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मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली लोकेशन : विदिशा स्लग : मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली लोकेशन : विदिशा एंकर : विदिशा के प्रसिद्ध बाढ़ वाले गणेश मंदिर से सरकारी रेलिंग चोरी होने का मामला सामने आने के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। हालांकि मंदिर के पुजारी और पुलिस का कहना है कि रेलिंग चोरी नहीं हुई है। पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिली है। वीओ : दरअसल, बाढ़ वाले गणेश मंदिर में पर्यटन विभाग की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी। रेलिंग चोरी होने की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लोगों से अपील भी की थी कि यदि किसी को रेलिंग चोरी या उसे ले जाने वालों के संबंध में कोई जानकारी है तो उन्हें सूचना दी जाए। लेकिन अब इस मामले में मंदिर के पुजारी परसराम चौबे का कहना है कि न तो उन्होंने रेलिंग चोरी होने की कोई शिकायत की है और न ही मंदिर से कोई रेलिंग चोरी हुई है। उनका आरोप है कि किसी ने उनके नाम से झूठी शिकायत कर दी। वहीं सहायक सचिव का कहना है कि सीएसपी कार्यालय से पुलिस टीम जांच के लिए आई थी, लेकिन रेलिंग चोरी होने जैसा कोई मामला नहीं है। बाइट — अतुल सिंह, सीएसपी विदिशा सीएसपी अतुल सिंह के मुताबिक पुलिस अधीक्षक को आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसके बाद जांच उन्हें सौंपी गई। पुलिस ने मौके पर जांच करने के साथ संबंधित लोगों के बयान भी लिए हैं। जांच में रेलिंग मौके पर लगी हुई मिली है। वीओ-2 : फिलहाल मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रेलिंग चोरी होने की बात सामने आई तो शिकायत किस आधार पर हुई और इसकी जानकारी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य तक कैसे पहुंची। वहीं पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिलने के बाद पूरे मामले की तस्वीर अलग नजर आ रही है। अब पुलिस की जांच और सामने आए बयानों से ही स्पष्ट होगा कि आखिर इस मामले की वास्तविकता क्या है। बाइट : परसराम चौबे पुजारी बाइट : यशवंत मीणा सहायक सचिव

7 hrs ago
user_रिपोर्टर rupesh yadav
रिपोर्टर rupesh yadav
Photographer सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago

मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली लोकेशन : विदिशा स्लग : मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली लोकेशन : विदिशा एंकर : विदिशा के प्रसिद्ध बाढ़ वाले गणेश मंदिर से सरकारी रेलिंग चोरी होने का मामला सामने आने के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। हालांकि मंदिर के पुजारी और पुलिस का कहना है कि रेलिंग चोरी

नहीं हुई है। पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिली है। वीओ : दरअसल, बाढ़ वाले गणेश मंदिर में पर्यटन विभाग की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी। रेलिंग चोरी होने की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लोगों से अपील भी की थी कि यदि किसी को रेलिंग चोरी या उसे ले जाने वालों के संबंध में कोई जानकारी है तो उन्हें सूचना दी जाए। लेकिन अब इस मामले में मंदिर के पुजारी

परसराम चौबे का कहना है कि न तो उन्होंने रेलिंग चोरी होने की कोई शिकायत की है और न ही मंदिर से कोई रेलिंग चोरी हुई है। उनका आरोप है कि किसी ने उनके नाम से झूठी शिकायत कर दी। वहीं सहायक सचिव का कहना है कि सीएसपी कार्यालय से पुलिस टीम जांच के लिए आई थी, लेकिन रेलिंग चोरी होने जैसा कोई मामला नहीं है। बाइट — अतुल सिंह, सीएसपी विदिशा सीएसपी अतुल सिंह के मुताबिक पुलिस अधीक्षक को आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसके बाद जांच उन्हें सौंपी गई। पुलिस ने मौके पर जांच करने के साथ संबंधित लोगों के

बयान भी लिए हैं। जांच में रेलिंग मौके पर लगी हुई मिली है। वीओ-2 : फिलहाल मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रेलिंग चोरी होने की बात सामने आई तो शिकायत किस आधार पर हुई और इसकी जानकारी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य तक कैसे पहुंची। वहीं पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिलने के बाद पूरे मामले की तस्वीर अलग नजर आ रही है। अब पुलिस की जांच और सामने आए बयानों से ही स्पष्ट होगा कि आखिर इस मामले की वास्तविकता क्या है। बाइट : परसराम चौबे पुजारी बाइट : यशवंत मीणा सहायक सचिव

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    मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला

मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली

लोकेशन : विदिशा
स्लग : मंदिर की रेलिंग चोरी का मामला
मंदिर की रेलिंग चोरी पर उठे सवाल, पुलिस जांच में रेलिंग लगी मिली
लोकेशन : विदिशा
एंकर :
विदिशा के प्रसिद्ध बाढ़ वाले गणेश मंदिर से सरकारी रेलिंग चोरी होने का मामला सामने आने के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। हालांकि मंदिर के पुजारी और पुलिस का कहना है कि रेलिंग चोरी नहीं हुई है। पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिली है।
वीओ :
दरअसल, बाढ़ वाले गणेश मंदिर में पर्यटन विभाग की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई थी। रेलिंग चोरी होने की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने वीडियो जारी कर मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने लोगों से अपील भी की थी कि यदि किसी को रेलिंग चोरी या उसे ले जाने वालों के संबंध में कोई जानकारी है तो उन्हें सूचना दी जाए।
लेकिन अब इस मामले में मंदिर के पुजारी परसराम चौबे का कहना है कि न तो उन्होंने रेलिंग चोरी होने की कोई शिकायत की है और न ही मंदिर से कोई रेलिंग चोरी हुई है। उनका आरोप है कि किसी ने उनके नाम से झूठी शिकायत कर दी।
वहीं सहायक सचिव का कहना है कि सीएसपी कार्यालय से पुलिस टीम जांच के लिए आई थी, लेकिन रेलिंग चोरी होने जैसा कोई मामला नहीं है।
बाइट — अतुल सिंह, सीएसपी विदिशा
सीएसपी अतुल सिंह के मुताबिक पुलिस अधीक्षक को आवेदन प्राप्त हुआ था, जिसके बाद जांच उन्हें सौंपी गई। पुलिस ने मौके पर जांच करने के साथ संबंधित लोगों के बयान भी लिए हैं। जांच में रेलिंग मौके पर लगी हुई मिली है।
वीओ-2 :
फिलहाल मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रेलिंग चोरी होने की बात सामने आई तो शिकायत किस आधार पर हुई और इसकी जानकारी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य तक कैसे पहुंची। वहीं पुलिस जांच में रेलिंग मौके पर लगी मिलने के बाद पूरे मामले की तस्वीर अलग नजर आ रही है। अब पुलिस की जांच और सामने आए बयानों से ही स्पष्ट होगा कि आखिर इस मामले की वास्तविकता क्या है।
बाइट : परसराम चौबे पुजारी 
बाइट : यशवंत मीणा सहायक सचिव
    user_रिपोर्टर rupesh yadav
    रिपोर्टर rupesh yadav
    Photographer सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लटेरी के कोटरा हुसैनपुर में वन विभाग का अतिक्रमण हटाओ अभियान। लटेरी के कोटरा हुसैनपुर में वन विभाग का अतिक्रमण हटाओ अभियान।
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    लटेरी के कोटरा हुसैनपुर में वन विभाग का अतिक्रमण हटाओ अभियान।
लटेरी के कोटरा हुसैनपुर में वन विभाग का अतिक्रमण हटाओ अभियान।
    user_Rajkapur
    Rajkapur
    Local News Reporter Lateri, Vidisha•
    10 hrs ago
  • गंजबासौदा में किन्नर समाज का भव्य आयोजन, देशभर से जुटेंगे 3 हजार से ज्यादा लोग! *C NEWS BHARAT* *मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़* *📡📡📡*
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    गंजबासौदा में किन्नर समाज का भव्य आयोजन, देशभर से जुटेंगे 3 हजार से ज्यादा लोग!
 *C NEWS BHARAT* 
 *मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़* 
 *📡📡📡*
    user_PRAYAS vishwakarma
    PRAYAS vishwakarma
    Loan agency शमशाबाद, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • बड़ी खबर -लटेरी में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, वन भूमि से अवैध कब्जा हटाया#विदिशा #लटेरी #वनविभाग बड़ी खबर -लटेरी में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, वन भूमि से अवैध कब्जा हटाया#विदिशा #लटेरी #वनविभाग
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    बड़ी खबर -लटेरी में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, वन भूमि से अवैध कब्जा हटाया#विदिशा #लटेरी #वनविभाग
बड़ी खबर -लटेरी में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, वन भूमि से अवैध कब्जा हटाया#विदिशा #लटेरी #वनविभाग
    user_VIMAL KUMAR VISHWAKARMA
    VIMAL KUMAR VISHWAKARMA
    शमशाबाद, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी। नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें। वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो। लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी। नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें। वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
    1
    लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 

बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, 

नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक

बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी।
नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें।
वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, 
नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक
बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी।
नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें।
वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
    user_Laxman singh rajput
    Laxman singh rajput
    बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी। नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें। वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो। लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी। नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें। वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
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    लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 

बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, 

नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक

बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी।
नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें।
वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, 
नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक
बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी।
नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें।
वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
    user_Mp news 24live
    Mp news 24live
    बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • लोकल न्यूज़ बीना रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी। नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें। वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
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    लोकल न्यूज़ बीना 
रिपोर्ट लक्ष्मण सिंह राजपूत 
बीना में मुख्य मार्ग पर सब्जी दुकानों से बिगड़ी यातायात व्यवस्था, 
नगरपालिका की समझाइश पर नोकझोंक
बीना। शहर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे सब्जी विक्रेताओं द्वारा दुकानें लगाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर दुकानें लगने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर नगरपालिका कर्मचारियों ने कार्रवाई करते हुए सब्जी विक्रेताओं को निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने की समझाइश दी।
नगरपालिका कर्मचारियों ने मुख्य सड़क पर सब्जी बेच रहे दुकानदारों से सड़क खाली रखने और निर्धारित स्थान पर दुकानें लगाने के लिए कहा। इस दौरान नगरपालिका कर्मचारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे भी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सब्जी बेचते हैं। उनका कहना है कि अगर मुख्य मार्ग से दुकानें हटाई जाती हैं तो नगरपालिका उन्हें ऐसा उचित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए, जहां वे अपना कारोबार कर सकें। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी दुकानें कहां लगाएं और परिवार का गुजारा कैसे करें।
वहीं, नगरपालिका का कहना है कि मुख्य सड़क पर दुकानें लगने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के साथ सब्जी विक्रेताओं के रोजगार का भी समाधान कैसे निकलेगा? जरूरत है कि नगरपालिका विक्रेताओं के लिए सुविधाजनक और निर्धारित स्थान की व्यवस्था करे, ताकि सड़क पर जाम और अव्यवस्था की समस्या भी खत्म हो और छोटे व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित न हो।
    user_Laxman Singh Rajput
    Laxman Singh Rajput
    Local News Reporter बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पताल में शूट किया हुआ वीडियो वायरल लोकेशन :- विदिशा मध्य प्रदेश स्लग :- नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पताल में शूट किया हुआ वीडियो वायरल लोकेशन :- विदिशा मध्य प्रदेश एंकर :- शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता अब चरम पर पहुंच चुकी है। परिसर में सुरक्षा में हुई भारी चूक और लिफ्ट-कॉरिडोर में हुई कमर्शियल शूटिंग के गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए डीन महोदय ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान दे डाला। डीन का कहना है कि "इतना बड़ा परिसर है, हम कैसे देख सकते हैं कि कौन आ रहा है और कौन जा रहा है!" लाखों रुपये का सुरक्षा बजट, 60 से 70 सुरक्षा गार्ड्स और सरकार से मोटा वेतन पाने वाले शीर्ष प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी का ऐसा बयान न केवल उनकी प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं और मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा डीन का यह बयान बेहद खतरनाक और लापरवाही से भरा है। सवाल यह उठता है कि यदि कल को अस्पताल परिसर या हॉस्टल में कोई अनजान व्यक्ति घुसकर छात्र-छात्राओं या महिला डॉक्टरों के साथ कोई अप्रिय घटना या अपराध घटित कर देता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? जब सरकार सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पर हर महीने लाखों रुपये का शासकीय बजट पानी की तरह बहा रही है, तब भी मरीज, मेडिकल छात्र और डॉक्टर सुरक्षा के अभाव में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। कॉलेज प्रशासन, डीन और अस्पताल अधीक्षक का ध्यान इन संवेदनशील मुद्दों पर बिल्कुल नहीं है। आलम यह है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर आराम फरमा रहे हैं और जमीनी स्तर पर अस्पताल लावारिस हाल में छोड़ दिया गया है। संवेदनशील लिफ्ट और कॉरिडोर में कमर्शियल रील्स हाल ही में अस्पताल के आपातकालीन भाग एवं लिफ्ट कोरिडोर जैसे संवेदनशील भाग में एक व्यावसायिक डांस क्लास के प्रमोशन के लिए वीडियो और रील्स शूट किए गए। नियमतः किसी भी शासकीय अस्पताल में कमर्शियल गतिविधियों और शूटिंग पर कानूनी प्रतिबंध होता है। आपातकालीन सेवाओं के लिए बनी लिफ्ट को शूटिंग के लिए रोके जाने से गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न हुई और मरीजों की गोपनीयता का सरेआम उल्लंघन हुआ। प्राथमिकताओं पर सवाल :- मंदिर पर 24 घंटे कड़ा पहरा, अस्पताल अनाथ डीन और अधीक्षक की प्राथमिकताओं का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां पूरा अस्पताल परिसर बाहरी तत्वों के लिए खुला छोड़ दिया गया है, वहीं परिसर में स्थित शिव मंदिर पर 24 घंटे गार्ड की विशेष ड्यूटी लगाई गई है और CCTV कैमरे से सीधी निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में प्रशासन ने एक सख्त आदेश जारी कर कर्मचारियों को मंदिर में पूजा-पाठ करने पर कार्रवाई की धमकी दी थी। आस्था पर तुरंत प्रतिबंध लगाने वाले डीन महोदय, जब परिसर में कमर्शियल शूटिंग होती है और सुरक्षा में सेंध लगती है, तो पूरी तरह मौन धारण कर लेते हैं। सुरक्षा एजेंसी और कंपनी मैनेजर पर मेहरबानी अस्पताल में 60 से 70 सुरक्षा गार्ड्स की फौज तैनात होने के बावजूद बाहरी व्यक्ति बेझिझक मुख्य भवन और लिफ्ट तक पहुंचकर रील्स बना लेते हैं। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी सुरक्षा एजेंसी या उसके मैनेजर पर कोई आर्थिक दंड या ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई न होना, शीर्ष प्रबंधन और एजेंसी के बीच सांठगांठ की ओर साफ इशारा करता है। उठते सीधे सवाल :- सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? यदि 'इतने बड़े परिसर' का बहाना बनाकर डीन पल्ला झाड़ लेंगे, तो हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं और अस्पताल के मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? कमरों में बैठकर क्या कर रहा प्रबंधन? लाखों रुपये वेतन लेने वाले डीन और अधीक्षक अगर अपने दफ्तरों से निकलकर सुरक्षा का जायजा नहीं ले सकते, तो वे पदों पर क्यों बने हुए हैं? बजट की बर्बादी :- जब 60-70 गार्ड्स के रहते बाहरी लोग आकर डांस वीडियो बना रहे हैं, तो सुरक्षा पर खर्च हो रहे लाखों रुपये के बजट का क्या मतलब रह जाता है? अस्पताल के डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और भर्ती मरीजों के परिजनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले डीन, अधीक्षक और सुरक्षा एजेंसी के मैनेजर पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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    नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पताल में शूट किया हुआ वीडियो वायरल


लोकेशन :- विदिशा मध्य प्रदेश 
स्लग :- नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पताल में शूट किया हुआ वीडियो वायरल
लोकेशन :- विदिशा मध्य प्रदेश 
एंकर :- शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता अब चरम पर पहुंच चुकी है। परिसर में सुरक्षा में हुई भारी चूक और लिफ्ट-कॉरिडोर में हुई कमर्शियल शूटिंग के गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए डीन महोदय ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान दे डाला। डीन का कहना है कि "इतना बड़ा परिसर है, हम कैसे देख सकते हैं कि कौन आ रहा है और कौन जा रहा है!"
लाखों रुपये का सुरक्षा बजट, 60 से 70 सुरक्षा गार्ड्स और सरकार से मोटा वेतन पाने वाले शीर्ष प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी का ऐसा बयान न केवल उनकी प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं और मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा
डीन का यह बयान बेहद खतरनाक और लापरवाही से भरा है। सवाल यह उठता है कि यदि कल को अस्पताल परिसर या हॉस्टल में कोई अनजान व्यक्ति घुसकर छात्र-छात्राओं या महिला डॉक्टरों के साथ कोई अप्रिय घटना या अपराध घटित कर देता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
जब सरकार सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पर हर महीने लाखों रुपये का शासकीय बजट पानी की तरह बहा रही है, तब भी मरीज, मेडिकल छात्र और डॉक्टर सुरक्षा के अभाव में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। कॉलेज प्रशासन, डीन और अस्पताल अधीक्षक का ध्यान इन संवेदनशील मुद्दों पर बिल्कुल नहीं है। आलम यह है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर आराम फरमा रहे हैं और जमीनी स्तर पर अस्पताल लावारिस हाल में छोड़ दिया गया है।
संवेदनशील लिफ्ट और कॉरिडोर में कमर्शियल रील्स
हाल ही में अस्पताल के आपातकालीन भाग एवं लिफ्ट कोरिडोर जैसे संवेदनशील भाग में एक व्यावसायिक डांस क्लास के प्रमोशन के लिए वीडियो और रील्स शूट किए गए। नियमतः किसी भी शासकीय अस्पताल में कमर्शियल गतिविधियों और शूटिंग पर कानूनी प्रतिबंध होता है। आपातकालीन सेवाओं के लिए बनी लिफ्ट को शूटिंग के लिए रोके जाने से गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न हुई और मरीजों की गोपनीयता का सरेआम उल्लंघन हुआ।
प्राथमिकताओं पर सवाल :- मंदिर पर 24 घंटे कड़ा पहरा, अस्पताल अनाथ
डीन और अधीक्षक की प्राथमिकताओं का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां पूरा अस्पताल परिसर बाहरी तत्वों के लिए खुला छोड़ दिया गया है, वहीं परिसर में स्थित शिव मंदिर पर 24 घंटे गार्ड की विशेष ड्यूटी लगाई गई है और CCTV कैमरे से सीधी निगरानी रखी जा रही है।
हाल ही में प्रशासन ने एक सख्त आदेश जारी कर कर्मचारियों को मंदिर में पूजा-पाठ करने पर कार्रवाई की धमकी दी थी। आस्था पर तुरंत प्रतिबंध लगाने वाले डीन महोदय, जब परिसर में कमर्शियल शूटिंग होती है और सुरक्षा में सेंध लगती है, तो पूरी तरह मौन धारण कर लेते हैं।
सुरक्षा एजेंसी और कंपनी मैनेजर पर मेहरबानी
अस्पताल में 60 से 70 सुरक्षा गार्ड्स की फौज तैनात होने के बावजूद बाहरी व्यक्ति बेझिझक मुख्य भवन और लिफ्ट तक पहुंचकर रील्स बना लेते हैं। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी सुरक्षा एजेंसी या उसके मैनेजर पर कोई आर्थिक दंड या ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई न होना, शीर्ष प्रबंधन और एजेंसी के बीच सांठगांठ की ओर साफ इशारा करता है।
उठते सीधे सवाल :-
सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? यदि 'इतने बड़े परिसर' का बहाना बनाकर डीन पल्ला झाड़ लेंगे, तो हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं और अस्पताल के मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
कमरों में बैठकर क्या कर रहा प्रबंधन? लाखों रुपये वेतन लेने वाले डीन और अधीक्षक अगर अपने दफ्तरों से निकलकर सुरक्षा का जायजा नहीं ले सकते, तो वे पदों पर क्यों बने हुए हैं?
बजट की बर्बादी :- जब 60-70 गार्ड्स के रहते बाहरी लोग आकर डांस वीडियो बना रहे हैं, तो सुरक्षा पर खर्च हो रहे लाखों रुपये के बजट का क्या मतलब रह जाता है?
अस्पताल के डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और भर्ती मरीजों के परिजनों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले डीन, अधीक्षक और सुरक्षा एजेंसी के मैनेजर पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
    user_रिपोर्टर rupesh yadav
    रिपोर्टर rupesh yadav
    Photographer सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
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