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डिंडौरी जिले के संगवा गांव में दो पक्षों के बीच एक गंभीर विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में लाठी और रॉड से मारपीट होने लगी, जिसके परिणामस्वरूप कुल 8 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, यह विवाद व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा को लेकर शुरू हुआ था, जो बाद में एक खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। सूचना मिलने पर शहपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है।
NILMANI CHOUDHARY
डिंडौरी जिले के संगवा गांव में दो पक्षों के बीच एक गंभीर विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में लाठी और रॉड से मारपीट होने लगी, जिसके परिणामस्वरूप कुल 8 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, यह विवाद व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा को लेकर शुरू हुआ था, जो बाद में एक खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। सूचना मिलने पर शहपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है।
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- डिंडोरी जिले में ईंधन खर्च रोकने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यालय में निवास करने के निर्देश दिए थे। हालाँकि, समनापुर ब्लॉक में इन आदेशों का पालन केवल कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहा है, जहाँ कई अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन जिला मुख्यालय से समनापुर तक आवागमन कर रहे हैं। इस स्थिति से शासन के पेट्रोल-डीजल बचत अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई विभागों के कर्मचारी सुबह देर से कार्यालय पहुंचते हैं और शाम होते ही निकल जाते हैं, जिससे आम लोगों के कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते। सबसे गंभीर आरोप शासकीय वाहनों के दुरुपयोग को लेकर लगाए जा रहे हैं; सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारी सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल निजी आवागमन और व्यक्तिगत कार्यों के लिए कर रहे हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो शासन को लाखों रुपये के ईंधन और वाहन खर्च में हुई गड़बड़ी का खुलासा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन अधिकारी मुख्यालय में रुकने के बजाय रोजाना अपडाउन में व्यस्त रहते हैं। इससे आपातकालीन स्थितियों में जनता को अधिकारियों की उपलब्धता नहीं मिल पाती। स्थानीय नागरिकों ने माँग की है कि मुख्यालय में निवास न करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जांच की जाए, शासकीय वाहनों की लॉगबुक और ईंधन खर्च की भी जाँच हो, और बिना अनुमति के डेली अपडाउन करने वालों पर कार्रवाई की जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी करने वालों पर कब तक कार्रवाई करेगा, या फिर सरकारी आदेश केवल फाइलों तक ही सीमित रहेंगे।1
- डिंडोरी में एसडीएम राम बाबू देवआंगन ने अतिक्रमण और अनाधिकृत निर्माण कार्यों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यवस्था को भंग करेगा, उसे सीधे जेल भेजा जाएगा। यह चेतावनी विशेष रूप से बस स्टैंड और नर्मदा तट के आसपास मनमाने ढंग से हो रहे निर्माण कार्यों, जैसे बिना अनुमति के दर्जनो मंदिर निर्माण या अन्य निर्माण कार्यों के संदर्भ में दी गई है। एसडीएम देवआंगन ने निर्देश दिया है कि अब तक जो भी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, उन्हें एक ही स्थान पर लाइन में लगाकर अपनी भक्ति भाव और आस्था को आश्रम तक सीमित रखा जाए। उन्होंने लोगों से जिला प्रशासन के सहयोगी बनकर योगदान देने की अपील की, अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि जो व्यवस्था बिगाड़ेगा, उसे जेल भेजा जाएगा।4
- वनमंडल डिंडौरी के दक्षिण समनापुर वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने अवैध साल चिरान लकड़ी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग ने 25 मई 2026 को वन ग्राम लमोटा के बीट अजगर क्षेत्र में दो स्थानों पर छापा मारकर अवैध रूप से रखी गई साल चिरान लकड़ी को जब्त किया। यह कार्रवाई वनमंडलाधिकारी श्रीमती भारती ठाकरे और उप वनमंडल अधिकारी श्री सुरेंद्र सिंह जाटव के मार्गदर्शन में की गई। इसमें वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री रेवासिंह परस्ते ने वन अमले का नेतृत्व किया। इस अभियान में वनरक्षक श्री इन्द्रसिंह पट्टा, श्रीमती प्रेमवती मरावी, श्री पवन कुमार यादव, वाहन चालक श्री राकेश कुमार टेकाम, सुरक्षा श्रमिक श्री शुभम कुमार पट्टा, श्री दादूलाल मरकाम और वन सुरक्षा समिति लमोटा के अध्यक्ष श्री विष्णु सिंह का विशेष योगदान रहा। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 52 के तहत जब्ती की कार्रवाई की है। इस मामले में दो आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनके विरुद्ध आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध लकड़ी कटाई और परिवहन के खिलाफ उनका अभियान लगातार जारी रहेगा तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।2
- बुढ़ार के वार्ड क्रमांक 1 स्थित रेस्ट हाउस परिसर के पास सूर्य नमस्कार की विभिन्न मुद्राओं को दर्शाती आकर्षक प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। इस पहल को केवल सौंदर्यीकरण का कार्य नहीं बताया गया है, बल्कि इसे बुढ़ार नगरवासियों को स्वास्थ्य, योग और भारतीय संस्कृति के साथ जोड़ने की एक सुंदर पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उम्मीद जताई गई है कि आने वाले समय में यह स्थान नगर की एक नई पहचान और आकर्षण का केंद्र बनेगा। योग को प्राचीन संस्कृति की अमूल्य धरोहर मानते हुए, इन मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए नगर को सुंदर, प्रेरणादायी और aesthetic रूप देने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।1
- शहडोल जिले में शराब कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ शराब की दुकानें निर्धारित समय के बाद भी रात लगभग 1:30 बजे तक खुली रहने और खुलेआम बिक्री के आरोपों के बीच अब प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूलने का मामला भी सामने आया है। शहर के शिव मंदिर के पास कमिश्नर बंगला रोड स्थित एक शराब दुकान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ग्राहकों से शराब की बोतलों पर अंकित कीमत से ज्यादा रकम लेने के आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे प्रकरण ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और शराब ठेकेदारों को मिल रहे कथित संरक्षण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में शराब की दुकानों पर नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन आबकारी विभाग कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है। उनका कहना है कि देर रात तक शराब की बिक्री और प्रिंट रेट से अधिक पैसे वसूलना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि आबकारी अधिकारी सावित्री भगत और शराब ठेकेदार प्रिंस राय की कथित मिलीभगत के चलते नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। वायरल वीडियो में ग्राहक कथित तौर पर शराब खरीदते समय निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे लिए जाने की बात कहते दिख रहे हैं, जिसके सामने आने के बाद आम लोगों में खासी नाराजगी बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट आरोप है कि बिना विभागीय संरक्षण के शराब दुकानों में इस तरह की मनमानी संभव ही नहीं है, और देर रात शराब बिक्री से लेकर ओवररेटिंग तक का पूरा खेल अधिकारियों व ठेकेदारों की सांठगांठ से संचालित हो रहा है। इस अनियमितता के कारण क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, जैसे नशे में विवाद, गाली-गलौज और मारपीट, जिससे स्थानीय नागरिकों में भय और आक्रोश का माहौल है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि वायरल वीडियो की जांच कर यह पता लगाया जाए कि ग्राहकों से कितनी अधिक वसूली की जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं। साथ ही, देर रात शराब बिक्री कराने वाले ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग की गई है। अब जिले में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर शराब कारोबारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जिसके दम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह देखना होगा कि क्या आबकारी विभाग इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगा या शराब कारोबार और विभागीय संरक्षण का यह खेल आगे भी यूं ही चलता रहेगा। फिलहाल, वायरल वीडियो और देर रात शराब बिक्री का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।3
- डिंडौरी जिले के संगवा गांव में दो पक्षों के बीच एक गंभीर विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में लाठी और रॉड से मारपीट होने लगी, जिसके परिणामस्वरूप कुल 8 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, यह विवाद व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा को लेकर शुरू हुआ था, जो बाद में एक खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। सूचना मिलने पर शहपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है।1