टाइगर रिजर्व मार्गों पर नो एंट्री की तैयारी को जनता ने नकारा, वन विभाग की बंदिशों पर लगी लगाम पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नाम पर आम जनता और ग्रामीणों की आवाजाही पर बेड़ियां डालने की वन विभाग की कोशिशों को सोमवार को जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। गांधी सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में जैसे ही विभाग ने सुरक्षा का हवाला देकर रात्रि और सुबह के समय मुख्य मार्गों को पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा, माहौल पूरी तरह गर्मा गया। भारतीय किसान यूनियन टिकैत और अन्य संगठनों ने विभाग के इस एकतरफा रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए साफ कर दिया कि जनता के हक और रास्ते किसी भी कीमत पर छीने नहीं जा सकते।बैठक में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक सुकृति माधव और टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह की उपस्थिति में घंटों तक गहमागहमी का सिलसिला चला। भाकियू के मंडल अध्यक्ष सतविंदर सिंह काहलों और जिलाध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा ने तर्क दिया कि जंगल के साथ ग्रामीणों का रिश्ता सदियों पुराना है और विभाग को जनहित की अनदेखी करने का कोई हक नहीं है। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार यह लिखित सहमति बनी कि जब तक शासन स्तर पर कोई निर्णायक फैसला नहीं हो जाता, तब तक जनपद के किसी भी मार्ग पर कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इस मुद्दे पर केवल किसान ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी ने भी वन विभाग की कार्यशैली की जमकर घेराबंदी की। आप के जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जहाँ गरीब ग्रामीणों को अपनी झोपड़ी और धार्मिक कार्यों के लिए लकड़ी तक नसीब नहीं हो रही, वहीं विभाग की अपनी चौकियों और बैरियरों पर जंगली लकड़ी का उपयोग कैसे हो रहा है? उन्होंने टाइगर रिजर्व क्षेत्र की बदहाल सड़कों और जर्जर पुलों का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए विभाग को जमकर आड़े हाथों लिया। बैठक में बलजिंदर सिंह मान, गुरजीत सिंह ब्रेक और गुरदीप सिंह जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी आक्रामक मांगें रखीं। कार्यकर्ताओं के भारी जमावड़े और तर्कों के सामने प्रशासन को बैक फुट पर आनन पड़ा और फिलहाल पाबंदी की फाइल बंद करनी पड़ी। इस फैसले से क्षेत्रीय जनता ने राहत की सांस ली है, लेकिन संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे विभाग की हर हरकत पर पैनी नजर रखेंगे।
टाइगर रिजर्व मार्गों पर नो एंट्री की तैयारी को जनता ने नकारा, वन विभाग की बंदिशों पर लगी लगाम पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नाम पर आम जनता और ग्रामीणों की आवाजाही पर बेड़ियां डालने की वन विभाग की कोशिशों को सोमवार को जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। गांधी सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में जैसे ही विभाग ने सुरक्षा का हवाला देकर रात्रि और सुबह के समय मुख्य मार्गों को पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा, माहौल पूरी तरह गर्मा गया। भारतीय किसान यूनियन टिकैत और अन्य संगठनों ने विभाग के इस एकतरफा रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए साफ कर दिया कि जनता के हक और रास्ते किसी भी कीमत पर छीने नहीं जा सकते।बैठक में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक सुकृति माधव और टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह की उपस्थिति में घंटों तक गहमागहमी का सिलसिला चला। भाकियू के मंडल अध्यक्ष सतविंदर सिंह काहलों और जिलाध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा ने तर्क दिया कि जंगल के साथ ग्रामीणों का रिश्ता सदियों पुराना है और विभाग को जनहित की अनदेखी करने का कोई हक नहीं है। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार यह लिखित सहमति बनी कि जब तक शासन स्तर पर कोई निर्णायक फैसला नहीं हो जाता, तब तक जनपद के किसी भी मार्ग पर कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इस मुद्दे पर केवल किसान ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी ने भी वन विभाग की कार्यशैली की जमकर घेराबंदी की। आप के जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जहाँ गरीब ग्रामीणों को अपनी झोपड़ी और धार्मिक कार्यों के लिए लकड़ी तक नसीब नहीं हो रही, वहीं विभाग की अपनी चौकियों और बैरियरों पर जंगली लकड़ी का उपयोग कैसे हो रहा है? उन्होंने टाइगर रिजर्व क्षेत्र की बदहाल सड़कों और जर्जर पुलों का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए विभाग को जमकर आड़े हाथों लिया। बैठक में बलजिंदर सिंह मान, गुरजीत सिंह ब्रेक और गुरदीप सिंह जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी आक्रामक मांगें रखीं। कार्यकर्ताओं के भारी जमावड़े और तर्कों के सामने प्रशासन को बैक फुट पर आनन पड़ा और फिलहाल पाबंदी की फाइल बंद करनी पड़ी। इस फैसले से क्षेत्रीय जनता ने राहत की सांस ली है, लेकिन संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे विभाग की हर हरकत पर पैनी नजर रखेंगे।
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- पूरनपुर,पीलीभीत।भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले किसानों ने केंद्र सरकार की किसान-विरोधी नीतियों के विरोध में ट्रैक्टर मार्च निकालकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने कहा कि सरकार की नीतियों से किसान, मजदूर और ग्रामीण जनता लगातार परेशान हो रही है, इसलिए अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया जा रहा है। सोमवार को क्षेत्र के किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकालते हुए तहसील मुख्यालय तक मार्च किया। रैली के माध्यम से किसानों ने अपनी मांगों और समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद किसान नेताओं ने एसडीएम को ज्ञापन देकर सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि किसानों की फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। साथ ही किसानों ने कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले डीजल की कीमत कम करने, किसानों के ऊपर बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने तथा कृषि से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग भी उठाई।किसान नेताओं ने बताया कि संगठन द्वारा देशभर में किसान-मजदूर और ग्रामीण जनता के मुद्दों को लेकर आंदोलन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 27 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान किसानों के मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि 10 मार्च 2026 को ट्रैक्टर मार्च निकालकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जा रहा है, जिसके माध्यम से किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा 23 मार्च 2026 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर आगे की आंदोलन की रणनीति तय करेंगे।इस मौके पर संगठन के पदाधिकारियों ने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। रैली और ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में किसान और भाकियू (चढूनी) के कार्यकर्ता मौजूद रहे।2
- भारतीय किसान यूनियन चढूनी ने पूरनपुर में निकाला ट्रैक्टर मार्च पुलिस रही मौके पर1
- पीलीभीत,कलीनगर- तहसील क्षेत्र के भीमपुर नौगजा गांव से मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन के लिए चौथी बार डोला बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ रवाना किया गया।1
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