यूपी के रहने वाले त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव मिला है। सोमवार सुबह वह पुलिस मुख्यालय में अचेत मिले थे, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ ने सुसाइड किया है। उनका शव फिलहाल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है और पुलिस व फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर जांच कर रही हैं। अनुराग धनखड़ ने अपने करियर के दौरान 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच भी की थी। अनुराग धनखड़ मूल रूप से बागपत शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। वह करीब एक साल पहले अपने पिता सतपाल धनखड़ के निधन पर आखिरी बार अपने गांव आए थे। गांव में उनका पैतृक मकान फिलहाल बंद है और वहां परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता। उनके भाई राजकुमार धनखड़ ने बताया कि उनका परिवार करीब 5 साल पहले गांव से बड़ौत जाकर बस गया था। इस परिवार का प्रशासनिक पृष्ठभूमि से गहरा नाता रहा है; उनके बाबा हीरा सिंह धनखड़ सुपरिटेंडेंट जेलर थे, उनके चाचा सतपाल धनखड़ दो बार ग्राम प्रधान रहे और परिवार के एक अन्य सदस्य जय सिंह भी जेलर रहे हैं। उनकी मां रगबीरी बड़ौत में रहती हैं, जिनकी बेटे के निधन की खबर सुनकर तबीयत बिगड़ गई है। इस दुखद सूचना के बाद परिवार के लोग त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए हैं। डीजीपी अनुराग धनखड़ के परिवार में उनकी पत्नी कल्पना और एक बेटा अभिषेक हैं, जो वर्तमान में कनाडा में रहते हैं। उनके दो भाई हैं, जिनमें से बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होकर दिल्ली में रहते हैं, जबकि छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में खिलौने की दुकान चलाते हैं। अनुराग का जन्म और बचपन बिहारीपुर गांव में ही बीता था, जहां उन्होंने गांव के प्राइमरी स्कूल से पांचवीं तक और फिर सरूरपुर खेड़की के इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी (कृषि) की शिक्षा ली। उनके सहपाठी और मित्र रमेश कुमार ने बताया कि अनुराग वॉलीबॉल के एक अच्छे खिलाड़ी थे और अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दिल्ली चले गए थे।
यूपी के रहने वाले त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव मिला है। सोमवार सुबह वह पुलिस मुख्यालय में अचेत मिले थे, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ ने सुसाइड किया है। उनका शव फिलहाल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है और पुलिस व फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर जांच कर रही हैं। अनुराग धनखड़ ने अपने करियर के दौरान 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच भी की थी। अनुराग धनखड़ मूल रूप से बागपत शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। वह करीब एक साल पहले अपने पिता सतपाल धनखड़ के निधन पर आखिरी बार अपने गांव आए थे। गांव में उनका पैतृक मकान फिलहाल बंद है और वहां परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता। उनके भाई राजकुमार धनखड़ ने बताया कि उनका परिवार करीब 5 साल पहले गांव से बड़ौत जाकर बस गया था। इस परिवार का प्रशासनिक पृष्ठभूमि से गहरा नाता रहा है; उनके बाबा हीरा सिंह धनखड़ सुपरिटेंडेंट जेलर थे, उनके चाचा सतपाल धनखड़ दो बार ग्राम प्रधान रहे और परिवार के एक अन्य सदस्य जय सिंह भी जेलर रहे हैं। उनकी मां रगबीरी बड़ौत में रहती हैं, जिनकी बेटे के निधन की खबर सुनकर तबीयत बिगड़ गई है। इस दुखद सूचना के बाद परिवार के लोग त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए हैं। डीजीपी अनुराग धनखड़ के परिवार में उनकी पत्नी कल्पना और एक बेटा अभिषेक हैं, जो वर्तमान में कनाडा में रहते हैं। उनके दो भाई हैं, जिनमें से बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होकर दिल्ली में रहते हैं, जबकि छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में खिलौने की दुकान चलाते हैं। अनुराग का जन्म और बचपन बिहारीपुर गांव में ही बीता था, जहां उन्होंने गांव के प्राइमरी स्कूल से पांचवीं तक और फिर सरूरपुर खेड़की के इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी (कृषि) की शिक्षा ली। उनके सहपाठी और मित्र रमेश कुमार ने बताया कि अनुराग वॉलीबॉल के एक अच्छे खिलाड़ी थे और अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दिल्ली चले गए थे।
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपने 32 वर्षीय पति अतुल पवार को जहरीले सांप से डसवाकर हत्या करने वाली 30 वर्षीय पत्नी दामिनी ने पुलिस पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले और बेखौफ खुलासे किए हैं। दामिनी का कहना है कि उसे अपने पति की मौत का कोई गम नहीं है क्योंकि उसका किसी दूसरी महिला के साथ अफेयर था और टोकने पर वह उसे बुरी तरह पीटता था। दामिनी ने खुद कमाने के बावजूद प्रताड़ना से तंग आकर स्कूल वैन ड्राइवर तुषार से दोस्ती कर ली थी। पति से छुटकारा पाने और उसकी हत्या को एक सामान्य हादसा दिखाने के लिए दामिनी ने मेरठ की ही रविता नाम की महिला के मामले से प्रेरणा ली, जिसने अपने पति को सांप से कटवाया था। दामिनी ने गूगल पर सबसे ज्यादा जहरीले सांप के बारे में सर्च किया और करैत सांप का प्लान बनाया। इस साजिश को अंजाम देने के लिए उसने अपने प्रेमी तुषार के साथ मिलकर 5 लाख रुपये में दो सपेरों, सोनू और उदय को काम पर रखा। तुषार ने 7 जुलाई को सपेरों को ₹15,000 एडवांस भी दे दिए थे और सांप को डिब्बे में बंद कर स्कूल में ही छिपाकर रखा गया था। 16 जुलाई की रात जब अतुल घर आया, तो दामिनी ने उसे दूध में नींद की 12-15 गोलियां मिलाकर दे दीं। अतुल के गहरे नशे में सोने के बाद, 17 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे दामिनी ने तुषार को कॉल किया। इसके बाद तुषार, सोनू और उदय चुपचाप घर के अंदर आए और सोते हुए अतुल के बेड पर चादर के नीचे सांप को दबाकर छोड़ दिया, जिसने अतुल को डस लिया। वारदात को अंजाम देकर आरोपी चले गए, जिसके बाद दामिनी ने शोर मचाकर ससुराल वालों को फोन किया कि उसके पति को सांप ने काट लिया है और वह बेसुध हैं। दामिनी ने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद उनका प्लान अतुल के ₹20 लाख के मेडिकल बीमा और उसकी 36 बीघा जमीन को हासिल करने का था, जिससे वह और तुषार शादी करके अपने बेटे मानिक के साथ एक नई जिंदगी शुरू कर सकें। इससे पहले दामिनी ने ससुराल वालों से ज्योतिष का बहाना बनाकर अतुल के साथ अलग किराए के मकान में रहने का नाटक रचा था, जहां वह स्कूल में बतौर प्रिंसिपल काम करती थी। हालांकि, पुलिस और पोस्टमॉर्टम की बात सामने आने पर वैन ड्राइवर तुषार घबराकर मौके से भाग गया था, जिसे पुलिस ने सर्विलांस के जरिए 17 जुलाई (शुक्रवार) की रात को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शनिवार, 18 जुलाई को दामिनी को भी कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है और मामले की जांच कर रही है।1
- उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सिल्वर नगर धनोरा में स्थानीय लोगों का बहुत ही बुरा हाल है। यहाँ स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों के घरों के अंदर पानी भर जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।1
- सोनीपत के खानपुर क्षेत्र में गली निर्माण और लाइट की व्यवस्था न होने से परेशान एक स्थानीय नागरिक ने सरपंच से अपनी शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित का कहना है कि उनके हिस्से की गार्ड छोड़ दी गई है, जिसे तुरंत ठीक कराया जाना चाहिए और वहां सभी लाइटें लगाई जानी चाहिए। उन्होंने सरपंच से सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि जब गांव में बाकी सबकी गली बन चुकी है, तो फिर उनकी ही गली का निर्माण क्यों नहीं कराया जा रहा है।1
- सरकार इथेनॉल को लेकर एक नई योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत आने वाले समय में इसका इस्तेमाल खाना पकाने के ईंधन के रूप में भी किया जा सकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसके लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्तावित नीति में सब्सिडी और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया जा सकता है। इथेनॉल को एक ग्रीन फ्यूल माना जाता है, जिसे चीनी और अनाज के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है। हालांकि, जहां एक तरफ इसे खाना पकाने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण E20 को लेकर वाहन मालिकों की चिंताएं भी सामने आती रही हैं।1
- केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि विपक्ष का काम केवल हंगामा खड़ा करना है, न कि बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाना। उन्होंने विपक्ष पर बातचीत से भागने का आरोप लगाया और कहा कि जब असल में चर्चा की शुरुआत होती है, तो वे गायब हो जाते हैं। चिराग पासवान ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष से कुछ भी कहने की कोशिश करना भैंस के आगे बांसुरी बजाने जैसा है क्योंकि वे किसी भी बात को सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एनडीए (NDA) सांसदों की बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा है कि भारत के भविष्य, युवाओं और छात्रों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाया कि वे हर सत्र से पहले केवल एक या दो मुद्दे उठाते हैं और फिर उन्हें बिना किसी नतीजे के बीच में ही छोड़कर अगले सत्र में नया मुद्दा ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, छात्रों और युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है और इस दिशा में विपक्ष के हर सही सुझाव को तथ्यों के साथ स्वीकार करने के लिए तैयार है। चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि विपक्ष बातचीत के लिए बने वास्तविक मंचों की अनदेखी करता है और तथ्यों पर चर्चा करने के बजाय केवल सड़कों पर अफरा-तफरी मचाकर लोगों को गुमराह करने का काम कर रहा है।1
- यूपी के रहने वाले त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव मिला है। सोमवार सुबह वह पुलिस मुख्यालय में अचेत मिले थे, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुराग धनखड़ ने सुसाइड किया है। उनका शव फिलहाल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है और पुलिस व फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर जांच कर रही हैं। अनुराग धनखड़ ने अपने करियर के दौरान 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच भी की थी। अनुराग धनखड़ मूल रूप से बागपत शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। वह करीब एक साल पहले अपने पिता सतपाल धनखड़ के निधन पर आखिरी बार अपने गांव आए थे। गांव में उनका पैतृक मकान फिलहाल बंद है और वहां परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता। उनके भाई राजकुमार धनखड़ ने बताया कि उनका परिवार करीब 5 साल पहले गांव से बड़ौत जाकर बस गया था। इस परिवार का प्रशासनिक पृष्ठभूमि से गहरा नाता रहा है; उनके बाबा हीरा सिंह धनखड़ सुपरिटेंडेंट जेलर थे, उनके चाचा सतपाल धनखड़ दो बार ग्राम प्रधान रहे और परिवार के एक अन्य सदस्य जय सिंह भी जेलर रहे हैं। उनकी मां रगबीरी बड़ौत में रहती हैं, जिनकी बेटे के निधन की खबर सुनकर तबीयत बिगड़ गई है। इस दुखद सूचना के बाद परिवार के लोग त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए हैं। डीजीपी अनुराग धनखड़ के परिवार में उनकी पत्नी कल्पना और एक बेटा अभिषेक हैं, जो वर्तमान में कनाडा में रहते हैं। उनके दो भाई हैं, जिनमें से बड़े भाई विवेक धनखड़ भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होकर दिल्ली में रहते हैं, जबकि छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत में खिलौने की दुकान चलाते हैं। अनुराग का जन्म और बचपन बिहारीपुर गांव में ही बीता था, जहां उन्होंने गांव के प्राइमरी स्कूल से पांचवीं तक और फिर सरूरपुर खेड़की के इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी (कृषि) की शिक्षा ली। उनके सहपाठी और मित्र रमेश कुमार ने बताया कि अनुराग वॉलीबॉल के एक अच्छे खिलाड़ी थे और अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह दिल्ली चले गए थे।1
- बागपत के रमाला थाना क्षेत्र में युवक विनय की गोली मारकर हत्या करने के मामले में फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस और आरोपी के बीच हुई इस मुठभेड़ के दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, 14 जुलाई 2026 को एक महिला ने रमाला थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि किशनपुर निवासी ऋतिव उर्फ विशू पुत्र ओमपाल ने उसके बेटे विनय की गोली मारकर हत्या कर दी है और जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया है। इस तहरीर के आधार पर रमाला थाने में मुकदमा अपराध संख्या 149/26 के तहत बीएनएस की धारा 103(1) व 351(3) में मामला दर्ज किया गया था। बागपत पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत रमाला थाना पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। इसी दौरान हुई मुठभेड़ में आरोपी घायल हो गया और उसे दबोच लिया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया 315 बोर का एक अवैध तमंचा और 315 बोर के दो खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस इस गिरफ्तारी को विनय हत्याकांड के खुलासे में बड़ी सफलता मान रही है और मामले में नियमानुसार आगे की आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।1