध हालत में मिला युवक का शव,सिर पर चोट के निशान, हत्या की आशंका जांच में जुटी पुलिस
    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    38 min ago
  • मंडला में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर मंडला पुलिस द्वारा भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा के नेतृत्व में निकली इस साइक्लोथॉन को पुलिस लाइन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः परेड ग्राउंड में संपन्न हुई। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में डीएसपी सतीश चतुर्वेदी, रक्षित निरीक्षक सुनील नागवंशी, साइक्लिंग क्लब के सदस्य, खिलाड़ी और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। मंडला पुलिस की पहल—एकता और फिटनेस की ओर मजबूत कदम
    1
    मंडला में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर मंडला पुलिस द्वारा भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया।
पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा के नेतृत्व में निकली इस साइक्लोथॉन को पुलिस लाइन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः परेड ग्राउंड में संपन्न हुई।
इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में डीएसपी सतीश चतुर्वेदी, रक्षित निरीक्षक सुनील नागवंशी, साइक्लिंग क्लब के सदस्य, खिलाड़ी और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
मंडला पुलिस की पहल—एकता और फिटनेस की ओर मजबूत कदम
    user_प्रशांत पटैल
    प्रशांत पटैल
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    44 min ago
  • Post by Salim khan
    1
    Post by Salim khan
    user_Salim khan
    Salim khan
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    59 min ago
  • उपनगर महाराजपुर में सनसनी: युवक की हत्या कर शव ग्राउंड में फेंका
    1
    उपनगर महाराजपुर में सनसनी: युवक की हत्या कर शव ग्राउंड में फेंका
    user_Sanjay nanda
    Sanjay nanda
    Local News Reporter Mandla, Madhya Pradesh•
    3 hrs ago
  • आदिवासी बहुल क्षेत्र मवई इन दिनों महुआ की मिठास से सराबोर है। जंगल की धरती पर बिछे महुआ के फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। सुबह की पहली किरण से पहले ही महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे टोकरी-बोरे लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया है—जहां हर गिरा हुआ फूल उनके घर के चूल्हे को जलाने की उम्मीद बन जाता है। जंगल की हरियाली और साल का वैभव मवई का वन क्षेत्र अपनी अनूठी प्रकृति के कारण विशेष पहचान रखता है। जब अन्य स्थानों पर पतझड़ के कारण पेड़ सूने हो जाते हैं, तब यहां के साल वृक्ष निरंतर हरियाली बनाए रखते हैं। साल के पत्ते धीरे-धीरे गिरते हैं और उसी क्रम में नए पत्ते आते रहते हैं, जिससे जंगल साल भर जीवंत और हरा-भरा दिखाई देता है। महुआ के बाद साल में फूल और फल (बीज/वीजा) लगते हैं, जो ग्रामीणों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत है। पहले इन वन उपजों की खरीदी सहकारी समितियों और वन विभाग के माध्यम से समर्थन मूल्य पर होती थी, जिससे ग्रामीणों को उचित दाम मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का फल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। आजीविका का एकमात्र आधार मवई क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। खेती भी पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ऐसे में महुआ और साल बीज ही ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से मिलने वाली आय से वे बीज, बैल, खाद, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते हैं। मनरेगा जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। निजी रोजगार के अवसर नगण्य हैं। परिणामस्वरूप वन संपदा ही यहां के लोगों का एकमात्र सहारा बन गई है। लेकिन जब इस संपदा का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगता है। वन कटाई : बढ़ता हुआ संकट वन विभाग द्वारा निरंतर और अनियंत्रित कटाई से जंगलों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले घने वृक्षों की छाया थी, वहां अब खालीपन नजर आने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह वनांचल अपनी पहचान खो सकता है। वन कटाई के दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं जल स्रोतों का सूखना वन्य जीवों का पलायन जलवायु असंतुलन ग्रामीणों की आय में गिरावट यह संकट पर्यावरणीय होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक भी है। बाजार और मूल्य का असंतुलन एक ओर शहरों में महुआ से बने उत्पाद—जैसे मिठाइयां, चॉकलेट और अन्य खाद्य सामग्री—महंगे दामों पर बिकते हैं, वहीं दूसरी ओर वनांचल में महुआ का मूल्य इतना कम मिलता है कि मजदूरी तक नहीं निकल पाती। यह स्पष्ट रूप से बाजार व्यवस्था की असमानता को दर्शाता है। इसी प्रकार, महुआ से पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली शराब भी ग्रामीणों के लिए आय का स्रोत है, लेकिन उसे न तो उचित पहचान मिल पाई है और न ही बेहतर बाजार। संभावनाएं और समाधान यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो मवई का वनांचल आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। महुआ और साल बीज की समर्थन मूल्य पर खरीदी पुनः शुरू की जाए। टोना-पत्तल (पत्तों से बने उत्पाद) जैसी वन उपज को भी बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए। मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। वन कटाई पर नियंत्रण रखते हुए स्थानीय समुदाय को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए। महुआ आधारित उत्पादों (खाद्य पदार्थ और पेय) पर शोध कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध में सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थान मिल सके। महुआ से बनने वाले पारंपरिक पेय को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर उसे कानूनी और आर्थिक रूप से संगठित उद्योग का रूप दिया जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को सीधा लाभ मिल सके। मवई का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनरेखा है। महुआ की खुशबू में उनकी आशाएं बसती हैं और साल के वृक्षों में उनका भविष्य छिपा है। यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो ही यह जीवन चक्र चलता रहेगा। अन्यथा, यह वनांचल केवल स्मृतियों और कहानियों में सिमट कर रह जाएगा। वनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा है, जिनकी रोजी-रोटी इन जंगलों से जुड़ी हुई है।
    1
    आदिवासी बहुल क्षेत्र मवई इन दिनों महुआ की मिठास से सराबोर है। जंगल की धरती पर बिछे महुआ के फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। सुबह की पहली किरण से पहले ही महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे टोकरी-बोरे लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया है—जहां हर गिरा हुआ फूल उनके घर के चूल्हे को जलाने की उम्मीद बन जाता है।
जंगल की हरियाली और साल का वैभव
मवई का वन क्षेत्र अपनी अनूठी प्रकृति के कारण विशेष पहचान रखता है। जब अन्य स्थानों पर पतझड़ के कारण पेड़ सूने हो जाते हैं, तब यहां के साल वृक्ष निरंतर हरियाली बनाए रखते हैं। साल के पत्ते धीरे-धीरे गिरते हैं और उसी क्रम में नए पत्ते आते रहते हैं, जिससे जंगल साल भर जीवंत और हरा-भरा दिखाई देता है।
महुआ के बाद साल में फूल और फल (बीज/वीजा) लगते हैं, जो ग्रामीणों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत है। पहले इन वन उपजों की खरीदी सहकारी समितियों और वन विभाग के माध्यम से समर्थन मूल्य पर होती थी, जिससे ग्रामीणों को उचित दाम मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का फल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
आजीविका का एकमात्र आधार
मवई क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। खेती भी पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ऐसे में महुआ और साल बीज ही ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से मिलने वाली आय से वे बीज, बैल, खाद, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते हैं।
मनरेगा जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। निजी रोजगार के अवसर नगण्य हैं। परिणामस्वरूप वन संपदा ही यहां के लोगों का एकमात्र सहारा बन गई है। लेकिन जब इस संपदा का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगता है।
वन कटाई : बढ़ता हुआ संकट
वन विभाग द्वारा निरंतर और अनियंत्रित कटाई से जंगलों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले घने वृक्षों की छाया थी, वहां अब खालीपन नजर आने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह वनांचल अपनी पहचान खो सकता है।
वन कटाई के दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं
जल स्रोतों का सूखना
वन्य जीवों का पलायन
जलवायु असंतुलन
ग्रामीणों की आय में गिरावट
यह संकट पर्यावरणीय होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक भी है।
बाजार और मूल्य का असंतुलन
एक ओर शहरों में महुआ से बने उत्पाद—जैसे मिठाइयां, चॉकलेट और अन्य खाद्य सामग्री—महंगे दामों पर बिकते हैं, वहीं दूसरी ओर वनांचल में महुआ का मूल्य इतना कम मिलता है कि मजदूरी तक नहीं निकल पाती। यह स्पष्ट रूप से बाजार व्यवस्था की असमानता को दर्शाता है।
इसी प्रकार, महुआ से पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली शराब भी ग्रामीणों के लिए आय का स्रोत है, लेकिन उसे न तो उचित पहचान मिल पाई है और न ही बेहतर बाजार।
संभावनाएं और समाधान
यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो मवई का वनांचल आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
महुआ और साल बीज की समर्थन मूल्य पर खरीदी पुनः शुरू की जाए।
टोना-पत्तल (पत्तों से बने उत्पाद) जैसी वन उपज को भी बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए।
मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
वन कटाई पर नियंत्रण रखते हुए स्थानीय समुदाय को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए।
महुआ आधारित उत्पादों (खाद्य पदार्थ और पेय) पर शोध कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध में सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थान मिल सके।
महुआ से बनने वाले पारंपरिक पेय को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर उसे कानूनी और आर्थिक रूप से संगठित उद्योग का रूप दिया जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को सीधा लाभ मिल सके।
मवई का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनरेखा है। महुआ की खुशबू में उनकी आशाएं बसती हैं और साल के वृक्षों में उनका भविष्य छिपा है।
यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो ही यह जीवन चक्र चलता रहेगा। अन्यथा, यह वनांचल केवल स्मृतियों और कहानियों में सिमट कर रह जाएगा।
वनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा है, जिनकी रोजी-रोटी इन जंगलों से जुड़ी हुई है।
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल 9974778863
    1
    शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल 9974778863
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Mandla, Madhya Pradesh•
    10 hrs ago
  • मध्यप्रदेश के मण्डला से एक ऐसी कहानी जहाँ आस्था सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत विरासत है। गौंडवाना साम्राज्य की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि में भक्ति का विशाल केंद्र बना हुआ है.जहाँ हर शंखनाद के साथ गूंजती है वीरता की गाथा और हर आरती में झलकता है अटूट विश्वास।
    1
    मध्यप्रदेश के मण्डला से एक ऐसी कहानी जहाँ आस्था सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत विरासत है।
गौंडवाना साम्राज्य की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि में भक्ति का विशाल केंद्र बना हुआ है.जहाँ हर शंखनाद के साथ गूंजती है वीरता की गाथा और हर आरती में झलकता है अटूट विश्वास।
    user_प्रशांत पटैल
    प्रशांत पटैल
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.