न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावुक पल देखने को मिला। माता भागासिद्ध लगभग 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने भ्राता श्री जुआणी महादेव से मिलीं। इस दौरान देव परंपराओं और वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य आकर्षण और धार्मिक झलकियां * भ्राता-भगिनी का भव्य मिलन: माता भागासिद्ध जब अपने मूल स्थान से जुआणी महादेव के दरबार पहुँचीं, तो देव परंपरा अनुसार दोनों देवताओं का अत्यंत भावुक और भव्य मिलन (मिलनी) हुआ। * देवताओं की उपस्थिति: इस दिव्य अवसर पर देवता जुआणी महादेव और देवता वीर नाथ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। * भव्य स्वागत: श्रद्धालुओं और स्थानीय कार-कारिंदों (देव सेवकों) ने माता भागासिद्ध का पारंपरिक वेशभूषा, फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। * सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: कुल्लू की देव संस्कृति में देवताओं के इस प्रकार के मिलन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिससे पूरी घाटी में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। समस्त क्षेत्र में इस अलौकिक देव मिलन को लेकर भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ है। न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावुक पल देखने को मिला। माता भागासिद्ध लगभग 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने भ्राता श्री जुआणी महादेव से मिलीं। इस दौरान देव परंपराओं और वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य आकर्षण और धार्मिक झलकियां * भ्राता-भगिनी का भव्य मिलन: माता भागासिद्ध जब अपने मूल स्थान से जुआणी महादेव के दरबार पहुँचीं, तो देव परंपरा अनुसार दोनों देवताओं का अत्यंत भावुक और भव्य मिलन (मिलनी) हुआ। * देवताओं की उपस्थिति: इस दिव्य अवसर पर देवता जुआणी महादेव और देवता वीर नाथ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। * भव्य स्वागत: श्रद्धालुओं और स्थानीय कार-कारिंदों (देव सेवकों) ने माता भागासिद्ध का पारंपरिक वेशभूषा, फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। * सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: कुल्लू की देव संस्कृति में देवताओं के इस प्रकार के मिलन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिससे पूरी घाटी में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। समस्त क्षेत्र में इस अलौकिक देव मिलन को लेकर भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावुक पल देखने को मिला। माता भागासिद्ध लगभग 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने भ्राता श्री जुआणी महादेव से मिलीं। इस दौरान देव परंपराओं और वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य आकर्षण और धार्मिक झलकियां * भ्राता-भगिनी का भव्य मिलन: माता भागासिद्ध जब अपने मूल स्थान से जुआणी महादेव के दरबार पहुँचीं, तो देव परंपरा अनुसार दोनों देवताओं का अत्यंत भावुक और भव्य मिलन (मिलनी)
हुआ। * देवताओं की उपस्थिति: इस दिव्य अवसर पर देवता जुआणी महादेव और देवता वीर नाथ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। * भव्य स्वागत: श्रद्धालुओं और स्थानीय कार-कारिंदों (देव सेवकों) ने माता भागासिद्ध का पारंपरिक वेशभूषा, फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। * सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: कुल्लू की देव संस्कृति में देवताओं के इस प्रकार के मिलन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिससे पूरी घाटी में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। समस्त क्षेत्र में इस अलौकिक देव मिलन को लेकर भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ
है। न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावुक पल देखने को मिला। माता भागासिद्ध लगभग 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने भ्राता श्री जुआणी महादेव से मिलीं। इस दौरान देव परंपराओं और वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य आकर्षण और धार्मिक झलकियां * भ्राता-भगिनी का भव्य मिलन: माता भागासिद्ध जब अपने मूल स्थान से जुआणी महादेव के दरबार पहुँचीं, तो देव परंपरा अनुसार दोनों देवताओं का अत्यंत भावुक और भव्य मिलन (मिलनी) हुआ। *
देवताओं की उपस्थिति: इस दिव्य अवसर पर देवता जुआणी महादेव और देवता वीर नाथ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। * भव्य स्वागत: श्रद्धालुओं और स्थानीय कार-कारिंदों (देव सेवकों) ने माता भागासिद्ध का पारंपरिक वेशभूषा, फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। * सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: कुल्लू की देव संस्कृति में देवताओं के इस प्रकार के मिलन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिससे पूरी घाटी में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। समस्त क्षेत्र में इस अलौकिक देव मिलन को लेकर भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
- न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावुक पल देखने को मिला। माता भागासिद्ध लगभग 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने भ्राता श्री जुआणी महादेव से मिलीं। इस दौरान देव परंपराओं और वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य आकर्षण और धार्मिक झलकियां * भ्राता-भगिनी का भव्य मिलन: माता भागासिद्ध जब अपने मूल स्थान से जुआणी महादेव के दरबार पहुँचीं, तो देव परंपरा अनुसार दोनों देवताओं का अत्यंत भावुक और भव्य मिलन (मिलनी) हुआ। * देवताओं की उपस्थिति: इस दिव्य अवसर पर देवता जुआणी महादेव और देवता वीर नाथ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। * भव्य स्वागत: श्रद्धालुओं और स्थानीय कार-कारिंदों (देव सेवकों) ने माता भागासिद्ध का पारंपरिक वेशभूषा, फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। * सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: कुल्लू की देव संस्कृति में देवताओं के इस प्रकार के मिलन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिससे पूरी घाटी में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। समस्त क्षेत्र में इस अलौकिक देव मिलन को लेकर भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ है। न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावुक पल देखने को मिला। माता भागासिद्ध लगभग 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने भ्राता श्री जुआणी महादेव से मिलीं। इस दौरान देव परंपराओं और वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य आकर्षण और धार्मिक झलकियां * भ्राता-भगिनी का भव्य मिलन: माता भागासिद्ध जब अपने मूल स्थान से जुआणी महादेव के दरबार पहुँचीं, तो देव परंपरा अनुसार दोनों देवताओं का अत्यंत भावुक और भव्य मिलन (मिलनी) हुआ। * देवताओं की उपस्थिति: इस दिव्य अवसर पर देवता जुआणी महादेव और देवता वीर नाथ जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। * भव्य स्वागत: श्रद्धालुओं और स्थानीय कार-कारिंदों (देव सेवकों) ने माता भागासिद्ध का पारंपरिक वेशभूषा, फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। * सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व: कुल्लू की देव संस्कृति में देवताओं के इस प्रकार के मिलन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, जिससे पूरी घाटी में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। समस्त क्षेत्र में इस अलौकिक देव मिलन को लेकर भारी उत्साह और भक्तिमय माहौल बना हुआ है।4
- विभागीय कार्यालय में मेरा कोई हस्ताक्षर नहीं जनता के हितों की रक्षा करना मेरा कार्य सुजानपुर : सुजानपुर विधायक कैप्टन रंजीत सिंह ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि विभागीय कार्यालय में मेरा कोई हस्ताक्षर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जनता के हितों की रक्षा करना मेरा कार्य हैं।1
- झंडूता-भगेड़ सड़क पर HRTC और निजी बस में टक्कर, सड़क किनारे लटकी सरकारी बस झंडूता-भगेड़ सड़क पर गुरुवार को HRTC बस और निजी बस के बीच टक्कर हो गई। टक्कर के बाद HRTC बस अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे लटक गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि HRTC बस सड़क से नीचे खाई में नहीं गिरी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था और जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका थी। हादसे में यात्रियों की स्थिति और नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। घटना के कारण कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ।1
- जब तक कुलपति नहीं आएंगे, तब तक भूख हड़ताल रहेगी जारी” — भवानी ठाकुर HPTU की समस्याओं को लेकर ABVP का आंदोलन तेज, छात्र हितों के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान हमीरपुर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विश्वविद्यालय की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की गई है। विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया है कि जब तक विद्यार्थियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ABVP विभाग संयोजक भवानी ठाकुर ने कहा कि “जब तक कुलपति नहीं आएंगे और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। जब तक समाधान नहीं, तब तक भोजन नहीं।” उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करना अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। विद्यार्थी परिषद ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल आश्वासनों से समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है, लेकिन लंबे समय से विश्वविद्यालय में कुलपति एवं Dean के पद रिक्त हैं। करीब दो वर्ष का समय बीतने के बावजूद कुलपति की नियुक्ति न होना सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी अपनी समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय आएं तो वे अपनी बात आखिर किसके समक्ष रखें? विश्वविद्यालय के शीर्ष पदों का रिक्त रहना सीधे तौर पर प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था को प्रभावित करता है। विद्यार्थी परिषद की प्रमुख मांगें 1. कुलपति एवं Dean के रिक्त पद तत्काल भरे जाएं। HPTU में लंबे समय से रिक्त चल रहे Vice Chancellor एवं Dean के पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि विश्वविद्यालय का प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। 2. HPTU को Aided Institution बनाया जाए। Self-Finance मॉडल के कारण विद्यार्थियों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने के लिए विश्वविद्यालय को Aided Institution बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिल सके। 3. छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं। विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करते हुए छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल किए जाएं, ताकि विद्यार्थी अपनी समस्याओं एवं मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रख सकें। 4. अंतिम सेमेस्टर में Tuition Fee पर स्थिति स्पष्ट की जाए। जब अंतिम सेमेस्टर में नियमित कक्षाएं नहीं लगती हैं, तो विद्यार्थियों से Tuition Fee किस आधार पर ली जा रही है, इसका स्पष्ट जवाब दिया जाए तथा विद्यार्थियों पर पड़ रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ को समाप्त किया जाए। 5. विश्वविद्यालय कैंटीन शीघ्र शुरू की जाए। HPTU परिसर में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय कैंटीन को जल्द शुरू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को परिसर में उचित एवं सुलभ भोजन की सुविधा मिल सके। भवानी ठाकुर ने कहा कि विद्यार्थियों की मांगें किसी व्यक्तिगत हित से जुड़ी हुई नहीं हैं, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय के छात्र समुदाय के हित से जुड़ी हैं। सरकार यदि विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर गंभीर है तो उसे तत्काल इन मांगों पर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद ने लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से विद्यार्थियों की आवाज उठाई है, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। केवल आश्वासन देकर विद्यार्थियों की आवाज को शांत नहीं किया जा सकता। ABVP ने सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मांगों पर ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। विद्यार्थी परिषद छात्र हितों के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष करेगी। “1
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- न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक हिमाचली नाटी न्यूली सावन मेला 2026: दिव्य और भव्य देव मिलन कुल्लू घाटी की समृद्ध देव संस्कृति में सावन मेले के दौरान एक ऐतिहासिक हिमाचली नाटी1