भीलवाड़ा के गांधी नगर स्थित निम्बार्क आश्रम में रविवार, 14 जून को एक महत्वपूर्ण सेवा कार्य आयोजित किया गया, जिसमें महंत मोहनशरण शास्त्री के सानिध्य में 501 ज़रूरतमंद महिलाओं को साड़ियों का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट की ओर से सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट के ज़िला संरक्षक बी.एल. जोशी, युवा ब्रह्म शक्ति मेवाड़ की महिला प्रदेश अध्यक्ष नीलम शर्मा, तथा सदस्या दीपिका अरोड़ा एवं रतन पारीक की विशेष उपस्थिति रही। सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस सेवा कार्य को समाज में संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को मज़बूत करने वाला बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महंत मोहनशरण शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना ही सच्ची मानव सेवा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल भावना को रेखांकित करते हुए बताया कि सेवा, दया और परोपकार इसके अभिन्न अंग हैं, और प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। महंत शास्त्री ने दोहराया कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना है, और ऐसे कार्य समाज में प्रेम, सद्भाव एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित जनों ने महंत मोहनशरण शास्त्री के सेवा भाव एवं समाजोत्थान के कार्यों की सराहना करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
भीलवाड़ा के गांधी नगर स्थित निम्बार्क आश्रम में रविवार, 14 जून को एक महत्वपूर्ण सेवा कार्य आयोजित किया गया, जिसमें महंत मोहनशरण शास्त्री के सानिध्य में 501 ज़रूरतमंद महिलाओं को साड़ियों का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट की ओर से सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट के ज़िला संरक्षक बी.एल. जोशी, युवा ब्रह्म शक्ति मेवाड़ की महिला प्रदेश अध्यक्ष
नीलम शर्मा, तथा सदस्या दीपिका अरोड़ा एवं रतन पारीक की विशेष उपस्थिति रही। सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस सेवा कार्य को समाज में संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को मज़बूत करने वाला बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महंत मोहनशरण शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना ही सच्ची मानव सेवा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल भावना को रेखांकित करते हुए बताया कि सेवा,
दया और परोपकार इसके अभिन्न अंग हैं, और प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। महंत शास्त्री ने दोहराया कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना है, और ऐसे कार्य समाज में प्रेम, सद्भाव एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित जनों ने महंत मोहनशरण शास्त्री के सेवा भाव एवं समाजोत्थान के कार्यों की सराहना करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
- भीलवाड़ा के गांधी नगर स्थित निम्बार्क आश्रम में रविवार, 14 जून को एक महत्वपूर्ण सेवा कार्य आयोजित किया गया, जिसमें महंत मोहनशरण शास्त्री के सानिध्य में 501 ज़रूरतमंद महिलाओं को साड़ियों का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट की ओर से सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट के ज़िला संरक्षक बी.एल. जोशी, युवा ब्रह्म शक्ति मेवाड़ की महिला प्रदेश अध्यक्ष नीलम शर्मा, तथा सदस्या दीपिका अरोड़ा एवं रतन पारीक की विशेष उपस्थिति रही। सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस सेवा कार्य को समाज में संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को मज़बूत करने वाला बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महंत मोहनशरण शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना ही सच्ची मानव सेवा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल भावना को रेखांकित करते हुए बताया कि सेवा, दया और परोपकार इसके अभिन्न अंग हैं, और प्रत्येक सक्षम व्यक्ति को ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। महंत शास्त्री ने दोहराया कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना है, और ऐसे कार्य समाज में प्रेम, सद्भाव एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित जनों ने महंत मोहनशरण शास्त्री के सेवा भाव एवं समाजोत्थान के कार्यों की सराहना करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।3
- राजस्थान में अब ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इस पहल के तहत, कलेक्टर्स को विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं ताकि वे इन शिविरों में प्रभावी ढंग से समस्याओं का निपटारा कर सकें।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के माल गांव की चोगावाड़ी में जोरदार आंधी-तूफान के साथ बारिश दर्ज की गई।1
- एक व्यक्ति ने आगामी जुलाई माह में निर्धारित अपनी शादी से पहले एक अनोखी अपील की है। उन्होंने कहा है कि वे चाहते हैं कि उनका वैवाहिक रिश्ता पूर्ण विश्वास, पारदर्शिता और सत्य पर आधारित हो। इसी क्रम में, उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि यदि किसी को भी उनके होने वाले जीवनसाथी के बारे में कोई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी हो जो उनके वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर सकती है, तो वे उसे प्रमाण सहित और पूरी जिम्मेदारी के साथ उन्हें अवगत कराएँ। अपीलकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई गंभीर तथ्य सामने आता है, तो वे उस पर विचार कर उचित निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।1
- अनीता के पति दिनेश बिश्नोई ने अपने गहरे दुख को व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस कानून पर कोई विश्वास नहीं है, और उनका मानना है कि ऐसे व्यक्तियों को केवल भगवान ही उचित सज़ा दे सकते हैं। दिनेश बिश्नोई का दृढ़ विश्वास है कि 'भगवान के घर देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं', जो न्याय के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है, भले ही वे वर्तमान कानूनी व्यवस्था से निराश हों।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मेनाल में रविवार को एक युवक की झरने के नीचे बने गहरे कुंड में डूबने से दुखद मौत हो गई। यह युवक अजमेर से अपने दोस्तों के साथ वीकेंड मनाने आया था। इस घटना के बाद एक बार फिर पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी और पर्यटकों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजमेर जिले के निवासी कुछ युवक छुट्टियां बिताने मेनाल पहुंचे थे। रोमांच के चलते ये सभी मुख्य झरने से लगभग 150 फीट नीचे एक गहरी खाई में स्थित कुंड में नहाने चले गए। जंगल के बीच बने इस गहरे कुंड में नहाते समय अजमेर निवासी कानू सिंह पुत्र लाल सिंह रावत गहरे पानी में चला गया और कुंड की अत्यधिक गहराई तथा तैरना न आने के कारण डूब गया। युवक के डूबने की सूचना मिलते ही मौके पर हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को जानकारी दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए बेगूं तहसीलदार गोपाल जीनगर और थानाधिकारी कमल चंद मीणा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने चित्तौड़गढ़ से सिविल डिफेंस की टीम और गोताखोरों को बुलाया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद, शाम करीब 7 बजे रेस्क्यू टीम ने कुंड से युवक का शव बाहर निकाला। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में मेनाल में हर साल ऐसे हादसे होते हैं, फिर भी प्रशासन की ओर से गहरे कुंडों के पास चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या सुरक्षा गार्ड की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, जिससे सुरक्षा इंतजाम नाकाफी लगते हैं। बेगूं पुलिस ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मानसून के दौरान झरने और गहरे कुंडों के पास जाने से बचें, खतरे के निशान को पार न करें और सेल्फी या रोमांच के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें।1