बेतिया राज भूमि कानून के खिलाफ भाकपा का बिगुल, मार्च में डीएम कार्यालय पर धरना का ऐलान। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला कार्यालय बलिराम भवन के सभागार में आयोजित कानूनी जागरूकता शिविर में बेतिया राज की भूमि से जुड़े नए कानून पर तीखी बहस हुई। अध्यक्षता करते हुए भाकपा जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने आज 21 फ़रवरी शनिवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यह कानून जमीनी हकीकत से कटा हुआ है और इसे बिना व्यापक चर्चा के जल्दबाजी में लागू किया गया है। पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि यह कानून बिहार में मुकदमों की बाढ़ और सामाजिक अशांति को जन्म देगा। उन्होंने मांग की कि सरकार इस कानून को वापस लेकर स्थानीय परिस्थितियों और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नया कानून बनाए। वक्ताओं ने बताया कि बेतिया राज की सभी जमीन एक जैसी नहीं है—कई भूखंड ऐतिहासिक रूप से हस्तांतरित हैं और अनेक परिवार दशकों से वहीं रहकर खेती-किसानी या व्यवसाय कर अपना जीवन चला रहे हैं। ऐसे लोगों को बेदखल करना न्यायसंगत नहीं है। भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने भूमि आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार गरीबों को उजाड़कर जमीन बड़े लोगों को सौंपने की मंशा रखती है, जिसे पार्टी सफल नहीं होने देगी। बैठक में विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे नोटिसधारी लोगों ने मानसिक उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बेतिया राज की भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक और पट्टा देने, तथा अव्यवहारिक कानून को वापस लेने की मांग को लेकर मार्च में जिला पदाधिकारी के समक्ष जोरदार धरना दिया जाएगा।
बेतिया राज भूमि कानून के खिलाफ भाकपा का बिगुल, मार्च में डीएम कार्यालय पर धरना का ऐलान। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला कार्यालय बलिराम भवन के सभागार में आयोजित कानूनी जागरूकता शिविर में बेतिया राज की भूमि से जुड़े नए कानून पर तीखी बहस हुई। अध्यक्षता करते हुए भाकपा जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने आज 21 फ़रवरी शनिवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यह कानून जमीनी हकीकत से कटा हुआ है और इसे बिना व्यापक चर्चा के जल्दबाजी में लागू किया गया है। पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि यह कानून बिहार में मुकदमों की बाढ़ और सामाजिक अशांति को जन्म देगा। उन्होंने मांग की कि सरकार इस कानून को वापस लेकर स्थानीय परिस्थितियों और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नया कानून बनाए। वक्ताओं ने बताया कि बेतिया राज की सभी जमीन एक जैसी नहीं है—कई भूखंड ऐतिहासिक रूप से हस्तांतरित हैं और अनेक परिवार दशकों से वहीं रहकर खेती-किसानी या व्यवसाय कर अपना जीवन चला रहे हैं। ऐसे लोगों को बेदखल करना न्यायसंगत नहीं है। भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने भूमि आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार गरीबों को उजाड़कर जमीन बड़े लोगों को सौंपने की मंशा रखती है, जिसे पार्टी सफल नहीं होने देगी। बैठक में विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे नोटिसधारी लोगों ने मानसिक उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बेतिया राज की भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक और पट्टा देने, तथा अव्यवहारिक कानून को वापस लेने की मांग को लेकर मार्च में जिला पदाधिकारी के समक्ष जोरदार धरना दिया जाएगा।
- नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट को लेकर देश की राजनीति में उठी हलचल की गूंज आज बेतिया तक सुनाई दी। सोवा बाबू चौक पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सियासी तापमान बढ़ा दिया। चौक पर जुटे कार्यकर्ताओं ने तीखी नारेबाजी के बीच राहुल गांधी पर अंतरराष्ट्रीय मंच से देश की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप उनका पुतला दहन कर अपना आक्रोश प्रकट किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि एआई समिट भारत की तकनीकी ताकत, डिजिटल क्रांति और वैश्विक नेतृत्व को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का ऐतिहासिक अवसर था। उनका आरोप रहा कि विपक्ष ने इस महत्वपूर्ण मंच को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश की और देशहित से ऊपर अपनी राजनीति को रखा। नेताओं ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अमर्यादित नारेबाजी करने का भी आरोप लगाया और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा रहा, हालांकि प्रशासन की सतर्क निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। युवा मोर्चा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री के सम्मान के खिलाफ यदि भविष्य में इस तरह के बयान या गतिविधियां सामने आती हैं तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। सोवा बाबू चौक पर आज का यह प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि एआई समिट को लेकर तेज होती राष्ट्रीय सियासत का स्थानीय प्रतिबिंब बनकर उभरा है, जिसने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमाने वाला है।1
- विकासखंड दुदही वार्ड संख्या 49 से जिला पंचायत सदस्य अब्दुल हबीब अंसारी आप सभी क्षेत्रवासियों को दिल की गहराई से नमस्कार 🙏🙏🙏1
- Post by RAJHANSH VERMA1
- Post by Sadhana national News1
- Post by Shambhu Rajbhar1
- बेतिया के बगीचा रेस्टोरेंट में होली मिलन समारोह के शुभ अवसर पर महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन 18 फरवरी 2026 को किया गया था।1
- पीएसजी ग्रुप और एमओआईसी डॉ. राकेश कुमार की उपस्थिति में ईंट भट्ठा पर सामूहिक दवा सेवन अभियान का सफल आयोजन इस अवसर पर एमओआईसी डॉ. राकेश कुमार खुद मौजूद रहे1
- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला कार्यालय बलिराम भवन के सभागार में आयोजित कानूनी जागरूकता शिविर में बेतिया राज की भूमि से जुड़े नए कानून पर तीखी बहस हुई। अध्यक्षता करते हुए भाकपा जिला सचिव ओम प्रकाश क्रांति ने आज 21 फ़रवरी शनिवार दोपहर करीब 3 बजे बताया कि यह कानून जमीनी हकीकत से कटा हुआ है और इसे बिना व्यापक चर्चा के जल्दबाजी में लागू किया गया है। पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि यह कानून बिहार में मुकदमों की बाढ़ और सामाजिक अशांति को जन्म देगा। उन्होंने मांग की कि सरकार इस कानून को वापस लेकर स्थानीय परिस्थितियों और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नया कानून बनाए। वक्ताओं ने बताया कि बेतिया राज की सभी जमीन एक जैसी नहीं है—कई भूखंड ऐतिहासिक रूप से हस्तांतरित हैं और अनेक परिवार दशकों से वहीं रहकर खेती-किसानी या व्यवसाय कर अपना जीवन चला रहे हैं। ऐसे लोगों को बेदखल करना न्यायसंगत नहीं है। भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने भूमि आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार गरीबों को उजाड़कर जमीन बड़े लोगों को सौंपने की मंशा रखती है, जिसे पार्टी सफल नहीं होने देगी। बैठक में विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे नोटिसधारी लोगों ने मानसिक उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बेतिया राज की भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक और पट्टा देने, तथा अव्यवहारिक कानून को वापस लेने की मांग को लेकर मार्च में जिला पदाधिकारी के समक्ष जोरदार धरना दिया जाएगा।1